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Daily Current Affairs 17 July 2021

राष्ट्रीय परिदृश्य

आईटी एक्ट-66 A

चर्चा में क्यों?

  • गृह मंत्रालय ने हाल ही में सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के सभी पुलिस स्टेशनों को निरस्त आईटी एक्ट-66 A के तहतमामले दर्ज न करने का निर्देश दें।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उल्लेखनीय है कि 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को निरस्त कर दिया था लेकिन कई राज्यों में पुलिस इसी धारा में मामले दर्ज कर रही थी। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी भी जताई और कड़ी टिप्पणी भी की। इसके बाद ही भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने यह आदेश जारी किया है।

क्या थी धारा 66 ए?

  • दरअसल हाल के कुछ बरसों में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट करने पर जिस धारा में प्रशासन और पुलिस लोगों पर मुकदमा दर्ज कर रही थी, वो धारा 66 ए ही था।
  • इसमें सोशल मीडिया और आनलाइन पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी करना कानून के दायरे में आता था, लेकिन इसकी परिभाषा गोलमोल थी, जिससे इसका दायरा इतना बढ़ा हुआ था कि अगर पुलिस-प्रशासन चाहे तो हर आनलाइन पोस्ट पर गिरफ्तारी हो सकती थी या एफआईआर हो सकती थी. ये धारा सूचना-प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इसे निरस्त क्यों किया था ?

  • वर्ष 2015 में जब सुप्रीम कोर्ट ने इसे निरस्त किया तो उसका मानना था कि ये धारा संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) यानि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी का हनन है।
  • कोर्ट ने तब धारा को शून्य करार दिया था। इससे पहले धारा 66 ए के तहत आनलाइन तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने पर 03 साल की सजा का प्रावधान था।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

यूरोप में बाढ़ की त्रासदी

चर्चा में क्यों?

  • जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड्स समेत पश्चिमी यूरोप के कई देशों में लगातार बारिश के बाद बाढ़ आने से कम से कम 120 लोगों की मौत हो गई है जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • बताया जा रहा है कि यूरोप के इस हिस्से में दशकों में पहली बार इस तरह की भयानक बाढ़ आई है।
  • रिकॉर्ड बारिश के कारण नदियों के तटबंध टूट गए हैं और बारिश का पानी शहरों बेहद तेज गति के साथ शहरों में घुस आया है।
  • जर्मनी में राइनलैंड-पैलाटिनेट और नॉर्थ राइन-वेस्टफालिया सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं।
  • जर्मनी और बेल्जियम के समीप दक्षिणी पुर्तगाली शहर वाल्केनबर्ग में भी बाढ़ के खराब स्थिति है। यहां रातों-रात एक देखभाल गृह और एक धर्मशाला को खाली कराया गया। दक्षिणी प्रांत लिम्बर्ग में तो कई मकान बाढ़ की चपेट में हैं।

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सिलिकान शील्ड

चर्चा में क्यों?

  • चीन और ताइवान में लगातार तनाव बढ़ रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि इस पर अधिपत्य करने के लिए चीन इस पर आक्रमण भी कर सकता है। इसी तनाव के बीच एक शब्द ” सिलीकान शील़्ड” चर्चा में है। कहा जा रहा है कि इस एक वजह से चीन ताइवान पर हमला नहीं कर सकता।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • चीन और ताइवान के बीच 1949 से विवाद चला आ रहा है जिसकी वजह से ताइवान की पहुंच अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक नहीं है और उसे सीमित अंतरराष्ट्रीय मान्यता ही मिली हुई है। दुनिया के सिर्फ 15 देश ही ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र मानते हैं।
  • वहीं, चीन इसे अपने से अलग हुआ हिस्सा और एक विद्रोही प्रांत मानता है। साल 2005 में चीन ने अलगाववादी विरोधी क़ानून पारित किया था जो चीन को ताइवान को बलपूर्वक मिलाने का अधिकार देता है।
  • उसके बाद से यदि ताइवान अपने आप को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करता है तो चीन की सेना उस पर हमला कर सकती है। लेकिन कई साल के तनाव और धमकियों के बाद ताइवान ने एक रणनीति खोज ली है जिससे वो चीन के हमले से बचता रहा है। इसे ही सिलीकॉन शील्ड कहा जा रहा है।

क्या है ये रणनीति?

