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Daily Current Affairs 20 July 2021

राष्ट्रीय परिदृश्य

राजद्रोह कानून के दुरुपयोग पर चिंता

चर्चा में क्यों?

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई है। कोर्ट ने आजादी के 75 साल बाद भी इस कानून के होने की उपयोगिता पर केंद्र से सवाल किया है।

क्या है राजद्रोह कानून?

  • भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए में राजद्रोह को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है, ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 124ए में राजद्रोह का मामला दर्ज हो सकता है।
  • इसके अलावा अगर कोई शख्स देश विरोधी संगठन के खिलाफ अनजाने में भी संबंध रखता है या किसी भी प्रकार से सहयोग करता है तो वह भी राजद्रोह के दायरे में आता है।

कब बना था कानून?

  • यह कानून ब्रिटिश काल का है। इसे 1870 में लाया गया था। सरकार के प्रति विरोध रखने वालों के खिलाफ इसके तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। राजद्रोह के मामले में दोषी पाया जाना वाला व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकता है।
  • इसके अतिरिक्त उसका पासपोर्ट भी रद्द हो जाता है। जरूरत पड़ने पर उसे कोर्ट में उपस्थित होना पड़ता है।

सजा का प्रावधान क्‍या है?

  • राजद्रोह गैर जमानती अपराध है। राजद्रोह के मामले में दोषी पाए जाने पर आरोपी को तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इसके अतिरिक्त इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है।

चुनौती क्यों दी गई है?

  • आजादी के बाद हमारे संविधान में विचार और अभिव्यक्ति की आजादी मिली है। अनुच्छेद-19 (1)(ए) के तहत यह आजादी मिली है।
  • संविधान का अनुच्छेद-19 (2) अभिव्यक्ति की आजादी में वाजिब रोक की भी बात करता है। इसके लिए कुछ अपवाद बनाए गए हैं। इसके तहत ऐसा कोई बयान नहीं दिया जा सकता जो देश की संप्रभुता, सुरक्षा, पब्लिक ऑर्डर, नैतिककता के खिलाफ हो या बयान मानहानि या कंटेप्ट ऑफ कोर्ट वाला हो ऐसे बयान पर रोक है।

राजद्रोह के कितने मामले?

  • समाज में शांति और कानून-व्‍यवस्‍था कायम रखने के लिए राजद्रोह कानून सरकार को ताकत देता है। मामले में याचिकाकर्ता ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि 2010 में राजद्रोह के 10 केस थे और अभी 2020 में 67 पत्रकारों के खिलाफ केस कर दिया गया है।
  • देखा जाए तो मीडिया और मीडिया कर्मियों पर राजद्रोह के नाम पर सेंशरशिप है। उन पर राजद्रोह के मामले बनाए जा रहे हैं।
  • एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया गया था कि साल 2020 में ही राजद्रोह के 70 से अधिक मामले सामने आए। देश के विभिन्न भागों में साल 2019 के दौरान राजद्रोह के 93 मामले दर्ज किए गए जिनमें 96 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या कहा है?

  • मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि यह महात्मा गांधी, तिलक को चुप कराने के लिए अंग्रेजों की ओर से इस्तेमाल किया गया एक औपनिवेशिक कानून है। फिर भी, आजादी के 75 साल बाद भी क्‍या यह जरूरी है? मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘यह ऐसा है जैसे आप बढ़ई को आरी देते हैं, वह पूरे जंगल को काट देगा। यह इस कानून का प्रभाव है।’
  • उन्होंने बताया कि एक गांव में भी पुलिस अधिकारी राजद्रोह कानून लागू कर सकते हैं और इन सभी मुद्दों की जांच की जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘मेरी चिंता कानून के दुरुपयोग को लेकर है।
  • क्रियान्वयन एजेंसियों की कोई जवाबदेही नहीं है। मैं इस पर गौर करूंगा। सरकार पहले ही कई बासी कानूनों को निकाल चुकी है, मुझे नहीं पता कि वह इस कानून को क्यों नहीं देख रही है।’अदालत की टिप्‍पणी के बाद सोशल मीडिया पर राजद्रोह कानून ट्रेंड होने लगा।

सरकार का क्‍या है पक्ष?

  • अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने सरकार का पक्ष रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि पूरे कानून को निकालने के बजाय इसके उपयोग पर पैरामीटर निर्धारित किए जा सकते हैं।
  • केंद्र सरकार ने जुलाई 2019 में संसद में कहा था कि वह राजद्रोह कानून को खत्म नहीं करेगी। सरकार का कहना था कि राष्ट्र-विरोधी, पृथकतावादी और आतंकवादी तत्वों से प्रभावकारी ढंग से निपटने के लिए इस कानून की जरूरत है।

