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Daily Current Affairs 29 July 2021

स्वास्थ्य एवं पोषण

अमेरिका में कैंडि़डा औरिस फंगस का बढ़ता संक्रमण

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका के नर्सिंग होम और अस्पतालों में कोरोना वायरस के बाद अब खतरनाक फंगल इन्फेक्शन फैलने लगा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक पहली बार इतना घातक फंगल इन्फेक्शन फैल रहा है जिसका इलाज उपलब्ध दवाओं से बेअसर साबित हो रहा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • कैंडि़डा औरिस फंगस (Candida auris) ईस्ट का खतरनाक रूप होता है। यह अस्पताल और नर्सिंग होम जैसी गंभीर बीमारियों वाली जगह पर बेहद घातक माना जाता है। यह खून, दिमाग या दिल में पहुंचने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है।

ऐंटीफंगल दवाएं प्रभावहीन

  • कैंडिडा ऑरिस से संक्रमित ज्यादातर मरीजों पर आमतौर पर इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ऐंटीफंगल्स — Fluconazole (55%) और Voriconazole (35%) का कोई असर नहीं हुआ।
  • इन दवाइयों को मरीजों को तब दिया जाता है जब उन पर ऐंटीबैक्टीरिया दवाइयां असर नहीं करती हैं। कैंडिडा ऑरिस एक ऐसा फंगस है जो आमतौर पर अस्पताल के वातावरण में मौजूद रहता है और कमजोर इम्यूनिटी के मरीजों को अपना शिकार बनाता है।
  • कैंडिडा ऑरिस के केस गंभीर रूप से बीमार केयर होम मरीजों में वॉशिंगटन डीसी में पाए गए जिनमें से तीन पर दवाओं का असर नहीं हो रहा।
  • वहीं, 22 केस टेक्सस के डैलस में मिले जिनमें से दो पर दवाएं बेअसर हैं। पांच में से तीन लोगों की मौत हो गई जिन पर दवाओं का असर नहीं था।

30 करोड़ से ज्यादा लोग शिकार

  • दुनियाभर में हर साल 30 करोड़ से ज्यादा लोगों को फंगस से जुड़ी बीमारियां होती हैं और करीब 2.5 करोड़ लोगों को आंखों की रोशनी या जान जाने का खतरा रहता है।
  • ग्लोबल ऐक्शन फंड फॉर फंगल इन्फेक्शन के आकलन के मुताबिक यह मलेरिया या टीबी से होने वाली मौतों से ज्यादा है।
  • साल 2020 के अंत तक अमेरिका में 1,500 मामले थे। कोरोना के चलते दोनों के मिलकर ज्यादा नुकसान पहुंचाने की आशंका भी थी।

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चर्चित पुस्तक

चाईना रूम

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय मूल के ब्रितानी उपन्यासकार संजीव सहोता उन 13 लेखकों में शामिल है, जिनकी किताब ‘चाइना रूम’ को इस साल बुकर पुरस्कार के दावेदारों की सूची में शामिल किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • सहोता ने पहले भी ‘द ईयर ऑफ द रनवेज’ के लिए 2015 के बुकर पुरस्कार के दावेदारों में जगह बनाई थी और उन्हें 2017 में साहित्य के लिए यूरोपीय संघ पुरस्कार मिला थ।
  • उनके उपन्यास ‘चाइना रूम’ को ब्रिटेन या आयरलैंड में अक्टूबर 2020 और सितंबर 2021 के बीच प्रकाशित 158 उपन्यासों में से चुना गया।
  • अंग्रेजी में लिखे गए और ब्रिटेन या आयरलैंड में प्रकाशित पुस्तक के लिए किसी भी राष्ट्रीयता का लेखक इस पुरस्कार को जीतने का पात्र है।
  • ‘‘’चाइना रूम’ में दो काल और दो महाद्वीपों को एक साथ बुनते हुए प्रवासी अनुभव पर आधारित कहानी है।
  • सहोता के अलावा नोबेल पुरस्कार विजेता जापानी लेखक काजुओ इशिगुरो और पुलित्जर पुरस्कार विजेता रिचर्ड पॉवर्स प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार की दौड़ में शामिल हैं।
  • 2017 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीत चुके ब्रिटेन के इशिगुरो प्रेम एवं मानवता पर आधारित उपन्यास ‘क्लारा एंड द सन’’ भी इसके दावेदारों में शामिल है।
  • उन्हें इससे पहले ‘द रीमेन्स ऑफ दि डे’ के लिए 1989 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • सूची में अंतिम छह में जगह बनाने वाली किताबों की घोषणा 14 सितंबर को की जाएगी और विजेता को तीन नवंबर को लंदन में एक समारोह के दौरान पुरस्कृत किया जाएगा।
  • इससे पहले, 2020 का बुकर पुरस्कार स्कॉटिश-अमेरिकी डगलस स्टुअर्ट ने अपने पहले उपन्यास ‘शुगी बैन’ के लिए जीता था।

