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Daily Current Affairs 16 June 2021

रिपोर्ट/इंडेक्स

भारत में पर्यावरण की स्थिति रिपोर्ट 2021

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों की ओर से 2015 में 2030 एजेंडा के रूप में अपनाए गए 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDG) पर पिछले साल की तुलना में दो पायदान फिसलकर भारत 117 वें स्थान पर आ गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ‘भारत में पर्यावरण की स्थिति रिपोर्ट 2021’ में सामने आया कि पिछले साल भारत का स्थान 115 था और अब वह दो स्थान और नीचे चला गया है।
  • ऐसा मुख्यत: इसलिए हुआ है कि भुखमरी समाप्त करने और खाद्य सुरक्षा हासिल करने (SDG-2), लैंगिक समानता हासिल करने (SDG-5) और लचीली अवसंरचना का निर्माण, समावेशी एवं सतत औद्योगिकीकरण तथा नवोन्मेष को बढ़ावा देना (SDG-9) जैसी बड़ी चुनौतियां अब भी देश के सामने हैं।
  • रिपोर्ट में बताया गया कि भारत का स्थान चार दक्षिण एशियाई देशों – भूटान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से नीचे है। भारत का कुल एसडीजी स्कोर 100 में से 61.9 है।
  • राज्यवार तैयारियों के बारे में रिपोर्ट में कहा गया कि झारखंड और बिहार 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सबसे कम तैयार हैं।
  • झारखंड पांच लक्ष्यों में पीछे है जबकि बिहार सात में।
  • जो राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश अच्छे स्कोर के साथ इन लक्ष्यों को पाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं वे हैं- केरल, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़।
  • सतत विकास के लिए 2030 के एजेंडा को संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने 2015 में स्वीकार किया था, जो लोगों और धरती के लिए अभी और भविष्य के लिये शांति एवं समृद्धि की रूप-रेखा उपलब्ध कराता है।
  • भारत पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक के लिहाज से 180 देशों में से 168वें स्थान पर है। यह पर्यावरणीय सेहत, जलवायु, वायु प्रदूषण, स्वच्छता एवं पेयजल, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं, जैव विविधता आदि जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर तय किया जाता है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय रेलवे ने पश्चिमी ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (Western Dedicated Freight Corridor- WDFC) पर रेवाड़ी-मदार खंड(Rewari – Madar section) में स्थित न्यू रेवाड़ी (हरियाणा) से न्यू फुलेरा (राजस्थान) तक वाहनों और उपकरण से भरी सैन्य ट्रेनों को चलाकर सफल परीक्षण किया।
  • इसने सशस्त्र बलों को जुटाने की क्षमता बढ़ाने में अपनी प्रभावकारिता साबित की।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ऑफ इंडिया’ (DFCCIL) के अनुसार पहला परीक्षण रेलवे के डिब्बों पर किया गया जबकि दूसरा परीक्षण सैन्य ट्रेन के डिब्बों पर किया गया और दोनों परीक्षणों में भारी उपकरण लादे गए थे।
  • इस सफलतापूर्वक परीक्षण के बाद, सैन्य उपकरण सिर्फ 24 घंटे में कोलकाता से लुधियाना भेजे जा सकते हैं और ट्रेनों की गति 65 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी।”
  • आम तौर पर इस तरह की ट्रेनें हर 150 किलोमीटर पर उसपर सवार कर्मचारियों के लिए रूकती हैं, क्योंकि रास्ता लंबा होता है, लेकिन डीएफसी पर कोई ट्रेन इस तरह नहीं रुकेगी।

क्या हैं डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर?

  • डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Rail Freight corridor -DRFC),भारतीय रेलवे की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसके तहत भारत में रेल के द्वारा मालवाहन को अधिक सक्षम, तेज और सुगम बनाया जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • इस परियोजना में नई रेल लाइनों के विकास का लक्ष्य है। जिसके ऊपर सिर्फ मालगाडि़यां ही चलेंगी यानि मालवाहक रेल लाइनों व यात्री रेल लाइनों दोनों को एक दूसरे से अलग करने की योजना है।
  • इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कार्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड’ (Dedicated Freight Corridor Coporation of India Limited -DFCCIL) की है जो कि रेल मंत्रालय के तहत एक निकाय है।
  • दरअसल डीएफ़आरसी (DRFC) को ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत शुरू किया गया था जिसमें दो नये मालढुलाई गलियारों की बात कही गई थी।
  • प्रथम गलियारे का नाम ‘ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (Eastern Dedicated Freight Corridor- EDFC) और दूसरे गलियारे का नाम ‘वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (Western Dedicated Freight Corridor- WDFC) है।
  • जहां पूर्वी गलियारा पंजाब के लुधियाना को पश्चिम बंगाल के दानकुनी से जोड़ता है वहीं पश्चिमी गलियारा उत्तर प्रदेश के दादरी को महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित जवाहर लाल नेहरू पोर्ट से जोड़ता है।
  • पूर्वी गलियारा लगभग 1856 किलोमीटर लम्बा तथा पश्चिमी गलियारा लगभग 1504 किलोमीटर लम्बा है।
  • इसके साथ ही भारत में डीएफ़आरसी(DRFC) को एक स्वर्णिम चतर्भुज की तरह भी जोड़ने की बात कही गई है। जिसमें भारत के चार बड़ें शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को भी जोड़ने की बात कही गई है। इन परियोजनाओं में ईस्ट-वेस्ट डीएफ़आरसी( East-West DRFC) के तहत कोलकाता को चेन्नई से तथा नार्थ-साउथ डीएफ़आरसी (North-South DRFC )के तहत दिल्ली को चेन्नई से जोड़ने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के लिये साउथ-वेस्ट डीएफ़आरसी (South-West DRFC) के तहत चेन्नई को गोवा से व खड़गपुर को विजयवाड़ा से जोड़ने का प्रस्ताव भी 2018 में पारित कर दिया गया है।

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कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

संयुक्त राष्ट्र में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे पर उच्च-स्तरीय संवाद

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने ‘मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे पर संयुक्त राष्ट्र के उच्च-स्तरीय संवाद’ में संबोधन दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की ‘मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे पर उच्च स्तरीय संवाद’ में अपना मुख्य संबोधन दिया है।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने ‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन’ (United Nations Convention to Combat Desertification- UNCCD) के सभी पक्षों के 14वें सत्र के अध्यक्ष के रूप में प्रारंभिक सत्र को संबोधित किया है।
  • भूमि को जीवन और आजीविका का मूलभूत हिस्सा बताते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने भूमि और उसके संसाधनों पर अत्यधिक दबाव को कम करने का आह्वान किया है।

संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन’ (UNCCD)

  • ‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन’ (UNCCD), संयुक्त राष्ट्र के तीन रियो समझौतों में से एक है।
  • भारत ने इससे संबंधित समझौते पर 14 अक्टूबर, 1994 को हस्ताक्षर किये थे।
  • इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मरूस्थलीकरण से निपटना तथा सूखे या मरूस्थलीकरण से जूझ रहे देशों में इसके प्रभाव को कम करना है।

यूएनसीसीडी की 14वीं सीओपी

  • यूएनसीसीडी की 14वीं सीओपी में दिल्ली घोषणापत्र-2019 को स्वीकार किया गया था।
  • यह सीओपी वर्ष 2019 में भारत में हुई थी।
  • इस सीओपी में भूमि की गुणवत्ता बहाली, सूखा, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और पानी की कमी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई थी।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

दक्षिणी महासागर: विश्व का पांचवां महासागर !

चर्चा में क्यों?

