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Daily Current Affairs 27 July 2021

टोक्यो ओलंपिक- 2020

सबसे कम उम्र की ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता

चर्चा में क्यों?

  • जापान की मोमिजी निशिया ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में इतिहास रच दिया है। 13 साल 330 दिन की उम्र में मोमिजी निशिया ने स्ट्रीट स्केटबोर्डिंग में स्वर्ण पदक जीता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • मोमिजी निशिया ने विमेंस इंडिविजुअल स्केटबोर्डिंग का स्वर्ण पदक जीता।
  • मोमिजी निशिया ओलंपिक में सबसे कम उम्र में स्वर्ण पदक जीतने वाली एथलीट बन गई हैं। वे इस खेल की पहली ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भी हैं क्योंकि स्केटबोर्डिंग पहली बार ओलंपिक खेलों की स्पर्धा में शामिल किया गया है।
  • जापान की मोमिजी निशिया ने इसी साल रोम में आयोजित हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया था।
  • वहीं 13 साल की ब्राजील की खिलाड़ी रेसा लील ने इस खेल में रजत पदक जीता और ओलंपिक की सबसे युवा मेडलिस्ट बन गई।
  • वहीं तीसरे नंबर पर आई कांस्य पदक विजेता नयाकाम फूना की उम्र महज 16 की है।
  • ओलंपिक के इस पोडियम को सबसे युवा पोडियम कहा जा रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि इस बार स्ट्रीट स्केटबोर्डिंग के समेत चार खेलों का ओलंपिक में पदार्पण हुआ है, इसमें सर्फिंग, स्पोर्ट क्लाइमिंग और कराटे शामिल है।

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सुमित नागल का चर्चित प्रदर्शन

चर्चा में क्यों?

  • भारत के टेनिस स्टार सुमित नागल ने इतिहास रच दिया है। वे पिछले 25 साल में ओलिंपिक में पहला मैच जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इससे पहले 1996 में लिएंडर पेस ने ये कारनामा किया था। इसके बाद कोई भी भारतीय टेनिस खिलाड़ी ऐसा नहीं कर सका।
  • नागल ने अपने पहले मैच में 2018 एशियन गोल्ड मेडलिस्ट डेनिस इस्तोमिन को 6-4, 6-7(6), 6-4 से हराया।
  • नागल ओलिंपिक में पहला मैच जीतने वाले ओवरऑल तीसरे भारतीय खिलाड़ी हैं।
  • पेस 1996 ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीते थे। उन्होंने ब्राजील के फर्नांडो मेलिजेनी को हराकर मेडल जीता था।

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चर्चित व्यक्तित्व

मीराबाई चानू

चर्चा में क्यों?

  • मीराबाई चानू को मणिपुर सरकार देगी एएसपी पद।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को मणिपुर सरकार राज्य पुलिस में एडिशनल एसपी (स्पोर्ट्स) के पद पर तैनात करने की घोषणा की है।
  • इससे पहले मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने मीरा को 1 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की थी।
  • मीराबाई ने टोक्यो ओलिंपिक में भारत को पहला और अब तक का इकलौता मेडल दिलाया है।
  • उन्होंने 49 किलोग्राम वेट कैटेगरी में कुल 202 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता। मीरा ओलिंपिक के पहले दिन मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

असम-मिजोरम सीमा पर हिंसक संघर्ष

चर्चा में क्यों?

  • असम-मिजोरम के बीच सीमा विवाद को लेकर 26 जुलाई को हिंसा भड़की, जिसमें असम पुलिस के 6 जवान मारे गए। इस घटना के पीछे दोनों राज्य एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

महत्वपू्र्ण बिंदु

  • जुलाई के शुरू में असम पुलिस ने अपनी जमीन बताते हुए अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया था, जिसके बाद से 100 साल पुराना यह सीमा विवाद फिर गरमा गया है।

असम-मिजोरम के बीच विवाद क्या है?

