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Daily Current Affairs 28 July 2021

नियुक्ति/निर्वाचन

वसवराज बोम्मई

चर्चा में क्यों?

  • वसवराज बोम्मई कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री होंगे। वह राज्य के 23 वें मुख्यमंत्री थे।
  • भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक में हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले बीएस येदियुरप्पा ने बोम्मई के नाम का प्रस्ताव रखा। इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 28 जनवरी 1960 को जन्मे बसवराज सोमप्पा बोम्मई येदियुरप्पा सरकार में कर्नाटक के गृह, कानून, संसदीय मामलों के मंत्री थे।
  • उनके पिता एसआर बोम्मई भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट बसवराज ने जनता दल के साथ राजनीति की शुरुआत की थी।
  • वे धारवाड़ से दो बार 1998 और 2004 में कर्नाटक विधान परिषद के लिए चुने गए।
  • इसके बाद वे जनता दल छोड़कर 2008 में भाजपा में शामिल हो गए।
  • के. चेंगलराय रेड्डी कर्नाटक के प्रथम मुख्यमंत्री थे।

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राकेश अस्थाना

  • भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के गुजरात कैडर के वरिष्ठ अधिकारी राकेश अस्थाना को दिल्ली का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।
  • वह अब तक सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक के रूप में कार्यरत थे।
  • अस्थाना की नियुक्ति 31 जुलाई को उनकी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले हुई है। उनका कार्यकाल एक साल का होगा।
  • 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी अस्थाना पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में विशेष निदेशक रह चुके हैं।
  • सीबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान,उनका सीबीआई के तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा के साथ विवाद हो गया था जिसमें दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

पृथ्वी के पास से गुजरा एस्टेरॉयड

चर्चा में क्यों?

  • चार फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) हाल ही में पृथ्वी के पास से गुजरा।
  • ये 29 हजार किलोमीटर प्रति घंटे यानी औसतन 8 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से धरती की ओर बढ़ रहा था।
  • नासा ने इस उल्का पिंड का नाम ‘2008 GO20’ रखा था। ये एक अपोलो क्लास एस्टेरॉयड था।
  • ‘2008 GO20’ भारतीय समयानुसार 25 जुलाई 2021 को रात 11.21 बजे पृथ्वी के सबसे करीब रहा।

2034 में पृथ्वी की ओर फिर आएगा क्षुद्रग्रह

  • ‘2008 GO20’ एस्टेरॉयड के धरती से टकराने की कोई आशंका नहीं है। ऐसा एस्टेरॉयड पहले भी पृथ्वी के ऊपर से गुजर चुका है।
  • यह क्षुद्रग्रह 2034 में फिर से पृथ्वी पर आएगा।
  • पहले भी पृथ्वी के काफी करीब आ चुका है एस्टेरॉयड
  • यह क्षुद्रग्रह 1935 और 1977 में पृथ्वी से क्रमशः 19 लाख किमी और 29 लाख किमी की दूरी से गुजर चुका है।
  • उस समय, यह उड़ गया और कभी पृथ्वी की ओर नहीं आया। इस बार यह लगभग 45 लाख किमी है, जो पृथ्वी-चंद्रमा की दूरी से लगभग 11 से 12 गुना अधिक है, इसलिए पृथ्वी से टकराने का कोई खतरा नहीं है।

99.9% क्षुद्र ग्रह वायुमंडल में जल कर राख हो जाते हैं

  • मंगल और बृहस्पति के बीच कई क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इनका आकार एक मीटर से लेकर सैकड़ों किलोमीटर तक होता है।
  • ये लाखों क्षुद्र ग्रह कभी-कभी गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी की ओर आकर्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी की सतह पर गिरने से पहले उनमें से 99.9% वायुमंडल में जल कर राख हो जाते हैं।

नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स (NEO)

  • वैज्ञानिकों ने अब तक 23,628 से अधिक बड़े क्षुद्रग्रहों की एक सूची तैयार की है जो पृथ्वी के करीब जाते हैं। वैज्ञानिक इनकी गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं। इनमें से केवल 1,045 को खतरनाक माना गया है, जिन्हें नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स (NEO) नाम दिया गया है।
  • कई संगठन, वैज्ञानिक ऐसी वस्तुओं पर नजर रख रहे हैं जो धरती के करीब पहुंच रही हैं। इस तरह की तबाही से पृथ्वी को कैसे बचाना है, इस पर खगोलविद और वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं।
  • नासा के मुताबिक 24 जुलाई तक पृथ्वी के आसपास से 2021 NE, 2019 AT6, 2019 NB7 और 2014 BP43 जैसे एस्टोरॉयड भी गुजरेंगे, लेकिन किसी से भी कोई खतरा नहीं है।