  • ताइवान की ये रणनीति ‘सिलिकॉन शील्ड’ की तरह काम करती है। ताइवान के लिए ये एक तरह का ऐसा ‘हथियार’ है जिसे कोई और देश निकट भविष्य में आसानी से नहीं बना सकता है।
  • ये ताइवान का एक अहम उद्योग है जिसपर लड़ाकू विमानों से लेकर सोलर पैनल तक और वीडियो गेम्स से लेकर मेडिकल उपकरण उद्योग तक निर्भर हैं।
  • पत्रकार क्रेग एडिशन ने अपनी किताब ‘सिलिकॉन शील्ड- प्रोटेक्टिंग ताइवान अगेंस्ट अटैक फ्रॉम चाइना’ के शीर्षक में ये शब्द गढ़ा है।
  • क्रेग एटिशन कहते हैं, “इसका मतलब ये है कि ताइवान दुनिया भर में एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स का अग्रणी उत्पादक है और इसी वजह से चीन की सेना उसके ख़िलाफ़ हमला नहीं कर पाती है”।
  • क्रेग के मुताबिक़ दुनिया के इस सेक्टर में युद्ध का असर इतना व्यापक होगा कि चीन को भी इसकी भारी आर्थिक क़ीमत चुकानी पड़ेगी। ये युद्ध चीन को इतना महंगा पड़ सकता है कि चीन हमला करने से पीछे हटेगा।
  • दुनिया के बाकी देशों की तरह चीन भी ताइवान में बनने वाली एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स पर निर्भर है। ये ऐसे ख़ास चिप होते हैं जिनपर सेमीकंडक्टर सर्किट बनाए जाते हैं। ये चिप सिलिकॉन से बने होते हैं। दुनिया के लगभग सभी तकनीकी उत्पादों की जान इन्हीं चिप्स में बसती है।

ये ताइवान की सुरक्षा कैसे कर सकती हैं?

  • इसे शीत युद्ध के दौरान के ‘मैड सिद्धांत’ (एमएडी यानी म्युचुअल एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन जिसका मतलब हुआ कि दोनों का बर्बाद होना सुनिश्चित है) से समझा जा सकता है।
  • ताइवान की खाड़ी में सैन्य कार्रवाई का असर इतना व्यापक हो सकता है कि चीन या अमेरिका भी उससे बचे नहीं रह सकेंगे।
  • ऐसे में ये ‘सिलिकॉन शील्ड’ असरदार तरीके से ताइवान को चीन की सेना के हमले से सुरक्षित रखती है। (स्रोत:बीबीसी हिंदी)

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निधन

दानिश सिद्दीकी

  • अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय फोटो पत्रकारदानिश सिद्दीकी की हत्या कर दी गई है।
  • दानिश सिद्दीकीअफगान सुरक्षा बलों के साथ एक रिपोर्टिंग असाइनमेंट कर रहे थे और उसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई।
  • वह न्यूज एजेंसी रायटर्स की ओर से अफगानिस्तान में तैनात थे।

रोहिंग्या कवरेज के लिए मिला था पुलित्जर

  • दानिश सिद्दीकी को उनके बेहतरीन काम के लिए पत्रकारिता का प्रतिष्ठित पुलित्जर अवॉर्ड भी मिला था।
  • दानिश सिद्दीकी ने रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या को अपनी तस्वीरों से दिखाया था। ये तस्वीरें देखकर लोगों को रोहिंग्या संकट की गंभीरता का अंदाजा लगा था। 2018 में उनकी टीम को पुलित्जर अवॉर्ड मिला था।

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राज्य परिदृश्य

उत्तराखंड: महालक्ष्मी किट योजना

चर्चा में क्यों?

  • उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महालक्ष्मी किट योजना का शुभारंभ किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • योजना के तहत प्रसवोपरांत मातृ व कन्या शिशु के पोषण और अतिरिक्त देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रथम दो बालिकाओं/जुङवा बालिकाओं के जन्म पर माता और नवजात कन्या शिशु को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट उपलब्ध कराई जा रही है।
  • करीब साढ़े तीन हजार रुपये मूल्य की इस किट में माता के लिए बादाम, छुआरा, साड़ी, सूट, स्कार्फ, बेडशीट, हैंडवाश, साबुन, मौजे, नेलकटर आदि सामग्री दी जाएगी।
  • बेटी के लिए सूती कपड़े, तौलिया, कंबल, रबरशीट, तेल, साबुन आदि सामग्री दी जाएगी। परिवार में दो बेटियां को यह किट दी जाएंगी। किट के साथ टीकाकरण से संबंधित संदेश भी मिलेगा।
  • यह योजना आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित की जाएगी।
  • मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना के तहत पूरे राज्य के सभी जिलों में कुल 16929 लाभार्थियों को पहले चरण में लाभान्वित किया गया है।
  • वर्ष भर में 50 हजार से अधिक लोगों को इसका लाभ दिया जाना है।

