DAILY CURRENT AFFAIRS 20 NOVEMBER 2020

पुरस्कार/सम्मान
बुकर पुरस्कार-2020
चर्चा में क्यों?
न्यूयॉर्क में बसे स्कॉटलैंड के लेखक डगलस स्टुअर्ट (Douglas Stuart) को उनके पहले उपन्यास “शग्गी बैन” (“Shuggie Bain) के लिए 2020 का बुकर पुरस्कार ( Booker Prize 2020 ) मिला है।
महत्वपूर्ण बिंदु
‘शग्गी बैन’ की कहानी में ग्लासगो की पृष्ठभूमि है।
दुबई में बसी भारतीय मूल की लेखिका अवनी दोशी का पहला उपन्यास ‘ब्रंट शुगर’ (Burnt Sugar)भी इस श्रेणी में नामित था लेकिन पुरस्कार डगलस को मिला।
2019 में कनाडा की मार्गरेट एटवुड (Margaret Atwood) और ब्रिटेन की बर्नाडिन एवरिस्टो (Bernardine Evaristo) को वर्ष 2019 के बुकर पुरस्कार के लिये संयुक्त रूप से चुना गया था।
बुकर पुरस्कार
बुकर पुरस्कार वर्ष 1969 से प्रदान किया जा रहा है।
इसके तहत 50,000 पाउंड की राशि प्रदान की जाती है।
बुकर पुरस्कार वर्ष के सर्वोत्तम अंग्रेज़ी उपन्यास को दिया जाता है, जो यूनाइटेड किंगडम या आयरलैंड में प्रकाशित हुआ हो।
भारत के तीन लेखकों; अरविंद अडिगा को वर्ष 2008 में उनके उपन्यास द व्हाइट टाइगर (The White Tiger) के लिये, किरण देसाई को वर्ष 2006 में उपन्यास द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस (The Inheritance of Loss) के लिये तथा अरुधंति रॉय को उपन्यास गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स (God of Small Things) के लिये बुकर पुरस्कार मिल चुका है।
भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी के उपन्यास क्विचोटे (Quichotte) को इस वर्ष के बुकर पुरस्कार के लिये अंतिम छह उपन्यासों में शामिल किया गया था। सलमान रुश्दी को इससे पहले वर्ष 1981 में उनके उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के लिये बुकर पुरस्कार मिला।
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वातायन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
चर्चा में क्यों?
भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को वर्चुअल माध्यम से आयोजित एक कार्यक्रम में ‘वातायन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ (Vatayan Lifetime Achievement Award) से सम्मानित किये जाने की घोषणा हुई है।
महत्वपूर्ण बिंदु
‘वातायन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’लंदन के ‘वातायन-यूके संगठन’ (Vatayan-UK Organization) द्वारा कवियों, लेखकों एवं कलाकारों को उनके क्षेत्र में किये गए उल्लेखनीय कार्यों के लिये प्रदान किया जाता है।
इससे पहले यह पुरस्कार गीतकार प्रसून जोशी और जावेद अख्तर को उनके साहित्यिक योगदान के लिये प्रदान किया जा चुका है।
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भारत एवं विश्व
इंडो- थाई कोरपैट
चर्चा में क्यों?