बुकर पुरस्कार के बारे में:

  • बुकर पुरस्कार वर्ष 1969 से प्रदान किया जा रहा है।
  • बुकर पुरस्कार वर्ष के सर्वोत्तम अंग्रेज़ी उपन्यास को दिया जाता है, इस उपन्यास का प्रकाशन यूनाइटेड किंगडम या आयरलैंड में होना चाहिये।
  • इसके तहत 50,000 पाउंड की धनराशि पुरस्कारस्वरूप विजेता को दिए जाते हैं।

भारत और बुकर पुरस्कार:

  • भारत के तीन लेखकों; अरविंद अडिगा को वर्ष 2008 में उनके उपन्यास द व्हाइट टाइगर (The White Tiger) के लिये, किरण देसाई को वर्ष 2006 में उपन्यास द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस (The Inheritance of Loss) के लिये तथा अरुधंति रॉय को उपन्यास गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स (God of Small Things) के लिये बुकर पुरस्कार मिल चुका है।
  • भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी के उपन्यास क्विचोटे (Quichotte) को इस वर्ष के बुकर पुरस्कार के लिये अंतिम छह उपन्यासों में शामिल किया गया था। सलमान रुश्दी को इससे पहले वर्ष 1981 में उनके उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के लिये बुकर पुरस्कार मिला।

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निधन

नंदू नाटेकर

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय बैडमिंटन के शुरुआती दौर के सुपरस्टार में से एक नंदू नाटेकर का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण हाल ही में निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • नाटेकर जब कोर्ट पर खेलते थे तो उनकी तुलना अक्सर किसी बैले नर्तक से की जाती थी। अपने करियर में उन्होंने 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीते।
  • छह बार के राष्ट्रीय सिंगल्स चैंपियन नाटेकर ने 20 वर्ष की उम्र में भारत के लिए खेलना शुरू किया।
  • वह राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट और टेनिस खेलने के बाद बैडमिंटन खेले।
  • वह  1956 में अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय शटलर (बैडमिंटन खिलाड़ी) थे।
  • अपने समय के सबसे लोकप्रिय खिलाडि़यों में से एक माने जाने वाले नाटेकर दुनिया के पूर्व नंबर तीन खिलाड़ी थे।
  • पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली में जन्मे नाटेकर को 1961 में पहले अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया।
  • नाटेकर ने 15 साल से अधिक के अपने करियर के दौरान 1954 में प्रतिष्ठित आल इंग्लैंड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और 1956 में कुआलालंपुर में सेलांगर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतकर अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
  • उन्होंने 1951 से 1963 के बीच थामस कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने 16 में से 12 सिंगल्स और 16 में से आठ डबल्स मुकाबले जीते थे। उन्होंने और मीना शाह ने 1962 में बैंकाक में किंग्स कप अंतरराष्ट्रीय मिक्स्ड डबल्स खिताब जीता।
  • उन्होंने एक साल बाद सिंगल्स खिताब भी अपने नाम किया। उन्होंने जमैका में 1965 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। नाटेकर 1990 से 1994 तक महाराष्ट्र बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष भी रहे।

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अंतर्राष्ट्रीय़ परिदृश्य

शरणार्थी सुरक्षा पर ऐतिहासिक सन्धि को हुए 70 वर्ष

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने कहा है कि 1951 में वजूद में आई शरणार्थी कन्वेन्शन के बुनियादी सिद्धान्तों और भावना के लिये, ये समय, एक बार फिर नवीन संकल्प दोहराने का एक बेहतरीन मौक़ा है। एजेंसी ने इस अन्तरराष्ट्रीय सन्धि की 70वीं वर्षगाँठ के मौक़े पर 28 जुलाई 2021 को ये बात कही है।

