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Daily Current Affairs 14 July 2021

राष्ट्रीय परिदृश्य

असम-मिजोरम सीमा विवाद

चर्चा में क्यों?

  • असम के कछार जिले में एक संदिग्ध आईईडी विस्फोट किए जाने के एक दिन बाद पड़ोसी राज्य की अंतर-राज्यीय सीमा पर एक के बाद एक दो विस्फोट हुए। इन विस्फोटों को असम-मिजोरम सीमा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • असम की बराक घाटी में पड़ने वाले जिलों कछार, करीमगंज और हैलाकांडी की 164 किमी सीमा मिजोरम के तीन जिलों आइजोल,कोलासीब और मामित से मिलती है।
  • क्षेत्रीय विवाद के बाद, अगस्त 2020 में और इस साल फरवरी में अंतरराज्यीय सीमा पर झड़पें हुई थी
  • नया विवाद तब हुआ जब हाल ही में मिजोरम से करीब 25 से 30 लोग खुलीचेरा सीआरपीएफ शिविर से 25 मीटर आगे आ गए और असम के भीतर जमीन का अतिक्रमण करने , वन मार्ग को साफ करने और सड़क निर्माण कार्य को रोकने की कोशिश की।

विवाद की पृष्ठभूमि

  • ब्रिटिश काल के दौरान मिज़ोरम को असम के ‘लुशाई हिल्स’ ज़िले के नाम से जाना जाता था।
  • असम-मिज़ोरम विवाद की जड़ें ब्रिटिश काल में पारित दो अधिसूचनाओं में निहित है।
  • पहली अधिसूचना वर्ष 1875 में जारी की गई, जिसके तहत ‘लुशाई हिल्स’ क्षेत्र को कछार के मैदानी इलाकों से अलग कर दिया गया।
  • दूसरी अधिसूचना वर्ष 1933 में जारी हुई और इसके तहत ‘लुशाई हिल्स’ तथा मणिपुर के बीच एक सीमा का सीमांकन किया गया।
  • मिज़ोरम का पक्ष है कि सीमा का सीमांकन वर्ष 1875 की अधिसूचना के आधार पर किया जाना चाहिये था, जो कि ‘बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन’ (BEFR) अधिनियम, 1873 के तहत जारी की गई थी।
  • यहां के लोग 1933 में अधिसूचित सीमांकन के विरुद्ध हैं, क्योंकि उनके अनुसार इस अधिसूचना के दौरान मिज़ो समाज से परामर्श नहीं किया गया था।
  • वहीं दूसरी ओर असम सरकार वर्ष 1933 के सीमांकन को अपना आधार मानती है।
  • परिणामस्वरूप दोनों राज्यों की अपनी-अपनी सीमा के बारे में अलग-अलग धारणा बनी हुई है और यही विवाद का मुख्य कारण है।
  • इस विवाद के निपटारे के लिए दोनों राज्यों के बीच समय-समय पर शासन स्तर पर वार्ता होती रहती है।

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भारत एवं विश्व

जार्जिया में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जॉर्जिया के विदेश मंत्री डेविड जलकालियानी के साथ मिलकर हाल ही में त्बिलिसी पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया।

मह्तवपूर्ण बिंदु

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर दो दिवसीय यात्रा पर जॉर्जिया पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने रूस की यात्रा संपन्न की है।
  • इस दौरान उन्होंने जॉर्जिया के प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की और आर्थिक सहयोग, पर्यटन, व्यापार और दोनों देशों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए लंबी बातचीत की।
  • अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 17वीं सदी की जॉर्जिया की महारानी संत केतेवन के अवशेष यहां की सरकार को सौंपे हैं।
  • संत महारानी केतेवन (St Queen Ketevan) 17वीं सदी में जॉर्जिया की महारानी थीं। जिन्होंने शहादत प्राप्त की थी।
  • पुर्तगीज रिकॉर्ड के आधार पर उनके अवशेष 2005 में गोवा के संत ऑगस्टिन कॉन्वेंट में मिले थे। ऐसा कहा जाता है कि इन्हें साल 1627 में यहां लाया गया था।

