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Daily Current Affairs 12 July 2021

कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

फजली आम का निर्यात

चर्चा में क्यों?

  • पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से प्राप्त जियोग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन (GI) प्रमाणित फजली नाम के आम की किस्म की एक खेप हाल ही में बहरीन निर्यात की गई।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) गैर-पारंपरिक क्षेत्रों और राज्यों से आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रहा है। वह आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए खरीदारों और विक्रेताओं के बीच आभासी बैठकें और फेस्टिवल आयोजित करता रहा है।
  • बहरीन को भेजी गई इस खेप का सौदा एपीडा द्वारा कतर के दोहा में आम से संबंधित प्रचार कार्यक्रम आयोजित करने के कुछ दिनों बाद हुआ।
  • इस प्रचार कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के जीआई प्रमाणित किस्म सहित नौ किस्मों के आम आयातक फैमिली फ़ूड सेंटर के स्टोर मेंप्रदर्शित किए गए थे।
  • जिन नौ किस्मों का निर्यात किया गया उनमें जीआई प्रमाणित खिरसापति (मालदा, पश्चिम बंगाल), लखनभोग (मालदा, पश्चिम बंगाल), फजली (मालदा, पश्चिम बंगाल), दशहरी (मलीहाबाद, उत्तर प्रदेश), आम्रपाली एवं चौसा (मालदा, पश्चिम बंगाल) और लंगड़ा (नदिया, पश्चिम बंगाल) शामिल हैं।
  • जून 2021 में, बहरीन में एक सप्ताह तक चलने वाले भारतीय आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।इसमें तीन जीआई प्रमाणित खिरसापति एवं लक्ष्मणभोग (पश्चिम बंगाल), जर्दालू (बिहार) सहित आम की 16 किस्मों को प्रदर्शित किया गया था।
  • एपीडा आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए खरीदारों और विक्रेताओं के बीच आभासी बैठकें और फेस्टिवल आयोजित करता रहा है।
  • इसने हाल ही में जर्मनी के बर्लिनमें ‘मैंगो फेस्टिवल’ का आयोजन किया था।
  • इस सीजन में पहली बार, भारत ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के कृष्णा और चित्तूर जिले के किसानों से प्राप्त जीआई प्रमाणित बंगनपल्ली और सुरवर्णरेखा नाम के आम की एक अन्य किस्म के 2.5 मीट्रिक टन (एमटी) की एक खेप भेजी है।
  • भारत में आम को ‘फलों का राजा’ भी कहा जाता है और प्राचीन शास्त्रों में इसे कल्पवृक्ष (इच्छा पूरी करने वाला पेड़) कहा जाता था।
  • भारत के अधिकांश राज्यों में आम के बागान हैं, लेकिन इस फल के कुल उत्पादन में बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक का है। अलफांसो, केसर, तोतापुरी और बंगनपल्ली भारत से निर्यात की जाने वाली आम की प्रमुख किस्में हैं।
  • आम का निर्यात मुख्य रूप से तीन रूपों – ताजा आम, आम का गूदा और आम का टुकड़ा – में होता है।

एपीडा क्या है?

  • कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की स्थापना दिसंबर, 1985 में संसद द्वारा पारित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा की गई।
  • इस अधिनियम (1986 का 2) को गजट असाधारण भाग – II (खण्ड 3 (II) में 13.02.1986 से लागू किया गया। प्राधिकरण ने संसाधित खाद्य निर्यात प्रोत्साहन परिषद का स्थान लिया।
  • एपीडा को कृषि और उससे संबंधित उत्पादों के निर्यात एवं संवर्धन एवं विकास का उत्तरदायित्व सौंपा गया है ।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

 दुर्लभ सुपर ल्यूमिनस सुपरनोवा की खोज

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय शोधकर्ताओं ने एक अत्यंत उज्जवल और हाइड्रोजन कमी के साथ तेजी से उभरने वाले सुपरनोवा (supernova) का पता लगाया है जो एक अति-शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के साथ एक अनोखे न्यूट्रॉन तारे से ऊर्जा लेकर चमकता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ऐसी प्राचीन आकाशीय पिंडों के गहन अध्ययन से प्रारंभिक ब्रह्मांड के रहस्यों की जांच करने में मदद मिल सकती है।
  • इस प्रकार के सुपरनोवा को सुपरल्यूमिनस सुपरनोवा (SLSNE) कहा जाता है जो काफी दुर्लभ होते हैं।
  • ऐसा इसलिए है क्योंकि वे आम तौर पर बहुत बड़े तारों (न्यूनतम द्रव्यमान की सीमा सूर्य के 25 गुना से अधिक) से उत्पन्न होते हैं और हमारी आकाशगंगा अथवा आसपास की आकाशगंगाओं में ऐसे विशाल तारों का वितरण काफी विरल है।
  • एसएन 2020एएनके की खोज सबसे पहले 19 जनवरी 2020 को ज्विकी ट्रांजिएंट फैसिलिटी द्वारा की गई थी।
  • फरवरी 2020 से और उसके बाद मार्च एवं अप्रैल की लॉकडाउन अवधि में इसका अध्ययन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत स्वायत्त अनुसंधान संस्थान आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) नैनीताल के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया।
  • यह सुपरनोवा उस क्षेत्र में मौजूद अन्य पिंडों के समान स्पष्ट तौर पर दिख रहा था। हालांकि उसकी चमक का अनुमान लगाया गया और वह काफी नीली वस्तु के रूप में दिखा जो उसकी अत्यंत चमक वाली प्रकृति को दर्शाता है।

इन दो अन्य भारतीय दूरबीनों की भी ली गई मदद

  • टीम ने दो अन्य भारतीय दूरबीनों: संपूर्णानंद टेलीस्कोप- 1.04एम और हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप- 2.0एम के साथ हाल ही में चालू किए गए भारत के देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप (DOT- 6M) में विशेष व्यवस्थाओं का उपयोग करते हुए इसका अवलोकन किया।
  • उन्होंने पाया कि प्याज जैसी संरचना वाले सुपरनोवा की बाहरी परतों को छील दिया गया था और कोर किसी अन्य ऊर्जा स्रोत के साथ चमक रहा था।

सुपरनोवा क्या है?

