Daily Current Affairs 3 September 2020

राष्ट्रीय परिदृश्य

संसद के आगामी मानसून सत्र में नहीं होगा प्रश्नकाल

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना वायरस महामारी के कारण संसद के मानसून सत्र की अवधि कम कर दी गई है, जिसमें प्रश्नकाल नहीं होगा जबकि शून्य काल के समय में भी कटौती कर दी गई है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हो रहा है जो 1 अक्टूबर तक चलना प्रस्तावित है।
  • प्रश्नकाल के अलावा इस दौरान निजी विधेयक भी पेश नहीं किया जा सकेगा।
  • शून्य काल होगा और सांसद जनता से जुड़े ज़रूरी मुद्दे भी उठा सकेंगे, लेकिन उसकी अवधि भी घटा कर 30 मिनट कर दी गई है।

प्रश्नकाल क्या होता है?

  • सामान्यतया, लोकसभा की बैठक का पहला घंटा प्रश्‍नों के लिए होता है और उसे प्रश्‍नकाल कहा जाता है। इसका संसद की कार्यवाही में विशेष महत्व है।
  • प्रश्‍न पूछना सदस्यों का उन्मुक्त संसदीय अधिकार है। प्रश्‍नकाल के दौरान सदस्य प्रशासन और सरकार के कार्यकलापों के प्रत्येक पहलू पर प्रश्‍न पूछ सकते हैं।
  • चूंकि सदस्य प्रश्‍नकाल के दौरान प्रासंगिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं इसलिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्यों संबंधी सरकारी नीतियों पर पूरा ध्यान केन्द्रित होता है।
  • प्रत्येक मंत्री जिनकी प्रश्नों का उत्तर देने की बारी होती है, वह सदन में खड़े होकर अपने प्रशासनिक कामों के बारे में उत्तर देते हैं।

प्रश्‍न चार प्रकार के होते हैं: –

  • तारांकित, अतारांकित, अल्प सूचना प्रश्‍न और गैर सरकारी सदस्‍यों से पूछे गए प्रश्‍न

तारांकित प्रश्‍न :

  • तारांकित प्रश्न वह होता है जिसका सदस्य सभा में मौखिक उत्तर चाहता है और पहचान के लिए उस पर तारांक बना रहता है।
  • जब प्रश्‍न का उत्तर मौखिक होता है तो उस पर अनुपूरक प्रश्‍न पूछे जा सकते हैं। मौखिक उत्तर के लिए एक दिन में केवल 20 प्रश्‍नों को सूचीबद्ध किया जा सकता है।

अतारांकित प्रश्‍न :

  • अतारांकित प्रश्‍न वह होता है जिसका सभा में मौखिक उत्तर नहीं मांगा जाता है और जिस पर कोई अनुपूरक प्रश्‍न नहीं पूछा जा सकता।
  • ऐसे प्रश्‍न का लिखित उत्तर प्रश्‍न काल के बाद जिस मंत्री से वह प्रश्‍न पूछा जाता है, उसके द्वारा सभा पटल पर रखा गया मान लिया जाता है।
  • इसे सभा की उस दिन के अधिकृत कार्यवाही वृत्तान्त (ऑफिशियल रिपोर्ट) में छापा जाता है। लिखित उत्तर के लिए एक दिन में केवल 230 प्रश्‍नों को सूचीबद्ध किया जा सकता है।

गैर सरकारी सदस्‍य हेतु प्रश्‍न

  • यह स्‍वयं सदस्‍य से ही पूछा जाता है और यह उस स्‍थिति में पूछा जाता है जब इसका विषय सभा के कार्य से संबंधित किसी विधेयक, संकल्‍प या ऐसे अन्‍य मामले से संबंधित हो जिसके लिए वह सदस्‍य उत्तरदायी हो।
  • ऐसे प्रश्‍नों हेतु ऐसे परिवर्तनों सहित, जैसा कि अध्‍यक्ष आवश्‍यक या सुविधाजनक समझे जाएं, वही प्रक्रिया अपनायी जाती है जो कि किसी मंत्री से पूछे जाने वाले प्रश्‍न के लिए अपनायी जाती है।

अल्प सूचना प्रश्‍न :

  • वह होता है जो अविलम्बनीय लोक महत्व से संबंधित होता है और जिसे एक सामान्य प्रश्‍न हेतु विनिर्दिष्ट सूचनावधि से कम अवधि के भीतर पूछा जा सकता है।
  • एक तारांकित प्रश्‍न की तरह, इसका भी मौखिक उत्तर दिया जाता है जिसके बाद अनुपूरक प्रश्‍न पूछे जा सकते हैं।

प्रश्नकाल की शुरुआत कैसे हुई?

