Daily Current Affairs : 21 November 2020

रक्षा/प्रतिरक्षा
जाट रेजिमेंट का 225 वां स्‍थापना दिवस
महत्वपूर्ण बिंदु
जाट रेजिमेंट ने 19 और 20 नवंबर को देश में अपनी 225 वर्षों की असाधारण एवं शानदार सेवाओं का जश्न मनाया।
महत्वपूर्ण बिंदु
इस अवसर पर रेजिमेंट के मुख्यालय पर कर्नल ऑफ द जाट रेजिमेंट और उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, वीएसएम, एडीसी, वीसीओएएस बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत जाट वार मेमोरियल में एक माल्यार्पण समारोह के साथ हुई जिसके बाद इस रेजिमेंट के दिग्गजों के साथ एक शानदार रेजिमेंटल परेड और जोरा मीट का आयोजन किया गया।
कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण सुरक्षा संबंधी सभी सावधानियों का पालन करते हुए छोटे स्‍तर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जाट रेजिमेंट का इतिहास
इसकी स्थापना अंग्रेजों ने जाटों की वीरता को देखते हुए 1795 में बंगाल नेटिवइफेन्ट्री के रूप में की थी। आरंभ में एक, दो, तीन व फोर्थ जाट रेजिमेंट की स्थापना हुई।
अभी तक के अपने इतिहास में अनेक युद्धों में वीरता दिखाते हुए 2 विक्टोरिया क्रास, 2 जार्ज क्रास, 10 महावीर चक्र, 35 शौर्य चक्र, 8 कीर्ति चक्र, 170 सेना मैडल प्राप्त कर चुकी है।
इसमें 96 प्रतिशत जाट सैनिक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली व पंजाब आदि राज्यों से हैं।
रेजिमेंट का युद्ध घोष जाट बलवान जय भगवान है। आजादी के बाद जाट रेजिमेंट की बहादुर फोर्थ जाट बटालियन का जनवरी 1962 में पुनर्गठन किया गया।
रेजिमेंट ने 1962 के भारत चीन युद्ध, 1965 व 71 के भारत पाकिस्तान युद्धों में अपने नाम के अनुसार दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए भागने पर मजबूर कर दिया था।
1971 के युद्ध में रेजिमेंट ने पंजाब के फाजिल्का अबोहर सेक्टर में तैनात रहते हुए अदम्य साहस दिखाया।
फाजिल्का को पाकिस्तान के मुंह में जाने से बचाया और सेवियर आफ फाजिल्का का युद्ध सम्मान प्राप्त किया।
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भारत एवं विश्व
मिशन सागर-II
चर्चा में क्यों?
आईएनएस ऐरावतद्वारा दक्षिण सूडान को खाद्य पदार्थ की सहायता प्रदान की गयी।
महत्वपूर्ण बिंदु
मानवीय सहायता मिशन,सागर-II को जारी रखते हुए भारतीय नौसेना का जहाज, आईएनएस ऐरावत 20 नवंबर 2020 को पोर्ट ऑफ मोम्बासा,केन्या पहुंचा।
भारत सरकार, प्राकृतिक आपदाओं और कोविड-19 महामारी का सामना करने के लिए मित्र देशों को सहायता प्रदान कर रही है, और इसी क्रम में आईएनएस ऐरावत दक्षिण सूडान के लोगों के लिए खाद्य सहायता लेकर जा रहा है।
मिशन सागर-II को प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास- एसएजीएआर) के साथ जोड़ा गया है और यह हिन्द महासागर समुद्री क्षेत्र (आईओआर) में भरोसेमंद साझेदार के रूप में भारत की स्थिति को रेखांकित करता है।
भारतीय नौसेना समुद्री क्षेत्र की प्रमुख एजेंसी है और समुद्री डोमेन में पहला कार्य-संचालन (रेस्पोंस) करती है।
यह मिशन भारत तथा दक्षिण सूडान के संबंधों के महत्व को भी रेखांकित करता है और मौजूदा बंधन को और मजबूत करता है।
कई सदियों से भारत और अफ्रीकी देशों के बीच मित्रता और भाईचारे के संबंधरहे हैं तथा ये बंधन समय के साथ और भी मजबूत हुए हैं। भारत ने हमेशा अफ्रीकी देशों और लोगों के साथ एकजुटता दिखाई है और विकास, क्षमता निर्माण और मानवतावादी सहायता कार्यक्रम में उनके साथ भागीदारी की है।
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दिन/दिवस/सप्ताह
राष्ट्रीय नवजात सप्ताह 2020
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय नवजात सप्ताह 15 नवंबर से 21 नवंबर तक मनाया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में नवजात शिशु स्वास्थ्य के महत्व को सुदृढ़ किया जा सके और उच्चतम स्तर पर प्रतिबद्धता दोहरायी जाए।
महत्वपूर्ण बिंदु
इस वर्ष राष्ट्रीय नवजात सप्ताह का विषय है ‘हर स्वास्थ्य केंद्र और हर जगह, हर नवजात शिशु के लिए गुणवत्ता, समानता, गरिमा।’
उल्लेखनीय है कि 2014 में, भारत नवजात कार्य योजना (INAP) शुरू करने वाला पहला देश बना था, जो रोके न सकने वाली नवजातों की मौत और जन्म के समय मृत पाए जाने की समस्या को खत्म करने को लेकर ग्लोबल एवरी न्यूबोर्न एक्शन प्लान के अनुरूप है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आईएनएपी लक्ष्यों और रोडमैप योजना पर एक विस्तृत प्रगति कार्ड जारी करते हुए कहा कि भारत ने 2017 के महत्वपूर्ण लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है:-
