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Daily Current Affairs 22 June 2021

राज्य परिदृश्य

तमिलनाडु: मुख्यमंत्री के लिए आर्थिक सलाहकार परिषद

चर्चा में क्यों?

  • तमिलना़डु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ‘मुख्यमंत्री के लिए आर्थिक सलाहकार परिषद’ का गठन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस परिषद में विश्व के प्रसिद्ध और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रो. एस्थर डुफ्लो, आरबीआई के पूर्व गवर्नर डॉ. रघुराम जी. राजन, डॉ. अरविंद सुब्रमण्यम, मनरेगा के वास्तुकार प्रोफेसर ज्यां द्रेज और डॉ. एस नारायण शामिल होंगे।
  • इस परिषद की सिफारिशों के आधार पर, सरकार राज्य में अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर निकालने की कोशिस करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे।

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रिपोर्ट/इंडेक्स

विश्व निवेश रिपोर्ट 2021

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में “व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन” (UNCTAD) द्वारा “विश्व निवेश रिपोर्ट” जारी की गई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार 2020 में भारत में 64 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया और विदेशी निवेश के लिहाज से उसका विश्व में पांचवां स्थान रहा।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में कोविड-19 की दूसरी लहर (Coronavirus Second Wave) का प्रकोप अर्थिक गतिविधियों पर काफी गहरा था, लेकिन मजबूत बुनियादी तत्व मध्यम अवधि के लिए उम्मीद पैदा करते हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एफडीआई प्रवाह महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह 2020 में 35 प्रतिशत गिरकर 1500 अरब अमरीकी डॉलर से घटकर 1,000 अरब अमरीकी डॉलर रह गया।

इस वजह से बना पांचवां सबसे बड़ा एफडीआई प्राप्तकर्ता

  • रिपोर्ट में आगे कहा गया कि दुनिया भर में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन ने मौजूदा निवेश परियोजनाओं को धीमा कर दिया और मंदी की आशंका के चलते बहुराष्ट्रीय उद्यमों को नई परियोजनाओं का फिर से आंकलन करने को मजबूर किया।
  • रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में एफडीआई 2020 में 27 प्रतिशत बढ़कर 64 अरब अमरीकी डॉलर हो गया, जो 2019 में 51 अरब अमरीकी डॉलर था। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उद्योग में अधिग्रहण से भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा एफडीआई प्राप्तकर्ता बन गया।

क्या होता है विदेशी निवेश?

  • विकासात्मक कार्यो के लिये अपने घरेलू स्रोत अलावा वैश्विक स्रोतों से संसाधनों को जुटाना पड़ता विदेशी निवेश कहलाता है।
  • ये संसाधन या तो कर्ज (ऋण) के रूप में जुटाए जाते हैं या फिर निवेश के रूप में।
  • ऋण संसाधनों पर ब्याज देना पड़ता है, जबकि निवेश की स्थिति में लाभ में निवेशकों को भाग देना होता है।
  • विदेशी निवेश विकासात्मक कार्यों के लिये एक महत्त्वपूर्ण ज़रिया है। विदेशी निवेश को निम्न दो रूपों में देखा जा सकता है-

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI):

  • जब विदेशी निवेशक को किसी भारतीय कंपनी में निवेश करने से 10% या अधिक शेयर प्राप्त हो जाएं जिससे कि वह कंपनी के निदेशक मंडल में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सके तो इस निवेश को ‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’ कहते हैं।
  • इससे विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI):

  • यदि किसी विदेशी निवेशक द्वारा कंपनी के 10% से कम शेयर खरीदे जाएँ तो उसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investment- ) कहते हैं।
  • FPI के अंतर्गत विदेशी संस्थाओं द्वारा खरीदे गए शेयर को विदेशी संस्थागत निवेश, जबकि विदेशी व्यक्तियों द्वारा खरीदे गए शेयर को पत्रागत/अर्हता प्राप्त विदेशी निवेश कहते हैं।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की तुलना में बेहतर माने जाते हैं क्योंकि FDI किसी देश की अर्थव्यवस्था को समुचित स्थिरता प्रदान करते हैं जबकि FPI निवेश अस्थिर प्रकृति के होते हैं और इनमें संकट की स्थिति में अर्थव्यवस्था से निकल जाने की प्रवृति देखी जाती है।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश:

  • भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को दो अलग-अलग मार्गों के माध्यम से अनुमति दी जाती है- पहला, स्वचालित (Automatic) और दूसरा, सरकारी अनुमोदन के माध्यम से।
  • स्वचालित मार्ग में विदेशी संस्थाओं को निवेश करने के लिये सरकार की पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।
  • हालाँकि उन्हें निर्धारित समयावधि में निवेश की मात्रा के बारे में भारतीय रिज़र्व बैंक को सूचित करना होता है।
  • विशिष्ट क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सरकारी अनुमोदन के माध्यम से होता है।

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यूनाइटेड नेशन डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (UNDRR) ने सूखे पर जारी की रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में यूनाइटेड नेशन डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (UNDRR) ने “Global Assessment Report on Disaster Risk Reduction: Special Report on Drought 2021” शीर्षक से विश्व में सूखे की स्थिति वाली रिपोर्ट जारी की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस रिपोर्ट पर नवंबर 2021 में ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में होने वाली COP26 सम्मेलन में चर्चा होगी।
  • रिपोर्ट के अनुसार सूखा एक छुपा हुआ वैश्विक संकट है जो जल-भूमि प्रबंधन और जलवायु आपातकाल से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई नहीं करने पर “अगली महामारी” बन सकता है।
  • इस सदी में दुनिया में लगभग 5 अरब लोग सीधे तौर पर सूखे से प्रभावित हैं।
  • अगले कुछ सालों में दुनिया के अधिकांश हिस्से में पानी की कमी होगी और कुछ निश्चित समय के लिए पानी की माँग आपूर्ति से अधिक हो जाएगी।
  • सूखा अब व्यापक है और इस सदी के अंत तक अधिकांश देश किसी न किसी रूप में इसका अनुभव करेंगे।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था में खेती का योगदान भले ही कम हो रहा है लेकिन सूखे की स्थिति में जीडीपी का 2-5 फीसदी तक नुकसान होता है।
  • पानी की कमी के कारण लोग स्थान्तरित हो रहे हैं और दूसरी तरफ मरुस्थलीय इलाके तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • भारत के दक्कन के पठारी भाग का अध्ययन
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्कन पठारी भूभाग में प्रत्येक तीन वर्ष में एकबार सूखे की समस्या आती है जिसके कारण बड़े पैमाने पर स्थान्तरण होता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक से हर साल कई गाँव खाली हो जाते है। हजारों की आबादी में केवल कुछ लोग गाँव में बाकी रह जाते हैं।

विकसित देशों पर परिदृश्य

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भी सूखे से अछूते नहीं हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी यूरोप ने हाल के दिनों में सूखे का अनुभव किया है।
  • सूखे की कीमत अमेरिका में 6 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष से अधिक है जबकि यूरोपीय संघ में 9 बिलियन यूरो है।

सूखे के कारण

  • जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के बदलते पैटर्न सूखे के प्रमुख कारक हैं।
  • हालांकि, इस रिपोर्ट में जल संसाधनों के अकुशल उपयोग, गहन कृषि के तहत भूमि का क्षरण और खराब कृषि पद्धतियों की पहचान भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वनों की कटाई, उर्वरकों और कीटनाशकों का ज्यादा उपयोग, खेती के लिए पानी का अतिचारण और अति-निष्कर्षण कुछ अन्य कारक है।

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