Daily Current Affairs 5 December 2020

पुरस्कार/सम्मान

ग्लोबल टीचर प्राइज-2020

चर्चा में क्यों?

  • महाराष्ट्र के प्राथमिक स्कूल शिक्षक रंजीत सिंह दिसाले को 2020 का वार्षिक ग्लोबल टीचर प्राइज (Global Teacher Prize) दिया जाएगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उन्हें यह पुरस्कार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने एवं देश में त्वरित कार्रवाई (QR) कोड वाली पाठ्यपुस्तक क्रांति में उल्लेखनीय प्रयास के लिए दिया जा रहा है।
  • इसके तहत उनको 10 लाख डॉलर (7,38,50,150 रुपये) प्रदान किए जाएंगे।
  • यह पुरस्कार यूनेस्को और लंदन स्थित वार्की फाउंडेशन (The Varkey Foundation) द्वारा 2014 से हर साल दिया जाता है।
  • रंजीत सिंह इस पुरस्कार के पहले भारतीय विजेता हैं।
  • रंजीत सिंह दिसाले  2009 में जब सोलापुर जिले के परितेवाडी गांव में जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में आए थे, जब यह एक जीर्ण-शीर्ण इमारत थी।
  • उन्होंने वहां बदलाव लाने का फैसला किया और यह सुनिश्चित किया कि छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकें स्थानीय भाषा में उपलब्ध हों।
  • रंजीत दिसाले ने न केवल पाठ्यपुस्तकों को छात्रों की मातृभाषा में अनुवाद किया बल्कि उनमें क्यूआर कोड भी जोड़ा ताकि छात्रों की पहुंच देखे जा सकने वाली कविताओं, वीडियो व्याख्यान, कहानियों तक हो।

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निधन

महाशय धर्मपाल गुलाटी

  • महाशियां दि हट्टी (MDH)मसाले कंपनी के संस्थापक महाशय धर्मपाल गुलाटी का 3 दिसंबर 2020 को निधन हो गया है। वह 98 साल के वर्ष के थे।
  • भारत में एमडीएच मसालों के विज्ञापनों की वजह से उन्हें काफ़ी पहचान मिली थी।
  • उन्हें व्यापार और वाणिज्य के लिए साल 2019 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।
  • महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म साल 1923 में महाशय चुन्नीलाल गुलाटी और चन्नन देवी के घर सियालकोट में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है।
  • विभाजन के पश्चात उनके परिवार को भारत आना पड़ा।
  • भारत आकर करोल बाग़ में उन्होंने ‘महशियां दी हट्टी’ के नाम से अपना पुराना मसालों का कारोबार शुरू किया।
  • लगभग 1500 करोड़ का यह कारोबार अब पूरे देश-विदेश में फैल चुका है।
  • 93 साल पुरानी ये कंपनी अब भारत के साथ-साथ यूरोप, जापान, अमेरिका, कनाडा और सऊदी अरब में अपने मसाले बेचती है।

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चर्चित व्यक्ति

गीतांजिलि राव

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय मूल की 15 साल की अमेरिकी किशोरी गीतांजलि राव (Gitanjali Rao) प्रसिद्ध “टाईम मैगजीन” (The Time Magazine) ने “किड ऑफ द इयर” का खिताब दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • टाइम पत्रिका ने पहली बार किसी बच्चे को यह खिताब दिया है।
  • एक उभरती वैज्ञानिक और खोजकर्ता के तौर पर पहचान बनाने वाली 15 वर्षीय गीतांजलि ने करीब पांच हजार बच्चोंत को पछाड़ते हुए यह खिताब हासिल किया है।
  • गीतांजलि ने टेक्नो लॉजी के प्रयोग से दूषित पेयजल से लेकर साइबर बुलिंग जैसे मुद्दों से निपटने के लिए शानदार काम किया है। गीतांजलिज भारत समेत पूरी दुनिया के बच्चोंब की प्रेरणा स्रोत बन गईं हैं।
  • साइबर बुलिंग से निपटने के लिए तैयार किया ऐप
  • साइबर बुलिंग से निपटने के लिए एक ऐप तैयार करने से लेकर गीतांजलि अब पानी की शुद्धता जांचने की दिशा में तकनीक के इस्तेेमाल पर काम कर रही हैं।
  • टाइम के लिए अकेडमी अवॉर्ड विजेता एंजेलिना जोली ने गीतांजलि का जूम पर इंटरव्यूद लिया। हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जोली संयुक्तर राष्ट्रल शरणार्थी उच्चाजयोग की विशेष दूत भी है।
  • साइबर बुलिंग रोकने के लिए की गई अपनी खोज के बारे में बताते हुए गीतांजलि ने कहा कि ये एक तरह की सर्विस है। इसका नाम Kindly है। उन्होंरने कहा कि दरअसल, यह एक ऐप और क्रोम एक्सिटेंसन है। यह शुरुआत में ही साइबर बुलिंग को पकड़ने में सक्षम होगा।

