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Daily Current Affairs 28  May 2021

पुरस्कार/सम्मान

अंतर्राष्ट्रीय एनी पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

  • भारत रत्न प्रोफेसर सी.एन.आर. राव को अक्षय ऊर्जा स्रोतों और ऊर्जा भंडारण में अनुसंधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय एनी पुरस्कार ( Eni International Award) 2020 प्राप्त हुआ है। इस पुरस्कार को एनर्जी फ्रंटियर पुरस्कार (Energy Frontier award) भी कहा जाता है। इसे ऊर्जा अनुसंधान क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार माना जाता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रोफेसर राव पूरी मानव जाति के लाभ के लिए ऊर्जा के एकमात्र स्रोत के रूप में हाइड्रोजन ऊर्जा पर काम कर रहे हैं।
  • हाइड्रोजन का भंडारण, हाइड्रोजन का फोटोकैमिकल और इलेक्ट्रोकेमिकल उत्पादन, हाइड्रोजन का सौर उत्पादन और गैर-धातु उत्प्रेरण प्रोफेसर राव की उपलब्धियां हैं।
  • एनर्जी फ्रंटियर्स पुरस्कार धातु ऑक्साइड, कार्बन नैनोट्यूब, और अन्य सामग्रियों और द्वि-आयामी प्रणालियों पर उनके काम के लिए प्रदान किया गया है, जिसमें ग्रेफीन, बोरॉन-नाइट्रोजन-कार्बन हाइब्रिड सामग्री, और मोलिब्डेनम सल्फाइड (मोलिब्डेनाइट – एमओएस2) ऊर्जा अनुप्रयोगों और हरित हाइड्रोजन का उत्पादन शामिल हैं।
  • ये सभी वास्तव में, विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैं, जिसमें सौर या पवन ऊर्जा से उत्पादित बिजली द्वारा सक्रिय पानी, थर्मल पृथक्करण, और इलेक्ट्रोलिसिस के फोटोडिसोसिएशन शामिल हैं। प्रोफेसर राव ने तीनों क्षेत्रों में काम किया है और कुछ अत्यधिक नवीन सामग्री विकसित की है।
  • समान या संबंधित सामग्रियों के हाइड्रोजन संग्रह प्रणाली और उच्च विशिष्ट शक्ति वाले सुपरकैपेसिटर और चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों की बढ़ी हुई संख्या के निर्माण के लिए फायदेमंद गुण भी दिखाए गए हैं। बाद वाली वस्तु बैटरी के समान ऊर्जा भंडारण उपकरण हैं, जो अक्षय ऊर्जा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा।
  • एनी अवार्ड्स 2020 रोम के क्विरिनल पैलेस में 14 अक्टूबर, 2021 को आयोजित एक आधिकारिक समारोह के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें इटली गणराज्य के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला शामिल होंगे।
  • ऊर्जा और पर्यावरण अनुसंधान के क्षेत्र में वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इस पुरस्कार का उद्देश्य ऊर्जा स्रोतों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना और शोधकर्ताओं की नई पीढ़ियों को उनके काम के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • यह एनी वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के महत्व का गवाह है। इस पुरस्कार में नगद राशि और विशेष रूप से ढाला गया स्वर्ण पदक शामिल है।

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योजना/परियोजना

मिड डे मील योजना

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना महामारी की वजह से ज्यादातर राज्यों में दोबारा लॉकडाउन लगा हुआ है। इसको देखते हुए भारत सरकार निर्णय लिया है कि मिड-डे-मील योजना के तहत सभी पात्र बच्चों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के जरिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस योजना को केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंजूरी दे दी है।
  • इसके लिए केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 1200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रदान करेगी।

स्कूलों में भोजन देने का इतिहास

  • भारतीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने का एक लंबा इतिहास रहा है।
  • भारत में छात्रों को भोजन प्रदान करने की अवधारणा पहली बार वर्ष 1925 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा तमिलनाडु के प्राथमिक स्कूलों में शुरू की गई थी।फ्रांसीसी प्रशासन ने भी 1930 के दशक में पॉन्डिचेरी (अब पुदुचेरी) में इसकी शुरुआत की।

