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Daily Current Affairs 17 June 2021

समारोह/सम्मेलन

नाटो शिखर सम्मेलन: 2021

चर्चा में क्यों?

  • 14 जून 2021 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन नाटो शिखर सम्मेलन में नेताओं ने घोषणा करते हुए कहा कि चीन वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है और अंतर्राष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था को कमतर करने के लिए काम कर रहा है।
  • खास बात यह है शीत युद्ध के दौरान अक्सखर नाटो सम्मेतलन रूस के प्रतिपक्ष में खड़ा रहता था, लेकिन पहली बार नाटो सम्मे लन में चीन को बड़ा खतरा बताया गया है।
  • इसी पर जवाब देते हुए चीन ने कहा है कि वह शांति के लिए काम करता है और अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है।

क्या है नाटो?

  • नाटो यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देशों के मध्य एक सैन्य गठबंधन है।
  • नाटो की स्थापना 4 अप्रैल, 1949 को 12 संस्थापक सदस्यों द्वारा अमेरिका के वाशिंगटन में की गई थी।
  • यह एक अंतर- सरकारी सैन्य संगठन है। इसका मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में स्थित है।
  • वर्तमान में इसके सदस्य देशों की संख्या 30 है।
  • वर्ष 2017 एवं 2020 में क्रमश: मोंटेनेग्रो और उत्तरी मैसिडोनिया को सदस्य देश के रूप में शामिल किया गया है।

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खेल परिदृश्य

विनेश फोगाट ने जीता स्वर्ण पदक

चर्चा में क्यों?

  • भारत की स्टार पहलवान विनेश फोगाट ने हाल ही में को पोलैंड ओपन के 53 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता।
  • फाइनल में यूक्रेन की ख्रिस्टिना बेरेजा के खिलाफ उन्होंने एक भी अंक नहीं गंवाया और 8-0 से जीत दर्ज की।
  • विनेश का यह सत्र का तीसरा खिताब है, उन्होंने मार्च में माटियो पेलिकोन और अप्रैल में एशियाई चैम्पियनशिप का स्वर्ण पदक भी जीता था।
  • इस जीत से ऐसा लगता है कि विनेश टोक्यो ओलंपिक में शीर्ष वरीय पहलवान बन जाएंगी।
  • विनेश ने अपने ज्यादातर अंक ‘डबल-लेग अटैक’ से बनाए जबकि 2019 यूरोपीय रजत पदक विजेता बेरेजा पूरे मुकाबले में रक्षात्मक बनीं रहीं।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

अमेरिका और रूस की शिखर वार्ता

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच पहली शिखर वार्ता हाल ही में जिनेवा (स्विटजरलैंड) में संपन्न हो गई।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 16 जून 2021 को करीब चार घंटे तक चली वार्ता के दौरान दोनों नेताओं के बीच रूस और अमेरिका में तनाव के मुद्दों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
  • विश्व के दो शीर्ष नेताओं की बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित बैठक के साथ ही बाइडन का एक हफ्ते का यूरोपीय दौरा भी समाप्त हो गया।
  • दोनो नेता पहली शिखर वार्ता में इस बात पर राजी हुए कि दोनों देश अपने-अपने राजदूतों को एक दूसरे की राजधानियों में वापस भेजेंगे।
  • गौरतलब है कि तल्खी के बीच दोनों देशों ने अपने-अपने राजदूतों को इस साल के शुरू में बुला लिया था।
  • मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने एक साझा बयान भी जारी किया जिसके केंद्र में परमाणु अप्रसार का मु्द्दा था।
  • बयान में कहा गया, “परमाणु युद्ध कभी नहीं जीते जा सकते और कभी नहीं होने चाहिए।”
  • साझा बयान में कहा गया कि ‘तनाव के बावजूद’ साझे लक्ष्यों पर प्रगति हुई।
  • दोनों नेताओं ने कहा, “निकट भविष्य में अमेरिका और रूस ‘रणनीतिक स्थिरता विमर्श’ शुरू करेंगे जो गहन और सुविचारित होगा।”
  • इस बयान में हथियारों पर नियंत्रण खतरे कम करने के उपायों के लिए काम शुरू करने पर भी सहमति जताई गई।
  • न्यू स्टार्ट समझौते की समयसीमा को बढ़ाकर पांच साल, यानी 2024 तक करने का फैसले का रूस ने स्वागत किया है।
  • न्यू स्टार्ट समझौता 2010 में हुआ था जिसके तहत रणनीतिक परमाणु हथियारों, मिसाइलों और बमवर्षकों की एक संख्या तय कर दी गई थी।
  • इसके तहत अमेरिका और रूस 1550 से ज्यादा हथियार तैनात नहीं कर सकते।

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योजना/परियोजना

डागमारा पनबिजली परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • सार्वजनिक क्षेत्र की जल-विद्युत कंपनी एनएचपीसी ने हाल ही में बिहार राज्य जल विद्युत निगम लिमिटेड (BHPC) के साथ राज्य में 130.1 मेगावाट क्षमता की डागमारा पनबिजली परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किये।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • बिजली मंत्रालय के बयान के अनुसार एनएचपीसी ने बिहार में 130.1 मेगावाट क्षमता की डागमारा पनबिजली परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को बीएसएचपीसी के साथ सहमति पत्र पर दस्तखत किये।
  • सहमति पत्र पर एनएचपीसी की तरफ से एनएचपीसी के निदेशक (परियोजना) बिश्वजीत बसु और बीएसएचपीसी के प्रबंध निदेशक आलोक कुमार ने बिहार सरकार की ओर से हस्ताक्षर किए।
  • बिहार के सुपौल जिले में कोसी नदी पर बनने वाली 126 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली डगमारा परियोजना का निर्माण कोसी बराज से 31 किलोमीटर की दूरी पर प्रस्तावित किया गया है।
  • कई बार विवादों में उलझी इस परियोजना का सर्वेक्षण पूर्व में ही पूरा किया जा चुका है।
  • यह परियोजना कोसी क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में जिला आत्म निर्भर बनेगा। साथ ही बाढ़ व सिंचाई सहित कई समस्याओं का भी समाधान होगा।

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सिल्वरलाइनपरियोजना

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केरल राज्य मंत्रिमंडल ने ‘सिल्वरलाइन’ परियोजना के लिये भूमि अधिग्रहण को मंज़ूरी दे दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस परियोजना के अंतर्गत राज्य के राजधानी ‘तिरुवनंतपुरम’ को कासरगोड के उत्तरी हिस्से से जोड़ने के लिये राज्य में एक सेमी हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण किया है।
  • यह रेलवे लाइन तकरीबन 45 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 11 स्टेशनों के माध्यम से राज्य के 11 ज़िलों को जोड़ा जाएगा।
  • इस परियोजना के पूरा होने से कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक की यात्रा चार घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी।
  • केरल रेल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRDCL) द्वारा इस परियोजना को वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • ‘केरल रेल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ केरल सरकार और केंद्रीय रेल मंत्रालय के बीच एक संयुक्त उद्यम है।
  • ‘सिल्वरलाइन’ परियोजना के माध्यम से राज्य की मौजूदा रेलवे अवसंरचना के भार को कम किया जा सकेगा, साथ ही इसके माध्यम से राज्य के निवासियों को तीव्र सार्वजानिक परिवहन सुविधा उपलब्ध की जा सकेगी।
  • इससे सड़कों पर भीड़भाड़ कम होगी और हादसों एवं मौतों की संख्या को भी कम किया जा सकेगा।

 

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