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Daily Current Affairs: 5 August 2021.

ओलंपिक 2020

भारतीय हॉकी टीम ने जीता कांस्य पदक

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को हराकर टोक्यो ओलिंपिक 2020 में कांस्य पदक जीत लिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय हॉकी टीम ने 1980 के बाद पहली बार ओलिंपिक में कोई पदक जीता है।
  • 1980 मॉस्को (रुस) ओलंपिक में भारत ने अपना अंतिम मैडल (गोल्ड) जीता था। तब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने गोल्ड जीता था।
  • सिमरनजीत सिंह के दो गोल की बदौलत भारत ने कांस्य पदक के प्ले ऑफ मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराकर ओलंपिक में 41 साल बाद कांस्य पदक जीता।

पुरुष हॉकी में भारत ने 8 गोल्ड मेडल जीते हैं

  • भारत ने ओलिंपिक में सबसे ज्यादा मेडल पुरुष हॉकी में जीते हैं। टीम ने 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964 और 1980 ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा 1960 में सिल्वर और 1968,1972 और 2021 (टोक्यो ओलिंपिक 2020) में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है।

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रक्षा-प्रतिरक्षा

हार्पून ज्वाइंट कॉमन टेस्ट सेट

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका ने ‘हार्पून ज्वाइंट कॉमन टेस्ट सेट’ और उससे जुड़े उपकरण को आठ करोड़ 20 लाख डॉलर की अनुमानित कीमत पर भारत को बेचने की मंजूरी दे दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • हार्पून’ मिसाइल प्रणाली को सर्वप्रथम वर्ष 1977 में तैनात किया गया था और यह एक ऑल-वेदर, ओवर-द-होराइज़न, एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम है।
  • इसमें सक्रिय रडार गाइडेंस के साथ एक समुद्र-स्किमिंग क्रूज़ प्रक्षेपक्र भी मौजूद है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत का यह मिलियन डॉलर का सौदा दोनों देशों के बीच संबंधों में विकास का परिणाम है, जिसकी नींव वर्ष 2016 में तब पड़ी थी, जब अमेरिका ने भारत को एक ‘प्रमुख रक्षा भागीदार’ के रूप में मान्यता दी थी।
  • 82 मिलियन डॉलर की खरीद के हिस्से के रूप में भारत को एक हार्पून ज्वाइंट कॉमन टेस्ट सेट, एक रखरखाव स्टेशन; स्पेयर और मरम्मत संबंधी हिस्से, समर्थन एवं परीक्षण उपकरण; प्रकाशन व तकनीकी दस्तावेज़; कर्मियों का प्रशिक्षण आदि की सुविधा प्राप्त होगी।

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समारोह/सम्मेलन

मद्रास विधानपरिषद शताब्दी समारोह

चर्चा में क्यों?

  • 2 जुलाई 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तमिलनाडु विधानसभा के 100वें वर्ष के स्मरणोत्सव को संबोधित किया, जिसे पहले मद्रास विधानपरिषद (MLC) के रूप में जाना जाता था।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • मद्रास विधानपरिषद की स्थापना वर्ष 1921 में भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत की गई थी।
  • तब परिषद का कार्यकाल तीन वर्ष का था। इसमें 132 सदस्य थे, जिनमें से 34 राज्यपाल द्वारा मनोनीत और शेष निर्वाचित थे।
  • इसकी पहली बैठक 9 जनवरी, 1921 को फोर्ट सेंट जॉर्ज, मद्रास में हुई।
  • इस परिषद का उद्घाटन 12 जनवरी, 1921 को गवर्नर वेलिंगटन के अनुरोध पर इंग्लैंड के राजा के संबंधी ‘ड्यूक ऑफ कनॉट’ द्वारा किया गया था।
  • यह विधान परिषद निर्वाचन के माध्यम से समय-समय पर गठित होती रही और भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत प्रांतीय स्वायत्तता के लागू होने तक चली।

