Daily Current Affairs 23 October 2020

कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
थार रेगिस्तान में 1,72,000 साल पहले बहने वाली नदी की खोज
चर्चा में क्यों?
1,72,000 साल पहले राजस्थान के बीकानेर के पास थार रेगिस्तान के बीचोंबीच से गुजरने वाली नदी का प्रमाण मिला है।
महत्वपूर्ण बिंदु
शोधकर्ताओं के अमुसार अब विलुप्त हो चुकी यह नदी उस वक्त इलाके के लोगों की जीवनरेखा होती होगी।
जर्नल क्वाटर्नरी साइंस रिव्यूज (Quaternary Science Reviews) में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि हजारों साल पहले यह नदी नाल कैरी में बहा करती थी।
नदी की खोज जर्मनी के ‘द मैक्स प्लांक इंस्टिट्यूट (The Max Planck Institute) ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री’, तमिलनाडु की अन्ना यूनिवर्सिटी और कोलकाता की IISER ने की है।
इनका कहना है कि पाषाण युग में इसी नदी के कारण इलाके में मनुष्यों की आबादी बसी होगी।
शोध में मिले साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि 1 लाख 72 हजार साल पहले बिकानेर के पास से जो नदी बहती थी, उसका प्रवाह स्थल अभी की नदी से 200 किमी दूर था।
शोधकर्ताओं ने कहा कि अति-प्राचीन नदी की प्रमाण मिलने से थार रेगिस्तान में मौजूदा नदियों के उद्गम का पता चलता है। साथ ही, इससे सूख चुकी घग्गर-हकरा नदी के बारे में भी जानकारी मिलती है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि उपग्रहों से मिली तस्वीरों से थार रेगिस्तान से गुजरने वाली नदियों का घने नेटवर्क का पता चलता है।
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योजना/परियोजना
“लाइफ इन मिनिएचर” परियोजना
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने 22 अक्टूबर 2020 को वर्चुअल तरी​के से “लाइफ इन मिनिएचर” परियोजना की आज शुरुआत की।
महत्वपूर्ण बिंदु
यह परियोजना संस्कृति मंत्रालय के नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय और गूगल आर्ट्स एंड कल्चर की संयुक्त परियोजना है।
“लाइफ इन मिनिएचर” नामक एक नयी परियोजना में दुनिया भर के लोग गूगल आर्ट्स एंड कल्चर पर आज से नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के कई सौ लघु चित्रों को देख सकेंगे।
परियोजना में मशीन लर्निंग, संवर्धित वास्तविकता और उच्च परिभाषा रोबोट कैमरों के साथ डिजिटलीकरण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर जादुई तरीके से कला के इन विशेष कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा।
गूगल आर्ट्स एंड कल्चर ऐप पर ऑनलाइन दर्शक पारंपरिक भारतीय वास्तुकला के साथ डिज़ाइन की गई पहली ऑगमेंटेड रियलिटी-संचालित आर्ट गैलरी का अनुभव कर सकते हैं।
प्रदर्शित की गई कलाकृतियां मानवीय संबंधों के पांच सार्वभौमिक विषयों प्रकृति, प्रेम, उत्सव, विश्वास और शक्ति के साथ मानव संबंधों के साथ प्रस्तुत की गई है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अन्तर्गत आने वाला नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय देश का एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान है। वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय में भारतीय और विदेशी मूल दोनों की 2,00,000 पुरातन और कला वस्तुएं हैं जो भारतीय और विदेशी दोनों मूल की सांस्कृतिक विरासत को 5,000 से अधिक वर्षों से कवर करता है।
गूगल आर्ट्स एंड कल्चर
एक क्लिक पर गूगल आर्ट्स एंड कल्चर पर 2,000 से अधिक संग्रहालयों का संग्रह देख सकते हैं।
यह कला, इतिहास और दुनिया के अजूबों का पता लगाने का एक शानदार तरीका है। गूगल आर्ट्स एंड कल्चर ऐप आईओएस और एन्ड्रॉइड पर ऑनलाइन मुफ्त उपलब्ध है।
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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य
आईएफएससीए विशेषज्ञ समिति की दूसरी अंतरिम रिपोर्ट
चर्चा में क्यों?
