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Daily Current Affairs 30 July 2021

चर्चित व्यक्तित्व

स्व. सुंदर लाल बहुगुणा

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली विधानसभा ने हाल ही में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से पर्यावरणविद स्व. सुंदरलाल बहुगुणा को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे जाने का अनुरोध किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • पर्यावरणविदपदमविभूषण और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुंदरलाल बहुगुणा का जन्म नौ जनवरी 1927 को टिहरी जिले में भागीरथी नदी किनारे बसे मरोड़ा गांव में हुआ।
  • उनके पिता अंबादत्त बहुगुणा टिहरी रियासत में वन अधिकारी थे।
  • 13 साल की उम्र में अमर शहीद श्रीदेव सुमन के संपर्क में आने के बाद उनके जीवन की दिशा ही बदल गई।
  • श्रीदेव सुमन से प्रेरित होकर वह बाल्यावस्था में ही आजादी के आंदोलन में कूद गए थे। उन्होंने टिहरी रियासत के खिलाफ भी आंदोलन चलाया।
  • उन्होंने पेड़ों की रक्षा के लिए चिपको आंदोलन में सक्रिय रुप से भाग लिया और उसे विश्वभर में फैलाया।
  • टिहरी बांध के विरोध में भी उन्होंने लंबे समय तक आंदोलन चलाया।

स्व. बहुगुणा को मिले पुरस्कार एवं सम्मान

  • जमनालाल बजाज पुरस्कार (1986)
  • Right Livelihood Award (1987)
  • पद्म विभूषण (2009)

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रक्षा-प्रतिरक्षा

12वां इंद्र नेवीअभ्यास

चर्चा में क्यों?

  • भारत और रूस की नौसेनाओं के बीच 12वां ‘इंद्र नेवी’ अभ्यास बाल्टिक सागर में 28 और 29 जुलाई, 2021 को आयोजित किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह सैन्याभ्यास हर दो वर्ष बाद भारत और रूस की नौसेनाओं के बीच किया जाता है।
  • ‘इंद्र नेवी’ अभ्यास की शुरूआत 2003 में की गई थी, जो दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच मौजूद दीर्घकालीन रणनीतिक सम्बंधों का परिचायक है।
  • उल्लेखनीय है कि रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी नौसेना का 325वां नौसेना दिवस मनाया जा रहा था, जिसमें शामिल होने के लिये आईएनएस तबर जब वहां पहुंचा, तो यह सैन्याभ्यास किया गया।
  • इस वर्ष के अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य है कि इतने वर्षों के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं ने परिचालन की जो आपसी समझ विकसित की है, उसे और बढ़ाया जाये तथा बहुस्तरीय समुद्री गतिविधियों में तेजी लाई जाये। इस अभ्यास में समुद्री गतिविधियों के सिलसिले में विस्तृत और विभिन्न गतिविधियों को भी शामिल किया गया।
  • भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तबर ने किया, जबकि रूसी संघ की नौसेना की तरफ से कॉरवेट्स आरएफएस ज़ेलायनी दोल और आरएफएस ऑदिनत्सोवो ने हिस्सा लिया। ये दोनों जहाज बाल्टिक बेड़े के हैं।

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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

तेंदुओं, सह-परभक्षियों और शाकभक्षियों की स्थिति-2018

चर्चा में क्यों?

  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री वैश्विक बाघ दिवस 29 जुलाई 2021 को ‘तेंदुओं, सह-परभक्षियों और शाकभक्षियों की स्थिति-2018’ ( ‘Status of Leopards, Co-predators and Megaherbivores-2018’) शीर्षक रिपोर्ट भी जारी की। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट इस तथ्य का प्रमाण है कि बाघों के संरक्षण से पूरे इकोसिस्टम का संरक्षण होता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वर्ष 2018 में बाघों की संख्या के अखिल भारतीय आकलन के दौरान, देश के बाघों वाले राज्यों में वनाच्छादित प्राकृतिक वासों के भीतर तेंदुओं की आबादी का भी अनुमान लगाया गया था।
  • वर्ष 2018 में भारत के बाघों के विचरण वाले इलाकों में तेंदुओं की कुल आबादी 12,852 (एसई रेंज 12,172 – 13,535) थी। यह 2014 की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि है, जोकि देश के बाघों वाले 18 राज्यों के वनाच्छादित प्राकृतिक वासों में 7,910 (एसई 6,566-9,181) थी।
  • ग्लोबल कंजर्वेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड्स (GCATS) की मान्यता वाले बाघ अभयारण्य
  • इस कार्यक्रम में भारत के उन 14 बाघ अभयारण्यों के बारे में चर्चा की गई, जिन्हें ग्लोबल कंजर्वेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड्स (Global Conservation Assured|Tiger Standards (CA|TS)) की मान्यता मिली है।
  • जिन 14 बाघ अभयारण्यों को मान्यता दी गई है उनमें असम के मानस, काजीरंगा और ओरंग, मध्य प्रदेश के सतपुड़ा, कान्हा और पन्ना, महाराष्ट्र के पेंच, बिहार में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, उत्तर प्रदेश के दुधवा, पश्चिम बंगाल के सुंदरबन, केरल में परम्बिकुलम, कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व और तमिलनाडु के मुदुमलई और अनामलई टाइगर रिजर्व शामिल हैं।

क्या है  कंजर्वेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड्स (CATS) ?

  • कंजर्वेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड्स (CATS) को टाइगर रेंज कंट्रीज (TRC) के वैश्विक गठबंधन द्वारा मान्यता संबंधी उपकरण के रूप में स्वीकार किया गया है और इसे बाघों एवं संरक्षित क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा विकसित किया गया है।
  • आधिकारिक तौर पर 2013 में लॉन्च किया गया यह मानक लक्षित प्रजातियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है और प्रासंगिक संरक्षित क्षेत्रों में इन मानकों के मूल्यांकन को प्रोत्साहित करता है।
  • सीएटीएस विभिन्न मानदंडों का एक सेट है, जो बाघ से जुड़े स्थलों को इस बात को जांचने का मौका देता है कि क्या उनके प्रबंधन से बाघों का सफल संरक्षण संभव होगा।

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