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Daily Current Affairs 24July 2021

ओलंपिक 2021

मीराबाई चानू ने जीता  पहला पदक

चर्चा में क्यों?

  • भारत की स्टार महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश को पहला पदक जीता है।

मह्तवपूर्ण बिंदु

  • मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में पदक का भारत का 21 साल का इंतजार खत्म किया और रजत पदक जीतकर देश का खाता भी खोला।
  • उन्होंने महिलाओं की 49 किग्रा वर्ग में क्लीन एंड जर्क में सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
  • वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं की 49 किलोग्राम वेट कैटेगरी में कुल 202 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता।
  • चीन की होउ जिहूई ने 210 किलोग्रम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता। इंडोनेशिया की कैंटिका विंडी ने ब्रॉन्ज जीता।
  • कर्णम मल्लेश्वरी वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं।

उन्होंने सिडनी ओलंपिक 2000 में कांस्य पदक जीता था।

  • मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपेक काकचिंग गांव में हुआ था।
  • मीराबाई 2021 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली इकलौती भारतीय वेटलिफ्टर हैं।

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चर्चित स्थान

स्पिन बोल्डाक

चर्चा में क्यों?

  • अफगानिस्तान के  कंधार प्रांत के पाकिस्तान से लगते स्पिन बोल्डक जिले में 100 लोगों की बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी गई है।
  • अफगानिस्तान का गृह मंत्रालय हिंसा व हत्याओं की इन घटनाओं के लिए तालिबान को जिम्मेदार मान रहा है।
  • स्पिन बोल्डक वही स्थान है, जहां पर भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या कर दी गई थी।

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लिवरपूल

चर्चा में क्यों?

  • यूनेस्को की विश्व विरासत समिति के फ़ुज़होऊ (चीन) में और ऑनलाइन आयोजित हुए 44 वें सत्र में, लिवरपूल – मैरीटाइम मर्केण्टाइल सिटी (यूके) को विश्व विरासत सूची से बाहर कर दिये जाने का निर्णय लिया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वर्ष 2012 में लिवरपूल के शहरी इलाक़े के निकट इस्तेमाल नहीं किये जा रहे गोदी इलाक़े में प्रस्तावित भवनों व इमारतों के निर्माण सम्बन्धी गतिविधियों के बारे में चिन्ताएँ व्यक्त की गई थीं।
  • यूनेस्को की कमेटी ने कहा था कि ये निर्माण गतिविधियाँ इस विरासत स्थल की प्रामाणिकता और साख़ के लिये हानिकारक हैं।
  • इस शहर के तटीय इलाक़ों में प्रस्तावित अनेक इमारतों और भवनों में, एवर्टन फ़ुटबॉल क्लब स्टेडियम का निर्माण भी शामिल है जो 2024-25 के खेल मौसम में खोला जाना प्रस्तावित है।