  • भारत ने यह पद्धति इंग्लैंड से ग्रहण की है जहाँ सबसे पहले 1721 में इसकी शुरुआत हुई थी।
  • भारत में संसदीय प्रश्न पूछने की शुरुआत 1892 के भारतीय परिषद् अधिनियम के तहत हुई।

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रिपोर्ट/इंडेक्स

वैश्विक नवाचार सूचकांक-2020

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत शीर्ष 50 देशों में शामिल हुआ है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वर्ल्‍ड इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (World Intellectual Property Organization, WIPO) द्वारा तैयार ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स ( Global Innovation Index- 2020) यानी वैश्विक नवाचार सूचकांक 2020 की रैंकिंग में भारत 4 पायदान चढ़कर 48वें पायदान पर पहुंच गया है।
  • वर्ष 2019 में भारत 52वें पायदान पर रहा था और वर्ष 2015 में वह 81वें स्थान पर था।
  • दुनिया भर में अत्यधिक नवोन्‍मेषी विकसित देशों की श्रेणी में शामिल होना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
  • डब्ल्यूआईपीओ ने भारत को मध्य एवं दक्षिणी एशियाई क्षेत्र में 2019 के अग्रणी नवोन्‍मेषी देश के रूप में भी स्वीकार किया था क्योंकि इसने पिछले 5 वर्षों से अपनी नवाचार रैंकिंग में लगातार सुधार दर्ज किया है।

इसलिए हासिल हुई उपलब्धि

  • व्‍यापक ज्ञान पूंजी, स्टार्टअप के लिए अनुकूल परिवेश और सार्वजनिक एवं निजी अनुसंधान संगठनों द्वारा किए गए अद्भुत कार्यों के कारण वैश्विक नवाचार सूचकांक की रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और अंतरिक्ष विभाग जैसे वैज्ञानिक मंत्रालयों ने राष्ट्रीय नवाचार परिवेश को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • नीति आयोग ईवी, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत आदि विभिन्न क्षेत्रों में नीति आधारित नवाचार लाकर इस दिशा में राष्ट्रीय प्रयासों के अनुकूलन को सुनिश्चित करने के लिए अथक परिश्रम कर रहा है।
  • नीति आयोग द्वारा पिछले वर्ष जारी इंडिया इनोवेशन इंडेक्‍स यानी भारत नवाचार सूचकांक को देश के सभी राज्यों में नवाचार के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक प्रमुख कदम के रूप में व्यापक तौर पर स्वीकार किया गया है।

क्या है वर्ल्‍ड इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन ?

  • यह संयुक्त राष्ट्र की सबसे पुरानी एजेंसियों में से एक है।
  • इसकी स्थापना 1967 में रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और विश्व में बौद्धिक संपदा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिये किया गया था।
  • इसके तहत वर्तमान में 26 अंतर्राष्ट्रीय संधियां आती हैं।
  • WIPO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।
  • प्रत्येक वर्ष 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस मनाया जाता है।
  • वर्तमान में 191 देश इसके सदस्य हैं।
  • भारत 1975 में WIPO का सदस्य बना था।

WIPO के मुख्य कार्य

  • विश्व में अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा नियमों को बनाने के लिये यह एक नीतिगत मंच उपलब्ध कराना।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बौद्धिक संपदा संरक्षण और विवादों को हल करने के लिये वैश्विक सेवाएं देना।
  • बौद्धिक संपदा प्रणालियों को आपस में जोड़ने और ज्ञान साझा करने के लिये तकनीकी आधारभूत संरचना बनाना।
  • सदस्य देशों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिये बौद्धिक संपदा का उपयोग करने में सक्षम बनाने के लिये सहयोग और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाना।

क्या है बौद्धिक संपदा?

