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Daily Current Affairs 16 July 2021

चर्चित स्थान

रुद्राक्षअंतर्राष्ट्रीय सहयोग सम्मेलन केंद्र

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 186 करोड़ की लागत से बने ‘रुद्राक्ष’ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग सम्मेलन केंद्र का उद्घाटन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • विश्व के प्राचीनतम शहरों में से एक वाराणसी के सिगरा में इस रुद्राक्ष सेंटर को जापान की सहयोग से बनाया गया है।
  • इस सेंटर में इंडोजापान कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
  • यह कन्वेंशन सेंटर काशी-क्योटो प्रोग्राम के तहत जापान और भारत की दोस्ती का एक बेमिसाल नमूना है।
  • इसकी आकृति शिवलिंग के समान है।

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चर्चित पुस्तक

द लाइट ऑफ एशिया, द पोयम दैट डिफाइंड द बुद्धा

चर्चा में क्यों?

  • सर एडविन आर्नाल्ड ने गौतम बुद्ध के जीवन और संदेशों को केंद्र में रखकर एक पुस्तक लिखी थी ‘द लाइट आफ एशिया’ जो 1879 में लंदन से प्रकाशित हुई थी। यूरोप और अमेरिका में भी यह बेहद चर्चित हुई थी।
  • बाद के वर्षों में इस पुस्तक का दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद हुआ और इस पर आधारित फिल्में भी बनीं।
  • अब पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने एडविन आर्नाल्ड की पुस्तक के भारतीय समाज पर प्रभाव पर एक पुस्तक लिखी है, ‘द लाइट ऑफ एशिया, द पोयम दैट डिफाइंड द बुद्धा’।इस पुस्तक की प्रस्तावना दलाई लामा ने लिखी है।
  • जयराम रमेश ने अपनी इस पुस्तक में लिखा है कि एडविन आर्नाल्ड की पुस्तक ने विश्व के कम से कम 11 साहित्यिक व्यक्तित्वों को प्रभावित किया, जिनमें से पांच को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
  • इनमें रूडयार्ड किपलिंग, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, टीएस इलियट, डब्ल्यूबी येट्स जैसे लेखकों के अलावा लियो टालस्टाय और डीएच लारेंस जैसे विश्वप्रसिद्ध लेखक शामिल हैं।

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राज्य परिदृश्य

हरियाणा: गुरूग्राम में खुला देश का पहला ग्रेन एटीएम

चर्चा में क्यों?

  • देश का पहला ‘ग्रेन एटीएम’ गुरुग्राम में पायलट परियोजना के रूप में स्थापित किया गया है। और यह मशीन एक बार में पांच से सात मिनट के भीतर 70 किलो तक अनाज निकाल सकती है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रदेश सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहला एटीएम ग्रेन गुरुग्राम के फारूख नगर मंह स्थापित किया है, यह बैंक एटीएम की तर्ज पर काम करेगा। उपभोक्ता अपना अंगूठा (पंच कर) लगाकर यहां से अनाज प्राप्त कर सकेंगे।
  • यह एक ऑटोमैटिक मशीन है, जो बैंक एटीएम की तरह काम करती है। यूनाइटेड नेशन के व‌र्ल्ड फूड प्रोग्राम के तहत स्थापित मशीन को ऑटोमेटिड, मल्टी कमोडिटी, ग्रेन डिस्पेंसिग मशीन कहा गया है।

बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन

  • मशीन में लगी टच स्क्रीन के साथ एक बायोमेट्रिक मशीन लगी हुई है, जहां पर लाभार्थी को आधार या राशन कार्ड का नंबर डालना होगा।
  • बायोमेट्रिक से सुनिश्चित करने पर लाभार्थियों को सरकार की ओर से निर्धारित अनाज खुद मशीन के नीचे लगाए गए बैग में भरा जाएगा। इस मशीन के माध्यम से तीन तरह के अनाज गेहूं, चावल और बाजरा का वितरण किया जा सकता है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

इजरायल में खुला यूएई का दूतावास

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इजरायल के बीच रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने के परिणाम अब सामने आ रहे हैं।यूएई ने इजरायल के तेलअवीव में पहला दूतावास खोल दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • खाड़ी के किसी भी देश का अब तक इजरायल में कोई दूतावास नहीं था।
  • ईरान के असहज होने के बाद भी अमेरिका के प्रयासों से पिछले साल यूएई और बहरीन ने अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ संबंधों के सामान्य करने की शुरुआत की थी।
  • तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के सूडान और मोरक्को के साथ संबंध सामान्य करने में भी योगदान दिया।
  • इजरायल के यूएई में एक माह पहले दूतावास खोलने के बाद अब तेलअवीव के स्टाक एक्सचेंज में यूएई का दूतावास खोला गया है।

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निधन

सुरेखा सीकरी

  • अभिनय के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और कई फिल्मों और सीरियलों में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने वाली अभिनेत्री सुरेखा सीकरी (Surekha Sikri) का 16 जुलाई 2021 को सुबह कार्डिएक अरेस्ट से निधन हो गया है।
  • सुरेखा सीकरी 75 साल की थीं और पिछले दिनों उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था।
  • सुरेखा सीकरी ने नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से ऐक्टिंग में ग्रैजुएशन किया था। उन्हें फिल्म ‘तमस’, ‘मम्मो’ और ‘बधाई हो’ के लिए 3 बार नैशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।
  • नैशनल अवॉर्ड के अलावा 1989 में सुरेखा को संगीत नाटक अकैडमी अवॉर्ड भी मिला था।

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रिपोर्ट/इंडेक्स

सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2021

चर्चा में क्यों?

  • सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2021 (Sustainable Development Goals Report 2021) , हाल ही में न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में जारी की गई जिसमें दिखाया गया है कि कोविड-19 महामारी ने 2030 विकास एजेण्डा पर क्या असर डाला है.

महत्पूर्ण बिंदु

  • रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण दुनिया भर में लगभग 40 लाख लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 12 करोड़ लोग ग़रीबी और भुखमरी में धकेल दिये गए हैं। क़रीब साढ़े 25 करोड़ पूर्णकालिक रोज़गारों के बराबर कामकाज व आमदनियाँ भी ख़त्म हो गए हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव लियू झेनमिन ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, “महामारी ने विकास प्रगति के अनेक वर्ष या यूँ कहें कि दशक ही उलट दिये हैं या उन पर विराम लगा दिया है. वैश्विक स्तर पर अत्यन्त निर्धनता में, वर्ष 1998 के बाद पहली बार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।”
  • रिपोर्ट कहती है कि आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण, मानसिक व बाल स्वास्थ्य में बेहतरी लाने, टीकाकरण का दायरा बढ़ाने, और संचारी व ग़ैर-संचारी बीमारियाँ कम करने के क्षेत्र में, वर्षों की प्रगति के लिये जोखिम पैदा हो गया है।
  • लगभग 90 प्रतिशत देशों में अब भी ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं में एक या उससे ज़्यादा महत्वपूर्ण व्यवधानों की ख़बरें मिल रही हैं।

उच्चस्तरीय राजनैतिक फ़ोरम

  • संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने वर्ष 2015 में, 2030 विकास एजेण्डा स्वीकृत किया था जिसमें दुनिया भर के लोगों व पृथ्वी ग्रह के लिये, वर्तमान और भविष्य में, शान्ति व ख़ुशहाली का ब्लूप्रिण्ट मुहैया कराया गया है।
  • इस एजेण्डा के केन्द्र में 17 लक्ष्य हैं जिनके ज़रिये स्वास्थ्य और शिक्षा में बेहतरी लाना, विषमता कम करना, और आर्थिक वृद्धि तेज़ करना, व साथ-साथ जलवायु परिवर्तन का सामना करना और हमारे समुद्रों व वनों को सहेजकर रखना भी है।
  • वर्ष 2021 की एसडीजी रिपोर्ट, टिकाऊ विकास पर 13 जुलाई 2021 शुरू हुए उच्चस्तरीय राजनैतिक फ़ोरम के मौक़े पर जारी की गई है। ये फ़ोरम, 2030 के विकास एजेण्डा की समीक्षा करने और उसकी रफ़्तार पर नज़र रखने का प्रमुख यूएन मंच है।
  • ये उच्चस्तरीय बैठक 15 जुलाई तक चली, जिसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) ने किया।

आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC)

  • यह समन्वय, नीति समीक्षा, नीतिगत संवाद, आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर सिफारिशों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्यों के कार्यान्वयन हेतु प्रमुख निकाय है।
  • इसमें महासभा द्वारा तीन वर्ष की अवधि के लिये निर्वाचित 54 सदस्य होते हैं।
  • यह सतत् विकास पर बहस एवं अभिनव सोच के लिये संयुक्त राष्ट्र का केंद्रीय मंच है।
  • प्रतिवर्ष ECOSOC सतत् विकास के लिये वैश्विक महत्त्व की वार्षिक थीम के इर्द-गिर्द अपनी कार्य संरचना बनाता है। यह ECOSOC के साझेदारों एवं संपूर्ण संयुक्त राष्ट्र विकास प्रणाली पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र की 14 विशिष्ट एजेंसियों, दस कार्यात्मक आयोगों और पाँच क्षेत्रीय आयोगों के कार्यों का समन्वय करता है, नौ संयुक्त राष्ट्र निधियों और कार्यक्रमों से रिपोर्ट प्राप्त करता है तथा संयुक्त राष्ट्र प्रणाली व सदस्य राज्यों के लिये नीतिगत सिफारिशें जारी करता है।

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कृषि पर्यावरण एवं जैव विविधाता

आईयूसीएन की रेड लिस्ट में शामिल किए गए अफ्रीकी हाथी

चर्चा में क्यों?

