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Daily Current Affairs 12 May 2021

स्वास्थ्य एवं पोषण

म्यूकरमायकोसिस

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना संक्रमितों के फेफड़ों का इंफेक्शन नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं हाईडोज स्टेरॉयड से अब ब्लैक फंगस ( म्यूकरमायकोसिस, Mucormycosis ) के मामले आ रहे हैं।
  • इसका सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज के मरीजों को है जो कोरोना की चपेट में आ गए हैं। रिकवरी के दौरान और रिकवरी के बाद भी ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं।

क्या है म्यूकरमायकोसिस (ब्लैक फंगस)

  • म्यूकरमायकोसिस एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है। ये म्यूकर फफूंद के कारण होता है जो आमतौर पर मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्ज़ियों में पनपता है।
  • यहां तक कि स्वस्थ इंसान की नाक और बलगम में भी ये फंगस पाई जाती है।
  • ये फंगस साइनस, दिमाग़ और फेफड़ों को प्रभावित करती है और डायबिटीज़ के मरीज़ों या बेहद कमज़ोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों जैसे कैंसर या एचआईवी/एड्स के मरीज़ों में ये जानलेवा भी हो सकती है।
  • जहां पर यह ब्लैक फंगस हो जाता है वहां से आगे की रक्त का प्रवाह रुक जाता है और एक प्रकार से यह जितनी दूरी तक फैल चुका होता है वहां के नर्वस सिस्टम में ब्लड की सप्लाई को डैमेज कर देता है।
  • सर्जरी के बाद ही उतने हिस्से से ब्लैक फंगस हटाकर मरीज को बचाया जाता है। इस समय कोरोना वाले मरीजों में नाक में मरीजों को ब्लैक फंगस हो रहा है।

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योजना/परियोजना

राष्ट्रीय उन्नत रसायन बैट्री भंडारण कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना “राष्ट्रीय उन्नत रसायन बैट्री भंडारण कार्यक्रम” (National Programme on Advanced Chemistry Cell Battery Storage) को मंजूरी दे दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारी उद्योग मंत्रालय ने इस योजना का प्रस्ताव रखा था।
  • इस योजना के तहत पचास (50) गीगावॉट ऑवर्स और पांच गीगावॉट ऑवर्स की “उपयुक्त” एसीसी बैट्री की निर्माण क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य है।
  • इसकी लागत 18,100 करोड़ रुपये है।
  • विदित हो कि गीगावॉट ऑवर्स का अर्थ एक घंटे में एक अरब वॉट ऊर्जा प्रति घंटा निर्माण करना है।

क्या है उन्नत रसायन बैट्री?

  • एसीसी (Advanced Chemistry Cell) उन्नत भंडारण प्रौद्योगिकी की नई पीढ़ी है, जिसके तहत बिजली को इलेक्ट्रो-कैमिकल या रासायनिक ऊर्जा के रूप में सुरक्षित किया जा सकता है।
  • जब जरूरत पड़े, तो इसे फिर से बिजली में बदला जा सकता है। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सामान, बिजली से चलने वाले वाहन, उन्नत विद्युत ग्रिड, सौर ऊर्जा आदि में बैट्री की आवश्यकता होती है।
  • आने वाले समय में इस उपभोक्ता सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी होने वाली है। उम्मीद की जाती है किबैट्री प्रौद्योगिकी दुनिया के कुछ सबसे बड़े विकासशील सेक्टर में अपना दबदबा कायम कर लेगी।

क्यों आरंभ की जा रही है योजना?

  • राष्ट्रीय उन्नत रासायनिक सेल (ACC) बैट्री भंडारण से आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे आत्मनिर्भर भारत को भी मदद मिलेगी।
  • एसीसी बैट्री भंडारण निर्माता का चयन एक पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के जरिये किया जायेगा। निर्माण इकाई को दो वर्ष के भीतर काम चालू करना होगा। प्रोत्साहन राशि को पांच वर्षों के दौरान दिया जायेगा।

इस योजना से संभावित लाभ और परिणाम

  • इस कार्यक्रम के तहत भारत में कुल 50 गीगावॉट ऑवर्स की एसीसी निर्माण सुविधा की स्थापना।
  • एसीसी बैट्री भंडारण निर्माण परियोजनाओं में लगभग 45,000 करोड़ रुपये का सीधा निवेश।
  • भारत में बैट्री निर्माण की मांग को पूरा करना।
  • मेक इन इंडिया को बढ़ावाः घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्धन पर जोर और आयात पर निर्भरता कम करना।
  • उम्मीद की जाती है कि योजना के तहत एसीसी बैट्री निर्माण से विद्युत चालित वाहन (ईवी) को प्रोत्साहन मिलेगा और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी।

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पुरस्कार/सम्मान

आईआरईडीए ग्रीन ऊर्जा अवॉर्डसे सम्मानित

चर्चा में क्यों?

  • इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) को भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा इस वर्ष ‘ग्रीन ऊर्जा अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह पुरस्कार आईआरईडीए को भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की अग्रणी पब्लिक फाइनेंसिंग संस्था होने के लिए दिया गया है।
  • आइआरईडीए के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास को यह अवॉर्ड डॉ. अजय माथुर, महानिदेशक, इंटरनेशनल सोलर एलायंस से प्राप्त हुआ।
  • आईआरईडीए को ग्रीन एनर्जी फाइनेंसिंग में निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण और विकास संबंधी भूमिका के लिए यह पुरस्कार मिला है।

इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA)

  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आईआरईडीए भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं की फाइनेंसिंग के लिए एकमात्र समर्पित संस्थान है।
  • वर्ष 1987 में स्थापित इरेडा एक गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के रूप में एक सर्वजनिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है, जो ऊर्जा के नवीन और नवीकरणीय स्रोतों से संबंधित परियोजनाओं की स्थापना के लिए और ऊर्जा दक्षता / ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने, विकसित करने और वित्तीय सहायता प्रदान करने में लगी हुई है।
  • इसकी स्थापना के बाद से कंपनी ने इन परियोजनाओं की फाइनेंसिंग के लिए विकासशील बाजार में एक उत्प्रेरक भूमिका निभाई है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता

चर्चा में क्यों?

  • नेपाल में प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार ने संसद में विश्वासमत खो दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ नीत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के ओली सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद उन्हें निचले सदन में बहुमत साबित करना था। नेपाल में सोमवार को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था।
  • ओली को सिर्फ 93 वोट मिले जबकि उन्हें कम से कम 136 वोटों की दरकार थी। विश्वास मत के खिलाऱ 124 वोट पड़े।
  • इसके साथ ही नेपाली संविधान के आर्टिकल 100(3) के मुताबिक अपने आप ही ओली PM पद से मुक्त हो गए।
  • ओली को फरवरी 2018 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर) के समर्थन से प्रधानमंत्री चुना गया था जिसके अध्यक्ष पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड हैं लेकिन मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के विलय को रद्द कर दिया था।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

ओसिरिस-रेक्स

चर्चा में क्यों?

  • ओसिरिस-रेक्स अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का अंतरिक्ष यान है जो 2018 में बेन्नू क्षुद्रग्रह की कक्षा में पहुंचा था। अब यह वापस पृथ्वी की ओर लौट रहा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का OSIRIS-REx स्पेसक्राफ्ट 2018 में ऐस्टरॉइड Bennu पर पहुंचा था।
  • अब यह एस्टेरॉइड से सैंपल लेकर धरती की ओर लौट रहा है। धरती पर लौटने के लिए इसने सोमवार से अपनी यात्रा शुरू कर चुका है।
  • बेन्नू एस्टेरॉइड धरती से 200 मिलियन मील (320 मिलियल किलोमीटर) की दूरी पर स्थित है।
  • ओसिरिस-रेक्स ने इसकी सतह से सैंपल एकत्रित करने से इसके आसपास चक्कर लगाए थे।
  • फिर इसने सैंपल एकत्रित किए और अब ये वापस धरती पर आ रहा है।
  • OSIRIS-REx ऐस्टरॉइड Bennu से निकल चुका है और यह 600 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से Bennu से निकल गया।
  • इसे धरती पर लौटने में अभी दो साल लगेंगे और 24 सितंबर, 2023 को इसके धरती पर लैंड करने की उम्मीद है।
  • फिलहाल इसे धरती पर सुरक्षित लाने पर वैज्ञानिकों की नजर टिकी हुई है।

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