Daily Current Affairs 2 September 2020

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

एस्ट्रोसैट की महत्वपूर्ण खोज

चर्चा में क्यों?

  • भारत के पहले मल्टी-वेवलेंथ सेटेलाइट-एस्ट्रोसैट (Multi-Wavelength Satellite, AstroSat) ने दूसरी आकाशगंगा से निकलने वाली एक्स्ट्रीम अल्ट्रावायलेट (यूवी) लाइट (Extreme Ultraviolet (UV) Light) की मौजूदगी को पकड़ा है, जो पृथ्वी से करीब 9.30 बिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • पुणे स्थित अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष भौतिकी के अंतर-विश्वविद्यालयी केंद्र (Inter-University Centre for Astronomy and Astrophysics (IUCAA) ने यह जानकारी साझा की।
  • अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के इस अंतर्राष्ट्रीय समूह (International Team of Astronomers) का नेतृत्व डॉक्टर कनक साहा कर रहे हैं, जो आईयूसीएए में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
  • इस खोज के बारे में 24 अगस्त को ‘नेचर एस्ट्रोनोमी’ में पूरे विस्तार से बताया गया है।ये खोज अंतरराष्‍ट्रीय विशेषज्ञों के दल ने की है, जिसमें भारत, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, अमेरिका, जापान और नीदरलैंड्स के वैज्ञानिक शामिल हैं।
  • दरअसल, इस तरह की अल्‍ट्रावॉयलेट रेडियेशन (UV radiation) को पृथ्वी अपनी कक्षा (Earths atmosphere) में प्रवेश करते ही सोख लेती है, ऐसे में इनका पता अंतरिक्ष में तैनात सेटेलाइट के जरिए ही लगाया जा सकता है।
  • बता दें कि इसी काम को अंजाम देने के लिए नासा ने हब्बल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope-एचएसटी) को अंतरिक्ष में तैनात किया है, जो कि एस्ट्रोसैट के यूवीआईटी (UV imaging telescope) से काफी बड़ा है, लेकिन एस्ट्रोसैट के यूवीआईटी ने वो कर दिखाया, जो हब्बल नहीं कर पाया।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार ‘यह खोज डार्क एज से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण खोज में से है, इसके जरिये हम प्रकाश के पैदा होने की कहानी जान पाएंगे।

क्या है एस्ट्रोसैट?

  • एस्ट्रोसैट भारत की पहली समर्पित बहु तरंगदैर्घ्य अंतरिक्ष वेधशाला (Multi-Wavelength Space observatory) है।
  • यह वैज्ञानिक उपग्रह मिशन हमारे ब्रह्मांड को अधिक विस्तृत समझने का प्रयास है।
  • एस्ट्रोसैट ऑप्टिकल, पराबैंगनी, निम्न और उच्च ऊर्जा विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के एक्स-रे क्षेत्रों में ब्रह्मांड का अवलोकन करता है, जबकि अधिकांश अन्य वैज्ञानिक उपग्रह तरंगदैर्घ्य बैंड के सीमित दायरे के अवलोकन के लिए सक्षम हैं।
  • इसे 2015 में अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था।

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विश्व का सबसे बड़ा सौर पेड़

चर्चा में क्यों?

  • सीएसआईआर (Council of Scientific and Industrial Research, CSIR) की सीएमईआरआइ (Central Mechanical Engineering Research Institute, CMERI)ने विश्व का सबसे बड़ा सौर पेड़ विकसित किया है, जिसे सीएमईआरआइ के आवासीय कॉलोनी, दुर्गापुर में स्थापित किया गया है। जिसकी क्षमता 5 किलोवाट पावर की होगी।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. हरीश हिरानी के अनुसार कम क्षेत्र में ज्यादा सौर बिजली उत्पादन की क्षमता सौर पेड़ में होती है। जिसमें कुल 35 सौर पीवी पैनल लगाया गया है।
  • यह सौर पेड़ विश्व का सबसे बड़ा सौर पेड़ (Solar Tree) है।
  • इस सौर पेड़ से किसानों को पंप, ई-ट्रैक्टर आदि को चलाने में सुविधा होगी।
  • यहां से उत्पादित बिजली को पावर ग्रिड में भी दिया जा सकेगा।
  • सौर पेड़ में आइओटी (Internat Of Thing, IOT) आधारित सुविधाओं को शामिल करने की क्षमता है।
  • यानी कृषि क्षेत्रों में चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी, वास्तविक समय में आद्रता हवा की गति, वर्षा की भविष्यवाणी और मिट्टी के विश्लेषण सेंसर का भी उपयोग किया जा सकेगा।

 

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भारत एवं विश्व

विश्व-सप्लाई चेन में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग

चर्चा में क्यों?