आईएफएससी में अंतर्राष्ट्रीय खुदरा व्यापार विकास पर इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) विशेषज्ञ समिति ने अपनी दूसरी अंतरिम रिपोर्ट आईएफएससीए के अध्यक्ष को सौंप दी है।
महत्वपूर्ण बिंदु
प्रदीप शाह की अध्यक्षता वाली इस अंतरिम रिपोर्ट में आईएफएससी में अंतर्राष्ट्रीय खुदरा कारोबार के तेज एवं कुशल विकास के उद्देश्य से कई सुझाव दिए गए हैं।
साथ ही यह रिपोर्ट आईएफएससी में अंतर्राष्ट्रीय बीमा गतिविधियों के विकास के लिए सिफारिशों पर ध्यान केंद्रित करती है।
यह रिपोर्ट 11 सितंबर 2020 को सौंपी गई पहली अंतरिम रिपोर्ट के अनुरूप है जिसमें बैंकिंग से संबंधित प्रस्तावों को शामिल किया गया था।
आईएफएससीए द्वारा विशेषज्ञ समिति का गठन इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में अंतर्राष्ट्रीय खुदरा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सिफारिशों के अलावा आईएफएससी को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के लिए आकर्षक बनाने के लिए संभावित रणनीतियां तैयार करने, आईएफएससी में अंतर्राष्ट्रीय खुदरा व्यापार के भविष्य के विकास के लिए एक रूपरेखा तैयार करने और आईएफएससी के विकास के लिए महत्वपूर्ण अन्य मुद्दों की भी जांच एवं अनुशंसा करने के लिए किया गया है।
इस अंतरिम रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें गिफ्ट आईएफएससी को जीवन, स्वास्थ्य एवं गैर-जीवन बीमा कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाने से संबंधित हैं।
समिति का मानना है कि आईएफएससी भारत के लिए आर्थिक विकास का एक इंजन बन सकता है। बीमा क्षेत्र के लिए वैश्विक अवसर काफी अधिक है।
भारतीय बीमा क्षेत्र का प्रदर्शन अन्‍य विकसित एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कमजोर है। बीमा की पैठ और घनत्व जो बीमा उद्योग के प्रदर्शन के प्रमुख संकेतक हैं, भारत में विशेष रूप से कम हैं।
गिफ्ट आईएफएससी बीमा कंपनियों को वहां अपना कारोबार स्‍थापित करने के लिए कम लागत एवं कम कराधान वाले क्षेत्राधिकार प्रदान करने का वादा करता है।
क्या है इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC)?
भारत सरकार ने भारत के आईएफएससी में वित्‍तीय सेवा बाजार को विकसित एवं विनियमित करने के उद्देश्‍य से इस वर्ष के आरंभ में आईएफएससीए का गठन किया था और इंजेती श्रीनिवास को उसका चेयरपर्सन नियुक्‍त किया था।
आईएफएससी में भारत के विदेशी कारोबार को चैनलाइज करने और इसे भारत केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के लिए प्रवेश द्वार बनाने के अलावा इसका उद्देश्य लंदन, हॉन्‍ग कॉन्‍ग, सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के लिए इसे एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
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औद्योगिक श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई की नई श्रृंखला जारी
चर्चा में क्यों?