  • धरती के सबसे विशालकाय जीवों में से एक अफ्रीकी हाथियों के ऊपर विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है। यही कारण है कि धरती से विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे जीवों की जानकारी देने वाली इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने जो नई रेड लिस्ट जारी की है उसमें अफ्रीकी हाथी को भी शामिल किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में बताया गया है कि अफ्रीकी हाथियों की दो प्रजातियां गंभीर रूप से लुप्तप्राय या लुप्तप्राय की श्रेणी में शामिल हैं।
  • आईयूसीएन के महानिदेशक ब्रूनो ओबेरले ने कहा कि हमें तत्काल अवैध शिकार पर रोक लगाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि जंगल और सवाना के दोनों हाथियों के लिए आवास का संरक्षण किया जाए।
  • आईयूसीएन ने कुछ अफ्रीकी देशों के काम की तारीफ भी की, जिन्होंने हाथियों के संरक्षण में अच्छा काम किया है। स्विट्जरलैंड की इस संस्था ने कहा कि सवाना के हाथी लुप्तप्राय श्रेणी में शामिल हैं, जबकि अफ्रीका के जंगली हाथी गंभीर रूप से लुप्तप्राय की सूची में हैं।
  • ऐसे जानवरों के निकट भविष्य में विलुप्त होने का खतरा ज्यादा होता है। पहले इन दोनों प्रजातियों के हाथियों को एक ही माना जाता था, लेकिन नए अनुवांशिकी प्रमाणों के बाद पहली बार दोनों प्रजातियों को अलग-अलग वर्गीकृत किया गया है।

31 साल में जंगली हाथियों की संख्या में 86 फीसदी की कमी

  • IUCN ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अफ्रीका के सवाना के हाथियों की आबादी पिछले 50 साल में कम से कम 60 फीसदी तक कम हुई है।
  • जबकि मध्य अफ्रीका में पाए जाने वाले जंगली हाथियों की तादाद पिछले 31 साल में 86 फीसदी तक कम हुई है। अब धरती पर केवल 415,000 अफ्रीकी हाथी ही रह गए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2008 के बाद से शिकार में तेजी आने से हाथियों की संख्या सबसे ज्यादा कम हुई है।

हाथियों के संरक्षण का प्रयास कर रहे ये देश

  • अफ्रीकी हाथियों की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी गेबोन और कांगो जैसे देश हाथियों के संरक्षण के लिए अच्छा प्रयास कर रहे हैं। इन देशों में हाथियों को सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के सरकारी अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इन हाथियों के संरक्षण के लिए जल्दी ही प्रयास शुरू नहीं किए तो एक दिन ऐसा आएगा जब इनकी पूरी प्रजाति ही खत्म हो जाएगी।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ

  • IUCN (The International Union for Conservation of Nature) सरकारों तथा नागरिकों दोनों से मिलकर बना एक सदस्यता संघ है।
  • यह दुनिया की प्राकृतिक स्थिति को संरक्षित रखने के लिये एक वैश्विक प्राधिकरण है जिसकी स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी।
  • इसका मुख्यालय स्विटज़रलैंड में स्थित है।
  • IUCN द्वारा जारी की जाने वाली लाल सूची दुनिया की सबसे व्यापक सूची है, जिसमें पौधों और जानवरों की प्रजातियों की वैश्विक संरक्षण की स्थिति को दर्शाया जाता है।
  • IUCN प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम का मूल्यांकन करने के लिये कुछ विशेष मापदंडों का उपयोग करता है। ये मानदंड दुनिया की अधिकांश प्रजातियों के लिये प्रासंगिक हैं।
  • इसे जैविक विविधता की स्थिति जानने के लिये सबसे उत्तम स्रोत माना जाता है।
  • यह SDG का एक प्रमुख संकेतक भी है।

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सांस्कृतिक परिदृश्य

उत्तराखंड का हरेला लोक पर्व

चर्चा में क्यों?

  • हरेला एक उत्तराखंड का एक लोक त्यौहार है जो मूल रूप से उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 16 जुलाई 2021 को मनाया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थालीनुमा पात्र या टोकरी का चयन किया जाता है।
  • इसमें मिट्टी डालकर गेहूँ, जौ, धान, गहत, भट्ट, उड़द, सरसों आदि 5 या 7 प्रकार के बीजों को बो दिया जाता है।
  • नौ दिनों तक इस पात्र में रोज सुबह को पानी छिड़कते रहते हैं। दसवें दिन इसे काटा जाता है। 4 से 6 इंच लम्बे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है।
  • घर की महिलाएं इन्हें परिवार के सदस्यों के सिर पर रखती हैं।
  • इसके मूल में यह मान्यता निहित है कि हरेला जितना बड़ा होगा उतनी ही फसल बढ़िया होगी।
  • श्रावण मास में मनाये जाने वाला हरेला सामाजिक रूप से अपना विशेष महत्व रखता तथा समूचे कुमाऊँ में अति महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक माना जाता है।

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