  • विश्व-सप्लाई चेन में चीन के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने 1 सितंबर 2020 को साथ मिलकर कार्यक्रम चलाने की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • तीनों देशों के वाणिज्य व उद्योग मंत्रियों की साझा रूप से वर्चुअल बैठक में इस आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल (SCRI) (Supply Chain Resilience Initiative (SCRI) इसकी घोषणा की गई। शीघ्र ही इस साझा कार्यक्रम में अमेरिका के जुड़ने की संभावना है।
  • इसके लिए जापान (Japan) की ओर से भारत और ऑस्ट्रेलिया (Australia) को मिलाकर तीनों की एक फास्ट ट्रैकिंग सप्लाई चेन कॉपोरेशन (fast-tracking supply chain cooperation) की स्थापना की है।
  • इस अवसर पर भारत के वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि तीनों देश प्रशांत महासागर वाले क्षेत्र में मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन की स्थापना कर सकते हैं जो जोखिम से दूर होने के साथ मूल्य के मामले में भी स्थिर होगी।

इस सहयोग के निहितार्थ

  • ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के साथ अमेरिका मिलकर विश्व सप्लाई चेन में चीन के वर्चस्व को समाप्त करना चाहते हैं।
  • वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच वस्तुओं का कारोबार 2.7 ट्रिलियन डॉलर का है तो सेवा कारोबार 0.9 ट्रिलियन डॉलर का है।
  • ऑस्ट्रेलिया और जापान भारत को चीन के विकल्प के तौर पर सप्लाई चेन का हिस्सा बनाना चाहते हैं, क्योंकि भारत भी चीन की तरह विशाल जनसंख्या वाला देश हैं और भारत में चीन की तरह ही संसाधनों की प्रचुरता है।
  • जापान की तकनीक मदद से ही चीन इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सफलता हासिल कर सका। अब भारत हर हाल में जापान की कंपनियों को भारत लाना चाहता है।

आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन का क्या मलतब है?

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के संदर्भ में, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन एक दृष्टिकोण है जो किसी देश को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि उसने अपने आपूर्ति जोखिम को आपूर्ति करने वाले कई देशों को शामिल कर विविध बना दिया है, बजाय कि सिर्फ एक या कुछ देशों पर निर्भर होने के।

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रक्षा प्रतिरक्षा

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स

चर्चा में क्यों?

  • 29- 30 अगस्त 2020 को चीन ने लद्दाख में फिर से घुसपैठ की कोशिश की, इस बार चीनी सेना के करीब 500 सैनिकों ने लद्दाख के चुशूल के एक गांव के जरिए पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी इलाके को कब्जाने का प्रयास किया।लेकिन, वह अपनी इस कोशिश में सफल नहीं हो पाए।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control- LAC) पर चीन की घुसपैठ को रोकने और महत्वपूर्ण रणनीतिक पहाड़ियों को अपने कब्जे में लेने में “स्पेशल फ्रंटियर फोर्स” (Special Frontier Force- SFF) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • “स्पेशल फ्रंटियर फोर्स” को विकास बटालियन (Vikas Battalion) के नाम से भी जाना जाता है।
  • एसएफएफ भारतीय सेना का हिस्सा नहीं है लेकिन सेना के ऑपरेशन कंट्रोल के तहत ही काम करती हैं। इसकी अपनी रैंक व्यवस्था होती है।
  • इसका प्रमुख इंसपेक्टर जनरल (IG) होता है जो सेना के मेजर जनरल रैंक का सैन्य अधिकारी होता है।
  • साल 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के तुरंत बाद एसएफएफ यानी स्पेशल फ्रंटियर फोर्स का गठन किया गया था।
  • यह एक तरह से स्पेशल फोर्स थी, जिसमें उस समय तिब्बती सैनिकों को शामिल किया गया था।
  • हालांकि अब इसमें तिब्बतियों और गोरखाओं को शामिल किया जाता है, शुरुआती समय में इस फोर्स को 22 रेजिमेंट (टूटू रेजिमेंट)के नाम से जाना जाता था।
  • इसे 22 इसलिए कहा जाता था क्योंकि मेजर जनरल सुजान सिंह उबान इसे एसएफएफ की भूमिका में लेकर आए थे और वो 22 माउंटेन रेजिमेंट के तोपखाना अधिकारी थे।
  • यह फोर्स वर्तमान में कैबिनेट सचिवालय के तहत काम करती है।
  • महिलाएंभी एसएफएफ यूनिट का हिस्सा बनती हैं। इसके जवानों को अमेरिकी सेना के ‘ग्रीन बेरेट’ की तरह ट्रेनिंग दी जाती है।

