Daily Current Affairs 31 October

रिपोर्ट/सूचकांक

पब्लिक अफेयर्स इंडेक्स 2020

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में पब्लिक अफेयर्स इंडेक्स 2020 (Public affairs index PAI 2020) जारी किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • पब्लिक अफेयर सेंटर की तरफ से जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह सूचकांक प्रकाशित किया गया।
  • इस संगठन के अध्यक्ष भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन हैं। पीएआइ के अनुसार राज्यों की रैंकिंग स्थायी विकास के संदर्भ में एकीकृत सूचकांक पर आधारित है।
  • पिछली रैंकिंग के हिसाब से पब्लिक डोमेन में जो सूचना रहती है, उसे सरकार के आंकड़ों के साथ एनालिसिस के बेस पर रैंकिंग दी जाती है।
  • इसमें 4 पैरामीटर्स के अलावा रूल ऑफ लॉ, करप्शन, गवर्नमेंट रूल और डेवलपमेंट के लिए किए गए कामों के डेटा के बेस पर चार प्रमुख पैरामीटर्स के हिसाब से फिर आगे पॉइंट्स दिए जाते हैं।
  • रिपोर्ट के मुताबिक शासन के संदर्भ में बड़े राज्यों की श्रेणी में शीर्ष चार रैंकों पर दक्षिणी राज्य- केरल (1.388 पीएआइ सूचकांक अंक), तमिलनाडु (0.912), आंध्र प्रदेश (0.531) और कर्नाटक (0.468)  हैं।
  • इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बिहार आखिरी पायदान पर हैं। इन राज्यों की पीएआइ अंक नकारात्मक हैं।
  • केन्द्रशासित प्रदेशों की श्रेणी में चंडीगढ़ पहले स्थान पर है दूसरे स्थान पर पुदुचेरी है।
  • छोटे राज्यों की श्रेणी में गोवा को 1.745 पीएआइ के साथ शीर्ष रैंकिंग मिली है। इसके बाद मेघालय (0.797), और हिमाचल प्रदेश (0.725) का स्थान है।
  • इस श्रेणी में सबसे खराब प्रदर्शन मणिपुर (ऋणात्मक 0.363), दिल्ली (ऋणात्मक 0.289) और उत्तराखंड (ऋणात्मक 0.277) का है।

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चर्चित स्थल

‘आरोग्य वन’

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2020 को अपने गृहराज्य गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार पटेल की विशालकाय प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास केवडिया गांव में ‘आरोग्य वन’ का उद्घाटन किया।
  • इसके अलावा उन्होंने चिल्ड्रेन न्यूट्रिशन पार्क और एकता मॉल का भी उद्घाटन किया।
  • एकता मॉल में देश के अलग-अलग हिस्सों और संस्कृति से जुड़े हैंडलूम के सामान मिल पाएंगे।
  • प्रधानमंत्री ने जुलॉजिकल पार्क भी उद्घाटन किया।
  • आरोग्य वन 17 एकड़ में फैला है, जिसमें करीब पांच लाख से अधिक औषधियों के पौधे हैं।

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कृषि पर्यावरण एवं जैव विविधता

UNESCO का मैन एंड बायोस्फेयर प्रोग्राम

चर्चा में क्यों?

  • मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व को UNESCO के ”मैन एंड बायोस्फेयर प्रोग्राम” (Man and Biosphere ) की सूची में शामिल किया गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) को UNESCO ने अपने Man and Biosphere (MAB) प्रोग्राम का हिस्सा बनाया है। पन्ना टाइगर रिजर्व भारत का 22वं बाघ अभयारण्य है।
  • यूनेस्को ने इसे 12वें बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में चिन्हित किया है।
  • मुख्य रूप से बाघों के लिए पहचान रखने वाले इस रिजर्व में मगरमच्छों और अन्य जीवों की संख्या भी अच्छी खासी है।
  • यह टाइगर रिजर्व विंध्य रेंज में स्थित है। यह मध्य प्रदेश के उत्तर में पन्ना और छतरपुर जिलों में फैला हुआ है।
  • इसकी स्थापना साल 1981 में  राष्ट्रीय उद्यान के तौर पर की गई थी।
  • 1994 में केंद्र सरकार द्वारा इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।

मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम (MAB)

