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Daily Current Affairs: 13 August 2021

आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

वाहन स्क्रैप नीति-2021

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अगस्त 2021 को वाहन स्क्रैप नीति (Vehicle Scrappage Policy) को लॉन्च किया है।

क्या है स्क्रैप पॉलिसी?

  • इस नई स्क्रैप पॉलिसी के अनुसार 15 और 20 साल पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप (कबाड़) कर दिया जाएगा।
  • कमर्शियल गाड़ी जहां 15 साल बाद स्क्रैप घोषित हो सकेगी, वहीं निजी गाड़ी के लिए यह समय 20 साल है।
  • वाहन मालिकों को तय समय बाद ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर ले जाना होगा। सरकार का दावा है कि स्क्रैपिंग पॉलिसी से वाहन मालिकों का न केवल आर्थिक नुकसान कम होगा, बल्कि उनके जीवन की सुरक्षा हो सकेगी। सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी होगी।

नई स्क्रैपिंग पॉलिसी लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

  • एक आंकड़े के मुताबिक, पुरानी कार चलाने पर एक व्यक्ति को हर साल 30 से 40 हजार तो एक ट्रक मालिक को सालाना, दो से तीन लाख रुपये का नुकसान होता है।
  • स्क्रैपिंग पॉलिसी से यह आर्थिक नुकसान कम होगा। देश में फिलहाल 50-60 लाख पुराने वाहन रजिस्टर्ड हैं। कुछ पहले ही स्क्रैप्ड हो चुके हैं।
  • स्क्रैपिंग पॉलिसी से अलगे चार साल में सिर्फ 15 से 20 लाख नए वाहनों की ही बिक्री होगी।

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60वां सार्वजनिक उद्यम (Public Enterprises-PE) सर्वेक्षण 2019-20

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) ने 60वां सार्वजनिक उद्यम (Public Enterprises-PE) सर्वेक्षण 2019-20 जारी किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) को लेकर सूचना का एकमात्र सबसे बड़ा स्रोत है और सूचित नीति निर्माण के आधार पर कार्य करता है।
  • सरकार ने सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) को भारी उद्योग मंत्रालय से फिर से वित्त मंत्रालय को आवंटित कर दिया है।
  • यह सर्वेक्षण संपूर्ण CPSE विश्व को शामिल करता है। यह विभिन्न वित्तीय और भौतिक मानकों पर सभी CPSE के लिये आवश्यक सांख्यिकीय डेटा प्राप्त करता है।
  • लोक उद्यम विभाग (DPE) ने दूसरी लोकसभा की प्राक्कलन समिति की 73वीं रिपोर्ट (1959-60) की सिफारिशों पर वित्तीय वर्ष 1960-61 से सार्वजनिक उद्यम सर्वेक्षण जारी करना शुरू किया।

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम

  • सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) के लिये नोडल विभाग है और CPSE से संबंधित नीति तैयार करता है।
  • सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का मतलब उन सरकारी कंपनियों से है, जो सांविधिक निगमों के अलावा हैं, जिनमें इक्विटी में 50% से अधिक हिस्सेदारी केंद्र सरकार के पास है।
  • इन कंपनियों की सहायक कंपनियाँ, यदि भारत में पंजीकृत हैं, तो उन्हें CPSE के रूप में भी वर्गीकृत किया गया है।
  • यह विभागीय रूप से संचालित सार्वजनिक उद्यमों, बैंकिंग संस्थानों और बीमा कंपनियों को कवर नहीं करता है।
  • CPSE को महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न नाम से 3 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
  • वर्तमान में 10 महारत्न, 14 नवरत्न और 74 मिनीरत्न CPSE हैं।

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रक्षा-प्रतिरक्षा, सैन्य अभ्यास