वर्ष 2017 के लिए 24 के नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) का निर्धारित लक्ष्य, और 2020 तक 19 की स्टिल बर्थ रेट (SBR) का लक्ष्य हासिल करने के लिए की गयी कोशिशें।
उन्होंने कहा, “अब हमारा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2018 और संयुक्त राष्ट्र की इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मॉर्टेलिटी एस्टीमेशन (UNIGME) के अनुसार प्रति 1000 जीवित जन्मों में से 23 नवजात मृत्यु दर और सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के आकलन के अनुसार चार (4) का सिस्टम स्टिल बर्थ रेट तथा यूएनआईजीएमई के आकलन के अनुसार 14 का सिस्टम स्टिल बर्थ रेट है।
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भूटान में रुपे कार्ड के दूसरे चरण की शुरुआत
चर्चा में क्यों?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान में रुपे कार्ड (RuPay Card) के दूसरे चरण की शुरुआत की है, जिससे भूटान के कार्डधारक अब भारत में रुपे (RuPay) नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगे।
महत्वपूर्ण बिंदु
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते वर्ष अगस्त माह में भूटान की राजकीय यात्रा के दौरान इस परियोजना के पहले चरण की शुरुआत की थी। रुपे कार्ड (RuPay Card) के पहले चरण के कार्यान्वयन के तहत भारत के नागरिक भूटान के ATM और प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) मशीन के माध्यम से लेनदेन में सक्षम हो गए थे।
अब दूसरे चरण के कार्यान्वयन से भूटान के कार्ड धारक भी रुपे (RuPay) नेटवर्क का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। रुपे (RuPay) भारत में अपनी तरह का पहला घरेलू डेबिट और क्रेडिट कार्ड भुगतान नेटवर्क है।
रुपे (RuPay) नेटवर्क का विकास भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा किया गया है। इस नेटवर्क का उपयोग सिंगापुर, भूटान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों में लेन-देन के लिये किया जा सकता है।
जनवरी 2020 तक 600 मिलियन से अधिक रुपे कार्ड धारक थे।
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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य
रोहिंग्‍या संकट को लेकर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पारित
चर्चा में क्यों?
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने रोहिंग्‍या संकट के तत्‍काल समाधान के लिये एक प्रस्‍ताव पारित किया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
यह प्रस्ताव इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया गया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र में कुल 132 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ।
वहीं 9 देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया, जबकि 31 देशों ने प्रस्ताव को लेकर हुए मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया।
इस प्रस्ताव में म्यांमार से कहा गया है कि वह रोहिंग्या संकट के मूल कारणों का समाधान करे, जिसमें अल्पसंख्यक रोहिंग्याओं को नागरिकता देना और सकारात्‍मक माहौल तैयार करके उनकी सकुशल तथा स्‍थाई घर वापसी को सुनिश्चित करना शामिल है।
इस प्रस्‍ताव में विस्थापित रोहिंग्‍याओं को मानवीय आधार पर शरण देने के लिये बांग्‍लादेश सरकार की प्रशंसा भी की गई है।
प्रस्‍ताव में बाकी देशों से अनुरोध किया गया है कि वे बांग्लादेश को उसके इस मानवीय प्रयास में सहायता दें।
कौन हैं रोहिंग्या?
दरअसल म्याँमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है, जबकि रोहिंग्याओं को अवैध बांग्लादेशी प्रवासी माना जाता है।
वे लंबे समय से वे म्यांमार के रखाइन प्रांत में रहते आ रहे हैं।
सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। हालांकि ये म्यामांर में पीढ़ियों से रह रहे हैं।
रखाइन स्टेट में 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई हैं और एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।

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