एटलस सिस्टम से मिलती है सूचना

  • एटलस सिस्टम अमरीका की हवाई यूनिवर्सिटी का है। ये दूरबीनों का ऐसा सिस्टम है, जिसका मक़सद धरती की तरफ़ आ रहे बड़े-बड़े उल्कापिंडों या क्षुद्र ग्रहों से आगाह करना है।
  • एटलस सिस्टम की स्थापना जॉन टोनरी ने की है, जो एक खगोलविद हैं। उन्हें इस सिस्टम की स्थापना करने की प्रेरणा उन चर्चाओं से मिली थी, जिनमें ये कहा जा रहा था कि किसी उल्कापिंड या धूमकेतु के धरती से टकराने की संभावना बहुत ही कम है। शायद हज़ार दो हज़ार साल में कभी एक बार ऐसा हो सकता है।

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रूस का नौका मॉड्यूल

चर्चा में क्यों?

  • रूस (Russia) ने हाल ही में लंबे समय से प्रतीक्षारत अपना एक विशेष मॉड्यूल को इंटरनेशल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए लॉन्च किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • रूस का यह बहुत उद्देश्यीय शोध मॉड्यूल यानी नौका मॉड्यूल (Nauka Module) को साल 2007 में प्रक्षेपित किया जाना था, लेकिन यह तकनीकी बाधाओं के कारण टलता 14 साल तक टलता रहा।
  • बीते 21 जुलाई को नौका को कजाकिस्तान के बायोकोनूर कॉस्मोड्रोम से प्रटोन एम रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
  • नौका मॉड्यूल (Nauka Module) अपने साथ यूरोपियन रोबोटिक आर्म (ERA) अपने साथ ले गया है।यह आईएसएस (ISS) के रूसी हिस्से के साथ जुड़ेगा।
  • इस मॉड्यूल में अंतरिक्ष यात्रियों के ठहरने के लिए एक पलंग, टॉयलेट, ऑक्सीजन पुनर्उत्पादन केंद्र और पेशाब से फिर पानी बनाने का सिस्टम है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में पहले से ही दो रोबोटिक भुजाएं (Robotic Arm) हैं एक कनाडा और एक जापानी रोबोटिक भुजाएं हैं जो अंतरिक्ष यान में रहने, और उसमें सामान और यात्रियों के आने जाने कि भूमिका निभाते हैं। लेकिन दोनों भुजाएं रूसी भुजा की तुलना में छोटी है।

क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ (ISS)?

  • ‘इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ एक कृत्रिम उपग्रह है, जो कि पृथ्वी की निचली कक्षा में सबसे बड़ी मानव निर्मित संरचना है।
  • यह पाँच अंतरिक्ष एजेंसियों: नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन), रॉसकॉसमॉस (रूस), जाक्सा (जापान), ESA (यूरोप) और CSA (कनाडा) के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है।
  • एक अंतरिक्ष स्टेशन मुख्य रूप से एक बड़ा अंतरिक्षयान है, जो लंबी अवधि के लिये पृथ्वी की निम्न कक्षा में रहता है।
  • यह अंतरिक्ष में एक बड़ी प्रयोगशाला की तरह है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक परीक्षण करने और हफ्तों या महीनों तक रहने की अनुमति देता है।
  • चीन ने अपने स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन का एक मानव रहित मॉड्यूल ‘तियानहे’ लॉन्च किया है, जिसके वर्ष 2022 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

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बृहस्पति के उपग्रह गैनीमीड पर पानी से बनी भाप के साक्ष्य