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नियुक्ति/निर्वाचन

दीपक दास

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय सिविल लेखा सेवा (ICAS) के वरिष्ठ अधिकारी दीपक दास ने हाल ही में देश के नए ‘लेखा महानियंत्रक’ (CGA) के रूप में कार्यभार संभाला लिया है।
  • वे देश के 25वें लेखा महानियंत्रक (CGA) हैं।
  • उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के तहत लेखा महानियंत्रक (CGA), भारत सरकार का प्रधान लेखा सलाहकार होता है, जो कि मुख्य तौर पर तकनीकी रूप से सुदृढ़ प्रबंधन लेखा प्रणाली की स्थापना और रखरखाव हेतु उत्तरदायी है।

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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

ई रुपी

चर्चा में क्यों?

  • 2 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वाउचर पर आधारित एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम ‘e-RUPI’ लांच किया। यह देश की अपनी डिजिटल करेंसी के रूप में भारत का पहला कदम होगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ई-रुपी डिजिटल भुगतान के लिए एक कैशलेस और कॉन्टैक्टलेस साधन है। यह एक क्यूआर कोड या एसएमएस स्ट्रिंग-आधारित ई-वाउचर है, जिसे लाभार्थियों के मोबाइल पर पहुंचाया जाता है।
  • इस निर्बाध वन टाइम पेमेंट मैकेनिज्म के यूजर्स, सेवा प्रदाता सेंटर पर कार्ड, डिजिटल भुगतान ऐप या इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस किए बिना वाउचर को भुनाने में सक्षम होंगे।
  • इसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने अपने UPI प्लेटफॉर्म पर वित्तीय सेवा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया है।
  • ई-रुपी, सेवाओं के स्पॉन्सर्स को बिना किसी फिजिकल इंटरफेस के डिजिटल तरीके से लाभार्थियों और सेवा प्रदाताओं से जोड़ता है।
  • साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि लेन-देन पूरा होने के बाद ही सेवा प्रदाता को भुगतान हो। ई-रुपी की प्रकृति प्री-पेड (Prepaid) है, लिहाजा यह किसी भी मध्यस्थ (Intermediary) की भागीदारी के बिना सेवा प्रदाता को समय पर भुगतान का आश्वासन देता है।
  • लाभार्थी के मोबाइल पर आए ईरुपी के कोड के माध्यम से सेवा प्रदाता के अकाउंट में डायरेक्ट फंड ट्रान्सफर हो जाता है। सरकारी संस्थाएं, कॉरपोरेट या कोई भी सेवा प्रायोजक अपने पार्टनर बैंक की मदद से ईरुपी वाउचर जनरेट कर सकते हैं।
  • इसके बाद सेवा प्रदाता केन्द्र पर लाभार्थी ईरुपी के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। सेवा प्रदाता केन्द्र पर क्यूआर कोड या एसएमएस रूप में प्राप्त ईरुपी वाउचर को स्कैन किया जाएगा। लाभार्थी के वेरिफिकेशन के लिए एक कोड लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। वेरिफिकेशन होने पर वाउचर रिडीम हो जाएगा और तुरंत भुगतान हो जाएगा।

कहां हो सकता है इस्तेमाल

  • कल्याणकारी सेवाओं की लीक-प्रूफ डिलीवरी सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी पहल होने की उम्मीद है। इसका उपयोग मातृ एवं बाल कल्याण योजनाओं के तहत दवा व न्यूट्रीशनल सपोर्ट उपलब्ध कराने वाली स्कीम्स, टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत ड्रग्स व डायग्नॉस्टिक्स, उर्वरक सब्सिडी आदि जैसी योजनाओं के तहत सेवाएं देने के लिए भी किया जा सकता है।
  • यहां तक कि निजी क्षेत्र भी अपने कर्मचारी कल्याण और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में इन डिजिटल वाउचर का लाभ उठा सकते हैं। कॉरपोरेट्स इसका इस्तेमाल प्राइवेट सेंटर पर किसी गरीब को वैक्सीन लगवाने में मदद करने के लिए भी कर सकते हैं।

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