अग्रणी भूमिका को पहचान

  • लिवरपूल को, 18वीं और 19वीं शताब्दियों के दौरान, दुनिया के एक प्रमुख व्यापार केन्द्र के रूप में इसकी अहम भूमिका को पहचान देते हुए, वर्ष, 2004 में विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।
  • साथ ही इसकी गोदी यानि डॉकलैण्ड टैक्नॉलॉजी, परिवहन व्यवस्थाओं और बन्दरगाह प्रबन्धन की अग्रणी भूमिका को भी पहचान व सांस्कृतिक मान्यता दी गई थी।
  • विश्व विरासत सूची में स्थान गँवाने वाला तीसरा विरासत स्थल
  • लिवरपूल, यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में स्थान गँवाने वाला तीसरा विरासत स्थल है।
  • यूनेस्को की सूची से बाहर निकाला जाने वाला पहला स्थल ओमान में, अरबी ओरिक्स (पशु) अभयारण्य था, जिसे शिकारी गतिविधियों व इन पशुओं के रहने के स्थानों की गुणवत्ता में गिरावट आने के बाद, वर्ष 2007 में बाहर किया गया।
  • इस सूची से बाहर होने वाला दूसरा स्थल जर्मनी के ड्रेस्डेन में ऐलबे घाटी थी जिसे, पूरी ऐलबे नदी पर सड़क पुल बनाए जाने के कारण, वर्ष 2009 में सूची बाहर किया गया था।
  • संयुक्त राष्ट्र संस्था ने विश्व विरासत स्थलों की सूची 1972 में शुरू की थी और सबसे पहले 12 विश्व स्थलों को, इस सूची में जगह मिली थी।
  • मौजूदा सूची में 1100 से ज़्यादा विश्व स्थल शामिल हैं जो अफ़ग़ानिस्तान से लेकर ज़िम्बाब्वे तक, 167 देशों में स्थित हैं। इनमें अमेरिका का यैलोस्टोन राष्ट्रीय पार्क, भारत का ताजमहल और इथियोपिया के लालीबेला में गुफ़ा चर्च भी हैं।
  • इस सूची में सबसे हाल ही में शामिल होने वाला स्थल, न्यूज़ीलैण्ड के दक्षिण-पश्चिम इलाक़े में ‘ते वहीपोऊनामू पार्क’ है जहाँ दुर्लभ प्रजाति के ‘किया’ नामक तोते का निवास है। यहाँ साथ ही, ‘तकाहे’ नामक, एक विशाल व दुर्लभ चिड़िया भी पाई जाती है जो मुर्ग़ी की तरह होती है और उड़ नहीं सकती।

यूनेस्को क्या है?

  • संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन’ (UNESCO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।
  • यह शिक्षा, विज्ञान एवं संस्कृति के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से शांति स्थापित करने का प्रयास करती है।
  • यूनेस्को का मुख्यालय पेरिस में अवस्थित है एवं विश्व में इसके 50 से अधिक क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
  • इसके 193 सदस्य देश एवं 11 संबद्ध सदस्य (अप्रैल 2020 तक) हैं और यह सामान्य सम्मेलन एवं कार्यकारी बोर्ड के माध्यम से नियंत्रित होता है।
  • यूनेस्को के सदस्य देशों में शामिल तीन देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य नहीं हैं: कुक द्वीप (Cook Islands), निउए (Niue) एवं फिलिस्तीन, जबकि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों में से तीन देश इज़रायल ,लिकटेंस्टीन,संयुक्त राज्य अमेरिका यूनेस्को के सदस्य देश नहीं हैं।
  • यूनेस्को संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र ऐसी एजेंसी है जिसे शिक्षा के सभी पहलुओं को शामिल करने का अधिकार प्राप्त है।
  • यूनेस्को को सतत् विकास लक्ष्य-4 के माध्यम से ‘वैश्विक शिक्षा एजेंडा 2030’ का नेतृत्व सौंपा गया है।

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भारत एवं विश्व

11वीं मेकांग-गंगा सहयोग (MGC) बैठक

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में मेकांग-गंगा सहयोग (MGC) की 11 वीं बैठक आयोजित की गई।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कोविड-19 महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए ”सामूहिक और सहयोगात्मक” कार्रवाई का आह्वान किया और कहा कि यह वायरस राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं है।
  • उन्होंने कहा कि ”भारत के लिए, मेकांग क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। भारत मेकांग देशों के साथ बहुआयामी जुड़ाव चाहता है। हमें सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करके अपनी साझेदारी के आधार को व्यापक बनाने की जरूरत है।”
  • उन्होंने कहा कि ”हमारा लक्ष्य न केवल भौतिक बल्कि डिजिटल, आर्थिक और लोगों से लोगों के बीच संपर्क सहित व्यापक अर्थ में क्षेत्र में संपर्क को बढ़ावा देने का है।”

