Daily Current Affairs 24 October 2020

नियुक्ति/निर्वाचन

साद अल-हरीरी

चर्चा में क्यों?

  • लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल ओउन (Michel Aoun) ने लेबनान की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति से निपटने के लिये नई सरकार बनाने हेतु पूर्व प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी को लेबनान के नए प्रधानमंत्री के रूप में नामित किया है।
  • साद अल-हरीरी को लेबनान की संसद के अधिकांश सांसदों का समर्थन भी हासिल है।
  • साद अल-हरीरी सर्वप्रथम वर्ष 2009 में लेबनान के प्रधानमंत्री बने थे और वर्ष 2011 तक इस पद पर रहे थे, इसके बाद वे वर्ष 2016 में एक बार फिर लेबनान के प्रधानमंत्री बने, किंतु अक्तूबर, 2019 में उन्हें भारी विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा देना पड़ा था।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

CTET और TET प्रमाणपत्र आजीवन मान्य

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) प्रमाणपत्र को जीवन भर के लिये मान्य कर दिया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • इस निर्णय के माध्यम से वे उम्मीदवार जिन्होंने CTET और TET परीक्षा उत्तीर्ण की है, वे अपने पूरे जीवनकाल में शिक्षक भर्ती के लिये आवेदन कर सकते हैं।
  • ध्यातव्य है कि इससे पूर्व इन प्रमाणपत्रों की वैधता जारी होने की तारीख से 7 वर्ष तक मान्य थी।
  •  राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा अभी तक यह घोषणा नहीं की गई है कि यह निर्णय कब से लागू होगा। NCTE का यह

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE)

  • एक सांविधिक निकाय के रूप में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) 17 अगस्त, 1995 को अस्तित्त्व में आई थी।
  •  इस परिषद का मूल उद्देश्य समूचे भारत में अध्यापक शिक्षा प्रणाली का नियोजन और समन्वित विकास करना, अध्यापक शिक्षा प्रणाली में मानदंडों और मानको का विनियमन तथा उन्हें समुचित रूप से बनाए रखना है।

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चर्चित स्थान

बिल्‍ली के 2200 वर्ष पुराने विशाल रेखाचित्र की खोज

चर्चा में क्यों?

  • दक्षिण अमेरिकी देश पेरू के रेगिस्‍तान में पुरात्‍वविदों को एक 2200 साल पुरानी बिल्‍ली का विशाल रेखाचित्र (Geoglyphs) मिला है।
  • इसकी खोज करने वाले पुरातत्‍वविदों के अनुसार पेरू के नाज्‍का रेगिस्‍तान में स्थित एक पहाड़ी पर इस बिल्‍ली की 121 फुट लंबी आकृति बनाई गई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • आकृति की खोज अलास्‍का से आर्जेंटीना जाने वाले एक हाइवे के किनारे स्थित पहाड़ी पर बनी हुई है।
  • इसके रेखाचित्र 12 से 15 इंच मोटे हैं। यह पूरी आकृति करीब 121 फुट लंबी है।
  • पुरातत्वविदों के अनुसार बिल्‍ली इस आकृति को 200 ईसापूर्व में बनाया गया था।
  • पेरु में इस तरह की विशाल रेखाकृतियों की खोज पहले भी हो चुकी है। इन रेखाचित्रों को नाज़्का लाइन्स (Nazca Lines) कहा जाता है।
  • पेरू में ये रेखाचित्र सदियों से संरक्षित हैं और इसे नाज़्का संस्‍कृति की विरासत माना जाता है।
  • नाज़्का लाइन्स (Nazca Lines) यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थल है। यह विशाल जानवरों, पौधों एवं काल्पनिक प्राणियों के प्राचीन चित्रों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
  • अब तक यहां पर 300 से अधिक कई विशाल आकृतियां मिल चुकी हैं और इसी कड़ी में अब 2200 साल पुरानी बिल्‍ली के आकृति की खोज हुई है।

 बिल्‍ली की इस

  • विश्व विरासत स्थल हैं नाज़्का लाइन्स
  • पेरू के नाज्‍का लाइंस यूनेस्‍को के विश्‍व विरासत स्‍थल में आते हैं और इसकी पहली बार खोज 1927 में पुरातत्‍वविदों ने की थी।
  •  इनमें से कई आकृतियां इतनी विशाल हैं कि वे आकाश से भी नजर आती हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि इन आकृतियों को 500 ईसा पूर्व से लेकर 500 ईस्‍वी के बीच बनाया गया था।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि तत्‍कालीन नाज्‍का लोगों का मानना था कि इसे देवता आकाश से देख सकते हैं। उन्‍होंने ईश्‍वर को संदेश देने के लिए यह आकृतियां बनाई।
  • पेरू प्रशांत महासागर के तट पर स्थित है जो तीन तरफ से पांच देशों  उत्तर दिशा में इक्वाडोर, कोलंबिया, पूर्व में ब्राज़ील, दक्षिण-पूर्व में बोलिविया तथा दक्षिण में चिली से और पश्चिम में प्रशांत महासागर से घिरा है।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

