Daily Current Affairs 18 November 2020

राज्य: महाराष्ट्र

एशिया की पहली सौर ऊर्जा संचालित कपड़ा मिल

महत्वपूर्ण बिंदु

  • महाराष्‍ट्र के परभणी जिले में एशिया की पहली सौर ऊर्जा संचालित कपड़ा मिल खोली जाएगी।
  • जय भवानी महिला सहकारी कपड़ा मिल एशिया में पहली होगी जो सौर ऊर्जा पर काम करेगी।
  • तीस एकड़ भूमि में फैले इस मिल में कपास से कपड़ा बनने की प्रक्रिया होगी।
  • उल्लेखनीय है कि परभणी से ही बेहतरीन क्वालिटी का कपास खरीदा जाएगा।
  • परभणी महाराष्ट्र का प्रमुख कपास उत्पादक जिला है।
  • इसके अलावा, कपास का उत्पादन एक लाभदायक निवेश के रूप में देखा जाता है, जिसके कारण अधिकांश किसान यह फसल उगाते हैं।
  •  मिल में कपास का ओटना, दबाना, बुनाई, कताई आदि जैसे काम किया जाएगा। इस परियोजना की लागत 100 करोड़ रुपये हैI

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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

भारत सरकार और विश्व बैंक के बीच समझौता

चर्चा में क्यों?

  • निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (Department of Investment and Public Asset Management, दीपम) ने लोक उपक्रमों की परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण पर परामर्श सेवाएं लेने के लिए विश्वबैंक के साथ  एक समझौता किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • दीपम सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का क्रियान्वयन करने वाला विभाग है।
  • सरकार ने अपने रणनीतिक विनिवेश कार्यक्रम के तहत दीपम को लोक उपक्रमों की गैर-जरूरी परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण का काम सौंपा है।
  • इसका लक्ष्य भारत में लोक परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण का विश्लेषण करना है। इनके संस्थागत और कारोबारी मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना है। साथ में उन्हें परिचालन दिशानिर्देशों के विकास में मदद करना और इसे लागू करने की क्षमता निर्माण करना भी शामिल है।
  • परियोजना से लोक उपक्रमों की गैर-जरूरी परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण को तेज करने और इन बिना उपयोग या बहुत कम काम आने वाली परिसंपत्तियों के मूल्य का सही इस्तेमाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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रक्षा विकास एवं अनुसंधान

क्यूआरएसएएम प्रणाली का द्वितीय सफल उड़ान परीक्षण

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में क्यूआरएसएएम प्रणाली का द्वितीय सफल उड़ान परीक्षण किया गया। परीक्षण में, क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (Quick Reaction Surface-to-Air Missile (QRSAM) प्रणाली ने हवाई लक्ष्य का सटीक रूप से पता लगाया और सफलतापूर्वक लक्ष्य को तय समय में मार गिराया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह परीक्षण ओडिशा तट पर एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर में किया गया।
  • यह परीक्षण एक बार फिर से उच्च क्षमता वाले मानवरहित जेट हवाई लक्ष्य, जिसे बंशी कहा गया, के खिलाफ किया गया जो एक विमान के अनुरूप है।
  • QRSAM एक छोटी दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) प्रणाली है। इसे मुख्य रूप से DRDO द्वारा डिज़ाइन एवं विकसित किया गया है ताकि दुश्मन के हवाई हमलों से सेना के बख्तरबंद कतार को सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके।
  • संपूर्ण शस्त्र प्रणाली एक मोबाइल एवं गतिशील प्लेटफॉर्म से संबंधित है जो वायु सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है।
  • इसे सेना में शामिल करने के लिये डिज़ाइन किया गया है और इसकी रेंज 25 से 30 किमी. है।

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कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

गिद्ध कार्य योजना 2020-25

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने देश में 16 नवंबर 2020 को देश में गिद्धों के संरक्षण के लिये एक ‘गिद्ध कार्य योजना 2020-25’ (Vulture Action Plan 2020-25) शुरू की।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • इस कार्य योजना के तहत अगले पांच वर्षों में गिद्धों के संरक्षण पर 207 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च होंगे।
  • इसके तहत उत्तर प्रदेश के गोरखपुर सहित देश के पांच राज्यों में गिद्धों के नए ब्रीडिंग सेंटर की स्थापना सहित उनके रहवासों के संरक्षण आदि का काम किया जाएगा।
  • राज्य में गिद्धों के संरक्षण के लिए कम से कम एक संरक्षित क्षेत्र स्थापित करने की भी योजना बनाई है।
  • यह नए ब्रीडिंग सेटंर गोरखपुर (उप्र) के साथ त्रिपुरा, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में स्थापित होंगे।
  • इसके साथ ही भोपाल (मप्र), मूटा चिडियाघर (झारखंड), रानी (असम), राजाभातखावा (पश्चिम बंगाल) जूनागढ़ (गुजरात) आदि जगहों पर पहले सें संचालित ब्रीडिंग सेंटरों के संरक्षण की भी योजना बनाई है।

गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट

  • पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है, कुछ प्रजातियों में यह गिरावट 90% तक है।
  • भारत, 1990 के दशक के बाद से दुनिया में पक्षियों की आबादी में सबसे अधिक गिरावट वाले देशों में से एक है।
  • हालाँकि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय वर्ष 2006 से गिद्धों के लिये एक संरक्षण परियोजना चला रहा है, किंतु अब इस परियोजना को वर्ष 2025 तक बढ़ाकर न केवल उनकी संख्या में गिरावट को रोकना है बल्कि भारत में गिद्धों की संख्या को सक्रिय रूप से बढ़ाना है।

किस कारण विलुप्त होने की कगार पर हैं गिद्ध

  • गिद्धों की पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका है। वह पशुओं को दी जाने वाली दर्दनाशक दवा डाइक्लोफिनेक (Diclofenac) से इन की प्रजाति पर संकट उत्पन्न हो गया है।
  • पशुओं की मौत के बाद उनके मांस को खाने से उनकी किडनी फेल हो जाती है। इससे गिद्धों की भी मौत हो जाती है।
  • हालांकि पशुओं को दी जाने वाली इन दवाओं को प्रतिबंधित भी कर दिया गया, लेकिन मौजूदा वक्‍त में अभी भी ये दवाएं बाजार में चोरी छुपे बिक रही हैं।
  • यही वजह है कि नई कार्ययोजना में प्रत्येक में पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी।

भारत में पाई जाने वाली गिद्धों की नौ प्रजातियां

गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically-Endangered)श्रेणी

  • ओरिएंटल व्हाइट-बैक्ड (Oriental White-Backed)
  • स्लेंडर-बिल्ड (Slender-Billed)
  • लॉन्ग-बिल्ड (Long-Billed)
  • रेड-हेडेड (Red-Headed)

‘संकटग्रस्त’ (Endangered) श्रेणी

  • इजिप्टियन गिद्ध  (Egyptian)
  • यूरेशियन ग्रिफन (Eurasian Griffon)

निकट संकटग्रस्त (Near Threatened)श्रेणी

  • हिमालयन (Himalayan)
  • बियर्डड (Bearded)
  • सिनेरियस (Cinereous)

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लोनार झील: रामसर साइट घोषित

महत्वपूर्ण बिंदु

  • हाल ही में महाराष्ट्र के बुलढाणा ज़िले की लोनार झील (Lonar lake) को रामसर स्थल (Ramsar Site) घोषित किया गया है, महत्वपूर्ण बिंदु
  • इंटरनेशनल रामसर कन्वेंशन ऑन वेटलैंड्स (IRCW) द्वारा  लोनार झील को कंज़र्वेशन स्टेटस (Conservation Status) प्रदान किया गया है।
  • यह झील लोनार वन्यजीव अभयारण्य का भाग है।
  • यह नासिक ज़िले में  गोदावरी नदी के तट पर अवस्थित नंदुर मद्महेश्वर पक्षी अभयारण्य जिसे जनवरी 2020 में रामसर स्थल घोषित किया गया था, के बाद राज्य का दूसरा रामसर स्थल है।

लोनार झील

  • लोनार झील महाराष्ट्र के बुलढाणा ज़िले के लोनार में स्थित खारे एवं क्षारीय पानी वाली एक क्रेटर झील (Crater-Lake) है।
  • इसका निर्माण प्लीस्टोसीन काल (Pleistocene Epoch) में उल्कापिंड के गिरने से हुआ था।
  • यह 1.85 किमी. के व्यास एवं 500 फीट की गहराई वाली झील है जो बेसाल्टिक चट्टानों से निर्मित है।
  • यह एक अधिसूचित राष्ट्रीय भू-विरासत स्मारक (National Geo-heritage Monument) भी है।
  • इस झील में नॉन-सिम्बायोटिक नाइट्रोजन-फिक्सिंग माइक्रोब (Non-Symbiotic Nitrogen-Fixing Microbes) जैसे- स्लैकिया एसपी (Slackia SP), एक्टिनोपॉलीस्पोरा एसपी (Actinopolyspora SP)   जैसे सूक्ष्म जीवों और प्रवासी पक्षियों जैसे- शेल्डक,  ग्रेब, रूडी शेल्डक के रूप में समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है।

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रिपोर्ट/इंडेक्स

थोक मूल्य सूचकांक (WPI)

चर्चा में क्यों?