मेकांग देशों में 38 परियोजनाएं पूरी कर चुका है भारत

  • बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने एमजीसी क्विक इंपैक्ट प्रोजेक्ट्स (QIP) के तहत भारत द्वारा की जा रही मेकांग देशों की सहायता का स्वागत किया और कहा कि 2015 में इसकी स्थापना के बाद से 38 परियोजनाएं पूरी हो चुकी है, जबकि 30 अन्य परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत 2015 में क्यूआईपी की शुरुआत की गई थी, जिसका बहुत कम समय में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है।
  • क्यूआईपी के तहत स्कूलों, सड़कों, स्वास्थ्य केंद्र जैसे भौतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण एवं उनका उन्नयन शामिल हैं। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भी क्यूआईपी के अंतर्गत चलाई जा रही हैं।
  • वर्ष 2000 में हुई एमजीसी की पहल
  • बता दें कि वर्ष 2000 में सम्पर्क पर्यटन और संस्कृति सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए छह देशों- भारत, कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस और वियतनाम को शामिल करते हुए एमजीसी की पहल शुरू की गई थी।
  • इसे वर्ष 2000 में लाओस के वियनतियाने (Vientiane) में प्रारंभ किया गया था।

दक्षिण पूर्व एशिया की गंगाहै मेकांग

  • मेकांग एक ऐसी नदी है जो एशिया के छः देशों से बहकर जाती है और इस पर करीब 10 करोड़ लोग निर्भर हैं। ये लोग तकरीबन 100 आदिवासी समूहों और दूसरे देश की जातियों से हैं।
  • हर साल इस नदी से 13 लाख टन मछलियाँ पकड़ी जाती है। यह नदी 4,350 किलोमीटर का सफर तय करती है, इसलिए इसे दक्षिण-पूर्वी एशिया की सबसे लंबी नदी कहा जाता है।
  • मेकांग अपना आधा सफर चीन देश में ही तय कर लेती है, जहाँ वह ‘लान्टसान्ग’ नाम से जानी जाती है। चीन से निकलने के बाद, यह नदी म्यानमार और लाओस की सीमा बनकर उन्हें अलग करती है और काफी हद तक लाओस और थाईलैंड की भी सीमा ठहरती है।
  • कम्बोडिया में यह नदी, दो उपनदियों में बँट जाती है और जब ये उपनदियाँ वियतनाम में बहती हैं, तो और भी छोटी-छोटी धाराएँ बनकर दक्षिण चीन सागर से जा मिलती हैं।
  • लाओस की राजधानी, विएंशिएन और कम्बोडिया की राजधानी, नाम पेन दोनों इसी नदी पर बसे बंदरगाह शहर हैं।
  • नदी के मुहाने के पास मेकांग, वियतनाम के लोगों के लिए भी बहुत अहमियत रखती है। वहाँ मेकांग सात धाराओं में अलग हो जाती है और 25,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला एक डेल्टा बनाती है। अनुमान लगाया जाता है कि ये धाराएँ कुल मिलाकर 3,200 किलोमीटर लंबी हैं।
  • पानी की कोई कमी न होने की वजह से इसके आस-पास के मैदानों और धान के खेतों की अच्छी सिंचाई होती है और उन्हें बेशकीमती बालू-मिट्टी भी मिलती है। इससे किसान हर साल तीन बार चावल की फसल उगा पाते हैं। जी हाँ, थाईलैंड के बाद वियतनाम ऐसा दूसरा देश है जो दुनिया-भर में इस मुख्य आहार का निर्यात करता है।
  • भारत में जो स्थाभन गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी का है, वही दक्षिण पूर्व एशिया में मेकांग नदी का है। इस नदी पर करोड़ों लोगों की आजीविका निर्भर है।
  • ये लोग खेती और मछली पकड़ने के लिए मेकांग नदी के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन चीन में बड़े पैमाने पर बांध बन जाने की वजह से यह नदी सूखती जा रही है।

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