क्या है साइबरबुलिंग?

  • साइबरबुलिंग (Cyberbullying ) एक तरह का साइबर अपराध है। साइबरबुलिंग तब होती है, जब कोई व्येक्ति इलेक्ट्रॉ निक साधनों का उपयोग करके दूसरों को धमकाता है।
  • इसके दायरे में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर दिए गए संदेश भी शामिल हैं। इसे मोबाइल फोन, टैबलेट या गेमिंग प्लेयटफॉर्म पर एक्से स की जा सकती है।
  • साइबर बुलिंग टेक्ट् पर, ईमेल और सोशल नेटवर्क और गेमिंग प्लेपटफॉर्म के जरिए हो सकती है।
  • इसमें निम्नय चीजें शामिल हो सकती हैं। जैसे धमकी, उत्पीरड़न और पीछा करना, मानहानि, बहिष्का र, सोशल मीड‍िया अकाउंट्स में हैकिंग और इंपर्सन को पहचानें, किसी अन्यऔ व्यपक्ति के बारे में व्य।क्तिगत जानकारी को सार्वजनिक रूप से पोस्ट् करना या भेजना, जोड़-तोड़ शामिल है।

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पूर्व प्रधानंत्री स्व. इंद्र कुमार गुजराल

चर्चा में क्यों?

  • उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु ने 4 दिसंबर 2020 को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंद्र कुमार गुजराल की जयंती एक डाकटिकट जारी किया।
  • स्व. इंद्र कुमार गुजराल 21 अप्रैल, 1997 से 19 मार्च, 1998 तक भारत के 12 वें प्रधानमंत्री रहे थे।
  • भारत के प्रधानमंत्री बनने से पहले श्री गुजराल 1 जून 1996 से विदेश मंत्री रह चुके थे और 28 जून 1996 को उन्होंने जल संसाधन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला। वह वर्ष 1989-90 में जल संसाधन मंत्री थे। 1976 से 1980 तक पूर्व यूएसएसआर में भारत के राजदूत (मंत्रिमंडल स्तर) रहे।

गुजराल सिद्धांत

  • पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र गुजराल ने विदेश मंत्री रहते हुए पड़ोसी देशों से रिश्तों की जटिलताओं को भली-भांति समझते हुए, सितंबर, 1996 में पहली बार एक स्थानीय नीति बनाई थी जिसका उद्देश्य था भारत की छवि को एक क्षेत्रीय अधिनायक से बदलकर एक उदार देश की छवि बनाना जो पड़ोसियों से बिना कोई खास अपेक्षा रखे, उन्हें साथ लेकर चलने की इच्छा रखता हो।
  • इसे गुजराल सिद्धांत कहा जाता है जिसमें पांच मूल सिद्धांतों को रेखांकित किया गया। पहला, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका के साथ भारत प्रतिफल की आशा नहीं रखेगा पर सद्भाव और विश्वास बनाने को अपनी तरफ से जो भी संभव हो, करने को तत्पर रहेगा।भूटान को इस सूची से बाहर रखा गया क्योंकि यह भावना द्विपक्षीय संबंधों में अंतर्निहित थी।
  • अन्य चार सिद्धांतों में अपनी धरती का उपयोग एक दूसरे के खिलाफ न होने देने, दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने, एक दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने और द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण निबटारे के संकल्प से जुड़े थे।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

किसानों का व्यापक विरोध प्रदर्शन

चर्चा में क्यों?