अल-मोहेद अल-हिंदी अभ्यास

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय नौसेना और सऊदी अरब नौसेना के बीच पहला ‘अल-मोहेद अल-हिंदी’ अभ्यास फारस की खाड़ी में शुरू हो गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत और सऊदी अरब की नौसेनाओं के बीच यह पहला युद्धाभ्‍यास है।
  • इसमें हिस्‍सा लेने के लिए गाइडेड मिसाइल डिस्‍ट्रॉयर आईएनएस कोच्चि भी पहुंचा हुआ है।
  • इसमें दो सी किंग-42बी हेलिकॉप्‍टर्स लगे हुए हैं।
  • INS कोच्चि ने इससे पहले अबू धाबी के पास UAE नौसेना के ‘जायद तलवार’ के साथ भी युद्धाभ्‍यास किया था। UAE ने 7 अगस्‍त के युद्धाभ्‍यास के लिए गाइडेड मिसाइल कॉर्वेट के अलावा हेलिकॉप्‍टर्स भी भेजे थे।

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पुरस्कार सम्मान

प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कारों की घोषणा

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार ने 2018 के लिए प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कारों की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ये पुरस्कार केंद्र और राज्य सरकारों के विभागीय उपक्रमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और 500 या उससे ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाली निजी क्षेत्र की इकाइयों में कार्यरत 69 श्रमिकों को प्रदान किए जाने हैं।
  • ये पुरस्कार श्रमिकों को उनके विशिष्ट प्रदर्शन, नवीन क्षमताओं, उत्पादकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और असाधारण साहस व बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करने के लिए दिए जाने हैं।
  • इस साल प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए गए हैं। ये श्रेणियां हैं – श्रम भूषण पुरस्कार जिसमें 1,00,000/- रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है, श्रम वीर / श्रम वीरांगना पुरस्कार जिसमें 60,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है, और श्रम श्री / श्रम देवी पुरस्कार जिसमें प्रत्येक को 40,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।

श्रम भूषण

  • श्रम भूषण पुरस्कारों की कुल संख्या 4 है। इसमें 1,00,000 रुपये का नकद पुरस्कार और एक ‘सनद’ दिया जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र में साल 2018 के लिए श्रम भूषण पुरस्कार विजेताओं की कुल संख्या 10 है।

श्रम वीर / वीरांगना

  • श्रम वीर / श्रम वीरांगना पुरस्कारों की कुल संख्या 12 है। इसमें 60,000/- रुपये का नगद पुरस्कार और एक ‘सनद’ दिया जाता है। श्रम वीर / श्रम वीरांगना पुरस्कार विजेताओं की कुल संख्या 21 है जिनमें साल 2018 के लिए 1 महिला कर्मचारी शामिल है।

श्रम श्री / देवी

  • श्रम श्री / श्रम देवी पुरस्कारों की कुल संख्या 17 है। इसमें 40,000/- रुपये का नकद पुरस्कार और एक ‘सनद’ दिया जाता है। श्रम श्री / श्रम देवी पुरस्कार विजेताओं की कुल संख्या 38 है जिसमें 7 महिला कर्मचारी शामिल हैं।

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रिपोर्ट/इंडेक्स

बुजुर्गों के लिये जीवन गुणवत्ता सूचकांक

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ‘बुजुर्गों के लिये जीवन गुणवत्ता सूचकांक’ जारी किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ‘बुजुर्गों के लिये जीवन गुणवत्ता सूचकांक’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट को इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस ने तैयार किया है।
  • इस रिपोर्ट में राज्यों को दो श्रेणियों बुजुर्ग (जहां वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 50 लाख से अधिक है) और ‘अपेक्षाकृत बुजुर्ग’ (जहां बुजुर्गों की आबादी 50 लाख से कम है) में बांटा गया है।
  • राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और मिजोरम उन शीर्ष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हैं जहां पर बुजुर्ग आबादी का जीवन स्तर गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर है। यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है।
  • बुजुर्ग राज्यों की श्रेणी में राजस्थान शीर्ष पर है जहां बुजुर्गों का जीवन स्तर बेहतर है। वहीं, इस श्रेणी में दूसरे और तीसरे पायदान पर क्रमश: महाराष्ट्र और बिहार हैं।
  • रिपोर्ट के मुताबिक ‘अपेक्षाकृत बुजुर्ग’ श्रेणी के राज्यों में हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर है जबकि उत्तराखंड और हरियाणा इस श्रेणी के राज्यों में क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
  • चंडीगढ़ और मिजोरम को क्रमश: केंद्र शासित प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में सबसे अधिक अंक मिले हैं।
  • वहीं, इसके उलट बुजुर्ग राज्यों की श्रेणी में तेलंगाना और गुजरात को सबसे कम अंक मिले हैं।
  • वरिष्ठ नागरिकों के जीवनस्तर के लिहाज से जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को क्रमश: केंद्र शासित प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में सबसे निचले पायदान पर रखा गया है।
  • इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए चार अहम आधारों- वित्तीय स्थिति, सामाजिक स्थिति, स्वास्थ्य प्रणाली और आय सुरक्षा- पर गौर किया गया। इसके तहत आठ उप आधारों- आर्थिक सशक्तिकरण, शैक्षणिक स्तर व रोजगार, सामाजिक स्थिति, शारीरिक सुरक्षा, मूलभूत स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, साामजिक सुरक्षा और सशक्त करने वाले माहौल- पर जीवनस्तर की गुणवत्ता का आकलन किया गया।

