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Daily Current Affairs: 30 August 2021

खेल परिदृश्य

पैरालंपिक खेल 2020

चर्चा में क्यों?

  • ओलंपिक के बाद जापान की राजधानी टोक्यों में आयोजित हो रहे पैरालंपिक खेलों में भी भारत के खिलाडियों के पदक जीतने का सिलसिला जारी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • टोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल अविन लेखरा ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में जीता है।
  • पुरुषों के F56 कैटेगरी में योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीता।
  • वहीं जेवलिन में भारत को 2 मेडल आए। देवेंद्र झाझरिया ने सिल्वर और सुंदर गुर्जर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
  • भारत ने पैरालिंपिक में अब तक 1 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज समेत 7 मेडल अपने नाम किए हैं।
  • यह भारत का अब तक का सबसे सफल पैरालिंपिक बन गया है।
  • इससे पहले 2016 रियो ओलिंपिक और 1984 ओलिंपिक में भारत ने 4-4 मेडल जीते थे।

अवनि ने भारत को पहला गोल्ड दिलाया

  • राजस्थान की अवनि लेखरा ने शूटिंग में देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता। जयपुर की रहने वाली अवनि पैरालिंपिक गेम्स में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट भी हैं।
  • उन्होंने महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल के क्लास एसएच1 के फाइनल में 249 पॉइंट स्कोर कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
  • इससे पहले उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 7वें स्थान पर रहकर फाइनल में जगह बनाई थी।

देवेंद्र झाझरिया ने सिल्वर मेडल जीता

  • दो बार के पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट देवेंद्र झाझरिया ने टोक्यो में एक और मेडल अपने नाम किया। उन्होंने F46 कैटेगरी में 64.35 मीटर दूर भाला फेंका। जबकि सुंदर गुर्जर ने 64.01 मीटर का थ्रो किया।
  • राजस्थान के चुरु जिले के देवेंद्र झाझरिया ने इससे पहले रियो पैरालिंपिक 2016 और एथेंस पैरालिंपिक 2004 में गोल्ड मेडल जीता था। उनके नाम भारत की ओर से पैरालिंपिक में 2 बार गोल्ड जीतने का रिकॉर्ड है। देवेंद्र के पास अब कुल 3 पैरालिंपिक मेडल हो गए हैं।

योगेश ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर जीता

  • योगेश कथुनिया ने F56 कैटेगरी में डिस्कस थ्रो में भारत के लिए सिल्वर जीता। दिल्ली के 24 साल के योगेश ने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 44.38 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो किया। यह उनका सीजन बेस्ट भी है।
  • ब्राजील के बतिस्ता डॉस सैंटोस क्लॉडनी ने 45.25 मीटर के थ्रो के साथ इस इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। क्यूबा के डियाज अल्दाना लियोनार्डो ने ब्रॉन्ज अपने नाम किया।

भाविनाबेन, निषाद और विनोद ने भी मेडल जीते

  • इससे पहले भाविनाबेन पटेल ने विमेंस टेबल टेनिस की क्लास-4 कैटेगरी में सिल्वर जीता।
  • वहीं मेंस T47 हाई जंप में निषाद कुमार ने 2.06 मीटर की जंप के साथ एक और सिल्वर भारत के नाम कर दिया।
  • जबकि डिस्कस थ्रो में विनोद कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। हालांकि विनोद कुमार के रिजल्ट को बाद में क्वालिफिकेशन विवाद की वजह से रोक दिया गया।

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स्वास्थ्य एवं पोषण

पोषण माह

चर्चा में क्यों?

