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Daily Current Affairs 15 June 2021

रिपोर्ट/इंडेक्स

ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) द्वारा विश्व के 140 शहरों के लिए “ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स (Global Liveability Index)” में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इंडेक्स के अनुसार विश्व के तीन सर्वश्रेष्ठ रहने लायक शहरों में ऑकलैंड (न्यूज़ीलैंड), ओसाका (जापान), एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया) शामिल हैं।
  • इस इंडेक्स में रहने के लिए तीन सबसे बदतर शहर हैं- दमिश्क (सीरिया), लागोस (नाइजीरिया), पोर्ट मोरेस्बी (पापुआ न्यू गिनी)

ऐसे दी जाती है रैंकिंग

  • इंडेक्स के तहत किसी विशेष शहर को पाँच श्रेणियों यथा- स्थायित्व (25%), संस्कृति एवं पर्यावरण (25%), स्वास्थ्य देखभाल (20%), शिक्षा (10%), आधारभूत अवसंरचना (20%) के आधार पर रैंकिंग प्रदान की जाती है।
  • कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष कुछ नए संकेतक जैसे स्वास्थ्य संबंधी संसाधनों पर तनाव और स्थानीय खेल आयोजनों, थिएटरों, संगीत समारोहों, रेस्तराँ और स्कूलों पर प्रतिबंध आदि को जोड़ा है।
  • इंडेक्स में किसी शहर में प्रमुख कारकों को स्वीकार्य (Acceptable), सहन करने योग्य (Tolerable), असुविधाजनक (Uncomfortable), अवांछनीय (Undesirable) या असहनीय (Intolerable) के रूप में मूल्यांकित किया जाता है।
  • एशिया-प्रशांत  क्षेत्र में ढाका (बांग्लादेश) और कराची (पाकिस्तान) सहित, जो पिछली रैंकिंग में दस सबसे कम रहने योग्य शहर थे इस वर्ष निचले दस स्थानों पर बने हुए हैं।

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट क्या है?

  • यह इकोनॉमिस्ट ग्रुप की अनुसंधान और विश्लेषण इकाई है।
  • यह अनुसंधान और विश्लेषण करके पूर्वानुमान और सलाहकार सेवाएं प्रदान करता है।

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समारोह/सम्मेलन

जी-7 शिखऱ सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ब्रिटेन के कॉर्नवॉल के कार्बिस बे के समुद्र तटीय रिसॉर्ट में दुनिया के सात समृद्ध देशों के समूह जी-7 का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • बैठक में शिनजियांग में वीगर मुसलमानों के मानवाधिकार हनन को लेकर जी-7 देशों के नेताओं ने चीन को फटकार लगाई।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 47वें जी-7 शिखर सम्मेलन 2021 के आउटरीच सत्र को संबोधित किया।
  • भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी “आउटरीच देशों” के रूप में शिखर सम्मेलन की कार्यवाही में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया गया था।
  • पिछला जी-7 शिखर सम्मेलन वर्ष 2019 में फ्रांस में हुआ था, पिछले वर्ष अमेरिका में होने वाले कार्यक्रम को महामारी के कारण रद्द कर दिया गया था।

डेमोक्रेसी 11 पर हस्ताक्षर

  • जी-7 और आउटरीच देशों द्वारा “खुले समाज” को लेकर एक संयुक्त बयान (डेमोक्रेसी 11) पर हस्ताक्षर किये गए।
  • यह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हेतु मूल्यों की पुष्टि और उन्हें प्रोत्साहित करता है, जो लोकतंत्र की रक्षा करता है और लोगों को भय और दमन से मुक्त रहने में मदद करता है।
  • यह बयान राजनीतिक रूप से प्रेरित इंटरनेट शटडाउन को स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिये खतरों में से एक के रूप में भी संदर्भित करता है।

कार्बिज़ बेघोषणा:

  • जी-7 देशों ने ‘कार्बिज़ बे’ घोषणा पर हस्ताक्षर किये। इसका उद्देश्य भविष्य की महामारियों को रोकना है।
  • जी-7 ने गरीब देशों को 1 बिलियन से अधिक कोरोनावायरस वैक्सीन खुराक देने का भी वादा किया।
  • गरीब देशों को कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने में मदद करने के लिये प्रति वर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अतिदेय व्यय प्रतिज्ञा को पूरा करने हेतु योगदान को बढ़ाने की प्रतिज्ञा को नवीनीकृत किया गया।
  • वर्ष 2030 तक जैव विविधता के नुकसान को रोकने और इसमें सुधार की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की गई।
  • वर्ष 2050 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन तक पहुँचने का संकल्प लिया गया।

क्या है ग्रुप ऑफ सेवन’ (जी-7)?