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सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021

चर्चा में क्यों?

  • संसद के मानसून सत्र में सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021 पारित कर दिया गया। यह सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 में संशोधन के लिए पारित किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस संशोधन विधेयक में इस शर्त हटा दिया गया कि केंद्र सरकार के पास सामान्य बीमा कंपनियों में 51% हिस्सेदारी होनी चाहिए।
  • सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम 1972 की धारा 10बी के प्रावधान के अनुसार निर्दिष्ट बीमा कंपनियों में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51% होनी चाहिए।
  • ये कंपनियां हैं:- जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड है। 1972 का अधिनियम भारत में सामान्य बीमा कारोबार करने वाली सभी निजी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करने के लिए बनाया गया था।
  • संशोधन विधेयक धारा 10बी के प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव करता है। साथ ही, 1972 के अधिनियम में जोड़े जाने के लिए प्रस्तावित धारा 24बी ऐसे निर्दिष्ट बीमाकर्ता को अधिनियम के आवेदन को समाप्त करने का प्रावधान करती है, जिस तारीख से केंद्र सरकार का इस पर नियंत्रण समाप्त हो जाता है।
  • इसके अलावा, नई धारा 31ए में कहा गया है कि एक निर्दिष्ट बीमाकर्ता का निदेशक, जो पूर्णकालिक निदेशक नहीं है, केवल कुछ कृत्यों के लिए उत्तरदायी होगा।

क्या है सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 ?

  • यह अधिनियम भारत में सामान्य बीमा व्यवसाय करने वाली सभी निजी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करने के लिये अधिनियमित किया गया था।
  • इसके तहत ‘भारतीय सामान्य बीमा निगम’ (GIC) की स्थापना गई।
  • GIC एक भारतीय राष्ट्रीयकृत पुनर्बीमा कंपनी है।
  • अधिनियम के तहत राष्ट्रीयकृत कंपनियों के व्यवसायों को ‘भारतीय सामान्य बीमा निगम’ की चार सहायक कंपनियों में पुनर्गठित किया गया था:
  • नेशनल इंशोरेंस
  • न्यू इंडिया एशोरेंस
  • यूनाइटेड इंशोरेंस
  • यूनाइटेड इंडिया इंशोरेंस
  • बाद में 2002 में इन चार सहायक कंपनियों का नियंत्रण GIS से केंद्र सरकार को हस्तांतरित करने के लिये अधिनियम में संशोधन किया गया, जिससे वे स्वतंत्र कंपनियाँ बन गईं।
  • वर्ष 2000 से GIC विशेष रूप से पुनर्बीमा व्यवसाय कर रहा है।

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राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (NMEO-OP)

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (NMEO-OP) मिशन की शुरुआत की है।

मह्तवपूर्ण बिंदु

  • इस मिशन के तहत खाद्य तेल के क्षेत्र में 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।
  • प्रधानमंत्री की घोषणा के “अनुसार सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ताड़ के तेल और अन्य तिलहन उत्पादन के लिए खेती को बढ़ावा दिया जाय और किसानों को इसके लिए बेहतर गुणवत्ता वाले बीज से लेकर प्रौद्योगिकी तक सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
  • फिलहाल भारत खाद्य तेल की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए तेल के आयात पर निर्भर है, इसमें पाम तेल की कुल आयात में करीब 55 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

