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Daily Current Affairs 23 June 2021

राज्य परिदृश्य

दिल्ली:मुख्यमंत्री COVID-19 परिवार आर्थिक सहायता योजना

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली सरकार ने हाल ही में COVID-19 के कारण अपने सदस्य को खोने वाले परिवारों को वित्तीय सहायता देने के लिए एक योजना अधिसूचित की।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • समाज कल्याण विभाग की नोटिफिकेशन के अनुसार, मुख्यमंत्री COVID-19 परिवार आर्थिक सहायता योजना के तहत, COVID-19 के कारण एक सदस्य को खोने वाले हर एक परिवार को 50,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी।
  • इसके अलावा, महामारी के कारण एकमात्र कमाने वाले को खो देने वाले परिवारों को हर महीने 2,500 रुपए पेंशन भी दी जाएगी।
  • इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 18 मई को की थी। उन्होंने माता-पिता में से किसी एक या दोनों को खोने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा और वित्तीय सहायता देने का भी वादा किया था।
  • सरकार पीड़ित परिवार के किसी एक सदस्य को सिविल डिफेंस वालंटियर बनाने पर भी विचार कर रही है। इसके अलावा राज्य मौजूदा नीति के अनुसार आश्रित बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा की जरूरतों को भी पूरा करेगा।
  • योजना के तहत अनुग्रह राशि के लिए आवेदन करने के लिए कोई उम्र का कोई मानदंड नहीं है। नोटिफिकेशन के अनुसार मृतक और आश्रित दोनों दिल्ली से होने चाहिए और उनकी मौत COVID-19 से ही हुई है ये भी प्रमाणित किया जाना चाहिए।

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भारत एवं विश्व

भारत तथा सेंट विंसेंट और द ग्रेनेडाइंस के बीच समझौता

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत तथा सेंट विंसेंट और द ग्रेनेडाइंस के बीच करों के संबंध में सूचना के आदान-प्रदान और संग्रह में सहायता के लिएएक समझौते को मंजूरी दी है।

समझौते का विवरण:

  1. i) यह भारत तथा सेंट विंसेंट और द ग्रेनेडाइंस के बीच एक नया समझौता है। अतीत में, दोनों देशों के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था।
  2. ii) समझौते में मुख्य रूप से दोनों देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की सुविधा और कर-संग्रह में एक दूसरे को सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है।

iii) समझौते में विदेश में कर जांच के प्रावधान भी शामिल हैं, जिसके तहत एक देश, दूसरे देश के प्रतिनिधियों को व्यक्तियों का साक्षात्कार करने और कर उद्देश्यों के लिए रिकॉर्ड की जांच करने के लिएअपने क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति दे सकता है। (अपने घरेलू कानूनों की स्वीकार्य सीमा तक)

समझौते का प्रभाव:

  • भारत तथा सेंट विंसेंट और द ग्रेनेडाइंस के बीच समझौते से दोनों देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।
  • इन सूचनाओं में बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले कानूनी और लाभकारी स्वामित्व के बारे में जानकारी भी शामिल होंगी।
  • यह दोनों देशों के बीच कर-दावों के संग्रह मेंभी सुविधा प्रदान करेगा। इस प्रकार, यह विदेश में कर-चोरी और कर से बचने के तौर-तरीकों, जिससे काला धन जमा होता है, से लड़ने की भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइन्स

  • सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइन्स अनेक द्वीपों में फैला एंग्लो-कैरेबियन देश है।
  • यह कैरिबियन सागर में पूर्वी सीमा के दक्षिणी छोर पर वेस्टइंडीज में स्थित है,
  • यहां कैरिबियन सागर अटलांटिक महासागर से मिलता है।
  • इस संप्रभु राज्य को अक्सर सेंट विंसेंट के नाम से भी जाना जाता है।

