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Daily Current Affairs  26  July 2021

खेल परिदृश्य

विश्व कैडेट चैंपियनशिप में प्रिया मलिक ने जीता स्वर्ण पदक

चर्चा में क्यों?

  • हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में भारतीय पहलवान प्रिया मलिक ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • विश्व कैडेट चैंपियनशिप में 73 किग्रा भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में प्रिया मलिक ने बेलारूस की पहलवान को 5-0 से पराजित कर यह पदक अपने नाम किया।
  • प्रिया 2019 में पुणे में खेलो इंडिया, 2019 में दिल्ली में 17वीं स्कूल गेम्स और 2020 में पटना में नेशनल कैडेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।
  • प्रिया मलिक ने साल 2020 में हुए राष्ट्रीय स्कूल खेलों में स्वर्ण जीता था।

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चर्चित व्यक्तित्व

बीएस येदियुरप्पा

चर्चा में क्यों?

  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्‍होंने राज्‍यपाल थावर चंद्र गहलोत को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया है। राज्य में नए मुख्यमंत्री के निर्वाचन तक वह कार्यवाहक सीएम बने रहेंगे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • बीएस येदियुरप्पा ने कर्नाटक में बीजेपी सरकार के 2 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम में त्यागपत्र की घोषणा की।
  • वह चार बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं लेकिन कार्यकाल एक बार भी पूरा नहीं कर पाए।
  • 26 जुलाई 2019 को उन्होंने चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
  • 27 फरवरी 1943 को कर्नाटक के मांड्या जिले के बूकनाकेरे गांव में जन्मे येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

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चर्चित स्थान

रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर

चर्चा में क्यों?

  • तेलंगाना का काकतीय रुद्रेश्‍वर मंदिर यूनेस्को विश्‍व धरोहरों की सूची में शामिल किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस मंदिर को रामप्‍पा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह 800 साल पुराना है। इस उपलब्‍धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बधाई दी है।
  • यह मंदिर तेलंगाना से पहला वर्ल्‍ड हेरिटेज साइट है।
  • यह मंदिर वारंगल से 77 किमी पर स्थित है। काकतीय वंश के राजा रुद्र देव ने इसे बनावाया था।
  • इसके शिल्‍पकार रामप्पा के नाम पर इस अद्वितीय मंदिर का नामकरण किया गया।
  • काकतीय वंश के दौरान जब मार्को पोलो भारत आए थे तो उन्‍होंने इसे तमाम मंदिरों में सबसे चमकता तारा कहा था।
  • इस मंदिर में शिव, श्री हरि और सूर्य देवता की मूर्तिया स्‍थापित हैं। इस मंदिर का विशाल प्रवेश द्वार, हजार खंभे और मनमोहक नक्‍काशी आकर्षण का केंद्र हैं।

यूनेस्को विश्व धरोहर

  • यूनेस्को (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) विश्व धरोहर स्थलों की सूची को ‘विश्व धरोहर कार्यक्रम’ (World Heritage Programme) के तहत सूचीबद्ध किया जाता है।
  • यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति (World Heritage Committee) द्वारा इस कार्यक्रम की निगरानी करता है।
  • यूनेस्को विश्व भर में सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों जिन्हें मानवता के लिये उत्कृष्ट मूल्य माना जाता है, की पहचान, संरक्षण और सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की कोशिश करता है।
  • यूनेस्को द्वारा वर्ष 1972 में अपनाई गई विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण से संबंधित कन्वेंशन नामक एक अंतर्राष्ट्रीय संधि में यह निहित है।
  • भारत में अब 31 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित सहित कुल 39 विश्व धरोहर स्थल हैं।

भारत में यूनेस्को विश्व धरोहरों की सूची

सांस्कृतिक स्थल (31)

1-आगरा का किला (1983) उत्तर प्रदेश

2-अजन्ता की गुफाएँ (1983) महाराष्ट्र

3–एलोरा की गुफाएँ (1983) महाराष्ट्र

4-सांची का बौद्ध स्मारक (1989) मध्य प्रदेश

5-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (विक्टोरिया टर्मिनस) (2004) मुंबई, महाराष्ट्र

6-गोवा के चर्च और मठ (1986)

7-एलीफेंटा की गुफाएँ (1987) महाराष्ट्र

8-फतेहपुर सीकरी (1986) उत्तर प्रदेश

9-ग्रेट लिविंग चोल मंदिर (1987, 2004) तमिलनाडु

10-हम्पी में स्मारकों का समूह (1986) कर्नाटक

11-महाबलीपुरम में स्मारक समूह (1984) तमिलनाडु

12-पट्टदकल समूह के स्मारक (1987) (कर्नाटक)