महत्वपूर्ण बिंदु 

  • संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी ने कहा है, “यह कन्वेन्शन, दुनिया भर में, शरणार्थियों के अधिकारियों की हिफ़ाज़त कर रही है। इस कन्वेन्शन की बदौलत, लाखों लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाई जा सकी हैं।”
  • 1951 की शरणार्थी कन्वेन्शन, दूसरे विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों में अस्तित्व में आई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र ने 14 दिसम्बर 1950 को यह सन्धि प्रकाशित की थी, और जुलाई 1951 में, 26 देशों के प्रतिनिधियों ने, इस सन्धि के मसौदे को अन्तिम रूप देने के लिये, जिनीवा में बैठक की थी।
  • 1967 में एक प्रोटोकॉल के ज़रिये, उन लोगों के लिये संरक्षा व सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया था जिन्हें अन्तर्राष्ट्रीय सहायता व सुरक्षा की ज़रूरत होती है।
  • यह सन्धि ही ये परिभाषित करती है कि कौन लोग शरणार्थी हैं और उन्हें कि तरह की सुरक्षा, सहायता और अधिकार मिलने चाहिये।
  • ये सन्धि और प्रोटोकॉल, शरणार्थियों की हिफ़ाज़त के लिये आज भी बुनियाद का काम करते हैं और इन्होंने अनगिनत क्षेत्रीय सन्धियों व क़ानूनों के लिये प्रेरणास्रोत का काम किया है।
  • इनमें 1969 में, अफ़्रीका में हुई शरणार्थी कन्वेन्शन, 1984 में लातीन अमेरिका में हुआ कार्टाजेना घोषणा-पत्र और योरोपीय संघ की साझा शरणार्थी प्रणाली प्रमुख हैं।
  • इस कन्वेन्शन के सिद्धान्तों के लिये, दिसम्बर 2018 में हुए – शरणार्थियों पर ग्लोबल कॉम्पैक्ट के ज़रिये फिर से संकल्प व्यक्त किये गए।
  • इन दोनों वैधानिक दस्तावेज़ों में कहा गया है कि अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के बिना, शरणार्थियों की समस्याओं व स्थितियों का कोई टिकाऊ समाधान नहीं हो सकता।

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चर्चित स्थान

ट्राँस-ईरानियन रेलवे

चर्चा में क्यों?

  • इस वर्ष ‘विश्व विरासत समिति’ की चीन के फ़ुज़होऊ में ऑनलाइन बैठक में ट्राँस-ईरानियन रेलवे समेत कई वैश्विक विरासतों को विश्व विरासत की सूची में शामिल किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ईरान में ट्राँस-ईरानियन रेलवे, पूर्वोत्तर क्षेत्र में कैस्पियन सागर को दक्षिण-पश्चिम में फ़ारस की खाड़ी से जोड़ता है। साथ ही दो पर्वत श्रृंखलाओं, नदियों, पहाड़ी भूमियों और चार भिन्न-भिन्न जलवायु क्षेत्रों को पार करता है।
  • एक हज़ार 394 किलोमीटर लम्बी इस रेल सेवा के लिये निर्माण कार्य, 1927 में शुरू होकर 1938 तक चला।
  • इसकी बनावट व क्रियान्वयन को ईरान की सरकार ने आकार दिया, जिसमें अनेक देशों से 43 अनुबन्धकों की भी भागीदारी रही।
  • इसके लिये व्यापक स्तर पर पहाड़ काटने पड़े, 174 बड़े पुलों का निर्माण किया गया, 186 छोटे पुल बनाए गए, और इस रास्ते में 224 सुरंगें भी हैं, जिनमें 11 सुरंगें घुमावदार हैं।

क्वानझाओ में Emporium of the World in Song-Yuan

  • इनमें चीन के क्वानझाओ में Emporium of the World in Song-Yuan नामक दुनिया का बाज़ार, एशिया में समुद्री व्यापार के लिये एक बेहद महत्वपूर्ण काल के दौरान फला-फूला।
  • यूनेस्को के मुताबिक़ यह स्थल, 10वीं से 14वीं शताब्दी तक वाणिज्यिक समुद्री मार्ग के तौर पर शहर की ऊर्जा व उमंग को प्रदर्शित करता है, साथ ही यह चीन के अन्दरूनी इलाक़ों से भी जुड़ा है।
  • क्वानझाओ के इस एम्पोरियम में, 11वीं सदी की किन्गजिन्ग मस्ज़िद, इस्लामी मकबरे सहित अन्य धार्मिक इमारतें, और विविध प्रकार के पुरातत्वकालीन अवशेष हैं।
  • उस काल के अरबी व पश्चिमी लेखों में इसे ज़ेटोन के नाम से भी जाना गया है।

मैड्रिड शहर में सड़क के किनारों पर लगे पेड़ों से सजे मुख्य मार्ग

  • यूनेस्को ने स्पेन के मैड्रिड शहर में सड़क के किनारों पर लगे पेड़ों से सजे मुख्य मार्ग (Paseo del Prado Boulevard) और पास के ही रेटिरो पार्क को विरासत सूची में जगह मिली है।
  • यूनेस्को ने स्पेन की राजधानी के शहरी केन्द्र में स्थित इस स्थल को कला व विज्ञान का भूदृश्य क़रार दिया है।
  • 200 हैक्टेयर मे फैले इस सांस्कृतिक भूदृश्य में अनेक फ़व्वारे हैं जिनमें मुख्य रूप से फ़ुएन्ते डे सिबेलेस और फ़ुएन्ते डे नेपचूनो हैं और प्रतिष्ठित प्लाज़ा दे सिबेलेस भी है।

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