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भारत और फिजी में समझौता

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और फिजी के कृषि, जलमार्ग व पर्यावरण मंत्री डॉ. महेंद्र रेड्डी ने हाल ही में एक वर्चुअल बैठक में भारत और फिजी के बीच कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह एमओयू डेयरी उद्योग विकास, चावल उद्योग विकास, रूट क्रॉप विविधीकरण, जल संसाधन प्रबंधन, नारियल उद्योग विकास, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग विकास, कृषि यंत्रीकरण, बागवानी उद्योग विकास, कृषि अनुसंधान, पशुपालन, कीट एवं रोग, जुताई, मूल्य संवर्धन एवं विपणन, कटाई बाद व मिलिंग, प्रजनन और कृषि विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग उपलब्ध कराता है।
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार और कृषि मंत्रालय, फिजी गणराज्य की सरकार संबंधित पक्षों की तरफ से कार्यकारी एजेंसियां रहेंगी।
  • एमओयू के अंतर्गत, प्रक्रियाओं और योजना तैयार करने व अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए सहयोग कार्यक्रम सुझाने को एक संयुक्त कार्यकारी समूह की स्थापना की जाएगी। कार्यकारी समूह हर दो साल में एक बार बारी-बारी से भारत और फिजी में अपनी बैठकों का आयोजन करेगा।
  • एमओयू हस्ताक्षर की तारीख से पांच साल की अवधि के लिए वैध रहेगा और इस दौरान किसी भी तरह के बदलाव के लिए दोनों ही पक्षों से लिखित में मंजूरी लेनी होगी।
  • फिजी दक्षिण प्रशांत महासागर में एक देश और द्वीपसमूह है। यह न्यूज़ीलैण्ड के आकलैण्ड से करीब 2000 किमी. उत्तर में स्थित है। इसके नज़दीकी पड़ोसी राष्ट्रों में पश्चिम में वनुआत, पूर्व में टोंगा और उत्तर में तुवालु हैं।

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समारोह/सम्मेलन

ब्रिक्स ग्रीन हाइड्रोजन शिखर सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

  • विद्युत मंत्रालय के तहत भारत की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने ग्रीन हाइड्रोजन पर दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ग्रीन हाइड्रोजन वर्तमान समय में सबसे लोकप्रिय तथा मांग वाले क्षेत्रों में से एक तथा ऊर्जा की अगली वाहक मानी जाती है।
  • इस ऑनलाइन कार्यक्रम में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स देशों) के अग्रणी विशेषज्ञों ने भाग लिया जिन्होंने इस विषय पर तथा ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में उनके देशों में हो रहे नवीनतम घटनाक्रमों पर अपनी अंतर्दृष्टि और प्रोफेशनल विचार साझा किए।

क्या है ग्रीन हाइड्रोजन?

  • नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रोलिसिस के इस्तेमाल से पानी को विभाजित कर हरित हाइड्रोजन को तैयार किया जाता है और यह मीथेन से उत्पन्न होने वाले ग्रे हाइड्रोजन से अलग है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जाता है। दरअसल कई कंपनियां, निवेशक, सरकारें और पर्यावरणवादी मानते हैं कि यह ऐसा ऊर्जा स्रोत है जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को ख़त्म करने में मददगार होगा और दुनिया को और गर्म होने से बचाएगा।

चुनौतियां क्या हैं?

  • बड़े पैमाने पर इसे अपनाने में कई रोड़े हैं। आलोचकों का तर्क है कि स्वच्छ ऊर्जा कहलाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन को अक्षय ऊर्जा स्रोतों से भारी पैमाने पर बिजली की ज़रूरत होगी।
  • पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अणुओं में तोड़ने वाले इलेक्ट्रोलिसिस प्लांट को चलाने के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोतों का बड़े पैमाने पर विस्तार करना होगा।
  • यह प्राकृतिक तौर पर नहीं मिलता इसलिए इसे अलग करने में ऊर्जा की ज़रूरत होती है। इसके भंडारण के लिए वायुमंडल के दबाव से 700 गुना ज़्यादा दबाव चाहिए। तरल रूप में रखने के लिए इसे- 253 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा करना पड़ता है।
  • फिलहाल हाइड्रोजन उत्पादन का सबसे प्रचलित तरीक़ा प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन अलग करना है। प्राकृतिक गैस को भाप से प्रतिक्रिया कराने पर हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाईऑक्साइड निकलते हैं।
  • मीथेन से हाइड्रोजन बनाने के इस परंपरागत तरीक़े में कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन होता है इसलिए यह जलवायु के लिए अनुकूल नहीं है. इस तरह से बनाए गए हाइड्रोजन को “ग्रे हाइड्रोजन” कहा जाता है।