  • सितंबर पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य कुपोषण को दूर करने पर जोर दिया जाएगा।
  • इसके लिए लिए महीनेभर तक अलग-अलग गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। ताकि लोगों में पोषण संबंधित जागरूकता आए।
  • महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण को कम करने के लिए फोकस किया जा रहा है।
  • चौथा राष्ट्रीय पोषण माह एक सितंबर से 30 सितंबर तक मनाया जाएगा। पोषण अभियान के तहत कुपोषण का शिकार हुए बच्चों का सर्वे करने के लिए डोर-टू-डोर अभियान भी चलाया जाएगा।
  • इस दौरान आंगनबाड़ी वर्कर, आशा वर्कर व एएनएम 5 साल तक के बच्चों की लंबाई व वजन का माप करेंगी।
  • इस दौरान कुपोषण का शिकार हुए बच्चों का भी पता लगाया जाएगा।
  • कुपोषण को दूर करने के लिए बाजरा, दालें, स्थानीय फल व सब्जियां आदि खाने के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। खानपान के प्रति बच्चों, गर्भवती महिलाओं व स्तनपान करवाने महिलाओं को जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

भारत की डिजिटल करेंसी

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनिटरी पॉलिसी में डिजिटल करेंसी के विकास की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • RBI अपनी डिजिटल करेंसी पर काम कर रहा है और साल के अंत तक इसका मॉडल आ जाएगा।
  • अभी डिजिटल करेंसी (Indian Digital Currency) की टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रीब्यूशन पर काम चल रहा है। ये कैसे काम करेगी इसका फ्रेमवर्क भी तैयार हो रहा है। हाल ही में RBI के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी के वेबिनार में कहा था कि भारत को भी डिजिटल करेंसी की जरूरत है।
  • यह बिटकॉइन जैसी प्राइवेट वर्चुअल करेंसी यानी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से होने वाले नुकसान से बचाएगी।
  • साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक इस पर काम कर रहा है।

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) हो सकता है नाम

  • क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के जाल से बचाने के लिए सेंट्रल बैंक यानि RBI अपनी डिजिटल करेंसी इंट्रोड्यूस करेगा। इसका नाम CBDC- सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी हो सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी से कैसे अलग होगी?

  • क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह से प्राइवेट है। इसे कोई मॉनिटर नहीं करता और किसी सरकार या सेंट्रल बैंक का कंट्रोल नहीं होता। ऐसी करेंसी गैरकानूनी होती हैं। लेकिन, आरबीआई जिस करेंसी पर काम कर रहा है, वो पूरी तरह से RBI ही रेगुलेट करेगा।
  • सरकार की मंजूरी होगी। डिजिटल रुपया की क्वांटिटी की भी कोई सीमा नहीं होगी। जैसे बिटकॉइन की होती है।

इन देशों में चल रही है डिजिटल करंसी

  • इक्वाडोर ने 2015 में ही डिजिटल करंसी सिस्टम (Ecuador’s Sistema de Dinero Electrónico) शुरू कर दिया था। हालांकि, इक्वाडोर में फिजिकल करंसी के रूप में डॉलर का इस्तेमाल होता है।
  • वहीं बहामास ने भी आधिकारिक डिजिटल करंसी जारी कर दी है।
  • ट्यूनीशिया में भी डिजिटल करंसी (eDinar digital currency) का इस्तेमाल हो रहा है। यह करंसी यूनिवर्सल कॉन्ट्रैक्टिंग प्लेटफॉर्म मॉनेटास (Monetas) के साथ मिलकर शुरू की गई है।
  • 2017 के करीब सेनेगल ने भी अपनी डिजिटल करंसी जारी कर दी थी। इसकी वैल्यू भी देश की करंसी (CFA franc) के बराबर ही है, लेकिन उसे किसी भी मोबाइल मनी या ई-मनी वॉलेट में रखा जा सकता है।

इन देशों में भी चल रहा है डिजिटल करंसी पर ट्रायल

  • चीन, जापान और स्वीडन जैसे देशों ने तो डिजिटल करंसी पर ट्रायल शुरू भी कर दिया है। बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपियन सेंट्रल बैंक भी ट्रायल की तैयारी में जुटे हैं।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