  • जी-7 दुनिया की सात सबसे बड़ी कथित विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमरीका शामिल हैं। इसे ग्रुप ऑफ़ सेवन भी कहते हैं।
  • समूह खुद को “कम्यूनिटी ऑफ़ वैल्यूज” यानी मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय मानता है।
  • स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतंत्र और क़ानून का शासन और समृद्धि और सतत विकास, इसके प्रमुख सिद्धांत हैं।
  • शुरुआत में यह छह देशों का समूह था, जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी।
  • इस बैठक में वैश्विक आर्थिक संकट के संभावित समाधानों पर विचार किया गया था।
  • 1976 में कनाडा इस समूह में शामिल हो गया और इस तरह यह जी-7 बन गया।
  • साल 1998 में इस समूह में रूस भी शामिल हो गया था और यह जी-7 से जी-8 बन गया था।
  • लेकिन साल 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया हड़प लेने के बाद रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया था।जी-7 का कोई औपचारिक संविधान या कोई निश्चित मुख्यालय नहीं है।
  • वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं द्वारा लिये गए निर्णय गैर-बाध्यकारी होते हैं।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

एनविज़न मिशन

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency- ESA) ने शुक्र ग्रह (Venus) के लिये एनविज़न मिशन (EnVision mission) की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इसे वर्ष 2030 तक लॉन्च किये जाने की संभावना है।
  • इसका उद्देश्य शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का अध्ययन करना तथा इसके वायुमंडल में पाई जाने वाली गैसों की निगरानी करना एवं ग्रह की सतही संरचना का विश्लेषण करना है।
  • एनविज़न मिशन शुक्र ग्रह के लिये ESA के नेतृत्व वाले वीनस एक्सप्रेस’ (2005-2014) नामक दूसरे मिशन का अनुसरण करेगा जो वायुमंडलीय अनुसंधान पर केंद्रित है और ग्रह की सतह पर ज्वालामुखीय हॉटस्पॉट के बारे में पता करेगा।

शुक्र ग्रह के लिए अन्य मिशन:

अमेरिका:

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी हाल ही में शुक्र के लिये दो नए रोबोटिक मिशन – डाविंसी प्लस (DAVINCI+) और वेरिटास (VERITAS) की घोषणा की है। इन्हें 2028-2030 के बीच लॉन्च किया जाएगा।
  • इसके अलावा मेरिनर शृंखला 1962-1974, पायनियर वीनस 1 और वर्ष 1978 में पायनियर वीनस 2, वर्ष 1989 में मैगलन आदि भेजे गए हैं।

रूस:

  • रूस द्वारा 1967-1983 में अंतरिक्षयानों की वेनेरा शृंखला और वर्ष 1985 में वेगास 1 तथा 2 भेजे गए।

जापान:

  • जापान का अकात्सुकी अंतरिक्षयान वर्ष 2015 से शुक्र ग्रह के वायुमंडल का अध्ययन कर रहा है।

भारत

  • भारत वर्ष 2024 में शुक्र के लिये शुक्रयान नामक एक ऑर्बिटर लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

नए अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपनी पहली व्यक्तिगत बैठक के दौरान वैश्विक चुनौतियों पर एक साथ काम करने के उद्देश्य से एक नए अटलांटिक चार्टर (The New Atlantic Charter) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जी 7 की बैठक में भाग लेने इंग्लैंड गए यात्रा पर थे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • जनवरी 2021 में सत्ता में आने के बाद बाइडन की यह पहली विदेश यात्रा है।
  • इस दौरान दोनों नेताओं ने द्वितीय विश्व युद्द के दौरान 1941 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट द्वारा हस्ताक्षरित अटलांटिक चार्टर के माध्यम से सहयोग को गहरा करने का वचन दिया था।
  • नए चार्टर में अवैध वित्त, हिंसक संघर्ष और उग्रवाद, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्वास्थ्य संकट जैसे कोविड-19 महामारी सहित आधुनिक समय के खतरों को रेखांकित किया गया है।
  • दोनों नेता हमारे देशों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोरोनावायरस के प्रसार को हराने में मदद करने वाली जानकारी साझा करना जारी रखने के लिए काम करने के लिए सहमत हुए।
  • बैठक के दौरान, बिडेन और जॉनसन ने उत्तरी आयरलैंड के मुद्दे पर अपने मतभेदों को दूर करने की भी कोशिश की, लेकिन अभी तक एक वास्तविक समाधान नहीं खोजा जा सका है।
  • नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि यूरोपीय संघ और यूके दोनों के पास एक साथ काम करने और उत्तरी आयरलैंड, ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड गणराज्य के बीच निर्बाध व्यापार की अनुमति देने के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने की जिम्मेदारी है।

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