  • मिजोरम के तीन जिले- आइजोल, कोलासिब और ममित- असम के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी जिलों के साथ लगभग 164.6 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं।
  • दोनों राज्यों में सीमा विवाद 100 साल पहले ब्रिटिश राज के समय से है। तब मिजोरम को असम के लुशाई हिल्स के रूप में जाना जाता था।
  • 1950 में असम भारत का राज्य बन गया। उस समय असम में आज के नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम आते थे।
  • ये राज्य असम से अलग हो गए तो उनके अपने पूर्व राज्य से सीमा विवाद रहने लगे।
  • नॉर्थईस्टर्न एरिया (रीऑर्गेनाइजेशन) एक्ट 1971 के तहत असम से तीन नए राज्य बनाए गए- मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा।
  • 1987 में मिजो पीस रिकॉर्ड के तहत मिजोरम को अलग राज्य बनाया गया। यह मिजो ट्राइब्स और केंद्र सरकार के बीच हुए करार के तहत था।
  • इसका आधार 1933 का एग्रीमेंट था। पर मिजो ट्राइब्स का कहना है कि उन्होंने 1875 ILR बॉर्डर को स्वीकार किया, इसके बाद सीमा पर लगातार विवाद बढ़ता गया।
  • 30 जून 1986 को मिजोरम के नेताओं ने मिजो पीस एकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें ही सीमा तय की गई है।
  • पर नियम 1875 को माने या 1933 को, इस पर ही असम और मिजोरम के बीच विवाद बना हुआ है। मिजोरम कहता है कि 1875 के नियमों का पालन किया जाए।
  • 30 जून 1986 को मिजोरम के नेताओं ने मिजो पीस एकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें ही सीमा तय की गई है। पर नियम 1875 को माने या 1933 को, इस पर ही असम और मिजोरम के बीच विवाद बना हुआ है। मिजोरम कहता है कि 1875 के नियमों का पालन किया जाए।

सीमा का यह विवाद कब शुरू हुआ?

  • पूर्वोत्तर में यह जमीन विवाद ब्रिटिशकालीन है। 1830 तक कछार एक स्वतंत्र राज्य था। 1832 में यहां के राजा की मौत हुई। उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था। उस समय डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स के तहत इस राज्य पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब्जा कर लिया, जो बाद में ब्रिटिश राज में मिल गई।
  • इस नियम के तहत अगर किसी राजा की मौत बिना उत्तराधिकारी के हो जाती थी, तो उस राज्य को ब्रिटिश राज में मिला दिया जाता था।
  • ब्रिटिशर्स की योजना लुशाई (मिजो) हिल्स की तलहटी पर चाय के बागान लगाने की थी। पर लोकल ट्राइब्स यानी मिजो इससे खुश नहीं थे। इसका नतीजा यह रहा कि ब्रिटिश इलाकों में वह सेंधमारी करने लगे।
  • बार-बार होने वाले छापेमारी की वजह से ब्रिटिशर्स ने 1875 में इनर लाइन रेगुलेशन (ILR) लागू किया। ताकि असम में पहाड़ी और आदिवासी इलाकों को अलग कर सकें। मिजो ट्राइब्स इससे खुश थे, उन्हें लगा कि कोई उनकी जमीन पर अतिक्रमण नहीं कर सकेगा।
  • पर 1933 में ब्रिटिश राज ने कछार और मिजो हिल्स के बीच औपचारिक तौर पर सीमा खींच दी और इस प्रक्रिया में मिजो ट्राइब्स को शामिल नहीं किया गया। मिजो ने नई सीमा का विरोध किया और 1875 ILR को फिर से लागू करने की मांग की।

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भौगोलिक परिदृश्य

नदी को जानो एप

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में व्यास पूजा महोत्सव के अवसर पर वर्चुअली नदी को जानो (Nadi Ko Jano) मोबाइल ऐप लॉन्च किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह मोबाइल ऐप छात्रों के बहुत काम आएगा। इस ऐप के जरिए छात्रों को भारत की नदियों से संबंधित जानकारी मिलेगी।
  • नदी को जानो मोबाइल ऐप का उद्देश्य पूरे भारत में नदियों के बारे में जानकारी एकत्र करना है।
  • यह पहल भारतीय नदियों पर एक डेटाबेस बनाने के उद्देश्य से पुनरुत्थान फाउंडेशन के लिए अनुसंधान का एक हिस्सा है।
  • इस मोबाइल ऐप में भारत की नदियों के बारे में हर प्रकार की जानकारी मिलेगी।
  • इस ऐप में छात्र नदी से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी अपलोड कर सकते हैं।

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चर्चित स्थान

जगन्नाथ पुरी

चर्चा में क्यों?