चमकीला एजीएन

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय खगोलविदों ने हमारे निकटवर्ती ब्रह्मांड में तीन ऐसे महाविशाल ब्लैकहोल के विलय की दुर्लभ घटना का पता लगाया है, जिससे एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस (active galactic nucleus) का निर्माण होता है। यह दुर्लभ खगोलीय घटना नई खोजी गई एक आकाशगंगा के केंद्र में हैं जहां सामान्य से बहुत अधिक चमक होती है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • हमारे निकटवर्ती ब्रह्मांडों में हुई यह विरलतम घटना बताती है कि विलय करने वाले छोटे समूह अनेक महाविशाल ब्लैक होल का पता लगाने के लिए आदर्श प्रयोगशालाएं हैं।
  • इनसे दुर्लभ घटनाओं का पता लगाने की संभावनाएं बढ़ती हैं। दरअसल, महाविशाल ब्लैकहोल का पता लगाना कठिन होता है, क्योंकि उनसे किसी भी प्रकार का प्रकाश उत्सर्जित नहीं होता।
  • किसी महाविशाल ब्लैकहोल पर आसपास की धूल और गैस गिरती है, तो वह उसका कुछ द्रव्यमान निगल लेता है। लेकिन, इसमें से कुछ द्रव्यमान ऊर्जा में परिवर्तित होकर विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में उत्सर्जित होता है, जिससे ब्लैकहोल बहुत चमकदार दिखाई पड़ता है। इन्हें एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस (एजीएन) कहा जाता है।

चमकीले झुरमुट से मिला तीसरा ब्लैकहोल

  • खगोलविद ‘एनजीसी 7733’ और ‘एनजीसी 7734’ की जोड़ी की परस्पर अंतक्रिया का अध्ययन कर रहे थे। इस दौरान एनजीसी 7734 के केंद्र से असामान्य उत्सर्जन और एनजीसी 7733 की उत्तरी भुजा से एक बड़े चमकीले झुरमुट का पता लगा।
  • जांच में पता चला कि यह झुरमुट एनजीसी 7733 के मुकाबले अलग गति से आगे बढ़ रहा है। फिर वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि झुरमुट एनजीसी 7733 का हिस्सा नहीं है बल्कि उसकी उत्तरी भुजा के पीछे एक अलग छोटा ब्लैकहोल था। इसका नाम ‘एनजीसी 7733एन’ रखा गया।
  • आकाशगंगा के विकास में जरूरी एजीएन आकाशगंगा और उसके वातावरण में भारी मात्रा में आयनित कण व ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। यह दोनों आकाशगंगा के चारों ओर माध्यम विकसित करने और आखिरकार उस आकाशगंगा के विकास में योगदान देते हैं।

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ब्लू मून

चर्चा में क्यों?

22 अगस्त 2021 की पूर्णिमा की रात आसमान में ब्लू मून दिखाई दिया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ब्लू मून का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि चंद्रमा नीले रंग में दिखाई दिया। बल्कि, यह एक प्रचलित नाम मात्र ही है।
  • ब्लू मून को भारत समेत दुनिया के सभी देशों में देखा गया।

क्यों कहा जाता है ब्लू मून

  • जब किसी साल के एक सीजन (तीन महीना) में चार पूर्णिमा पड़ती है तो उसमें से तीसरी को ब्लू मून का नाम से जाना जाता है।
  • इस बार 22 अगस्त की रात सीजन की कुल चार में से तीसरी पूर्णिमा थी। इसलिए, इसे ब्लू मून का नाम दिया गया है।
  • इस स्थिति में पूर्ण चंद्रमा दिखता है लेकिन चंद्रमा के निचले हिस्से से नीला प्रकाश निकलता दिखेगा। माना जा रहा है कि अगला ब्लू मून 2028 और 2037 में दिखेगा।

चंद्रमा के पारंपरिक नामों में से एक है ब्लू मून

* अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 60 के दशक में ब्लू मून का नाम का इस्तेमाल किया था। स्काई एंड टेलीस्कोप ने 1930 के दशक में प्रकाशित मेन फार्मर्स अल्मनैक में इस शब्द की उत्पत्ति का पता लगाया है।