स्वतंत्रता के पश्चात का इतिहात

  • स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1962-63 में तमिलनाडु में इस तरह की योजना शुरू की गई।
  • 1985 में गुजरात और केरल की सरकारों ने भी इसे लागू करने का निर्णय लिया। हालांकि कुछ कारणों से जल्द ही गुजरात में इस योजना को बंद कर दिया गया, परंतु केरल में यह चालू रही।
  • 1990-91 में बारह अन्य राज्य सरकारों ने इस योजना को अपने-अपने राज्य में लागू करने का निर्णय लिया, जिसके बाद 15 अगस्‍त 1995 को केन्द्र सरकार ने स्कूली बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करने के लिये मिड-डे मील कार्यक्रम की शुरुआत की।
  • सितंबर 2004 में कार्यक्रम में व्यापक परिवर्तन करते हुए मेनू आधारित पका हुआ गर्म भोजन देने की व्यवस्था प्रारंभ की गई थी।
  • इस योजना के तहत न्यूनतम 200 दिनों हेतु निम्न प्राथमिक स्तर के लिये प्रतिदिन न्यूनतम 300 कैलोरी ऊर्जा एवं 8-12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिये न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा एवं 20 ग्राम प्रोटीन देने का प्रावधान है।

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ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास का उपयोग बढ़ाने के लिये एक राष्ट्रीय मिशन

चर्चा में क्यों?

  • खेतों में पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान करने और ताप विद्युत उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए, विद्युत मंत्रालय ने कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के इस्तेमाल को लेकर एक राष्ट्रीय मिशन स्थापित करने का निर्णय लिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह देश में ऊर्जा संबंधी बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने के हमारे लक्ष्यों में और मदद करेगा।
  • “ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के इस्तेमाल से जुड़े राष्ट्रीय मिशन” के निम्नलिखित उद्देश्य होंगे;
  • ताप विद्युत संयंत्रों से कार्बन न्यूट्रल बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा पाने के लिए को-फायरिंग के स्तर को वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर उच्च स्तर तक ले जाना।
  • बायोमास पेलेट में सिलिका, क्षार की अधिक मात्रा को संभालने के लिए बॉयलर डिजाइन में आर एंड डी (अनुसंधान एवं विकास) गतिविधि शुरू करना।
  • बायोमास पेलेट एवं कृषि अवशेषों की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने और बिजली संयंत्रों तक इसके परिवहन की सुविधा देना।
  • बायोमास को-फायरिंग में नियामक मुद्दों पर विचार करना।

मिशन की संरचना

  • राष्ट्रीय मिशन के संचालन और संरचना के तौर-तरीकों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह परिकल्पना की जा रही है कि मिशन में सचिव (विद्युत) की अध्यक्षता में एक संचालन समिति होगी जिसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) आदि के प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारक शामिल होंगे। सीईए सदस्य (ताप) कार्यकारी समिति के अध्यक्ष होंगे।
  • एनटीपीसी प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन में रसद और बुनियादी ढांचा सहायता प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाएगी। मिशन में सीईए, एनटीपीसी, डीवीसी और एनएलसी या अन्य भाग लेने वाले संगठनों के पूर्णकालिक अधिकारी शामिल होंगे। प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन की अवधि न्यूनतम पांच वर्ष होगी। मिशन के तहत निम्नलिखित उप-समूह भी गठित करने का प्रस्ताव है।

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नियुक्ति/निर्वाचन

बशर अल असद

चर्चा में क्यों?