  • ओडिशा का जगन्नाथ पुरी देश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जिसके हर घर में 24 घंटे पीने का शुद्ध पेयजल उपलब्ध है।
  • साथ ही शहर आने वाले हर पर्यटक के लिए भी मुफ्त पीने के पानी की व्यवस्था है।
  • पुरी की ढाई लाख आबादी में 32 हजार से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। सालाना 2 करोड़ यात्री यहां पहुंचते हैं।
  • शहर में जगह-जगह पीने के पानी के फाउंटेन लगाए गए हैं, ताकि किसी भी यात्री को बोतल बंद पानी न खरीदना पड़े और न ही उसे लेकर चलना पड़े।
  • इससे पुरी में सालाना 3 करोड़ प्लास्टिक बोतलों के इस्तेमाल में कमी आएगी, यानी 400 मीट्रिक टन कचरा कम होगा।
  • ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि अपनी नई उपलब्धि के साथ पुरी अब न्यूयॉर्क, लंदन, सिंगापुर और टोक्यो जैसे शहरों की लीग में शामिल हो गया है।

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रक्षा-प्रतिरक्षा

समुद्री अभ्यास कटलैस एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

  • समुद्री अभ्यास कटलैस एक्सप्रेस 2021 (Exercise Cutlass Express) 26 जुलाई से 6 अगस्त, 2021 तक अफ्रीका के पूर्वी तट के निकट आयोजित किया जा रहा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह समुद्री अभ्यास प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है और यह पश्चिमी हिंद महासागर और पूर्वी अफ्रीका में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है।
  • कटलैस एक्सप्रेस 2021 अभ्यास में, आईएनएस तलवार भाग ले रहा है। यह अभ्यास प्रवर्तन क्षमता में सुधार, संयुक्त समुद्री कानून और क्षेत्रीय व राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
  • 2021 संस्करण में 12 पूर्वी अफ्रीकी देश,भारत, ब्रिटेन, अमेरिका और विभिन्न अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे United Nations Office on Drugs and Crime (UNODC), अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO), यूरोपीय संघ नौसेना बल (EUNAVFOR) की भागीदारी शामिल है।
  • इस अभ्यास में भारतीय नौसेना एक प्रशिक्षक की भूमिका में भाग ले रही है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

यूनेस्को विश्व विरासत

चर्चा में क्यों?

  • तेलंगाना के काकतीय रामप्पा मंदिर के बाद अब भारत के एक और हड़प्पा सभ्यता के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्थल धोलावीरा को यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है।
  • महत्वपूर्ण बिंदु यह फैसला यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी के 44वें सत्र के दौरान लिया गया जिसका आयोजन फुजहोउ (चीन) में वर्चुअली किया गया।
  • इस सेशन में पहले तेलंगाना के मंदिर रुद्रेश्वर का नाम विश्व के धरोहरों की सूची में शामिल किया गया था, जिसे रामप्पा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
  • अब भारत में विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है।

हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilisation):

  • इसे सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) भी कहा जाता है।
  • यह लगभग 2,500 ईसा पूर्व में यह समकालीन पाकिस्तान और पश्चिमी भारत में विकसित हुई।
  • वर्ष 1920 के दशक में भारतीय पुरातत्त्व विभाग (Indian Archeological Department) ने सिंधु घाटी में खुदाई की जिसमें दो पुराने शहरों मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा के खंडहर का पता चला।

धोलावीरा (Dholavira):