2.7 साल में एक बार दिखता है यह नजारा

  • फुल ब्लू मून औसतन हर 2.7 साल में एक बार होता है। वास्तव में चंद्रमा नीला दिखाई नहीं देगा बल्कि आम पूर्णिमा की तरह वह पूर्ण रूप में और चमकदार दिखेगा।

सुपर मून

  • सुपर मून उस स्थिति में होता है जब चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी घटती है और पृथ्वी सूर्य एवं चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति को सुपर मून कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा बहुत बड़ा और चमकीला दिखता है।

ब्लड मून

  • इस स्थिति में पृथ्वी की छाया पूरे चंद्रमा को ढंक लेता है लेकिन फिर सूर्य की कुछ किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं। जब सूर्य की किरणें चंद्रमा पर गिरती हैं तो यह लाल दिखता है। इसी कारण इसे ब्लड मून कहा जाता है।

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पाई के मान की गणना का विश्व रिकार्ड

चर्चा में क्यों?

  • स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने गणितीय संख्या पाई को 62.8 खरब तक नापते हुए एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इसके लिए सुपर कंप्यूटर का प्रयोग किया। गणना में उन्हें 108 दिन व नौ घंटे का समय लगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • गणित में किसी वृत्त की परिधि की लंबाई और उसके व्यास की लंबाई के अनुपात को पाई (π) कहा जाता है।
  • पाई (π) एक गणितीय स्थिरांक (Mathematical Constants) है जिसका मान 3.14159 (दशमलव के पाँच स्थानों तक) होता है।
  • ग्राब्यूंडन विश्वविद्यालय के इन वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में बताया कि अब वे गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में इसके दर्ज होने का इंतजार कर रहे हैं।
  • यहां के डाटा एनालिसिस, विजुअलाइजेशन एंड सिमुलेशन सेंटर के अनुसार तब तक वे अपने द्वारा करवाई गई पाई की गणना के आखिरी 10 अंक ही सार्वजनिक करेंगे, जो 7817924264 आए हैं।
  • 510 स्टोरेज का इस्तेमाल गणना के लिए उन्होंने कुल 510 टेराबाइट (TB) का स्टोरेज इस्तेमाल किया। इसमें 16 टीबी की 38 हार्ड डिस्क व अन्य उपकरण इस्तेमाल किए।
  • वैज्ञानिकों ने सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD) के बजाय हार्ड डिस्क का उपयोग किया क्योंकि एसएसडी में गहन गणना स्टोर करते समय इनमें मामूली अंतर आने का खतरा था, जिससे पूरा प्रयास विफल हो जाता।

पिछला रिकॉर्ड

  • पाई की गणना में पिछला रिकॉर्ड 50 ट्रिलियन तक गणना का था। गिनीज बुक के अनुसार इसे अमेरिका के अलाबामा राज्य में टिमोथी मुलिकन ने जनवरी 2020 में बनाया था। उस गणना में करीब आठ महीने लगे थे। वहीं गूगल ने 2019 में अपनी क्लाउड तकनीक का उपयोग कर इससे आधी गणना की थी।

पाई के मान की खोज का इतिहास

  • 4 मार्च को पूरे विश्व में पाई डे (Pi Day) मनाया जाता है।
  • पाई के मान की खोज 5वीं सदी में आर्यभट्ट ने की थी, जबकि आधुनिक युग में पाई का मान सबसे पहले वर्ष 1706 में गणितज्ञ विलिया जोन्स ने सुझाया था।

आर्यभट्ट (Aryabhatta):