जॉर्जिया यात्रा का कूटनीतिक महत्व

  • विदेश मंत्री की जॉर्जिया यात्रा का कूटनीतिक महत्व है। उनकी इस यात्रा को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की अप्रैल में हुई पाकिस्तान यात्रा से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
  • 1991 में जॉर्जिया तत्कालीन सोवियत गणराज्य से अलग हुआ था। जॉर्जिया अमेरिका के ज्यादा करीब और रूस के साथ उसका अच्छा संबंध नहीं है।
  • भारत का रूस के साथ घनिष्ठ संबंध है और रूस का पाकिस्तान के साथ कुछ साल पहले तक संबंध न के बराबर था।
  • रूस का कोई भी बड़ा नेता पाकिस्तान की यात्रा पर नहीं जाता था लेकिन हाल ही में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पाकिस्तान की यात्रा की है।
  • इस तरह रूस को दिखाने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर की इस यात्रा का कूटनीतिक महत्व है।
  • एस जयशंकर की ये यात्रा इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस की हाल के समय में पाकिस्तान और चीन के साथ करीबी बढ़ी है।
  • चीन के साथ तो उसने 20 साल पुरानी मैत्री संधि में भी विस्तार किया है वह भी तब, जब भारत और चीन का लद्दाख को लेकर विवाद चल रहा है।

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चर्चित व्यक्तित्व

दीपक काबरा

चर्चा में क्यों?

  • भारत के जिम्नास्टिक जज दीपक काबरा ओलंपिक खेलों की जिम्नास्टिक स्पर्धा में जज के तौर पर चुने जाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वह 23 जुलाई से शुरू हो रहे टोक्यो ओलंपिक में पुरुषों की लयबद्ध जिम्नास्ट स्पर्धा में जज होंगे।
  • बतौर जज 2010 राष्ट्रमंडल खेल उनका पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था।
  • वह 2014 एशियाई खेलों युवा ओलंपिक मेंभी जज रहे। उन्होंने इसके बाद 2018 में एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों, अर्जेंटीना में युवा ओलंपिक, विश्व कप जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी जज की भूमिका निभाई।

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लोवर अरुण जलविद्युत परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • नेपाल ने अपने पूर्वी हिस्से में अरुण नदी पर बनने वाली 679 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए भारत की सतलज जल विद्युत निगम लि. (SJVNL) के साथ 1.3 अरब डॉलर का समझौता किया है। यह  पड़ोसी देश में भारत द्वारा शुरू किया गया दूसरा बड़ा उद्यम होगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • निवेश बोर्ड नेपाल के अनुसार 2017 की लागत अनुमानों के आधार पर सबसे बड़ी विदेशी निवेश वाली परियोजना पूर्वी नेपाल में संखुवासभा और भोजपुर जिलों के बीच स्थित है।
  • 679 मेगावॉट की इस परियोजना को SJVN ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बोली के माध्यम से हासिल किया था।
  • कुल 679 मेगावाट क्षमता वाली लोवर अरुण जलविद्युत परियोजना भारत द्वारा शुरू की गई दूसरी बड़ी परियोजना है।
  • इससे पहले भारत ने 1.04 अरब अमेरिकी डॉलर लागत वाली 900 मेगावाट क्षमता की अरुण-3 जलविद्युत परियोजना शुरू की थी।
  • नेपाल की राजधानी काठमांडू में निवेश बोर्ड नेपाल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील भट्ट और एसजेवीएन के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने परियोजना के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।
  • इस परियोजना को बनाओ, रखो, चलाओ और सौंपो (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।