  • पंजाब और हरियाणा समेत देश के विभिन्न भागों से आए हजारों किसान हाल ही में पारित तीन कृषि अधिनियमों के विरुद्ध व्यापक विरोध- प्रदर्शन राजधानी नई दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में कर रहे हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • किसानों को कई आपत्तियां हैं जिनमें से एक ये है कि इन क़ानूनों की आड़ में कॉर्पोरेट जगत कृषि क्षेत्र पर हावी हो जाएगा और किसानों के शोषण का खतरा पैदा हो जाएगा।ये कानून निम्नलिखित हैं-

किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अधिनियम 2020(Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act, 2020):

•          इस अधिनियम उद्देश्य विभिन्न राज्य विधानसभाओं द्वारा गठित कृषि उपज विपणन समितियों (APMC) द्वारा विनियमित मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री की अनुमति देना है।

•          सरकार का मानना है कि किसान इस कानून के द्वारा अब एपीएमसी मंडियों के बाहर भी अपनी उपज को ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे।

•          लेकिन, सरकार ने इस कानून के जरिये एपीएमसी मंडियों को एक सीमा में बांध दिया है।

•          एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) के स्वामित्व वाले अनाज बाजार (मंडियों) को उन बिलों में शामिल नहीं किया गया है।

•          इसके जरिये बड़े कॉर्पोरेट खरीदारों को खुली छूट दी गई है। बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी कानून के दायरे में आए हुए वे किसानों की उपज खरीद-बेच सकते हैं।

•          किसानों को यह भी डर है कि सरकार धीरे-धीरे न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म कर सकती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. लेकिन केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि एमएसपी खत्म नहीं किया जाएगा।

किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं अधिनियम 2020(Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Act, 2020):

•          इस अधिनियम का उद्देश्य अनुबंध खेती यानी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की अनुमति देना है।

•          किसान की जमीन को एक निश्चित राशि पर एक पूंजीपति या ठेकेदार किराये पर लेगा और अपने हिसाब से फसल का उत्पादन कर बाजार में बेचेगा।

•          किसान इस कानून का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि फसल की कीमत तय करने व विवाद की स्थिति का बड़ी कंपनियां लाभ उठाने का प्रयास करेंगी और छोटे किसानों के साथ समझौता नहीं करेंगी।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम:2020 ( Essential Commodities (Amendment) Act, 2020)

•          यह कानून अनाज, दालों, आलू, प्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण को विनियमित करता है. यानी इस तरह के खाद्य पदार्थ आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर करने का प्रावधान है।

•          इसके बाद युद्ध व प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों को छोड़कर भंडारण की कोई सीमा नहीं रह जाएगी।

•          किसानों का कहना है कि यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि आम जन के लिए भी खतरनाक है।

•          इसके चलते कृषि उपज जुटाने की कोई सीमा नहीं होगी। उपज जमा करने के लिए निजी निवेश को छूट होगी और सरकार को पता नहीं चलेगा कि किसके पास कितना स्टॉक है और कहां है?

क्या हैं किसानों की मांगें?

– तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए क्योंकि ये किसानों के हित में नहीं है और कृषि के निजीकरण को प्रोत्साहन देने वाले हैं। इनसे होर्डर्स और बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा होगा।

– एक विधेयक के जरिए किसानों को लिखित में आश्वासन दिया जाए कि एमएसपी और कन्वेंशनल फूड ग्रेन खरीद सिस्टम खत्म नहीं होगा।

– किसान संगठन कृषि कानूनों के अलावा बिजली बिल 2020 को लेकर भी विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार के बिजली कानून 2003 की जगह लाए गए बिजली (संशोधित) बिल 2020 का विरोध किया जा रहा है।

– प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस बिल के जरिए बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण किया जा रहा है। इस बिल से किसानों को सब्सिडी पर या फ्री बिजली सप्लाई की सुविधा खत्म हो जाएगी।

– चौथी मांग एक प्रावधान को लेकर है, जिसके तहत खेती का अवशेष जलाने पर किसान को 5 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

चर्चा में क्यों?