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मोबाईल गवर्नेंस

उमंग एप

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उमंग (Unified Mobile Application for New-age Governance- UMANG) एप में मैप सेवाओं को सक्षम किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उमंग मोबाइल एप भारत सरकार का एकल, एकीकृत, सुरक्षित, मल्टी-चैनल, मल्टी-प्लेटफॉर्म, बहुभाषी, मल्टी-सर्विस मोबाइल एप है।
  • इस एप के माध्यम से अपने आस पास के स्थान पर उपलबंध सरकारी सुविधाओं, जैसे मंडियाँ, ब्लड बैंक आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  • इसके साथ ही इसे मैप माई इंडिया द्वारा निर्मित भारत के सबसे विस्तृत और संवादात्मक सड़क और ग्राम स्तर के नक्शों पर भी देखा जा सकेगा।
  • यह ‘डिजिटल इंडिया’ से जुड़ी एक पहल है।
  • यह केंद्र तथा राज्य के विभिन्न संगठनों के उच्च प्रभाव वाली सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है। वर्तमान में इसकी 2000+ सेवाएँ हैं।
  • ‘उमंग’ का उद्देश्य भारत में मोबाइल गवर्नेंस को फास्ट ट्रैक करना है।
  • यह एप भारत सरकार की तमाम नागरिक सेवाओं जैसे- स्वास्थ्य देखभाल, वित्त, शिक्षा, आवास, ऊर्जा, कृषि, परिवहन से लेकर उपयोगिता और रोज़गार एवं कौशल तक तक आसान पहुँच प्रदान करके नागरिकों के लिये ‘ईज ऑफ लिविंग’ को सक्षम बनाता है।
  • ‘उमंग’ के प्रमुख साझेदार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना से जुड़े विभाग, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, स्वास्थ्य मंत्रालय, शिक्षा, कृषि, पशुपालन और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) हैं।
  • उमंग एप को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीज़न (National e-Governance Division- NeGD), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया था।

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पर्यवरण एवं पारिस्थितिकी

पर्यावरण के लिए संकट बनती गोल्ड फिश

चर्चा में क्यों?

  • गोल्डफिश यानी कैरेसियस ऑराटस हाल के सालों में दुनिया भर की नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों में मौजूद जलीय जीव प्रजातियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • एक्वेरियम में नन्ही-सी दिखने वाली ये मछली बाहर की दुनिया में फुटबॉल की गेंद तक का आकार ले सकती हैं और इनका वजन दो किलो तक बढ़ता है।
  • आकार और वजन की बात छोड़ दें तो गोल्डफिश की प्रकृति अन्य मछलियों पर हमलावर रहने की है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ख़तरा बन जाती हैं।
  • अमेरिका के मिनेसोटा प्रांत में अधिकारियों ने लोगों से इन मछलियों को झीलों और नदियों में नहीं छोड़ने की अपील की है।
  • केले झील में गोल्डफिश की बहुत बड़े आकार की मछलियां देखने के बाद सरकारी अधिकारियों ने इसे हमलावर प्रजाति की मछली करार दिया है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार गोल्डफिश सबसे पहले चीन में पाया गया था और बाद में पूरी दुनिया में फैल गया।
  • ये मूलतः मांसाहारी मछलियां हैं. जहां दूसरी मछलियां मच्छरों का लार्वा खाती (इसलिए इन्हें प्राकृतिक कीटनाशक कहते हैं) हैं, वहीं गोल्डफिश का प्रमुख आहार इन मछलियों के अंडे हैं।
  • गोल्डफिश भोजन की तलाश में एक ऐसा तरीका अपनाती है जिससे जल स्रोत के निचले सतह में काफी हलचल होती है, इससे दूसरी समस्या पैदा होती है। पानी के नीचे मौजूद कीचड़ ऊपर आने लगता है और उस जगह पर मौजूद पोषक तत्व तैरने लगता है।
  • इससे गोल्डफिश को खाना तो मिल जाता है लेकिन वहां शैवाल बनने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।
  • नदियों, झीलों या अन्य जल स्रोतों में गोल्डफिश को फेंकने से वहां पहले से मौजूद मछलियों पर उन बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है जिनसे वो अनजान होती हैं।

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