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Daily Current Affairs 2 July 2021

भारत एवं विश्व

ओईसीडी/ जी 20 टैक्स संबंधी समावेशी समझौते में शामिल हुआ भारत

चर्चा में क्यों?

  • आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) /जी-20 के सदस्यों (भारत सहित) ने हाल ही में एक अहम घोषणापत्र को अपनाया है। सभी सदस्य इस बात पर सहमत थे कि अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण के कारण टैक्स चुनौतियों का समाधान किया जाना चाहिये।

आवश्यकता क्यों?

  • भारत समेत लगभग 130 देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा समर्थित वैश्विक न्यूनतम कर पर सहमति जताई है।
  • इस समझौते पर भारत चीन जैसी आर्थिक महाशक्तियों के साथ बरमुडा और केमन आइलैंड जैसे टैक्स हैवेन देशों ने भी दस्तखत किए हैं।
  • इसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कम दरों वाले देशों में अपने मुनाफे को स्थानांतरित करके कर देनदारी से बचने से रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर जारी प्रयास के बीच इन देशों ने कर लगाये जाने का समर्थन किया है।
  • समझौते में उन देशों में वैश्विक कंपनियों पर भी कर लगाने की बात कही गई है जहां वे ऑनलाइन कारोबार के जरिये मुनाफा कमाते हैं लेकिन भौतिक रूप से उनकी मौजूदगी नहीं है।

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन

  • 14 दिसंबर 1960 को, 20 देशों द्वारा मूल रूप से आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए थे।
  • जुलाई 2018 में लिथुआनिया की सदस्यता के साथ वर्त्तमान में इसके सदस्य दशों की कुल संख्या 36 है हो गई है।
  • इसका मुख्यालय पेरिस (फ़्राँस) में है।
  • विश्व भर में लोगों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण में सुधार लाने वाली नीतियों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना OECD का प्रमुख उद्देश्य है।
  • इसके सदस्य देश हैं- ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, चिली, चेक गणतंत्र, डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्राँस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आइसलैंड, आयरलैंड, इज़रायल, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, लक्जमबर्ग, लातविया, लिथुआनिया, मेक्सिको, नीदरलैंड, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्लोवाक गणराज्य, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • भारत इसका सदस्य नहीं है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहेगा पाकिस्तान

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force-FATF) की बैठक में पाकिस्तान को एफ़एटीएफ़ की ग्रे-लिस्ट में बनाए रखने का फैसला किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के पाकिस्तान 27 सूत्रीय कार्रवाई योजना को पूरी तरह से लागू करने में विफल रहा है।
  • हालांकि एफ़एटीएफ़ के अध्यक्ष के मुताबिक, पाकिस्तान को जो सुझाव दिए गए थे उनमें उसने काफी प्रगति की है और 27 में से 26 शर्तों को पूरा किया है। लेकिन अभी उसे आतंकवादियों को ज़िम्मेदार ठहराने और उन्हें सज़ा देने की दिशा में काम करना बाक़ी है।
  • एफ़एटीएफ़ ने आतंकवाद पर अंकुश लगाने को लेकर पाकिस्तान सरकार की प्रतिबद्धता की तारीफ की है।
  • हालांकि इस संस्था ने पाकिस्तान के प्रयासों को ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए नाकाफी माना है।
  • एफ़एटीएफ़ के अनुसार, पाकिस्तान ने अपनी क़ानूनी व्यवस्था में काफी सुधार किए हैं; लेकिन एशिया पेसिफ़िक ग्रूप की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए एफ़एटीएफ़ के अध्यक्ष ने कहा कि इसके बावजूद वो एफ़एटीएफ़ के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं कर पाया है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का गठन जुलाई 1989 में पेरिस में हुए जी 7 समिट में किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य मनी लांड्रिंग से निपटने हेतु उपाय करना था।
  • इसलिए इसे ग्लोबल फाइनेंशियल वॉचडॉग भी कहते हैं ।
  • इसका मुख्यालय पेरिस में है और इसमें कुल 39 सदस्य देश हैं।
  • सऊदी अरब 39 वें सदस्य के रूप में पहला खाड़ी देश है जिसे पिछले वर्ष इस संगठन का सदस्य बनाया गया था।

ग्रे लिस्ट

  • एफ़एटीएफ़ की ‘इन्क्रीज़्ड मॉनिटरिंग लिस्ट’ को ही ग्रे लिस्ट कहा जाता है।
  • एफ़एटीएफ़ द्वारा ग्रे लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है जो कि अपने देश के फाइनेंसियल सिस्टम को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उपयोग होने देते हैं।
  • इन्हें ग्रे लिस्ट में शामिल कर यह संकेत दिया जाता है कि इन गतिविधियों को ना रोकने पर वे ब्लैक लिस्ट हो सकते हैं।

ग्रे लिस्ट में शामिल होने का प्रभाव

  • अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों (विश्व बैंक, आईएमएफ , एशियाई विकास बैंक इत्यादि) और देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।

अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों और देशों से ऋण प्राप्त करने में समस्या आती है।

इसके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी आती है और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है।

पूर्णरूप से अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है।

ब्लैक लिस्ट

  • जो देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का पूर्ण और प्रत्यक्ष रूप से समर्थन करते हैं उन्हें ब्लैक लिस्ट में सूचीबद्ध किया जाता है; अर्थात इन देशों में मौजूद फाइनेंसियल सिस्टम की मदद से आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिलता है।

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