Daily Current Affairs 22 October 2020

रक्षा प्रतिरक्षा

नाग मिसाइल का अंतिम परीक्षण

चर्चा में क्यों?

  • तीसरी पीढ़ी के टैंकरोधी निर्देशि‍त मिसाइल (ATGM) नाग का आज 22 अक्‍टूबर, 2020 को पोखरण परीक्षण अड्डे पर अंतिम परीक्षण किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • एटीजीएम नाग को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा दिन और रात की  परिस्थितियों में अत्यधिक सुदृढ़ दुश्मन टैंकों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है।
  • जमीन से जमीन पर हमला करने में सक्षम यह मिसाइल 825 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दुश्मन के टैंक पर हमला कर उसे ध्वस्त करने में सक्षम है।
  • मिसाइल का उत्पादन रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जाएगा।
  • इसके लॉन्चर नैमिका का डिजाइन भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने किया है।

 नाग मिसाइल की विशेषताएं

  • नाग मिसाइल सभी मौसम में दुश्मनों के टैंकों को न्यूनतम 500 मीटर और अधिकतम चार किलोमीटर की दूरी से भेदने की क्षमता के साथ विकसित की गई है।
  •  नाग मिसाइस एक तीसरी पीढ़ी का भारत द्वारा स्वदेशीय निर्मित, टैंक भेदी मिसाइल है। यह उन पाँच मिसाइल प्रणालियों में से एक है जो भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत विकसित की गई है।
  •  इस प्रक्षेपास्त्र का विकास 300 करोड़ की लागत से किया गया है।
  •  इसे “दागो और भूल जाओ टैंक रोधी मिसाइल” भी कहा जाता है क्योंकि एक बार इसे दागे जाने के बाद निर्देशित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • इसके हवा से जमीन पर मार करने वाला हैलीना वर्जन भी है। जिसे हेलिकॉप्टर से दागा जाता है।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM)

चर्चा में क्यों?

  • जनवरी 2021 में शुरू होगा राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन का तीसरा चरण (Third Phase of National Supercomputing Mission)।

महत्वपू्र्ण बिंदु

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की घोषणा के अनुसार राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तीसरे चरण की शुरुआत जनवरी 2021 में होगी जो ‘कंप्यूटिंग’ गति को लगभग 45 पेटाफ्लॉप्स ( Petaflops) तक ले जाएगा।
  • इस 4,500 करोड़ रुपये के मिशन में तीन चरणों में देशभर में लगभग 50 सुपरकंप्यूटरों की परिकल्पना की गई है। 
  • एनएसएम के पहले चरण से संबंधित अवसंरचना पहले ही स्थापित हो चुकी है और दूसरे चरण की अवसंरचना का काफी हिस्सा स्थापित हो चुका है।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन

(National Supercomputing Mission-NSM)

  • 25 मार्च, 2015 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) को मंज़ूरी दी थी।
  • इस मिशन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग कार्यान्वित कर रहे हैं तथा इसके लिये प्रगत संगणन विकास केंद्र (C-DAC) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बंगलूरू को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है।
  • मिशन के तहत 70 से अधिक उच्च प्रदर्शन वाले सुपरकंप्यूटरों के माध्यम से एक विशाल सुपरकंप्यूटिंग ग्रिड स्थापित कर देश भर के राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों को सशक्त बनाने की परिकल्पना की गई है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

  • चुनावों में खर्च की सीमा की समीक्षा के लिये समिति

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) ने  उम्मीदवारों द्वारा किये जाने वाले चुनावी खर्च की सीमा से जुड़े मुद्दों का परीक्षण करने के लिये एक समिति का गठन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • समिति का गठन पूर्व भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी  हरीश कुमार तथा महासचिव तथा महानिदेशक (व्यय) उमेश सिन्हा इसके सदस्य होंगे।
  • समिति को चार माह के भीतर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपनी है।
  • उल्लेखनीय है कि कोविड-19 के चलते विधि और न्याय मंत्रालय ने 19 अक्तूबर, 2020 को निर्वाचन अधिनियम 1961 के नियम संख्या 90 में संशोधन अधिसूचित कर वर्तमान खर्चों की सीमा में 10% की वृद्धि  की है।
  • खर्च की सीमा में की गई यह वृद्धि वर्तमान में जारी चुनावों में भी तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
  • इससे पहले 28 फरवरी, 2014 को एक अधिसूचना के माध्यम से चुनावी खर्च की सीमा में वृद्धि की गई थी, जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के संदर्भ में 10 अक्तूबर, 2018 को इसमें संशोधन किया गया था।
  • उल्लेखनीय है कि पिछले 6 वर्षों में चुनावी खर्च की सीमा में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि मतदाताओं की संख्या 834 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2019 में 910 मिलियन और अब 921 मिलियन हो गई है।
  • इसके अलावा लागत मुद्रास्फीति में भी वृद्धि हुई है जो 220 से बढ़कर वर्ष 2019 में 280 और अब 301 के स्तर पर पहुँच गई है।

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योजना/परियोजना

आयुष्मान सहकार योजना

चर्चा में क्यों?

  • 19 अक्तूबर, 2020 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत शीर्ष स्वायत्त विकास वित्त संस्थान राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Cooperative Development Corporation- NCDC) ने सहकारी समितियों द्वारा देश में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिये आयुष्मान सहकार योजना (AYUSHMAN SAHAKAR Scheme) की शुरुआत की है।
  • इस योजना के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को स्थापित करने के लिये सहकारी समितियों को कुल 10,000 करोड़ रुपए का ऋण दिया जाएगा।
  • ध्यातव्य है कि ‘आयुष्मान सहकार योजना’ की अवधारणा मुख्य तौर पर केरल मॉडल पर आधारित है, जहाँ सहकारी समितियों ने केरल के स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने अगले कुछ वर्षो में इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये कर्ज देने का घोषणा किया है.
  • एनसीडीसी की तरफ से यह वित्तीय मदद या तो राज्य सरकारों के माध्यम से या पात्र सहकारी समितियों को सीधे प्राप्त होगी. अन्य स्रोतों से सब्सिडी या अनुदान परस्पर अनुबंध के हिसाब से होगा।

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