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा हाल ही में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए गए

महत्वपूर्ण बिंदु

  • थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में बढ़कर 1.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह इसका आठ महीने का उच्चस्तर है।
  • विनिर्मित उत्पाद महंगे होने से थोक मुद्रास्फीति बढ़ी है। सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 1.32 प्रतिशत पर और पिछले साल अक्टूबर में शून्य पर थी। फरवरी के बाद यह थोक मुद्रास्फीति का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। फरवरी में यह 2.26 प्रतिशत पर थी।
  • अक्टूबर में खाद्य वस्तुओं के दाम घटे, जबकि इस दौरान विनिर्मित उत्पाद महंगे हुए। अक्टूबर में खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 6.37 प्रतिशत रह गई।
  • सितंबर में यह 8.17 प्रतिशत के स्तर पर थी। समीक्षाधीन महीने में सब्जियों और आलू के दाम क्रमश: 25.23 प्रतिशत और 107.70 प्रतिशत बढ़ गए। वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं के दाम 2.85 प्रतिशत और खनिजों के दाम 9.11 प्रतिशत बढ़ गए।
  • अक्टूबर में विनिर्मित उत्पाद 2.12 प्रतिशत महंगे हुए। सितंबर में इनके दाम 1.61 प्रतिशत बढ़े थे। इस दौरान ईंधन और बिजली के दाम 10.95 प्रतिशत घट गए।
  • पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर में 7.61 प्रतिशत रही है।

 क्या है मुद्रास्फीति (Inflation): 

  • मुद्रास्फीति कीमतों के सामान्य स्तर में सतत् वृद्धि है। 
  • मुद्रास्फीति दर को मूल्य सूचकांक के आधार पर मापा जाता है, जो दो प्रकार के होते हैं-
  • थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index-WPI) 
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index-CPI)  

थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index-WPI):

  • यह भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला मुद्रास्फीति संकेतक (Inflation Indicator) है।
  • इसे वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के आर्थिक सलाहकार (Office of Economic Adviser) के कार्यालय द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • इसमें घरेलू बाज़ार में थोक बिक्री के लिये प्रथम बिंदु पर किये जाने-वाले (First point of bulk sale) सभी लेन-देन शामिल होते हैं।
  • वर्ष 2017 में अखिल भारतीय WPI के लिये आधार वर्ष को 2004-05 से संशोधित कर 2011-12 कर दिया गया है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिृश्य

इथियोपिया में युद्ध के हालात

चर्चा में क्यों?

  • इथियोपिया के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित प्रधानमंत्री अबी अहमद ने हाल ही में को सेना को टाइग्रे क्षेत्र (Tigray region) की क्षेत्रीय सरकार का सामना करने का आदेश दिया।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • सशस्त्र तिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) द्वारा देश के सैन्य अड्डों पर किए गए हमले से चिंता पैदा हो गई है कि अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले और शक्तिशाली देशों में से एक इथियोपिया में युद्ध फिर से शुरू हो सकता है।
  • प्रधानमंत्री अबी अहमद ने टेलीविज़न पर अपने एक संबोधन में घोषणा की कि उत्तरी टाइग्रे क्षेत्र की राजधानी मेकेले और दांशा शहर में रात भर हुए हमले में कई शहीद हो गए।
  • वहीं टीपीएलएफ दावा कर रहा है कि उसने इथियोपियाई सेना के अधिकारियों को पकड़ लिया और उन्हें मार डाला। दोनों देशों ने सीमा पर लंबे युद्ध के बाद 2018 में शांति समझौता किया था।
  • इथियोपिया ने बुधवार को टाइग्रे क्षेत्र में छह महीने के आपातकाल की घोषणा कर दी है। सरकार ने कहा है कि अवैध और हिंसक गतिविधियां देश की संप्रभुता के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।

टाइग्रेन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट

  • इथियोपिया की सैन्य तानाशाही सरकार के विरुद्ध टाइग्रे क्षेत्र में रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा करने के लिये एक सैन्य संगठन के रूप में टाइग्रेन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) की स्थापना वर्ष 1975 में की गई थी।
  • इस संगठन ने इथियोपिया की तत्कालीन सैन्य सरकार के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष किया और अंततः वर्ष 1991 में यह सैन्य तानाशाही सरकार को सत्ता से हटाने में कामयाब हो गया, जिसके बाद से इस संगठन को इथियोपिया में एक नायक के रूप में देखा जाने लगा।

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