  • मानव बुद्धि से निर्मित ऐसी रचनाएं, जिन्हें छूकर महसूस नहीं किया जा सकता बौद्धिक संपदा कहलाती हैं । इनमें मुख्य रूप से कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क शामिल हैं।
  • इनके अलावा ट्रेड सीक्रेट्स, प्रचार अधिकार, नैतिक अधिकार और अनुचित प्रतिस्पर्द्धा के खिलाफ अधिकार भी इसमें शामिल हैं।

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मिशन/अभियान

मिशन कर्मयोगी

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (National Programme for Civil Services Capacity Building (NPCSCB) को मंजूरी दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (NPCSCB) को शुरू करने की मंजूरी दी है।
  • एनपीसीएससीबी को सिविल सेवकों के लिए क्षमता विकास के लिए आधारशिला रखने हेतु बनाया गया है ताकि वे भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं से सराबोर रहें और विश्व भर की श्रेष्ठ पद्धतियों से सीखते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
  • ‘मिशन कर्मयोगी’ का लक्ष्य भारतीय सिविल सेवकों को और भी अधिक रचनात्मक, सृजनात्मक, विचारशील, नवाचारी, अधिक क्रियाशील, प्रोफेशनल, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-समर्थ बनाते हुए भविष्य के लिए तैयार करना है।
  • इस कार्यक्रम को एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण-आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म (iGOT-Karmayogi platform )की स्थापना करके कार्यान्वित किया जाएगा।

यह होगा कार्यक्रम का संस्थागत ढांचा

  • प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद।
  • क्षमता विकास आयोग।
  • डिजिटल परिसम्पत्तियों के स्वामित्व तथा प्रचालन और ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए प्रौद्योगिकीय प्लेटफार्म हेतु विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी)।
  • मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में समन्वयन यूनिट।

क्षमता विकास आयोग

  • एक क्षमता विकास आयोग स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, ताकि सहयोगात्मक और सह-साझाकरण के आधार पर क्षमता विकास परिवेश या व्यवस्था के प्रबंधन और नियमन में एकसमान दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके।

‘वॉटर हीरोज- शेयर योर स्टोरीज’

चर्चा में क्यों?

  • जल शक्ति मंत्रालय के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक देश में जल संरक्षण को जनांदोलन बनाना और पानी के प्रति चेतना को मजबूत बनाना है।
  • इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय ने जल संरक्षण एवं प्रबंधन जैसे अहम विषय पर लोगों तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से 1 सितंबर, 2020 से ‘वॉटर हीरोज- शेयर योर स्टोरीज’ (जल नायक- अपनी कहानी बताएं) प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस वॉटर हीरोज प्रतियोगिता से पूरे भारत से जल संरक्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं को प्रोत्साहन मिलने और उनके संग्रहित होने की उम्मीद है। यह भी उम्मीद है कि देश में ऐसे प्रयासों के प्रचार से इस क्षेत्र में ज्यादा परिवर्तनकारी प्रयासों को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • पुरस्कारों पर विचार के लिए हर महीने (सितंबर, 2020 पुरस्कार से) से प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी।
  • सभी चयनित प्रविष्टियों को 10,000 रुपये (प्रत्येक) का नकद पुरस्कार और एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

 

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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

ग्रीन टर्म अहेड मार्केट

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केंद्रीय मंत्री आर. के. सिंह ने विद्युत सेक्टर में ‘ग्रीन टर्म अहेड मार्केट’ (Green Term Ahead Market-GTAM) की शुरुआत की है, जो कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भागीदारी को बढ़ावा देगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इसकी शुरूआत से नवीकरणीय ऊर्जा से समृद्ध राज्यों पर बोझ कम होगा और राज्यों को अपने स्वयं के नवीकरणीय खरीद दायित्त्व (RPO) से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने वर्ष 2022 तक देश में 175 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निधारित किया है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा का पूरे देश में विस्तार हो रहा है।
  • ‘ग्रीन टर्म अहेड मार्केट’ (GTAM) प्लेटफॉर्म से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों को नवीकरणीय ऊर्जा बेचने के लिये अतिरिक्त अवसर प्राप्त होंगे। यह हरित बिजली खरीदने के लिये पर्यावरण के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं और संस्थाओं को एक मंच प्रदान करेगा।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

दो ब्लैक होल की टक्कर के बाद नए ब्लैक होल का निर्माण

चर्चा में क्यों?