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कृषि, पर्यावरण एवं जैव विविधता

ओडिशा मगरमच्छों की तीनों प्रजातियों पाईं गईं

चर्चा में क्यों?

  • ओडिशा मगरमच्छों की तीनों प्रजातियों वाला भारत का एकमात्र राज्य बन गया है।

मह्त्वपूर्ण बिंदु

  • ओडिशा भारत का अकेला ऐसा राज्य बन गया है, जहां मगरमच्छों की तीनों प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • महानदी के सातकोसिया में मीठे पानी का घड़ियाल, भीतर कनिका राष्ट्रीय उद्यान में मगर और खारे पानी के मगरमच्छ पाए जाते हैं।
  • 1975 में इसकी नदियों में आने के बाद पहली बार ओडिशा में घड़ियाल (एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति) का प्राकृतिक घोंसला देखा गया है।
  • सतकोसिया रेंज (Satkosia range) के पास बलदामारा क्षेत्र में महानदी नदी में घड़ियाल के लगभग 28 बच्चे देखे गए।
  • मूल घड़ियाल जो ओडिशा में पेश किए गए थे, अब मर चुके हैं। उनकी संख्या के स्वाभाविक रूप से बढ़ने के लिए 40 वर्षों तक प्रतीक्षा करने के बाद, ओडिशा ने महानदी में पिछले तीन वर्षों में 13 और घड़ियाल पेश किए। लेकिन अब केवल आठ जीवित हैं।

घड़ियाल के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

  • घड़ियाल, जिसे गेवियल या मछली खाने वाले मगरमच्छ के रूप में भी जाना जाता है, गेवियालिडे (Gavialidae) परिवार के मगरमच्छ हैं।
  • वे सभी जीवित मगरमच्छों में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मगरमच्छों में से हैं। उन्हें 2007 से IUCN रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • ये संभवतः उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित हुए। शिवालिक पहाड़ियों और नर्मदा नदी घाटी से प्लियोसीन निक्षेपों में जीवाश्म घड़ियाल अवशेषों की खुदाई की गई थी। वे वर्तमान में उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप में नदियों में निवास करते हैं।

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चर्चित व्यक्तित्व

मोंटेक सिंह अहलूवालिया

चर्चा में क्यों?

  • मोंटेक अहलूवालिया विश्व बैंक-आईएमएफ द्वारा गठित ग्रुप के सदस्य नियुक्त किए गए हैं।
  • कोरोना वायरस महामारी और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न संकट के बीच इस समूह का गठन किया गया है।
  • वह सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस (CSEP) में एक प्रतिष्ठित फेलो हैं।
  • इसके साथ ही वह भारत के योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष भी हैं।

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आशीष चांदोरकर

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार ने आशीष चांदोरकर (Aashish Chandorkar) को विश्व व्यापार संगठन (​WTO) के अपने परमानेंट मिशन में अगले तीन साल के लिए ‘काउंसलर’ नियुक्त किया है।
  • ऐसा पहली बार है जब सरकार ने निजी क्षेत्र के किसी गैर सरकारी व्यक्ति को ये जिम्मेदारी सौंपी है।
  • चांदोरकर फिलहाल समाही फाउंडेशन ऑफ पॉलिसी एंड रिसर्च नामक थिंक टैंक के डायरेक्टर हैं, जो बेंगलुरू में है।

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