13-राजस्थान के पर्वतीय किले (2013)

14-ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद (2017) गुजरात

15-हुमायूँ का मकबरा, दिल्ली (1993)

16-जयपुर शहर, राजस्थान (2019)

17-खजुराहो समूह के स्मारक (1986) उत्तर प्रदेश

18-महाबोधि मंदिर परिसर, बोधगया (2002) बिहार

19-भारत के पर्वतीय रेलवे (1999, 2005, 2008)

  • भारत के पर्वतीय रेलवे के तीन रेलवे विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल हैं।
  • दार्जिलिंग पर्वतीय रेलवे (पश्चिम बंगाल): यह रेलवे पहाड़ी यात्री रेलवे का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • नीलगिरि पर्वतीय रेलवे (तमिलनाडु): यह लाइन 1891 में शुरू हुई और 1908 तक पूरी हुई, यह तमिलनाडु में 46 किलोमीटर लंबी मीटर-गेज सिंगल-ट्रैक रेलवे है।
  • कालका-शिमला रेलवे (हिमाचल प्रदेश): यह एक 96.6 किलोमीटर लंबा, सिंगल ट्रैक वर्किंग रेल लिंक है जिसे शिमला को जोड़ने के लिये 19वीं शताब्दी के मध्य में बनाया गया था।

20-कुतुब मीनार और इसके अन्य स्मारक, नई दिल्ली (1993)

21-रानी की वाव, पाटन (2014)- गुजरात

22-लाल किला परिसर, दिल्ली (2007)

23-भीमबेटका के शैल आवास, मध्य प्रदेश (2003)

24-सूर्य मंदिर, कोणार्क (1984)- ओडिशा

25-ताज महल, आगरा (1983)- उत्तर प्रदेश

26-ली कार्बूजियर का वास्तुकला कार्य, चंडीगढ़ (2016)

27-जंतर-मंतर, जयपुर (2010)- राजस्थान

28-विक्टोरियन गोथिक एवं आर्ट डेको इंसेबल्स, मुंबई (2018)- महाराष्ट्र

29- चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्त्व उद्यान (2004)- गुजरात

30-नालंदा महाविहार का पुरातात्त्विक स्थल (2016)- बिहार

31- रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर (2021) – तेलंगाना

भारत में प्राकृतिक स्थल (7)

1-ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क संरक्षण क्षेत्र (2014)- हिमाचल प्रदेश

2-काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (1985)- असम

3-केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (1985)- राजस्थान

4-मानस वन्यजीव अभयारण्य (1985)- असम

5-नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (1988, 2005)- उत्तराखंड

6-सुंदरबन नेशनल पार्क (1987)- पश्चिम बंगाल

7-पश्चिमी घाट (2012)

भारत के मिश्रित स्थल (1)

कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान (2016) सिक्किम

 

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

जीएम गोल्डन राइस

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में फिलीपींस आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) ‘गोल्डन राइस’ के वाणिज्यिक उत्पादन को मंज़ूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

मह्त्वपूर्ण बिंदु

  • इससे खाद्य असुरक्षा की चुनौती को संबोधित करेगा और बच्चों में कुपोषण की समस्या को कमी आने की संभावना है।
  • इसके अलावा विटामिन-ए (बीटा कैरोटीन) से भरपूर होने के कारण ‘गोल्डन राइस’ दृष्टिहीनता और कैंसर जैसे रोगों से बचाव के लिये भी महत्त्वपूर्ण हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों की मानें तो विटामिन-ए की कमी के कारण प्रतिवर्ष बचपन में अंधेपन के 5,00,000 मामले सामने आते हैं, जिनमें से आधे लोगों की 12 माह के भीतर ही मृत्यु हो जाती है।
  • उल्लेखनीय है कि चावल, गेहूँ और सोयाबीन जैसी फसलों के साथ-साथ कई फलों और सब्जियों में प्राकृतिक रूप से कुछ आनुवंशिक कमियाँ मौजूद होती हैं, जिसके कारण उनकी उत्पादकता में भारी कमी आती है।
  • ऐसे में उनके पदार्थ को वैज्ञानिक तरीके से रूपांतरित किया जाता है, ताकि फसल की उत्पादकता में वृद्धि हो सके तथा फसल को कीट प्रतिरोधी अथवा सूखा रोधी बनाया जा सके। हालाँकि स्थानीय लोगों द्वारा आनुवंशिक रूप से संशोधित इस किस्म का विरोध किया जा रहा है, क्योंकि यह जैविक चावल की परंपरागत किस्मों को प्रतिस्थापित करके पर्यावरण और कृषकों की आजीविका को खतरे में डाल सकता है।

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