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने अपनी खोज में बृहस्पति के उपग्रह गैनीमीड (Ganymede) पर पानी से बनी भाप के सबूत मिलने की जानकारी दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • नेचर एस्ट्रोनॉमी जनरल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, पानी की भाप गैस के रूप में थी, लेकिन गैनीमीड की सतह से टकराकर बर्फ में बदल गई।
  • नासा ने अपने पिछले शोध में गैनीमीड को सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा उपग्रह बताया था, जिस पर पृथ्वी के सभी समुद्र से ज्यादा पानी होने की बात कही गई थी।
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, यहां तापमान काफी कम है, जिसके चलते पानी की ऊपरी सतह पर बर्फ जमी रहती है।
  • नासा के शोध में बताया गया कि गैनीमीड के समुद्र सतह से करीब 160 किमी नीचे हैं, जिससे समुद्र के पानी के वाष्पीकरण होने का अनुमान काफी कम है। गौरतलब है कि हबल ने करीब दो दशक तक गेनीमेड पर नजर रखी और पानी के भाप बनने की प्रक्रिया के सबूत जुटाए।
  • साल 1998 में हबल की स्पेस टेलीस्कोप इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ ने गेनीमेड की पहली अल्टावॉयलेट तस्वीर खींची थी, जिसमें गेनीमेड का चुंबकीय क्षेत्र कमजोर होने की जानकारी मिली थी।
  • इन अल्ट्रावॉयलेट तस्वीरों से आणविक ऑक्सीजन की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। हालांकि, कुछ जांच के दौरान वातावरण में शुद्ध ऑक्सीजन मिलने की पुष्टि नहीं हुई। वैज्ञानिकों ने इस अंतर की वजह परमाणु ऑक्सीजन की सांद्रता अधिक होने को माना।

बृहस्पति ग्रह:

  • बृहस्पति, सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है जो अन्य सभी ग्रहों के मुकाबले दोगुने से अधिक बड़ा है।
  • बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून को जोवियन ग्रह या गैसीय ग्रह कहा जाता है।
  • इनमें वायुमंडल की मोटी परत पाई जाती है जिसमें ज़्यादातर हीलियम और हाइड्रोजन गैस होती है।
  • बृहस्पति लगभग हर 10 घंटे में एक बार घूर्णन (एक जोवियन दिवस) करता है, परंतु सूर्य की परिक्रमा (एक जोवियन वर्ष) करने में इसे लगभग 12 वर्ष लगते हैं। बृहस्पति के 75 से अधिक चंद्रमा हैं।
  • बृहस्पति के चार सबसे बड़े चंद्रमाओं को इटालियन खगोलशास्त्री गैलीलियो गैलीली जिन्होंने पहली बार वर्ष 1610 में इन ग्रहों को देखा था, के नाम पर गैलीलियन उपग्रह कहा जाता है।
  • इनके नाम आयो, यूरोपा, गेनीमेड और कैलिस्टो हैं।
  • वर्ष 1979 में वॉयजर मिशन ने बृहस्पति की धुँधली वलय प्रणाली की खोज की।
  • नौ अंतरिक्षयानों को बृहस्पति पर भेजा जा चुका है। सबसे बाद में जूनो वर्ष 2016 में बृहस्पति पर पहुँचा।

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आर्थिक- वाणिज्यिक परिदृश्य

IMF ने घटाया भारत की वृद्धि दर का अनुमान

चर्चा में क्यों?

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 300 आधार अंक घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया है। इसके पहले अप्रैल में 12.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। वहीं एजेंसी ने वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6 प्रतिशत बरकरार रखा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • आईएमएफ में मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि ‘टीके तक पहुंच कम होने’ और कोरोनावायरस की लहर फिर से आने की संभावना को देखते हुए आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाया गया है।
  • चालू वित्त वर्ष में भारत के लिए आईएमएफ का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुरूप है, लेकिन विश्व बैंक इसकी तुलना में थोड़ा आशावादी है।
  • विश्व बैंक ने 2021 में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत और 2022 में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, भले ही कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण रिकवरी कमजोर पड़ी है।
  • मुद्राकोष ने हाल ही में जारी ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook, WEO) में कहा, ‘इस साल मार्च-मई के दौरान कोविड महामारी की दूसरी गंभीर लहर को देखते हुए भारत में वृद्धि की संभावना को कम किया गया है। इससे भरोसे में सुधार की गति भी धीमी पडऩे की आशंका है।’
  • हालांकि रिपोर्ट में चेताया गया है कि तेज रिकवरी निश्चित नहीं है क्योंकि वायरस और उसके म्यूटेशन को लेकर बड़ी आबादी आशंकित है। इसमं कहा गया है, ‘उन देशों, खासकर भारत में रिकवरी को झटका लगा है, जहां दूसरी लहर का प्रकोप रहा है।’
  • आईएमएफ की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत सरकार ने कहा है कि भारत में 44.19 करोड़ टीके लग चुके हैं, जो विश्व में सर्वाधिक है।
  • आईएमएफ ने कहा कि उभरते बाजारों व विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 2021 के लिए वृद्धि का अनुमान कम किया गया है, खासकर उभरते एशिया में। इसके विपरीत विकसित देशों में अनुमान बढ़ाया गया है। यह बदलाव महामारी की प्रगति और नीतिगत समर्थन में बदलाव को दिखाता है।
  • बहरहाल सार्वजनिक निवेश और कुल मिलाकर वित्तीय समर्थन को देखते हुए चीन के लिए 2021 का अनुमान 0.3 प्रतिशत अंक कम किया गया है।
  • फंड के अनुमान के मुताबिक महामारी ने विकसित देशों में प्रति व्यक्ति आमदनी 2.8 प्रतिशत कम कर दी है, वहीं उभरते देशों व चीन को छोड़कर विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति सालाना आमदनी 6.3 प्रतिशत कम हुई है।

अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष (IMF)

  • अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष 187 देशों का संगठन है, जो विश्‍व में मौद्रिक सहयोग बढ़ाने, वित्‍तीय स्थिरता लाने, अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार में मदद करने, अधिक रोजगार तथा सतत् आर्थिक वृद्धि को प्रोत्‍साहन देने और विश्‍व भर में गरीबी कम करने के लिए काम करता है।
  • अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष का बुनियादी मिशन अंतर्राष्‍ट्रीय तंत्र में स्थिरता रखने में मदद करना है।

 कोष यह काम तीन तरीके से करता है :

  • वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था और सदस्‍य देशों की अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर निगरानी रखकर;
  • भुगतान संतुलन में कठिनाई वाले देशों को ऋण देकर
  • सदस्‍यों को व्‍यावहारिक सहायता देकर।
  • भारत में अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष का काम, भारत सरकार, रिजर्व बैंक तथा अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष के बीच सूचना के प्रवाह में मदद देने तथा रिजर्व बैंक और राष्‍ट्रीय तथा राज्‍य सरकारों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का है।
  • फोकस के क्षेत्र: सदस्‍य देशों की आर्थिक और वित्तीय नीतियों की निगरानी; वित्‍तीय सहायता; तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण
  • प्रमुख प्रकाशन: वर्ल्‍ड इकनॉमिक आउटलुक; फिस्कल मॉनीटर; ग्‍लोबल फाइनेंशियल स्‍टेबिलिटी रिपोर्ट; फाइनेंस एंड डेवलपमेंट
  • अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक: क्रिस्टलीना जार्जीवा

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राज्य परिदृश्य:

ओडिशा में आपदा प्रबंधन पर अनिवार्य पाठ्यक्रम

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ओडिशा सरकार ने राज्य के कॉलेजों में पहले वर्ष के दौरान आपदा प्रबंधन पर एक पाठ्यक्रम अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने की घोषणा की है। इससे पूर्व ओडिशा सरकार ने हाई स्कूल और कॉलेज पाठ्यक्रम में आपदा एवं महामारी प्रबंधन को शामिल करने का निर्णय लिया था।
  • इन पाठ्यक्रमों का प्राथमिक उद्देश्य राज्य भर में छात्रों को आपदाओं के कारण उत्पन्न चुनौतियों जैसे कि बार-बार आने वाले चक्रवात एवं कोरोना वायरस महामारी आदि का सामना करने हेतु बेहतर तैयारी हेतु प्रशिक्षित करना है।

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उत्तर प्रदेश: ‘MyGov-पोर्टल

चर्चा में क्यों?

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में ‘MyGov-मेरी सरकार’ (MyGov-Meri Sarkar) पोर्टल लॉन्च किया है।
  • इस पोर्टल के माध्यम से राज्य सरकार आम लोगों से फीडबैक प्राप्त कर सकेगी और साथ ही इसकी सहायता से आम लोग सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी ले सकेंगे। इस पोर्टल का उद्देश्य राज्य सरकार के साथ आम नागरिकों के जुड़ाव को और बढ़ाना है।
  • यह प्रशासन की योजनाओं के प्रचार-प्रसार तथा उन पर आम नागरिकों की राय जानने के एक प्रमुख मंच के तौर पर कार्य करेगा।

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