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Daily Current Affairs: 27 August 2021

रिपोर्ट/इंडेक्स

सेफ सिटीज इंडेक्स-2021

चर्चा में क्यों?

  • इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ने सेफ सिटीज इंडेक्स-2021 के तहत दुनिया के 60 सबसे सुरक्षित शहरों की सूची जारी की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • सूचकांक के अनुसार डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन दुनिया का सबसे सुरक्षित शहर है।
  • इसने पिछले वर्षों में शीर्ष पर रहे टोक्यो, सिंगापुर और ओसाका को पीछे छोड़कर ये गौरव हासिल किया है।
  • दूसरे नंबर पर कनाडा का टोरंटो और तीसरे पर सिंगापुर है।
  • शीर्ष 50 शहरों में दिल्ली 48वें और मुंबई 50वें स्थान पर है।
  • पिछले इंडेक्स में दिल्ली को 52वां और मुंबई को 45वां स्थान मिला था।
  • इंडेक्स में कोपेनहेगन को 82.4 अंक, वहीं दिल्ली को 56.1 और मुंबई को 54.4 अंक मिले।

कैसै की जाती है रैंकिंग?

  • इंडेक्स के लिए दुनियाभर के शहरों का व्यापक अध्ययन करवाया गया था।
  • ईआईयू ने 76 मापदंड रखे थे ताकि वैश्विक शहरी सुरक्षा की स्पष्ट तस्वीर मिल सके।
  • इनमें डिजिटल, हेल्थ, इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यक्तिगत और पर्यावरण सुरक्षा शामिल थे।
  • इन पांचों मापदंडों में सभी शहरों को 100 में से अलग-अलग स्कोर दिया गया है।
  • कोरोना के मद्देनजर पहली बार इस साल पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को शामिल किया गया था।

इंटरनेट की उपलब्धता और पेड़ों की संख्या भी महत्वपूर्ण:

  • शहरी सुरक्षा के अध्ययन के लिए तय मानकों में नेट उपलब्धता और ट्री कवर भी शामिल थे।
  • शहर की कितनी फीसदी आबादी को इंटरनेट की सुविधा है, साइबर सुरक्षा के लिए स्मार्ट सिटी प्लान के संबंध में भी जानकारी ली गई।
  • सेहत की स्थिति जांचने के लिए शहर में 1000 लोगों पर डॉक्टरों की मौजूदगी का पता लगाया गया।
  • पर्यावरण सुरक्षा के लिए शहर में कुल ट्री कवर (पेड़ों की संख्या) और पीएम 2.5 कणों की मौजूदगी को अहम माना गया।

टॉप 10 शहरों में एशिया के सिर्फ तीन शहर हैं।

  • 2017 और 2019 में शीर्ष पर रहा टोक्यो इस बार पांचवें स्थान पर रहा।
  • डिजिटल सुरक्षा के मामले में सिडनी बेहतर तो सेहत में टोक्यो आगे रहा है। इंफ्रा सुरक्षा में हांगकांग का प्रदर्शन अच्छा रहा है। व्यक्तिगत सुरक्षा में कोपेनहेगन श्रेष्ठ रहा, वहीं पर्यावरण सुरक्षा में वेलिंग्टन ने सबको पीछे छोड़ दिया है।

क्या है इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट?

  • द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट लंदन स्थित इकोनॉमिस्ट ग्रुप का एक हिस्सा है जिसकी स्थापना 1946 में हुई थी।
  • यह दुनिया के बदलते हालात पर नज़र रखती है और दुनिया की आर्थिक-राजनीतिक स्थिति के पूर्वानुमान द्वारा देश विशेष की सरकार को खतरों से आगाह करती है।

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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

स्टॉकहोम विश्व जल सप्ताह

चर्चा में क्यों?

  • स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय जल संस्थान (Stockholm International Water Institute – SIWI) द्वारा 23 से 27 अगस्त, 2021 तक स्टॉकहोम विश्व जल सप्ताह (Stockholm World Water Week) ऑनलाइन आयोजित किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • सूरत नगर निगम भारत का एकमात्र नागरिक निकाय था जिसे “Zero Liquid Discharge Cities” विषय पर पैनल चर्चा में आमंत्रित किया गया था।
  • सूरत शहर को हाल ही में स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के तहत ‘वाटर+ प्रमाणीकरण’ से सम्मानित किया गया था। यह पहचान पाने वाला गुजरात का पहला शहर था। यह अपशिष्ट जल प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के क्षेत्र में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा प्रदान किया गया था।
  • स्टॉकहोम विश्व जल सप्ताह 2021 ‘Building Resilience Faster’ थीम के तहत आयोजित किया गया था।

क्या है विश्व जल सप्ताह?