भारत और थाईलैंड के नौसैनिक पोतों की साझा समुद्री गश्त ।
महत्वपूर्ण बिंदु
इंडो-थाईलैंड कोआर्डिनेटेड पेट्रोल ( Indo-Thai CORPAT) के तीसवें संस्करण में 18 से 20 नवंबर 2020 के बीच भारतीय नौसेना की ओर से स्वदेशी मिसाइल कार्वेट आईएनएस कार्मुक और थाईलैंड की ओर से फ्रिगेट क्राबुरी ने भाग लिया। इन पोतों के साथ दोनों नौसेनाओं के समुद्र गश्ती विमान डार्नियर ने भी भाग लिया।
भारत सरकार के सागर (SAGAR– Security and Growth For All in the Region) कार्यक्रम के तहत भारतीय नौसेना हिंद महासागर के इलाके में विशेष आर्थिक क्षेत्र की चौकसी, मानवीय सहायता, आपदा सहायता और अन्य क्षमता विकास गतिविधियों में तटीय देशों के आग्रह पर उनके साथ सहयोग करती रही है।
अपने समुद्री सम्पर्कों को मजबूती देने के लिये दोनों नौसेनाएं 2005 से ही अपनी अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के निकट साल में दो बार अभ्यास करती रही हैं।
कोरपैट के माध्यम से नौसेनाओं के बीच परस्पर समझ और तालमेल विकसित करने और गैरकानूनी तौर पर मछली पकड़ने , मादक द्रव्यों की तस्करी , समुद्री आतंकवाद और समुद्री डाकाजनी को रोकने के लिये आपसी सहयोग विकसित किया जाता है।
इसके अलावा समुद्र में खोज एवं बचाव कार्य भी किये जाते हैं। कोरपैट के 30 वें संस्करण के जरिये भारत और थाईलैंड की नौसेनाओं के बीच मजबूत सम्बन्ध विकसित होंगे।
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भारत और लक्जमबर्ग में समझौते
चर्चा में क्यों?
भारत और लक्जमबर्ग ने दो दशक बाद हुए शिखर सम्मेलन में वित्त क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने के लिए 19 नवंबर 2020 को तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
महत्वपूर्ण बिंदु
डिजिटल शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके लक्जमबर्ग के समकक्ष जेवियर बेटेल ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद पर चिंता व्यक्त की तथा आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र में और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल जैसे मंचों पर वैश्विक प्रयासों का समर्थन करने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग की जरूरत पर सहमति जताई।
भारत और लक्जमबर्ग के बीच हुए समझौतों में, इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज और लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज के बीच हुआ समझौता शामिल है जो वित्तीय सेवा उद्योग में सहयोग उपलब्ध कराएगा।
इसी तरह के सहयोग के लिए भारतीय स्टेट बैंक और लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज के बीच समझौता हुआ है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के इस तीसरे सबसे बड़े विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) देश से वित्तीय और डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
लक्जमबर्ग विश्व के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में एक है। कई भारतीय कंपनियों ने लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज में ‘‘ग्लोबल डिपाजटरी रिसीट’’ के माध्यम से वित्तीय संसाधन जुटाए हैं।
यह अमेरिका और मॉरीसश के बाद भारत में एफपीआई का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है।
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने लक्जमबर्ग के चार उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है।
लग्जमबर्ग ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल होने की घोषणा की है। है।
इस्पात के क्षेत्र में भी भारत और लक्जमबर्ग के बीच लंबे समय से सहयोग रहा है। लक्जमबर्ग की कंपनी पॉल वुर्थ पिछले दो दशकों से भारत में सक्रिय है और सेल, टिस्को और जिंदल स्टील के साथ मिलकर भारत में इस्पात उद्योग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विश्व की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता कंपनी आर्सेलर मित्तल भी लक्जमबर्ग में स्थित है।
हाल में ही उसने भारत के निप्पन इस्पात के साथ मिलकर संयुक्त उद्यम स्थापित किया है।
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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य
भारत एवं विश्व बैंक में ऋण समझौता
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार, मेघालय सरकार और विश्व बैंक ने मिलकर मेघालय राज्य के परिवहन क्षेत्र में सुधार और आधुनिकीकरण के लिए 120 मिलियन डॉलर की परियोजना पर हस्ताक्षर किए हैं।
महत्ववपूर्ण बिंदु
यह मेघालय को उच्च मूल्य वाले कृषि और पर्यटन के लिए अपनी विशाल विकास क्षमता का दोहन करने में मदद करेगा।
यह परियोजना लगभग 300 किमी के रणनीतिक सड़क खंडों और स्टैंड-अलोन पुलों का अभिनव, जलवायु लचीला और प्रकृति-आधारित समाधानों का उपयोग करके सुधार करेगी।
कठिन पहाड़ी इलाके और चरम जलवायु परिस्थितियां मेघालय की परिवहन चुनौतियों को विशेष रूप से जटिल बनाती हैं।
राज्य में 5,362 बस्तियों में से लगभग आधे में परिवहन कनेक्टिविटी का अभाव है।
यह परियोजना दो तरीकों से मेघालय की विकास क्षमता पर काम करेगी। राज्य के भीतर, यह बहुत जरूरी परिवहन कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
यह मेघालय को बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल कॉरिडोर के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक प्रमुख संपर्क केंद्र के रूप में भी स्थान देगा।
यह ऑपरेशन COVID-19 महामारी के कारण प्रभावित विकास गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के “रिस्टार्ट मेघालय मिशन” का भी समर्थन करेगा।
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भारत सरकार और न्यू डेवलपमेंट बैंक के बीच ऋण समझौता
चर्चा में क्यों?