हाल ही में औद्योगिक श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई की नई श्रृंखला (CPI-IW) जारी की गई है।
महत्वपूर्ण बिंदु
नई श्रृखला में आधार वर्ष को संशोधित कर 2016 कर दिया गया है। यह अब तक 2001 था।
औद्योगिक श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का नया आधार लक्षित आबादी के ताजा उपभोग की प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है और यह श्रमिकों के हितों के अनुकूल साबित होगा।
श्रम और रोजगार मंत्रालय के एक संबद्ध कार्यालय, श्रम ब्यूरो ने इस सूचकांक को संकलित और जारी किया है।
नई श्रृंखला, मौजूदा श्रृंखला आधार 2001=100 को आधार 2016 = 100 के साथ प्रतिस्थापित करेगी।
इस संशोधन से पहले, श्रम ब्यूरो की स्थापना के बाद से श्रृंखला को 1944 से 1949; 1949 से 1960, 1960 से 1982 और 1982 से 2001 तक संशोधित किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), सूचकांक संशोधन समिति (IRC) और राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग (NSC) की सिफारिशों के अनुसार, मूल्य सूचकांक संख्याओं के आधार वर्ष को नियमित अंतराल पर संशोधित किया जाना चाहिए, जो कि होने वाले परिवर्तनों को प्रतिबिंबित करने के लिए 10 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए।
सीपीआई-आईडब्ल्यू को अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं और आईएलओ के दिशा-निर्देशों के अनुसार संकलित किया गया है।
सीपीआई-आईडब्ल्यू यह मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के महंगाई भत्ते को निर्धारित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
खुदरा कीमतों में मुद्रास्फीति को मापने के अलावा नियोजित रोजगार में न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण और संशोधन में भी इसका उपयोग किया जाता है।

सीपीआई-आईडब्ल्यू (2016 = 100) की नई श्रृंखला के तहत किए गए कुछ महत्वपूर्ण सुधार
2016 श्रृंखला में कुल 88 केंद्रों को शामिल किया गया है, जबकि 2001 श्रृंखला में केवल 78 केंद्र ही शामिल थे।
कामकाजी वर्ग की पारिवारिक आय और व्यय सर्वे के संचालन के लिए नमूना आकार, जिसके आधार पर भारण आरेख प्राप्त किए गए हैं, 2001 श्रृंखला में 41,040 से नई शृंखला में 48,384 परिवारों तक बढ़ाया गया था।
खुदरा श्रृंखला के आंकड़ों के संग्रह के लिए चयनित बाजारों की संख्या भी 2016 की श्रृंखला के तहत 317 बाजारों तक बढ़ा दी गई है, जबकि 2001 श्रृंखला में 289 बाजारों को ही शामिल किया गया था।
सूचकांक पेटी में सीधे रखे गए आइटमों की संख्या बढ़कर 463 आइटम हो गई है, जबकि 2001 की श्रृंखला में 392 आइटम ही शामिल थे।
2016 श्रृंखला के तहत राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 28 हो गई जबकि 2001 शृंखला में यह संख्या 25 ही थी।
नई श्रृंखला में, कीमतों और लागत के जीवन स्तर (एसपीसीएल) के तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) के निर्देशानुसार, ज्यामितीय माध्य आधारित कार्यप्रणाली (जीएम ऑफ प्राइस रिलेटिव्स) का उपयोग सूचकांकों के संकलन के लिए किया जाता है, जबकि 2001 की श्रृंखला में अंकगणितीय माध्य का उपयोग किया जाता था।
पहले की श्रृंखला (1982 और 2001) की तुलना में नई श्रृंखला के तहत समूह स्तर का महत्व बदल गया है। खाद्य और पेय पदार्थों के प्रभाव समय के साथ कम हो गया है जबकि विविध समूह (स्वास्थ्य; शिक्षा और मनोरंजन; परिवहन और संचार; व्यक्तिगत देखभाल और प्रभाव; घरेलू सामान और सेवाएं आदि) के प्रभाव में 2016 श्रृंखला में महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि हुई है। हाउसिंग ग्रुप के प्रभाव को भी समय के साथ बढ़ती हिस्सेदारी की सूचना है।
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भारत एवं विश्व
भारत और नाइजीरिया के बीच बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में सहयोग पर एमओयू
चर्चा में क्यों?