  • विश्व जल सप्ताह एक प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम है जो वैश्विक जल मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया जाता है।
  • यह 1991 से SIWI द्वारा आयोजित किया जाता है। सप्ताह भर चलने वाले इस कार्यक्रम में 135 देशों के लगभग 4,000 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
  • विश्व जल सप्ताह के तहत, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य से लेकर ऊर्जा, कृषि, जैव विविधता और जलवायु संकट तक, पानी से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा कई सत्र आयोजित किए जाते हैं।
  • इसमें ‘स्टॉकहोम जूनियर वाटर पुरस्कार’ नामक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता और स्टॉकहोम जल पुरस्कार के लिए पुरस्कार समारोह भी शामिल है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

नई ड्रोन नीति-2021

चर्चा में क्यों?

  • केंद्र सरकार ने हाल ही में नई ड्रोन नीति की घोषणा की है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे घोषित करते हुए कहा है कि ड्रोन संबंधी नए नियमों से भारत में इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण की शुरुआत हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्रोन संबंधी नए नियमों से स्टार्ट-अप्स के साथ-साथ इस सेक्टर में काम करने वाले हमारे युवाओं को भी काफी मदद मिलेगी।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • नई नीति की जरूरत इसलिए थी क्योंकिअर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों जैसे – कृषि, खनन, आधारभूत संरचना, निगरानी, आपातकालीन परिस्थितियों, परिवहन, मानचित्रण, रक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसी को ड्रोन से जबरदस्त लाभ मिल रहा है और आने वाले दिनों में इसका इस्तेमाल और बढ़ना है।
  • कई देश की सेना ने अपनी सीमा सुरक्षा के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। नवाचार, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग में इसके बढ़ते इस्तेमाल और विशाल घरेलू मांग को देखते हुए यह माना जा रहा है कि  भारत 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बन सकता है। ड्रोन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ड्रोन प्रोत्साहन परिषद की स्थापना करने की भी तैयारी कर रही है।

क्या है नई ड्रोन नीति

  • नई ड्रोन नीति के मुताबिक सभी ड्रोन का ऑनलाइन पंजीकरण होगा। अब पंजीकरण,लाइसेंस के लिए सुरक्षा मंजूरी लेने और ड्रोन के रखरखाव का प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।माइक्रो ड्रोन (गैर-व्यावसायिक उपयोग के लिए) और नैनो ड्रोन के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।
  • कार्गो डिलिवरी के लिए कॉरीडोर बनाए जांएगे। डीजीसीए ड्रोन प्रशिक्षण आवश्यकताओं को देखेगा और ऑनलाइन पायलट लाइसेंस जारी करेगा।
  • ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशिक्षण और परीक्षा ड्रोन स्कूलों में होगी। रिमोट पायलट लाइसेंस शुल्क का शुल्क तीन हजार रुपये (बड़े ड्रोन के लिए) से कम करके सभी श्रेणियों के लिए 100 रुपये कर दी गई है और यह 10 साल के लिए वैध है।
  • डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ता के अनुकूल सिंगल-विंडो सिस्टम को विकसित किया जाएगा। जिसमें कम से कम मानव दखल होगा। नए नियमों के तहत ड्रोन का अधिकतम वजन 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है।  इससे ड्रोन टैक्सियों को भी ड्रोन नियमों के दायरे में लाना आसान होगा।
  • वैसे सरकार ने जुलाई ही में  ड्रोन नियम 2021 की घोषणा की थी। यह नियम अब 12 मार्च को जारी मानव रहित विमान प्रणाली नियम 2021 की जगह लेगा।
  • दरअसल यह नियम अकादमिक, स्टार्टअप्स, उपयोगकर्ता और अन्य हितधारकों ने बहुत प्रतिबंध करने वाला लगा था, क्योंकि इसमें काफी कागजी कार्रवाई की जरूरत थी और हर ड्रोन उड़ाने के लिए आवश्यक अनुमति चाहिए थी।
  • इस नियम में एक बड़ी बाधा यह थी ड्रोन उडाने के लिए बहुत कम “फ्री टू फ्लाई” ग्रीन जोन उपलब्ध थे।

कहां ड्रोन उड़ाने के लिए लेनी होगी मंजूरी?