  • 1971 में, यूनेस्को ने मानव और उसके प्राकृतिक पर्यावरण के बीच वैज्ञानिक संबंध को औपचारिक रूप देने के लिए एक वैश्विक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम को मैन और बायोस्फीयर प्रोग्राम (MAB) भी कहा जाता है।
  • पारिस्थितिकी और पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से एमएबी एक उपयुक्त पहल है, जो वनस्पतियों और कई दुर्लभ जीवों और संकटग्रस्त प्रजातियों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
  • भारत अपने जैव विविधता रूपी समृद्ध खजाने के साथ भौगोलिक रूप से विभिन्न बायोस्फीयर रिजर्व की स्थापना व उसके विकास और बायोस्फीयर रिजर्व का संरक्षण करने में पूर्ण रूप से सक्षम है।

यूनेस्को की सूची में शामिल 12 बायोस्फीयर रिजर्व :

1. सिमलीपाल (ओडिशा, 2009)

2. नोकरेक (मेघालय, 2009)

3. पंचमढ़ी (मध्य प्रदेश, 2009)

4. नीलगिरि (तमिलनाडु, 2000 (सबसे पहला)

5. मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु, 2001)

6. सुंदरबन (पश्चिम बंगाल, 2001)

7. नंदा देवी (उत्तराखंड, 2004)

8. अचनाक्मर-अमरकंटक (मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, 2012)

9. ग्रेट निकोबार (अंडमान निकोबार द्वीप समूह, 2013)

10. अगस्त्यमलाई (केरल और तमिलनाडु, 2016)

11.कंचनजंगा (सिक्किम,2018)

12. पन्ना टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश,2020)

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राष्ट्रीय परिदृश्य

”वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश- 2020″

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गहराती समस्या के बीच केंद्र ने ”वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश- 2020″ के माध्यम से नया कानून लागू किया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • अध्यादेश के तहत विभिन्न अधिकारों से लैस एक निकाय का गठन किया जाएगा और प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 5 साल तक जेल की सजा या एक करोड़ रुपए का जुर्माना या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।0
  • अध्यादेश के तहत पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) को भंग किया गया है और इसके स्थान पर 20 से ज्यादा सदस्यों वाले एक आयोग का गठन किया है।
  • ईपीसीए का 1998 में गठन हुआ था। ईपीसीए दो सदस्यीय निकाय था। इसके अध्यक्ष भूरेलाल और सुनीता नारायण सदस्य थीं।
  • आयोग अध्यादेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।
  • इसमें कहा गया कि अध्यादेश को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश 2020 कहा जा सकता है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के उन इलाके तक लागू होगा, जहां वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दे हैं।
  • आयोग का गठन अध्यादेश के जरिए किया गया है जिस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।
  • अध्यादेश के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर से जुड़े इलाके, आसपास के क्षेत्र जहां यह लागू होगा उसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश हैं।
  • आयोग के पास वायु गुणवत्ता, प्रदूषणकारी तत्वों के बहाव के लिए मानक तय करने, कानून का उल्लंघन करने वाले परिसरों का निरीक्षण करने, नियमों का पालन नहीं करने वाले उद्योगों, संयंत्रों को बंद करने का आदेश देने का अधिकार होगा।

दंड का प्रावधान

  • इसमें कहा गया कि आयोग के किसी भी प्रावधान या नियमों या आदेश या निर्देश का पालन नहीं करना दंडनीय अपराध होगा जिसके लिए 5 साल जेल की सजा या एक करोड़ रुपए जुर्माना या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।

आयोग की संरचना

  • आयोग के एक अध्यक्ष भी होंगे। आयोग में दो पूर्णकालिक सदस्य होंगे जो केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव होंगे।
  • इसके अलावा 3 पूर्णकालिक स्वतंत्र तकनीकी सदस्य होंगे जिन्हें वायु प्रदूषण संबंधी वैज्ञानिक जानकारी होगी।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के एक तकनीकी सदस्य भी होंगे, तथा इसरो एक तकनीकी सदस्य को नामित करेगा।
  • वायु प्रदूषण रोकने के संबंध में अनुभव रखने वाले एनजीओ के तीन सदस्य भी होंगे।
  • आयोग सहयोगी सदस्यों को भी नियुक्त कर सकता है।
  • आयोग में निगरानी और पहचान, सुरक्षा और प्रवर्तन तथा अनुसंधान और विकास में प्रत्येक से एक-एक के साथ तीन उप कमेटी होंगी। आयोग के अध्यक्ष तीन साल तक या 70 साल उम्र होने तक पद पर रहेंगे।
  • आयोग के पास वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) कानून 1981, और पर्यावरण (संरक्षण) कानून 1986 जैसे मौजूदा कानूनों के तहत निवारण के लिए मामलों का स्वत: संज्ञान लेने, शिकायतों पर सुनवाई, आदेश जारी करने का अधिकार होगा।

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