कैबिनेट ने भारत और नाइजीरिया के बीच शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और इसके उपयोग में सहयोग पर हुए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी है।
महत्वपूर्ण बिंदु
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और इसके उपयोग में सहयोग पर भारत और नाइजीरिया के बीच हुए समझौता ज्ञापन(MOU) को स्वीकृति दी है।
एमओयू पर जून, 2020 में बेंगलुरु में भारत के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अगस्त 13, 2020 को अबूजा में नाइजीरिया के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास एजेंसी (NASRDA) ने हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों को सहयोग के संभावित हित क्षेत्रों जैसे पृथ्वी की सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग); सैटलाइट संचार और सैटलाइट आधारित नेविगेशन; अंतरिक्ष विज्ञान एवं ग्रहों की खोज; अंतरिक्ष यान, लॉन्च व्हीकल, अंतरिक्ष प्रणालियों और जमीनी प्रणालियों का उपयोग; भू-स्थानिक उपकरण और तकनीक सहित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोग; और सहयोग के अन्य क्षेत्रों को तय करने के लिए सक्षम बनाएगा।
इस समझौता ज्ञापन के तहत एक संयुक्त कार्य दल का गठन किया जायेगा, जिसमें डीओएस / इसरो और नाइजीरिया के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास एजेंसी (एनएएसआरडीए) के सदस्य शामिल होंगे। संयुक्त कार्य दल समय-सीमा और कार्यान्वयन के साधनों सहित कार्य योजना को अंतिम रूप देगा।
यह एमओयू पृथ्वी की सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग); सैटलाइट संचार; सैटलाइट नेविगेशन; अंतरिक्ष विज्ञान और बाहरी अंतरिक्ष की खोज के क्षेत्र में नई अनुसंधान गतिविधियों और अनुप्रयोग संभावनाओं का पता लगाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
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ICAI और मलेशिया के MICPA के बीच परस्‍पर मान्‍यता समझौते को मंजूरी
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) और मलेशियन इं‍स्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक एकाउंटेंट्स (MICPA) के बीच परस्‍पर मान्‍यता समझौते को मंजूरी दी गई।
महत्वपूर्ण बिंदु
मान्‍यता समझौते से इन दोनों संस्‍थानों में से किसी भी एक के योग्‍य चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स सदस्‍यों को अपनी मौजूदा एकाउंटेंसी योग्‍यता के समुचित अंकों के आधार पर दूसरे इं‍स्‍टीट्यूट में दाखिला लेने का मौका मिलेगा।
समझौते के तहत आईसीएआई और एमआईसीपीए एक दूसरे की योग्‍यता को मान्‍यता देने के लिए परस्‍पर समझौता करेंगे।
वे एक दूसरे के समुचित तौर पर योग्‍य सदस्‍यों को परीक्षा के विशिष्‍ट मॉड्यूल और तय आधार पर अपने यहां दाखिला देंगे।
इस प्रस्‍तावित समझौता ज्ञापन में इन दोनों व्‍यावसायिक संस्‍थानों के उन चार्टेर्ड एकाउंटेंट सदस्‍यों को शामिल किया जाएगा, जिन्‍होंने शिक्षा, परीक्षा, नैतिक व्‍यवहार और व्‍यावहारिक अभ्‍यास समेत इन दोनों संस्‍थानों की सदस्‍यता अनिवार्यताओं को पूर्ण कर लिया है।
क्या होगा प्रभाव?
आईसीएआई एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थित संस्‍थानों के साथ द्विपक्षीय सहयोग स्‍थापित करने की मंशा रखता है इसलिए वह एमआईसीपीए के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर करना चाहता है।
इस वैश्विक माहौल में एकाउंटेंसी के पेशे के सामने मौजूद नई चुनौतियों का मुकाबला करने के अवसर का लाभ उठाकर ये दोनों एकाउंटेंसी संस्‍थान नेतृत्‍वकारी भूमिका निभा सकते हैं।
इन दोनों नियामक संस्‍थानों के बीच औपचारिक समझौते से दोनों ओर के एकाउंटेंसी समुदाय के बीच बेहतर सामंजस्‍य और व्‍यापक स्‍वीकार्यता में वृद्धि होगी तथा अधिक व्‍यावसायिक अवसरों के विकास का रास्‍ता प्रशस्‍त होगा।
ICAI के बारे में
इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया एक वैधानिक निकाय है, जिसे ‘द चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स एक्‍ट 1949’ के तहत स्‍थापित किया गया था।
इसका कार्य भारत में चार्टेर्ड एकाउंटेंसी के व्‍यवसाय का नियमन करना है।
मलेशियन इं‍स्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक एकाउंटेंट्स कंपनी, मलेशिया के कंपनीज एक्‍ट 1965 के तहत काम करती है।
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ICAI और CPA, पापुआ न्यू गिनी के बीच हुए एमओयू को स्वीकृति
चर्चा में क्यों?