  • नेशनल जियोग्राफिक सोसायटी ने विश्व महासागर दिवस (8 जून) को एक पांचवे महासागर की घोषणा की है।
  • इस नए महासागर को “दक्षिणी महासागर” (southern ocean) नाम दिया है जो वास्तव में अंटार्कटिका के आसपास का महासागरीय इलाका है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह बहुत लंबे समय से विवाद का विषय रहा है कि क्या इस महासागरीय क्षेत्र को अलग नाम दिया भी जाए या नहीं। इसीलिए अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे अलग से महासागर घोषित नहीं किया जा सका है।
  • नेशनल जियोग्राफिक कहना है कि जब से 1915 से नक्शा बनने शुरू हुए हैं, तभी से दुनिया में केवल चार महासागरों की मान्यता दी जा रही है।
  • ये महासागर अटलांटिक, प्रशांत, हिंद और आर्कटिक महासागर हैं। लेकिन अब पत्रिका ने दक्षिणी महासागर को पांचवा महासागर कहा।
  • नैशनल जियोग्राफिक के मुताबिक यह महासागर अंटार्कटिका के तट से 60 डिग्री दक्षिण की ओर है और दूसरे देशों से किसी महाद्वीप नहीं बल्कि अपने करंट की वजह से अलग होता है। इसके अंदर आने वाले इलाका अमेरिका से दोगुना है।
  • इसमें डार्क पैसेज और स्कोटिया सागर शामिल नहीं होगा।

इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन (IHO) खारिज कर चुका है दावा

  • इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन (IHO) ने 1937 की गाइडलाइन्स में दक्षिणी महासागर को अलग माना था लेकिन 1953 में इसे बाहर कर दिया।
  • इसके बावजूद अमेरिका के जियोग्राफिक नेम्स बोर्ड ने 1999 से दक्षिणी महासागर नाम का इस्तेमाल किया है।
  • साल 1999 में नेशनल ओसियानिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOA) ने भी दक्षिणी महासागर को पांचवे महासागर के तौर पर पहचान दी थी।
  • लेकिन साल 2000 में इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन (IHO) इससे सहमत नहीं हुई।
  • आईएचओ ही सभी सागरों, महासागरों और संचालन पानी का सही तरीके से सर्वे करने के बाद उसका नक्शा बनाता है।
  • यह एक अंतर-सरकारी परामर्शदाता और तकनीकी संगठन है जिसे वर्ष 1921 में नेविगेशन की सुरक्षा एवं समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा का समर्थन करने के लिये स्थापित किया गया था। भारत भी IHO का सदस्य है।

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 ‘WISA वुडसैट

चर्चा में क्यों?

  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने हाल में घोषणा की है कि वह दिसंबर 2021 तक विश्व के पहले लकड़ी से निर्मित उपग्रह, ‘WISA वुडसैट’ को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस उपग्रह का मिशन अंतरिक्षयान संरचनाओं में प्लाईवुड जैसी लकड़ी की सामग्री की उपयोगिता का परीक्षण करना है और इस पर चरम अंतरिक्ष स्थितियों जैसे- गर्मी, ठंड, वैक्यूम और विकिरण आदि के प्रभाव का अध्य्यन करना है।
  • इसे न्यूज़ीलैंड के माहिया प्रायद्वीप प्रक्षेपण परिसर से ‘रॉकेट लैब इलेक्ट्रॉन’ नामक रॉकेट के साथ वर्ष 2021 के अंत तक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा। फिनलैंड में डिज़ाइन और निर्मित यह उपग्रह लगभग 500-600 किलोमीटर की ऊँचाई पर परिक्रमा करेगा।
  • ‘WISA वुडसैट’ एक 10x10x10 सेंटीमीटर नैनो उपग्रह है, जिसे प्लाईवुड से बने मानकीकृत बॉक्स और सतह पैनलों से बनाया गया है।
  • इसके तहत निर्माताओं ने लकड़ी से आने वाली वाष्प को कम करने और परमाणु ऑक्सीजन के क्षरणकारी प्रभावों से बचाने के लिये एक बहुत पतली एल्युमीनियम ऑक्साइड परत का भी उपयोग किया है।

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