दिल्ली- गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कारिडोर के लिए भारत सरकार और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के बीच 19 नवंबर 2020 को 500 मिलियन अमेरिकी डालर (लगभग 3,700 करोड़ रुपये) के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।
महत्वपूर्ण बिंदु
82 किमी लंबे कारिडोर पर 30,274 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एशियाई विकास बैंक (ADB) व एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) भी इस परियोजना के लिए ऋण दे रहे हैं। इसी साल सितंबर में एडीबी के साथ भी 500 मिलियन अमेरिकी डालर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
समझौते पर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में आर्थिक कार्य विभाग के संयुक्त सचिव (आइपीएफ एंड ओएमआइ) बलदेव पुरुषार्थ, आवास और शहरी विकास मंत्रालय के निदेशक जनार्दन प्रसाद, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह और एनडीबी के वाइस प्रेसीडेंट व चीफ आपरेटिग अफसर सियान सु ने डिजिटल तरीके ये हस्ताक्षर किए।
इस ऋण का उपयोग रौलिग स्टाक, सिग्नल सिस्टम, स्ट्रक्चर आपरेशन, स्टाफ आपरेशन, निवास स्थान, ट्रेन नियंत्रण और दूरसंचार प्रणाली समेत अन्य कार्यों में किया जाएगा।
आरआरटीएस कारिडोर में 24 स्टेशन होंगे। करीब 70.5 किमी एलिवेटेड और 11.5 किमी भूमिगत होगा।
साहिबाबाद से दुहाई के बीच के 17 किमी तक रैपिड रेल 2023 से चलने लगेगी, जबकि बाकी पूरे कारिडोर पर 2025 से।
डिब्बों का डिजाइन और निर्माण मेक-इन-इंडिया पहल के तहत गुजरात के सावली में किया जा रहा है।
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राष्ट्रीय परिदृश्य
गुपकार गठबंधन पर विवाद
चर्चा में क्यों?
बीते कुछ समय से ‘गुपकार’ शब्द काफी चर्चा में है।
क्या है गुपकार गठबंधन
दरअसल, गुपकार जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों का एक गठबंधन है, जिसे पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकर डिक्लेयरेशन (People’s Alliance for Gupkar Declaration,PAGD) का नाम दिया गया है, जो एक तरह का घोषणा पत्र है।
इसी गुपकार घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली सभी पार्टियों के एक समूह को गुपकार गठबंधन कहा जाता है।
इस गुपकार गठबंधन में फारूक अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (PC) के अलावा जम्मू-कश्मीर की 6 पार्टियां शामिल है।
गुपकार योजना को लेकर हुई पहली बैठक नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के निवास पर आयोजित की गई थी और इसमें पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सजाद लोन, पीपुल्स मूवमेंट के नेता जावेद मीर, सीपीआईएम नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी और अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह ने भाग लिया था।
क्यों पड़ा गुपकार नाम?