1971 के युद्ध में एसएफएफ की भूमिका

  • 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में एसएफएफ ने अद्भुत प्रदर्शन किया था और ऑपरेशन ईगल (Operation Eagle) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था।
  • साल 1971 में एसएफएफ ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के चटगांव पहाड़ी इलाकों में पाकिस्तानी सेना के घुसपैठ के इरादों को मिट्टी में मिला दिया।
  • इसके अलावा 1984 मेंअमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्ल्यूस्टार में भी इसकी बड़ी भूमिका रही।

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चर्चित व्यक्तित्व

प्रीतम सिंह लोधी

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय मूल के प्रीतम सिंह लोधी ने सिंगापुर की संसद में विपक्ष के नेता का पद हासिल करके इतिहास रच दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु?

  • 43 वर्षीय प्रीतम सिंह की वर्कर्स पार्टी बीती दस जुलाई को हुए आम चुनावों में 93 में से दस सीटों पर जीत हासिल करके सबसे मजबूत विपक्षी दल के रूप में उभरी है।
  • सदन की नेता इंद्राणी राजा ने प्रीतम सिंह को सिंगापुर की संसद में विपक्ष के नेता का स्थान दिया है।

यह पहला मौका है जब किसी व्यक्ति को सदन में विपक्ष के नेता का स्थान दिया गया है।

  • अब तक विपक्षी दलों के शीर्ष नेता इस ज़िम्मेदारी का निर्वाहन किया करते थे लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत सिंगापुर में ब्रिटिश संसद की तरह नेता प्रतिपक्ष संसद की कार्यवाही में अपनी भूमिका निर्वाह करेगा।

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नियुक्ति/निर्वाचन

मुस्तफा अदीब

चर्चा में क्यों?

  • जर्मनी में लेबनान के राजदूत मुस्तफा अदीब (Mustapha Adib) को लेबनान का नया प्रधानमंत्री नामित किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • मुस्तफा अदीब को देश के प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी (Saad Al-Hariri) का राजनीतिक दल भी शामिल है, जो कि लेबनान का सबसे बड़ा सुन्नी राजनीतिक दल है।
  • उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री हसन दियाब ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हुए एक शक्तिशाली विस्फोट के बाद इस्तीफा दे दिया था, ज्ञात हो कि भयंकर विस्फोट के कारण लगभग 200 लोगों की मृत्यु हो गई थी और लगभग 6000 लोग घायल हुए थे।
  • बेरुत बंदरगाह के वेयरहाउस में लगभग 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट मौजूद था जिसमें आग लगने से यह विस्फोट हुआ।

लेबनान

  • लेबनान पश्चिम एशिया में भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित है।
  • लेबनान के उत्तर और पूर्व में सीरिया तथा दक्षिण में इज़राइल स्थित है।
  • इसकी राजधानी बेरुत है।
  • प्रथम विश्वयुद्ध के बाद से 1943 तक यह फ्रांस का उपनिवेश रहा।
  • स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद लेबनान लंबे समय तक गृहयुद्ध में भी जूझता रहा है।

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