  • हड़प्पा सभ्यता से संबंधित यह स्थल गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है।
  • 100 हेक्टेयर ने फैले इस स्थल की खोज वर्ष 1967-68 ईस्वी में जे. पी. जोशी ने की थी।
  • यह भारत में स्थित सिंधु सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा नगर था जो तीन भागों में विभाजित था- दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर।
  • इस स्थल की सबसे महत्त्वपूर्ण खोज यहाँ विश्व की सबसे पुरानी जल संरक्षण प्रणाली मिली है जहाँ वर्षा जल का संचयन किया जाता था।
  • यहां से एक विशाल नाम पट्टिका के साक्ष्य भी मिले हैं।

रॉक आर्ट हिमा

  • यूनेस्को की विश्व विरासत की सूची में सऊदी अरब के ‘रॉक आर्ट हिमा’ को छठे धरोहर के रूप में शामिल किया गया है।
  • दक्षिण-पश्चिम सऊदी अरब में नजरान प्रांत में स्थित, यह दुनिया के सबसे बड़े रॉक कला स्थलों में से एक है।
  • आइकॉनिक रॉक साइट में 34 से अधिक अलग-अलग जगह हैं, जिनमें रॉक शिलालेख और प्राचीन अरब कारवां मार्ग के साथ कुएं शामिल है।
  • सऊदी अरब में अन्य यूनेस्को साइटों में हेल क्षेत्र में रॉक आर्ट, ऐतिहासिक जेद्दा, मक्का का गेट, दिरिया में अत-तुरीफ जिला, अल-हिज्र पुरातत्व स्थल (मदैन सालीह), अल-अहसा ओएसिस, एक विकसित सांस्कृतिक लैंडस्केप आदि शामिल हैं।

यूरोप के पांच सांस्कृतिक स्थल

  • यूनेस्को ने यूरोप के भी पांच सांस्कृतिक स्थलों को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया है।
  • ट्रांस-नेशनल साइट, द ग्रेट स्पा टाउन ऑफ यूरोप, में सात यूरोपीय देशों में स्थित 11 शहर शामिल हैं।
  • ये देश हैं, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चेक गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूके।
  • इस साइट के स्पा भवन और सुविधाएं सभी एक समग्र शहरी संदर्भ में एकीकृत हैं जिसमें एक सुरम्य परिदृश्य में सावधानीपूर्वक प्रबंधित मनोरंजक और चिकित्सीय वातावरण शामिल है और मानव मूल्यों और चिकित्सा, विज्ञान और बालनोलॉजी (Balneology ) में विकास के महत्वपूर्ण आदान-प्रदान को शामिल करते हैं।
  • अन्य साइटों में 16वीं और 17वीं शताब्दी के मोड़ पर समुद्री संकेतन की उत्कृष्ट कृति के रूप में फ्रांस में अटलांटिक महासागर में एक उथले चट्टानी पठार पर कॉडरअन का लाइटहाउस शामिल है।
  • पश्चिम-मध्य जर्मनी में डार्मस्टैड आर्टिस्ट्स कॉलोनी, 1897 में वास्तुकला, कला और शिल्प में उभरते सुधार आंदोलनों के केंद्र के रूप में स्थापित हुई और अब प्रारंभिक आधुनिक वास्तुकला, शहरी नियोजन और परिदृश्य डिजाइन का प्रमाण है।
  • अन्य साइटों में 16वीं और 17वीं शताब्दी के मोड़ पर समुद्री संकेतन की उत्कृष्ट कृति के रूप में फ्रांस में अटलांटिक महासागर में एक उथले चट्टानी पठार पर कॉडरअन का लाइटहाउस शामिल है; पश्चिम-मध्य जर्मनी में डार्मस्टैड आर्टिस्ट्स कॉलोनी, 1897 में वास्तुकला, कला और शिल्प में उभरते सुधार आंदोलनों के केंद्र के रूप में स्थापित हुई और अब प्रारंभिक आधुनिक वास्तुकला, शहरी नियोजन और परिदृश्य डिजाइन का प्रमाण है।

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