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पापुआ न्यू गिनी में क्षमता निर्माण और अकाउंटिंग, फाइनेंशियल तथा ऑडिट नॉलेज बेस को मजबूत बनाने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) और सर्टिफाइड प्रैक्टिसिंग एकाउंटेंट्स, पापुआ न्यू गिनी (CPA PNG) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MPU) को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
महत्वपूर्ण बिंदु
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) और सर्टिफाइड प्रैक्टिसिंग एकाउंटेंट्स पापुआ न्यू गिनी निम्नलिखित क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे :-
पीएनजी में तकनीकी कार्यक्रमों, सेमिनारों और सम्मेलनों का आयोजन और संचालन,
कंपनी प्रशासन, तकनीक अनुसंधान और परामर्श, गुणवत्ता आश्वासन, फॉरेंसिंग एकाउंटिंग, कॉन्टिन्युइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट (सीपीडी) के क्षेत्रों और पारस्परिक भागीदारी वाले अन्य विषयों में संभावित सहयोग और भागीदारी कायम करना।
भारत और पीएनजी में लेखा व्यवसाय से संबंधित उपलब्ध गैर प्रतिबंधित जानकारियों को साझा करना।
विद्यार्थी और संकाय आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू करना।
पीएनजी में लेखा, वित्त और ऑडिट के क्षेत्र में अल्पकालिक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पेशकश करना।
क्या होगा प्रभाव?
आईसीएआई के पीएनजी चैप्टर सहित ऑस्ट्रेलेशिया-ओसीनिया क्षेत्र में सदस्यों की संख्या 3,000 से भी ज्यादा है। इस एमओयू के माध्यम से सीपीए, पीएनजी को मिलने वाली सहायता से क्षेत्र में मौजूद आईसीएआई के सदस्यों को फायदा होगा और आईसीएआई के सदस्यों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
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समारोह सम्मेलन
‘आजाद हिंद सरकार गठन का 77 वां वर्ष समारोह
चर्चा में क्यों?
21 अक्टूबर 2020 को दिल्ली के लाल किले में आजाद हिंद सरकार के गठन की 77 वीं वर्षगांठ के गौरवपूर्ण अवसर पर समारोह आयोजित किया गया।
महत्वपूर्ण बिंदु
इसी दिन वर्ष 1943 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर में आज़ाद हिंद (जिसे अरजी हुकुमत-ए-आज़ाद हिंद के रूप में भी जाना जाता है) के रूप में अनंतिम सरकार की स्थापना की घोषणा की थी।
इस दौरान नेता जी ने स्वयं को आज़ाद हिंद सरकार का प्रधानमंत्री और युद्ध मंत्री घोषित किया था।
सिंगापुर में गठित अंतरिम सरकार ने सुभाषचंद्र बोस को न केवल जापान के साथ समान स्तर पर बातचीत करने में सक्षम बनाया, बल्कि पूर्वी एशिया में भारतीयों को आज़ाद हिंद फौज या भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) में शामिल होने और समर्थन देने के लिये भी सुविधा प्रदान की।
इस तरह आज़ाद हिंद सरकार और नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने विदेश में भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी और द्वितीय विश्व युद्ध के प्रकोप को भारत की स्वतंत्रता के लिये एक सुविधाजनक अवसर के रूप में देखा।
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रक्षा विकास एवं अनुसंधान
आईएनएस कवरत्ती
चर्चा में क्यों?