दरअसल, श्रीनगर में एक सड़क का नाम है गुपकार रोड। इसी गुपकार रोड पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का निवास स्थान है।
इसी जगह पर यानी फारूक अब्दुल्ला के आवास पर राज्य से आर्टिकल 370 हटने से एक दिन पहले यानी 4 अगस्त 2019 को कश्मीर के कुछ दलों ने एक साथ बैठक की थी।
क्या है गुपकार घोषणा?
इस समझौते में कहा गया है कि पार्टियों ने सर्व-सम्मति से फैसला किया है कि जम्मू कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और उसके विशेष दर्जे को संरक्षित करने के लिए वे मिलकर प्रयास करेंगी।
गुपकार का उद्देश्य
इस गुपकार अलांयस का मुख्य उद्देश्य जम्मू और कश्मीर को वापस विशेष दर्जा दिलाना है। इस गुपकार घोषणा पत्र में कश्मीर की इन पार्टियों ने सर्वसम्मति से जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और विशेष राज्य का दर्जा की स्थिति की रक्षा और बचाव के अपने प्रयासों में एकजुट होने पर सहमति व्यक्त की थी। इसमें कहा गया है कि पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकर डिक्लेयरेशन का मकसद सभी हितधारकों के साथ राजनीतिक रूप से वार्ता करना है।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
परम सिद्धि सुपर कंप्यूटर
चर्चा में क्यों?
16 नवंबर, 2020 को जारी विश्व के शीर्ष 500 सबसे शक्तिशाली नॉन-डिस्ट्रीब्यूटेड कंप्यूटर प्रणालियों में एआई सुपक कंप्यूटर परम सिद्धि (AI supercomputer Param Siddhi) ने 63वां स्थान हासिल किया।
महत्वपूर्ण बिंदु
परम सिद्धि उच्च प्रदर्शन वाली कृत्रिम बुद्धिमता वाली सुपरकंप्यूटर प्रणाली है जिसे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission-NSM) के तहत सी-डैक (C-DAC) में स्थापित किया गया है।
इसकी गति 5.267 पेटाफ्लॉप्स के आर-पीक (R-peak) तथा 4.6 पेटाफ्लॉप्स के आर-मैक्‍स (R-max) है।
इस सुपरकंप्यूटर का विकास सी-डैक (Centre for Development of Advanced Computing: C-DAC) द्वारा की गई और इसे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा केंद्रीय इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समर्थन से संयुक्‍त रूप से विकसित किया गया है।
परम सिद्धि सुपरकंप्यूटर सी-डैक द्वारा स्‍वदेश में विकसित एचपीसी-एआई इंजन, सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क तथा क्‍लाउड प्‍लेटफॉर्म के साथ ‘एनवीआईडीआईए डीजीएक्‍स सुपर-पीओडी रेफरेंस आर्किटेक्चर नेटवर्किंग’ (NVIDIA DGX Super-POD Reference Architecture Networking) पर आधारित है।
परम सिद्धि-एआई से हमारे राष्ट्रीय अकादमिक, विकास एवं अनुसंधान संस्थान मजबूत होंगे।
इसके अलावा राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क पर फैले उद्योग और स्टार्टअप को भी लाभ होगा।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी तकनीक की मदद से मौसम का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
इस कांफ्रेंस का आयोजन साल में दो बार किया जाता है और शक्तिशाली कंप्यूटरों की सूची जारी की जाती है।
ताजा लिस्ट में गैर-वितरित कंप्यूटर सिस्टम के बीच परम सिद्धि को मान्यता मिली है।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली 500 कंप्यूटरों की लिस्ट में जापान के सुपर कंप्यूटर फुगाकू (Fugaku supercomputer) को मिला है।
सीडैक
सी-डैक (C-DAC) सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) के अंतर्गत एक स्वायत्त वैज्ञानिक सोसायटी है।
भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर, परम-8000 वर्ष 1991 में C-DAC द्वारा ही बनाया गया था।
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