  • लाल या पीले जोन में ड्रोन चलाने के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी। किसी भी व्यक्ति को बिना पूर्व अनुमति के ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, ड्रोन ऑपरेशन शुरू करने से पहले, ड्रोन पायलट को ऑपरेशन के इच्छित क्षेत्र में ड्रोन संचालन के लिए लागू किसी भी अधिसूचना या प्रतिबंध के लिए डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म को अनिवार्य रूप से सत्यापित करना होगा।

भारत के तीन हवाई क्षेत्र कौन से हैं?

  • ग्रीन जोन: ग्रीनजोन का अर्थ है सुरक्षित एयरस्पेस। यह जमीन से 400 फीट (120 मीटर) की दूरी तक का हवाई क्षेत्र जिसे ड्रोन संचालन के लिए हवाई क्षेत्र के नक्शे में लाल या पीले क्षेत्र के रूप में निर्धारित नहीं किया गया है। नए नियम के तहत अब ग्रीन जोन में ड्रोन उड़ाने के लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है।
  • यलो जोन: येलो ज़ोन का अर्थ है जिसमें दायरे तय होते हैं। भारत की भूमि वाले क्षेत्रों या क्षेत्र के जल के ऊपर नियंत्रित हवाई क्षेत्र जिसके भीतर ड्रोन संचालन प्रतिबंधित है और इसके लिए संबंधित हवाई यातायात नियंत्रण प्राधिकरण से अनुमति की आवश्यकता होती है। नए नियम में हवाई अड्डे की परिधि से पीले जोन को 45 किमी से घटाकर 12 किमी किया गया है।
  • रेड जोन: यह वह जोन है जहां सिर्फ विशेष परिस्थितियों के तहत काम करने की अनुमति होती है। भारत के किसी भी भूमि क्षेत्रों या क्षेत्रीय जल के ऊपर अधिसूचित बंदरगाह सीमा जिसके भीतर ड्रोन संचालन की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है।
  • नए ड्रोन नियमों के प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर ग्रीन, यलोऔर रेड क्षेत्रों के साथ ड्रोन उडाने वाले हवाई क्षेत्र का नक्शा प्रदर्शित किया जाएगा।

ड्रोन का इस्तेमाल कब शुरू हुआ

  • कहा जाता है 1849 में ऑस्ट्रिया ने एक ऐसा बम फेंकने वाला गुब्बारे जैसा उपकरण बनाया था जो मानव रहित था। तब से इसे ही ड्रोन बनाने की प्रेरणा माना जाता है।
  • सके बाद 1915 में महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने एक लड़ाकू विमान बनाया जो मानव रहित था। कुछ लोग इसे आधुनिक ड्रोन का आधार मानते हैं। दूसरे विश्व युद्ध के समय अमेरिका ने बड़े स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल किया था। इसे बनाने में मैरीलिन मोनरोए वैज्ञानिक का बड़ा योगदान माना जाता है।

ड्रोन है क्या?

  • आमतौर पर मानव रहित बहुत छोटे वायुयान (यूएएस) को ड्रोन कहा जाता है। यह एक ऐसा उपकरण है जो एक रोबोट की तरह काम करता है। जिसका नियंत्रण इंसान के हाथों में रहता है। आकारछोटी होने की वजह से सैनिक गतिविधियों में इनका इस्तेमाल आजकल अधिक होने लगा है।

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राज्य परिदृश्य: मिशन वात्सल्य

चर्चा में क्यों?

  • महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना महामारी के कारण अपने जीवनसाथी को खोने वाली महिलाओं की मदद करने के लिए “मिशन वात्सल्य” नामक एक विशेष मिशन लांच किया ।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ‘मिशन वात्सल्य’ उन महिलाओं को एक छत के नीचे कई सेवाएं और लगभग 18 लाभ प्रदान करेगा।
  • यह ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब पृष्ठभूमि और वंचित वर्गों से आने वाली विधवाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ विधवाओं के लिए डिजाइन किया गया है।
  • इस मिशन के तहत ‘संजय गांधी निराधार योजना’ और ‘घरकुल योजना’ जैसी योजनाओं से महिलाओं को फायदा होगा।
  • यह मिशन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, आंगनबाडी कार्यकर्ता एवं स्थानीय इकाई के अधिकारी इन महिलाओं को सेवाएं प्रदान करने के लिए उनके घर जायेंगे।
  • संजय गांधी निराधार योजना (Sanjay Gandhi Niradhar Yojana)
  • यह योजना निराश्रित व्यक्तियों, विकलांग, नेत्रहीन, तलाकशुदा महिलाओं, वेश्यावृत्ति से मुक्त महिलाओं, अनाथ बच्चों, बड़ी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर आदि को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
  • इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को प्रति माह 600 रुपये मिलते हैं जबकि परिवार को एक से अधिक लाभार्थी को प्रतिमाह 900 रुपये मिलते हैं।
  • यह लाभ लाभार्थी को तब तक दिया जाएगा जब तक कि उनके बच्चे 25 वर्ष के नहीं हो जाते या जब तक वे नौकरी प्राप्त नहीं कर लेते।

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योजना/परियोजना

ई श्रम पोर्टल

चर्चा में क्यों?

  • असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत देश के करोड़ों कामगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए ई-श्रम पोर्टल (sharam Portal) लॉन्च कर दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह मजदूरों का डाटाबेस होगा। इसकी मदद से सरकार सोशल सिक्योरिटी स्कीमों को उनके दरवाजे पर तक पहुंचाएगी।
  • इस डाटाबेस में मजदूर, प्रवासी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, कंस्ट्रक्शन वर्कर, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर, खेतीहर मजदूर और असंगठित क्षेत्र के दूसरे वर्कर रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
  • डाटाबेस के लॉन्च के बाद श्रमिकों को स्वयं अपना पंजीकरण कराना होगा। उनको अपने नाम, पेशा, पता, पेशे का प्रकार, शैक्षिक योग्यता, कौशल, और पारिवारिक विवरण आदि की पूरी जानकारी देनी होगी।
  • प्रवासी मजदूर अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर पंजीकरण करा सकते हैं। जिन मजदूरों के पास फोन नहीं हैं या जो पढ़ना/लिखना नहीं जानते, वो सीएससी केंद्रों पर जाकर, पंजीकरण करा सकते हैं।
  • श्रमिक के यूनिक अकाउंट नंबर का एक रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाया जाएगा जिसे ई श्रम कार्ड नाम दिया गया है। असंगठित और प्रवासी श्रमिकों के डाटाबेस को आधार के साथ जोड़ा जाएगा।

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समृद्ध कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ‘उत्पाद, नवाचार विकास और वृद्धि के लिए स्टार्टअप एक्सीलेरेटर (समृद्ध) कार्यक्रम को लॉन्च किया है।

कार्यक्रम के बारे में:

  • अपने उत्पादों और व्यवसाय को बढ़ाने हेतु सुरक्षित निवेश के लिये भारतीय सॉफ्टवेयर उत्पाद स्टार्टअप को एक अनुकूल मंच बनाना।
  • यह कार्यक्रम अगले तीन वर्षों में ग्राहक संपर्क, निवेशक संपर्क और अंतर्राष्ट्रीय पहुंँच प्रदान करके 300 स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • स्टार्टअप के मौजूदा मूल्यांकन व विकास चरण के आधार पर स्टार्टअप में 40 लाख रुपए तक का निवेश चयनित एक्सीलेरेटरों के माध्यम से किया जाएगा।
  • कार्यक्रम का क्रियान्वयन मंत्रालय के स्टार्टअप हब (MSH) द्वारा किया जा रहा है।
  • MSH एक राष्ट्रीय समन्वय, सुविधा और निगरानी केंद्र के रूप में कार्य करता है जो मंत्रालय के सभी इन्क्यूबेशन केंद्रों, स्टार्टअप और नवाचार संबंधी गतिविधियों को एकीकृत करेगा।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप के विकास को आगे बढ़ाना है, जिसमें 63 यूनिकॉर्न सामने आए हैं, जो अब 168 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कुल मूल्यांकन के साथ वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा यूनिकॉर्न हब है।
  • “यूनिकॉर्न” एक शब्द है जिसका उपयोग उद्यम पूंजी उद्योग में निजी तौर पर आयोजित स्टार्टअप कंपनी का वर्णन करने हेतु किया जाता है, जिसका मूल्य 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होता है।

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