  • सीरिया के राष्ट्रपति चुनाव में बशर अल-असद को लगातार चौथी बार भारी जीत मिलने का दावा किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 26 मई को हुए चुनावों में असद को 95.1% मत मिले।
  • उन्हें चुनौती देने वाले दो उम्मीदवारों में से महमूद अहमद मारी को 3.3% और अब्दुल्ला सालौम अब्दुल्ला को 1.5% मत हासिल हुए।
  • सीरिया के विपक्षी दलों ने इस चुनाव को पाखंड बताते है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कहा है कि ये चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं था।

एक दशक से संघर्षरत है सीरिया

  • सीरिया पिछले एक दशक में संघर्ष से तबाह हो चुका है जिसका शुरूआत मार्च 2011 में हुई जब अरब स्प्रिंग के तहत वहाँ लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हुए जिन्हें असद सरकार ने ताक़त का इस्तेमाल करते हुए दबाने की कोशिश की।
  • इस संघर्ष में अब तक तीन लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। सीरिया की आधी आबादी को लड़ाई के कारण अपने घरों से जाना पड़ा है।
  • सीरिया के लगभग 60 लाख लोग अभी शरणार्थी बनकर विदेशों में रहने को मजबूर हैं।
  • 55 वर्षीय बशर अल-असद वर्ष 2000 से ही सीरिया के राष्ट्रपति बने हुए हैं।
  • इससे पहले उनके पिता हाफ़िज़ अल-असद ने सीरिया पर एक चौथाई सदी से ज़्यादा वक़्त तक राज किया था।
  • पिछले दशक के दौरान असद सरकार के मुख्य समर्थक रूस और ईरान रहा है, जबकि तुर्की, पश्चिमी ताक़तें और खाड़ी के कई देशों ने उनके विरोधियों का समर्थन किया।

कब निकलेगा समाधान?

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2012 जेनेवा समझौते को लागू करने की बात कही है। इसके तहत सबकी सहमति से एक अस्थायी गवर्निंग बॉडी बनायी जाएगी।
  • सुरक्षा परिषद की मध्यस्थता में नौ दौर तक चली बातचीत (जेनेवा-2 प्रक्रिया) के बाद भी अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।
  • राष्ट्रपति बशर अल असद विपक्षी राजनीतिक समूह से बातचीत को इच्छुक नहीं है, क्योंकि दूसरे पक्ष राष्ट्रपति का इस्तीफा मांग रहे हैं।
  • साल 2017 में रूस, ईरान और तुर्की ने अस्ताना प्रक्रिया के तहत राजनीतिक बातचीत शुरू की। इसके एक साल बाद संविधान बनाने के लिए 150 सदस्यों की एक समिति बनाने पर सहमति बनाई गई।
  • तय हुआ कि संविधान बनने के बाद यूएन की देखरेख में निष्पक्ष चुनाव होंगे लेकिन इस बीच सीरिया सरकार ने चुनाव करा भी लिए हैं।

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पेन्पा त्सेरिंग

चर्चा में क्यों?

  • 53 वर्षीय पेन्पा त्सेरिंग को धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार यानी ‘केंद्रीय तिब्बती प्रशासन’ का अध्यक्ष चुना गया है। इस पद को आधिकारिक तौर पर ‘सिक्योंग’ कहा जाता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस पद पर वे लोबसंग सांग्ये का स्थान लेंगे।
  • पेन्पा त्सेरिंग तिब्बत की निर्वासित संसद के पूर्व अध्यक्ष हैं। वर्ष 1967 में कर्नाटक के बाइलाकुप्पे रिफ्यूजी कैंप में जन्मे त्सेरिंग ने बाइलाकुप्पे में तिब्बती केंद्रीय स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नई से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की।
  • पेन्पा त्सेरिंग ने अपने कॉलेज के दौरान तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन और नाइजीरियाई-तिब्बत मैत्री संघ के महासचिव के रूप में कार्य किया तथा बाद में वर्ष 2001-08 तक दिल्ली में तिब्बती संसदीय एवं अनुसंधान केंद्र में कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य किया।
  • नियमों के मुताबिक, दुनिया भर के किसी भी देश में रह रहे 18 वर्ष से अधिक आयु के तिब्बती शरणार्थी मतदान में हिस्सा ले सकते हैं। ज्ञात हो कि भारत समेत विश्व भर के तमाम देशों में 1.3 लाख से अधिक शरणार्थी मौजूद हैं। निर्वासित तिब्बती सरकार या ‘केंद्रीय तिब्बती प्रशासन’ को भारत सहित विश्व स्तर पर किसी भी देश द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान नहीं की गई है।
  • तिब्बती निर्वासित सरकार का मुख्यालय धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में है।

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