स्वदेशी पनडुब्बी रोधी प्रणाली से लैस युद्धपोत (Anti-submarine warship) ”आईएनएस कवरत्ती” 21 अक्टूबर 2020 को विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में कमीशन्ड किया गया।
महत्वपूर्ण बिंदु
स्वदेश निर्मित पनडुब्बी रोधी प्रणाली (ASW) से लैस “आईएनएस कवरत्ती” को प्रोजेक्ट 28 (कमोर्टा क्लास) के तहत निर्मित किया गया है।
इस युद्ध पोत को भारतीय नौसेना के संगठन डायरेक्टरेट ऑफ नेवल डिजाइन (DND) ने डिजाइन किया है और इसे कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने बनाया है।
इसने भारतीय नौसेना, जीआरएसई और देश की बढ़ती क्षमता को स्वदेशीकरण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने में मदद किया है।
इस पोत के निर्माण में 90 फीसदी देसी उपकरण लगे हैं और इसके सुपरस्ट्रक्चर के लिए कार्बन कंपोजिट का उपयोग किया गया है। आईएनएस कवरत्ती में अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है और इसमें ऐसे सेंसर लगे हैं जो पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सक्षम है। इसके अलावा, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता के साथ ही पोत विश्वसनीय आत्मरक्षा क्षमता और लंबी दूरी के संचालन में सक्षम है।
आईएनएस कवरत्ती का नाम 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तानी गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले युद्ध में अपने अभियानों के जरिये अहम भूमिका निभाने वाले युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती के नाम पर मिला है।
भूतपूर्व आईएनएस कावारत्ती अरनल क्लास मिसाइल युद्धपोत था।
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स्वास्थ्य एवं पोषण
एनीमिया मुक्त भारत सूचकांक
चर्चा में क्यों?
हाल ही में जारी एनीमिया मुक्त भारत सूचकांक में हरियाणा को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है।
महत्वपूर्ण बिंदु
पूरे भारत में एनीमिया की रोकथाम के लिये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और यूनिसेफ ने एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरू की थी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एनीमिया मुक्त भारत सूचकांक जारी किया गया जिसमें हरियाणा 46.7 सूचकांक के साथ शीर्ष स्थान पर है।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा देश के उन 11 राज्यों में से एक है जिन्होंने वर्ष 2020 से पूर्व ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य प्राप्त को कर लिया है।
एनीमिया एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमे शारीरिक रक्त की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये आवश्यक लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनकी ऑक्सीजन वहन क्षमता अपर्याप्त होती है।
यह क्षमता आयु, लिंग, ऊँचाइयों, धूम्रपान और गर्भावस्था की स्थितियों से परिवर्तित होती रहती है। लौह (Iron) की कमी इसका सबसे सामान्य लक्षण है।
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भारत में राष्‍ट्रीय कृमिहरण दिवस का प्रामाणिक प्रभाव
चर्चा में क्यों?
14 राज्‍यों ने कृमि की मौजूदगी में कमी दर्ज की; 9 ने पर्याप्‍त कमी दर्शाई
महत्वपूर्ण बिंदु
सॉइल-ट्रांसमिटेड हेल्मनिथेसिस (Soil-Transmitted Helminthiases- STH)), जिसे आंतों के परजीवी कीड़ा संक्रमण के रूप में भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है।
यह ज्यादातर मलिन बस्तियों में पाई जाती है। ये बच्चों के शारीरिक विकास और स्‍वास्‍थ्‍य पर हानिकारक प्रभाव डालती है और एनीमिया और कुपोषण का कारण बन सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन नियमित अंतराल पर कृमिहरण (डीवर्मिंग) की सलाह देता है, ताकि मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्‍चों और किशोरों के शरीर से कृमि संक्रमण को समाप्त किया जा सके तथा उन्‍हें बेहतर पोषण और स्‍वस्‍थ जीवन उपलब्‍ध कराया जा सके।
स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के इस महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय कृमिहरण दिवस (नेशनल डीवर्मिंग डे) कार्यक्रम को 2015 में शुरू किया गया था।
यह कार्यक्रम स्‍कूलों और आंगनवाडि़यों के जरिए द्विवर्षीय एकल दिवस कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुमोदित एल्बेंडाजोल टैबलेट (Albendazole Tablet) का उपयोग विश्व स्तर पर मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में बच्चों और किशोरों में आंतों के कीड़े के इलाज के लिए किया जाता है।
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राज्य परिदृश्य: असम
देश का पहला मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्योग (MSME) मंत्री श्री नितिन गडकरी ने हाल ही में असम के जोगीघोपा में देश के पहले मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क की आधारशिला रखी।
693.97 करोड़ रुपये की लागत वाले इस पार्क से लोगों को सीधी हवाई, सड़क, रेल और जलमार्ग कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका विकास भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘भारतमाला परियोजना’ के तहत किया जाएगा।
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