ओसीरिस-रेक्स अंतरिक्ष यान

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ओसीरिस-रेक्स अंतरिक्ष यान (OSIRIS-REx) ने क्षुद्रग्रह  बेनू  (Bennu) के नमूने एकत्रित कर लिये हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • वैज्ञानिकों ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यान के ग्रह की चट्टानों को छूने के बाद धूल उड़ी है, जिससे इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि उसने ग्रह के नमूने एकत्रित कर लिए हैं।
  • उल्लेखनीय है कि ओसीरिस-रेक्स अमेरिका का पहला क्षुद्रग्रह सैम्पल रिटर्न मिशन (NASA asteroid-study and sample-return mission) है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अध्ययन के लिये क्षुद्रग्रह से प्राचीन अनछुए नमूनों को इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है।
  • वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अंतरिक्ष यान के लाए गए नमूनों की मदद से 4.5 अरब साल पुराने सौरमंडल की उत्पत्ति के राज खुलेंगे।
  • माना जाता है कि क्षुद्रग्रहों की उत्पत्ति भी सौरमंडल के साथ हुई थी।

क्षुद्रग्रह बेन्नू (Bennu):

  • बेन्नू एक क्षुद्र ग्रह है जिसे ‘1999 RQ36’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के मध्य सूर्य की परिक्रमा करने वाले छोटे-छोटे पिंडों को क्षुद्र ग्रह कहा जाता है।
  • अनियमित आकार वाले ये क्षुद्र ग्रह सूर्य की परिक्रमा दीर्घवृत्तीय कक्षा में करते हैं।

ओसीरिस-रेक्स (OSIRIS-Rex):

  • 8 सितंबर, 2016 को नासा द्वारा फ्लोरिडा के केप केनेवरल एयरफोर्स स्टेशन से अंतरिक्षयान ओसीरिस-रेक्स (Osiris-REx) को एटलस-U रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया।
  • ओसीरिस-रेक्स (Osiris-REx) का पूरा नाम-Origins, Spectral Interpretation, Resource Identification, Security, Regolith Explorer है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

10 सुरंगों का निर्माण करने की योजना

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार लद्दाख और कश्मीर केऊंचाई वाले क्षेत्रों में 100 किलोमीटर से अधिक की कुल 10 सुरंगों का निर्माण करने की योजना बना रही है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ये सुरंगें पूरे वर्ष सेना की सुचारू आवाजाही में मदद करेंगी।
  • सीमा सड़क संगठन (BRO) ने लद्दाख और कश्मीर के लिए सभी मौसम में कनेक्टिविटी बढ़ाने और दोनों क्षेत्रों में आगे के क्षेत्रों के लिए आठ सुरंगों का प्रस्ताव दिया है।

कहां-कहां बनेंगी सुरंगें?

  • सात किमी लम्बा खारदुंग ला टनल है, जो लेह को नुब्रा घाटी से जोड़ता है, यह लद्दाख का एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां भारत की सीमा चीन और पाकिस्तान से मिलती हैं।
  • दूसरी सुरंग आठ किमी लंबी होगी जो लद्दाख में कारू को टंगस्टे से जोड़ेगी।
  •  लद्दाख से साल भर की कनेक्टिविटी के लिए, निम्मू-दारचा-पदम रोड पर एक और सुरंग (शंकु ला पास के माध्यम से) बन रही है।
  • श्रीनगर को कारगिल, द्रास और लेह से जोड़े रखने के लिए 11,500 फीट ज़ोजिला दर्रे से 14 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण शुरू हो गया है।
  • एक और प्रस्तावित सुरंग, 17,800 फीट की ऊंचाई पर, पूर्वी लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) और डेपसांग मैदान को वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।
  • डीबीओ को पूरे साल 100 किमी वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित करने के लिए सेसर ला में 10 किमी लंबी सुरंग की आवश्यकता है।
  • डीबीओ और डेपसांग ऐसे क्षेत्र हैं जहां चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ मौजूदा तनाव के बीच एक बड़ा बिल्ड-अप हुआ है जो मई की शुरुआत में शुरू हुआ था।
  • सुरंग बनने के बाद, सेसर-ब्रेंगसा से मुर्गो के बीच 25 किमी की दूरी को 10 किमी तक कम किया जाएगा। इसका काम शुरू हो गया है और 6-7 किमी तक सड़क बन गई है।
  • मनाली-लेह राजमार्ग पर नियोजित अन्य सुरंगों में मनाली-सरचू रोड पर 16,000 फीट बारलाचा दर्रा में 13.7 किमी सुरंग, 16,000 फीट की ऊंचाई पर 14.7 किमी लंबी सुरंग लाचुंग दर्रा और 17,480 फीट की ऊंचई पर तंगलंग पास में 7.37 किलोमीटर लंबी सुरंग है।
  • इस बीच, कश्मीर के गुरेज़ से कनेक्टिविटी के लिए 11,672 फीट ऊंचे रज्जन दर्रे पर 18 किलोमीटर लंबी सुरंग की आवश्यकता है, और 10,269 फीट की ऊंचाई पर साधना दर्रा में 6 किमी लंबी सुरंग तांगधर को सभी मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए कार्य में है।

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