  • वैज्ञानिकों ने अरबों साल पहले दो ब्लैक होल के बीच हुई टक्कर के बाद एक नए आकार के ब्लैक होल के निर्माण की घटना की खोज की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वैज्ञानिकों ने इसका पता दो ब्लैक होल की सबसे भारी टक्कर का पता लगाते हुए लगाया है।
  • वैज्ञानिकों का दावा है कि दो ब्लैक होल के बीच यह टक्कर लगभग 7 अरब साल पहले हुई थी।
  • क्योंकि यह टक्कर पृथ्वी से इतनी दूर हुई, इसके कारण इस टक्कर के संकेत अब जाकर वैज्ञानिकों को मिले हैं।
  • शोध जर्नल फिजिकल रिव्यू लेटर्स और एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में इसके परिणाम प्रकाशित किए हैं, जिसके अनुसार, जिन दो ब्लैक होल में टक्कर हुई उसमें एक ब्लैक होल लगभग हमारे सूर्य के द्रव्यमान का 66 गुना और दूसरा ब्लैक होल लगभग हमारे सूर्य के द्रव्यमान का 85 गुना था।
  • यह दोनों आपस में टकराने से पहले कई बार काफी तेजी से एक दूसरे के करीब आए और एक दूसके के आसपास घूमे और फिर अंततः आपस में टकरा गए।
  • टक्कर के बाद जो विस्फोट हुआ उससे निकली शॉकवेव्स, गुरुत्वाकर्षण लहर के रूप में, अंतरिक्ष में प्रकाश की गति से चारों तरफ बढ़ने लगी।
  • इन गुरुत्त्वाकर्षण तरंगों को दो वेधशालाओं संयुक्त राज्य अमेरिका की लीगो (LIGO) एवं इटली की विर्गो (Virgo)द्वारा दर्ज किया गया।
  • इस तरंगीय संकेत को ‘GW190521’ नाम दिया गया है जो ब्लैक होल की टक्कर से आया था।
  • वहीं इन दो ब्लैक होल की टक्कर के बाद एक नए ब्लैक होल का निर्माण हुआ जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्ज के द्रव्यमान का लगभग 142 गुना है।

क्या होता है ब्लैक होल?

  • ब्लैक होल स्पेस में वो जगह है जहाँ भौतिक विज्ञान का कोई नियम काम नहीं करता। इसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है। इतना शक्तिशाली कि प्रकाश भी यहां प्रवेश करने के बाद बाहर नहीं निकल पाता है। जब कोई विशाल तारा अपने अंत की ओर पहुंचता है तो वह अपने ही भीतर सिमटने लगता है। धीरे धीरे वह विशाल ब्लैक होल बन जाता है और सब कुछ अपने में समेटने लगता है।
  • इसके बाहरी हिस्से को स्टीफ़न हॉकिंग ने इवेंट हॉराइज़न (Event Horizon) नाम दिया है। क्वांटम प्रभाव के चलते इससे गर्म कण टूट-टूट कर ब्रह्माण्ड में फैलने लगते हैं। स्टीफ़न हॉकिंग की खोज के अनुसार हॉकिंग रेडिएशन (Hawking Radiation) के चलते एक दिन ब्लैक होल पूरी तरह द्रव्यमान मुक्त हो कर ग़ायब हो जाता है। नाम के विपरीत ये क्षेत्र खाली नहीं होता बल्कि इसमें कई तरह के पदार्थ होते हैं जो इस इसके क्षेत्रफ़ल को असीम गुरुत्वाकर्षण बल देते हैं।

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