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चर्चित व्यक्तित्व

सीमा नंदा

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक सीमा नंदा की नियुक्ति श्रम विभाग के सॉलिसिटर के रूप में की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीमा नंदा ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के दौरान भी श्रम विभाग में काम किया था।
  • इससे पूर्व उन्होंने श्रम एवं रोज़गार अधिवक्ता के तौर पर विभिन्न भूमिकाओं में 15 वर्ष से अधिक समय तक सरकारी विभागों में कार्य किया था।
  • सीमा नंदा वर्तमान में हार्वर्ड लॉ स्कूल के लेबर एंड वर्कलाइफ प्रोग्राम में फेलो हैं।
  • वह कनेक्टिकट (अमेरिका) में पली-बढ़ी और ब्राउन यूनिवर्सिटी तथा बोस्टन कॉलेज लॉ स्कूल से उन्होंने स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
  • वह मैसाचुसेट्स बार एसोसिएशन की सदस्य भी हैं। इसके अतिरिक्त वह कई गैर-लाभकारी संगठनों के निदेशक मंडल का हिस्सा रही हैं।
  • गौरतलब है कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन में कई भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों को महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया था, जिसमें सबसे प्रमुख उदाहरण अमेरिका की मौजूदा उपराष्ट्रपति कमला हैरिस हैं।

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खेल परिदृश्य

आईसीसी में शामिल हुए तीन नए सदस्य देश

चर्चा में क्यों?

  • अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 18 जुलाई को अपने एसोसिएट देशों की संख्या में वृद्धि की है। इस दौरान आईसीसी ने मंगोलिया, स्विटजरलैंड और ताजिकिस्तान को नए सद्स्य के तौर पर शामिल किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इन तीन देशों के शामिल होने से अब आईसीसी के एसोसिएट्स देश की संख्या बढ़कर 94 हो गई है। वैसे आईसीसी के सभी सदस्य देशों की संख्या 106 है।
  • जहां एक तरफ इन तीन नए देशों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने सदस्यता दी वहीं दूसरी तरफ जांबिया की सदस्यता रद्द कर दी गई।
  • इसके अवाला रूस को भी इन्हीं कारणों के चलते निलंबित कर दिया गया है।
  • मंगोलियाई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) जो 2007 में स्थापित किया गया था  2018 में खेल का आधिकारिक राष्ट्रीय प्रशासक बन गया।
  • क्रिकेट पहली बार 1817 में स्विट्जरलैंड में खेला गया था और क्रिकेट स्विट्जरलैंड  का 2014 में एक संघ के रूप में उद्घाटन किया गया।
  • क्रिकेट स्विट्जरलैंड के अध्यक्ष अलेक्जेंडर मैके ने मुताबिक, आईसीसी के एसोसिएट सदस्य के रूप में स्वीकार किए जाने पर हम बेहद गर्व और उत्साहित हैं, यह स्विट्ज़रलैंड में क्रिकेट में शामिल सभी लोगों के लिए इनाम है।
  • आईसीसी के अनुसार, ताजिकिस्तान क्रिकेट महासंघ का गठन आधिकारिक तौर पर 2011 में हुआ। उनके पास चार संबद्ध सदस्य संघों में 22 पुरुष और 15 महिला टीमें हैं।

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निधन

केशव दत्त

  • हाल ही में हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी रहे केशव दत्त उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे।
  • केशव दत्त हॉकी में भारत के स्वर्ण युग का हिस्सा थे।
  • वह 1948 के लंदन ओलंपिक और 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक खेलों की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम का हिस्सा थे।
  • 1948 में लंदन के वेम्बली स्टेडियम में ब्रिटेन को 4-0 से हराकर भारत ने स्वतंत्रता के बाद पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था।
  • जबकि 1952 के हेलसिंकी खेलों में भारतीय टीम नीदरलैंड को 6-1 से हराकर लगातार पांचवीं बार ओलंपिक चैंपियन बनी थी।
  • 29 दिसंबर, 1925 को लाहौर में जन्मे केशव दत्त ने 1951-1953 तक और फिर 1957-1958 में मोहन बागान हॉकी टीम की कप्तानी भी की।
  • मोहन बागान के खिलाड़ी के रूप में उन्होंने 10 साल की अवधि में छह बार हॉकी लीग और तीन बार बीटन कप जीता।
  • उन्हें 2019 में मोहन बागान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो सम्मान के पहले गैर-फुटबॉलर प्राप्तकर्ता बने।
  • हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ज्ञानेंद्रो निंगोमबम ने कहा कि हम सभी महान हाफबैक केशव दत्त के निधन के बारे में सुनकर बहुत दुखी हैं।
  • वह 1948 और 1952 के ओलंपिक खेलों की भारतीय हॉकी टीम के एकमात्र जीवित सदस्य थे।

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पुरस्कार / सम्मान

मोहन बागान रत्न सम्मान

  • महान फुटबॉलर पेले की कप्तानी वाले कोस्मोस क्लब के खिलाफ कोलकाता (पश्चिम बंगाल) 1977 में नुमाइशी फुटबॉल मैच खेलने वाले भारत के पूर्व गोलकीपर शिवाजी बनर्जी को मरणोपरांत मोहन बागान रत्न सम्मान प्रदान किया जायेगा ।
  • क्लब की कार्यकारी समिति के सदस्यों ने फीजी के स्ट्राइकर रॉय कृष्णा को वर्ष 2020-21 का सव्रश्रेष्ठ फुटबॉलर चुना जिनके शानदार प्रदर्शन के दम पर एटीके मोहन बागान इंडियन सुपर लीग में उपविजेता रहा ।
  • बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन को सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर और राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में 100 मीटर बाधा दौड़ और ऊंची कूद जीतने वाली बिदिशा कुंडू को सर्वश्रेष्ठ एथलीट चुना गया।

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