  • आर्यभट्ट पाँचवीं शताब्दी के गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, ज्योतिषी और भौतिक विज्ञानी थे।
  • आर्यभट्ट गुप्त काल (320 ईस्वी से 550 ईस्वी तक) के महान गणितज्ञ थे। उन्होंने आर्यभट्टीयम् (Aryabhattiyam) की रचना की जो उस समय के गणित का सारांश है। इसके चार खंड हैं। पहले खंड में उन्होंने वर्णमाला द्वारा बड़े दशमलव संख्याओं को दर्शाने की विधि का वर्णन किया है।
  • दूसरे खंड में आधुनिक गणित के विषयों जैसे कि संख्या सिद्धांत, ज्यामिति, त्रिकोणमिति और बीजगणित का उल्लेख किया गया है।
  • आर्यभट्ट के अनुसार, शून्य केवल एक अंक नहीं था बल्कि एक प्रतीक और एक अवधारणा भी थी। शून्य की खोज ने भी नकारात्मक अंकों के एक नए आयाम को खोल दिया। उन्होनें पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की सटीक दूरी का पता लगाया।
  • आर्यभट्टीयम् के शेष दो खंड खगोल विज्ञान पर आधारित हैं जिन्हें खगोलशास्त्र भी कहा जाता है। ‘खगोल’ नालंदा विश्वविद्यालय में प्रसिद्ध खगोलीय वेधशाला थी जहाँ आर्यभट्ट ने अध्ययन किया था।
  • उन्होंने अपने सिद्धांत में बताया कि पृथ्वी गोल है और यह अपनी धुरी पर घूमती है। उन्होंने यह भी कहा कि सौरमंडल में चंद्रमा एवं अन्य ग्रह परावर्तित सूर्य के प्रकाश से चमकते हैं जो आधुनिक समय में सच साबित हुआ।
  • आर्यभट्ट द्वारा रचित अन्य कृतियों में दशगीतिका सूत्र तथा आर्याष्टशत हैं।

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रक्षा-प्रतिरक्षा

आईसीजीएस विग्रह

चर्चा में क्यों?

  • ऑफशोर (अपतटीय) निगरानी पोत आईसीजीएस विग्रह को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल कर लिया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अपतटीय निगरानी पोत (ओपीवी) लंबी दूरी की सतह के जहाज हैं, जो भारत के द्वीपीय क्षेत्र सहित समुद्री क्षेत्रों में संचालन में सक्षम हैं, जिसमें हेलीकॉप्टर संचालन क्षमता भी शामिल हैं।
  • उनकी भूमिकाओं में तटीय और अपतटीय गश्त, भारत के समुद्री क्षेत्रों की पुलिसिंग, नियंत्रण और निगरानी, तस्करी रोधी और सीमित युद्धकालीन भूमिकाओं के साथ समुद्री डाकू विरोधी अभियान शामिल हैं।
  • इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने किया है।
  • विग्रह’ के शामिल होने के बाद तटरक्षक बल में 157 पोत और 66 विमान हो गए हैं।

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निधन

फुटबॉलर एसएस हकीम

  • भारत के पूर्व फुटबॉलर और 1960 में रोम ओलंपिक में भाग लेने वाले एसएस हकीम का गुलबर्गा (कर्नाटक) में निधन हो गया। वह 82 साल के थे।
  • एसएस हकीम करीब पांच दशक तक भारतीय फुटबॉल से जुड़े रहे। इसके बाद वह कोच बने और उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया।
  • 1982 में वह एशियाई खेलों के दौरान पीके बनर्जी के साथ सहायक कोच थे। बाद में मर्डेका कप के दौरान वह राष्ट्रीय टीम के हेड कोच बने।
  • उनके कार्यकाल में महिंद्रा एंड महिंद्रा जिसे अब महिंद्रा यूनाइटेड के नाम से जाना जाता है 1988 में ईस्ट बंगाल की मजबूत टीम को हराकर डूरंड कप का खिताब जीतने में सफल रहा। इसके अलावा एसएस हकीम सालगावकर के भी कोच रहे।
  • वह फीफा के अंतरराष्ट्रीय मैच रेफरी भी रहे। फुटबॉल में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें ध्यानचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। वह भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय निदेशक भी रहे।

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