मिशन के उद्देश्य:

  • घरेलू खाद्य तेल की कीमतों को कम करना जो पाम तेल के महंगे आयात से प्रभावित होती हैं।
  • वर्ष 2025-26 तक पाम तेल का घरेलू उत्पादन तीन गुना बढ़ाकर 11 लाख मीट्रिक टन करना।
  • 2025-26 तक पाम तेल की खेती के क्षेत्र को 10 लाख हेक्टेयर और वर्ष 2029-30 तक 16.7 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना शामिल है।
  • इस योजना का विशेष बल भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में होगा।
  • इस योजना के अंतर्गत पाम तेल किसानों को वित्तीय सहायता और पारिश्रमिक प्रदान किया जाएगा।

क्या है पाम तेल?

  • पाम तेल ताड़ के पेड़ के बीजों से निकाला जाता है। इसमें कोई महक नहीं होती।
  • जिसकी वजह से हर तरह का खाना बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • यह बहुत ऊंचे तापमान पर पिघलता है। इसमें सैचुरेटेड फैट बहुत अधिक होता है।
  • यही वजह है कि इससे मुंह में पिघल जाने वाली क्रीम और टॉफी-चॉकलेट बनाये जाते हैं।
  • फिलहाल दुनियाभर में 8 करोड़ टन के आसपास पाम ऑयल पैदा होता है।
  • पाम तेल वर्तमान में विश्व का सबसे अधिक खपत वाला वनस्पति तेल है।
  • इसका उपयोग डिटर्जेंट, प्लास्टिक, सौंदर्य प्रसाधन और जैव ईंधन के उत्पादन में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
  • कमोडिटी के शीर्ष उपभोक्ता भारत, चीन और यूरोपीय संघ (EU) हैं।
  • पाम तेल उत्पादन में इंडोनीशिया दुनिया में नंबर एक स्थान पर है। दूसरे नंबर पर है मलेशिया है।
  • खाने वाले तेलों के मामले में भारत के आयात का दो तिहाई हिस्सा केवल पाम ऑयल का है।
  • विश्व में वनस्पति तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश, भारत सालाना लगभग 1.5 करोड़ टन तेल खरीदता है।
  • इसमें से पामतेल की मात्रा 90 लाख टन और बाकी 60 लाख टन सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल होता है।

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राज्य परिदृश्य:

सूचना प्रौद्योगिकी (IT) में उत्कृष्टता हेतु राजीव गांधी पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

  • महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में ‘सूचना प्रौद्योगिकी (IT) में उत्कृष्टता हेतु राजीव गांधी पुरस्कार’ की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह पुरस्कार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों और कंपनियों को दिया जाएगा।
  • राज्य सरकार के सार्वजनिक उद्यम- महाराष्ट्र आईटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MAHA-IT) को पुरस्कार के लिये नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है।
  • इस पुरस्कार का उद्देश्य भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में राजीव गांधी के अग्रणी योगदान को रेखांकित करना है।
  • उन्होंने देश में ‘सूचना प्रौद्योगिकी’ युग की शुरुआत की, जिसने भारत के सेवा क्षेत्र को बदलने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
  • यही कारण है कि राजीव गांधी को ‘भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार क्रांति का जनक’ और डिजिटल इंडिया के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है।

देश के छठे प्रधानमंत्री थे राजीव गांधी

  • राजीव गांधी ने वर्ष 1984 से वर्ष 1989 के बीच देश के छठे प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। यह समय देश में सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण दौर था।
  • 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदू में ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम’ नामक आतंकवादी संगठन के आतंकवादियों ने राजीव गांधी की आतमघाती हमले में हत्या कर दी।
  • इसी दौरान देश में अत्याधुनिक दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकसित करने और भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये अगस्त 1984 में ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स’ (C-DOT) की स्थपना की गई, वर्ष 1986 में ‘महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड’ की स्थापना हुई और इसी समय रेलवे का कंप्यूटरीकरण भी किया गया।

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