सतलज जल विद्युतनिगम

  • सतलज जल विद्युतनिगम (SJVN) एक पीएसयू है।
  • वर्तमान में नंद लाल शर्मा‚ SJVN के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं।
  • वर्तमान समय में SJVN की संस्थापित क्षमता 2016.51 मेगावॉट है और वर्ष 2023 तक 5000 मेगावॉट की कंपनी बनाने का लक्ष्य है।
  • इसके साथ ही वर्ष 2030 तक 12000 मेगावॉट और वर्ष 2040 तक 25000 मेगावॉट की क्षमता वाली कंपनी बनाने का लक्ष्य है।
  • SJVN विद्युत उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों से संबद्ध है‚ जिसमें हाइड्रो‚ विंड‚ सोलर और थर्मल शामिल है।

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खेल परिदृश्य

2026 बैडमिंटन विश्वकप की मेजबानी भारत को

चर्चा में क्यों?

  • विश्व बैडमिंटन महासंघ (BWF) ने हाल ही में घोषणा की कि भारत 2026 में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत को 2023 में सुदीरमन कप का आयोजन करना था लेकिन बीडब्ल्यूएफ ने इस विश्व मिश्रित टीम चैंपियनशिप की मेजबानी चीन को सौंपने का फैसला किया है।
  • बीडब्ल्यूएफ ने चीन में कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए इस साल के सुदीरमन कप को चीन के शुजोऊ की जगह फिनलैंड के वांता में आयोजित करने का फैसला किया।
  • शुजोऊ में अब 2023 में बीडब्ल्यूएफ विश्व मिश्रित टीम चैंपियनशिप का आयोजन होगा जिसकी मेजबानी पहले भारत को सौंपी गयी थी। भारत ने 2026 में बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी स्वीकार कर ली है।
  • यह दूसरा अवसर होगा जबकि भारत विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा। इससे पहले 2009 में हैदराबाद में इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था। भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) के अध्यक्ष हिमांता बिस्वा सरमा ने कहा, विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिता का आयोजन करना भारतीय बैडमिंटन संघ के साथ देश के लिये भी बड़ी उपलब्धि है।

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नियुक्ति/निर्वाचन

शेर बहादुर देउबा

चर्चा में क्यों?

  • नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा पांचवीं बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 75 वर्षीय देउबा को 13 जुलाई 2021 को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।
  • राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76(5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।
  • उल्लेखनीय है कि नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के 21 मई को प्रतिनिधि सभा (संसद) को भंग करने के फ़ैसले को रद्द कर दिया था और देउबा को नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था।
  • संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्ति के बाद देउबा को 30 दिनों के अंदर सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा.
  • प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद पर ओली का दावा असंवैधानिक है।
  • संविधान पीठ ने राष्ट्रपति विद्या विद्या देवी भंडारी की भूमिका की भी आलोचना की, जिन्होंने मई में देउबा को संसद में अपना बहुमत साबित करने का अवसर देने से मना कर दिया था।

कौन हैं शेर बहादुर देउबा?

  • शेर बहादुर देउबा अब से पहले चार बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वे पहली बार सितंबर 1995 से मार्च 1997, दूसरी बार जुलाई 2001 से अक्तूबर 2002, तीसरी बार जून 2004 से फ़रवरी 2005 और चौथी बार जून 2017 से फ़रवरी 2018 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रहे।
  • भारत से भी देउबा का पुराना रिश्ता रहा है। जून 2017 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा में, देउबा ने अगस्त 2017 में भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की थी।
  • देउबा इससे पहले 1996, 2004 और 2005 में भी प्रधानमंत्री के रूप में भारत के तीन दौरे कर चुके हैं।
  • पश्चिमी नेपाल के दादेलधुरा ज़िले के एक सुदूर गांव में 13 जून 1946 को जन्मे शेर बहादुर देउबा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक छात्र नेता के रूप में की थी।
  • उन्हें लोकतंत्र को मज़बूत करने में उनके योगदान के लिए नवंबर 2016 में नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था।

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