  • केन्‍द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने घोषणा की है कि शिक्षा मंत्रालय ने मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को लागू करने का रोडमैप तैयार करने के लिए एक टास्‍कफोर्स का गठन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • टास्क फोर्स उच्च शिक्षा के सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में गठित की गई है। यह विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेकर उन पर विचार करेगी, और एक महीने में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
  • इस रिपोर्ट के आधार पर इस बदलाव को जल्‍द लागू करने की तैयारियां शुरू की जाएंगी।
  • उल्लेखनीय है कि शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक ने यह निर्णय किया था कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) अगले शैक्षणिक वर्ष से मातृभाषा में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम पेश करना शुरू करेंगे।

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नियुक्ति

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी

  • लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने 1 दिसंबर 2020 को सीमा सड़क संगठन (BRO) के महानिदेशक का पद संभाला। उन्होंने जनरल हरपाल सिंह का स्थाकन लिया है।
  • इससे पहले वह सेना के एकीकृत मुख्यालय की क्यूएमजी शाखा में अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर तैनात थे।जनरल हरपाल सिंह को भारतीय सेना के नए इंजीनियर-इन-चीफ के रूप में नियुक्त किया गया है।

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कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

न्यूजीलैंड में जलवायु आपातकाल

चर्चा में क्यों?

  • न्यूजीलैंड ने दुनिया के 30 से अधिक देशों का समर्थन करते हुए हाल ही में जलवायु आपातकाल की घोषणा का ‘प्रतीकात्मक’ कदम उठाया। जलवायु आपातकाल की घोषणा के इस प्रस्ताव के पक्ष में 76 जबकि विरोध में 43 सांसदों ने मतदान किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इसके साथ ही सरकार ने एक नयी पहल की शुरुआत की जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कई एजेंसियों को 2025 तक कार्बन के उत्सर्जन में कटौती करनी होगी।
  • प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डन ने कहा कि सरकार आम तौर पर प्राकृतिक आपदाओं जैसी चीजों के लिए आपातकाल की घोषणा करती है लेकिन यदि हम जलवायु परिवर्तन पर ध्यान नहीं देंगे तो इस प्रकार की आपदाएं आती रहेंगी।
  • उन्होंने कहा कि यह घोषणा कर हम उस बोझ पर संज्ञान ले रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाला है।
  • यह उस देश के लिए है जिसमें आगामी पीढ़ियां जन्म लेने वाली हैं। और यह उस कर्ज के बारे में है जो उन पर पड़ेगा यदि हम इस मुद्दे पर अभी निर्णय नहीं लेंगे।

क्या है जलवायु आपातकाल?

  • ‘जलवायु आपातकाल’ की घोषणा किन परिस्थितियों में की जा सकती है इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, लेकिन कई देशों ने पहले ही जलवायु आपातकाल घोषित किया है।
  • हमारे पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने के परिणामस्वरूप जलवायु आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ये गैस हमारे ग्रह को लगातार गर्म कर रहे हैं जो एक वैश्विक आपदा के समान है।
  • जब तक इन गैसों को शून्य स्तर पर नहीं लाया जाता तब तक इन गैसों का परिणाम ग्लोबल वार्मिंग के रूप में सामने आएगा जो मानवता तथा दुनिया के पारिस्थितिक तंत्रों के लिये विनाशकारी होगा।
  • सबसे पहले मई 2019 में ब्रिटेन ने जलायु आपातकाल घोषित किया है।
  • जून 2019 में पोप फ्रांसिस ने वेटिकन सिटी में इमरजेंसी आपातकाल घोषित किया। आयरलैंड, पुर्तगाल, कनाडा, फ्रांस, अर्जेंटीना, स्पेन, आस्ट्रिया सहित कई देशों ने ऐसा उपबंध लागू कर दिया है। अक्टूबर, 2019 तक दुनिया के 1143 ऐसे प्रशासन प्रणाली या स्थानीय सरकारें हैं जिन्होंने जलवायु आपातकाल को लागू कर दिया है।

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खेल परिदृश्य

बहरीन ग्रां प्री 2020

  • ब्रिटेन के फॉर्मूला-1 ड्राइवर लुईस हैमिल्टन (Lewis Hamilton) ने रोमेन ग्रोसजेन को पछाड़कर मर्सिडीज टीम के लिए बहरीन ग्रां प्री खिताब अपने नाम किया। 
  • सात बार विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम करने वाले ब्रिटिश के 35 वर्षीय ड्राइवर हैमिल्टन की यह 95वीं जीत है।
  • हाल ही में इसी महीने हैमिल्टन ने रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने पक्का किया था। इस मामले में हैमिल्टन ने जर्मनी के दिग्गज माइकल शूमाकर (07 खिताब) के सर्वाधिक विश्व खिताब जीतने के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। उन्होंने 2013 में मर्सीडीज टीम में शूमाकर की ही जगह ली थी।

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