  • सुपरनोवा ब्रह्माण्ड में होने वाले सबसे खतरनाक दुर्घटनाओं में से एक है जिसमें कोई बहुत पुराना तारा अपने अंतिम क्षणों में होता है और कड़े विस्फोट के बाद नष्ट होने ही वाला होता है।
  • यह विस्फोट बहुत शक्तिशाली होता है। इस प्रतिक्रिया के बाद या तो कोई नया तारा बनना शुरू होता है या पुराने तारे में विस्फोट होने के बाद वह सफ़ेद ड्वार्फ में बदल जाता है।
  • जब सुपरनोवा प्रतिक्रिया हो रहा होता है, तो बहुत ज्यादा रौशनी प्रसारित होती है जो इतनी चमकीली रहती है कि वो पूरे ब्रह्माण्ड के रौशनी को पीछे छोड़ सकती है।
  • इससे इतनी ऊर्जा निकलती है, इतनी ऊर्जा सूर्य अपने पूरे जीवन में भी नहीं प्रकाशित कर सकता। वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि सुपरनोवा प्रतिक्रिया के दौरान जब विस्फोट होता है, यह अंतरिक्ष की सबसे खतरनाक घटना है।

सुपरनोवा पर किये गए अध्ययन

  • इससे पहले टेलिस्कोप की खोज होती, कई सभ्यताओं में सुपरनोवा प्रतिक्रिया होने की बात दर्ज है।
  • RCW86 नामक पहले सुपरनोवा की खोज साल 185 AD में चीनी खगोल वैज्ञानिकों ने की थी।
  • उनके रिकॉर्ड के अनुसार यह एक गेस्ट स्टार था जो रात्रि आसमान में आठ महीनों तक दिखा।
  • सत्रहवीं शताब्दी से पहले तक सिर्फ आठ सुपरनोवा की खोज हुई थी, जबकि उस समय तक टेलिस्कोप का अविष्कार हो चूका था।
  • अब तक के खोजे गए सुपरनोवा में सबसे प्रसिद्ध जो हुआ उसका नाम क्रैब नाब्युला है।
  • जिस सुपरनोवा के कारण क्रैब नाब्युला बना था, वह इतना चमकदार था कि वैज्ञानिक उसे दिन में भी देख पाते थे।
  • साल 1930 में वाल्टर बेड के नेतृत्व में S Andromadae नामक सुपरनोवा पर शोध कर रहे थे जो किसी दूसरी गैलेक्सी में विराजमान है। उन्होंने यह व्याख्या दी कि सुपरनोवा प्रक्रिया तब होती है जब साधारण तारा न्यूट्रॉन तारे में बदलने वाला होता है।
  • इन्ही लोगो ने पहली बार इस प्रतिक्रिया के लिए सुपरनोवा शब्द का उपयोग किया।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

यूरोपीय संसद ने किया बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक का बहिष्कार

चर्चा में क्यों?

  • यूरोपीय संसद ने 2022 में चीन के बीजिंग में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक के बहिष्कार की घोषणा की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यूरोपीय संसद के सदस्यों ने सहमति जताते हुए कहा कि हमें चीन के मानवाधिकारों के हनन के कारण बीजिंग 2022 शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले निमंत्रण को अस्वीकार करना चाहिए।
  • इन सांसदों ने अपनी सरकारों से मांग करते हुए कहा कि उन्हें उइगुर मुसलमानों को लेकर चीन के व्यवहार पर और अधिक प्रतिबंध लगाना चाहिए। इसके अलावा यूरोपीय देशों को हॉन्ग कॉन्ग में लोकतंत्र समर्थकों का समर्थन करना चाहिए।

चीन के खिलाफ कौन-कौन से प्रस्ताव पारित?

  • यूरोपीय संसद ने जिन प्रस्तावों को पारित किया उनमें हॉन्ग कॉन्ग के सरकारी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है।
  • इसके अलावा चीन के साथ प्रत्यर्पण संधि को तत्काल प्रभाव से खत्म करने और बीजिंग ओलंपिक के डिप्लोमेटिक बॉयकॉट का आह्वान भी किया।
  • यूरोपीय संसद के चीन प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष जर्मनी के रेइनहार्ड बुटिकोफर ने इस प्रस्ताव को पेश करते हुए कहा कि यूरोपीय संसद में इन मुद्दों पर आम सहमति बहुत मजबूत है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ेंगे कि यूरोप में सदस्य राज्य सरकारें भी एक अडिग रुख अपनाएं।

प्रस्ताव को मानने के लिए बाध्य नहीं यूरोपीय देश

  • हालांकि, यूरोपीय संसद के इस प्रस्ताव को मानने के लिए सदस्य देश बाध्य नहीं है। खुद इस प्रस्ताव को पेश करने वाली रेइनहार्ड बुटिकोफर ने कहा कि यह स्पष्ट है कि कई यूरोपीय संघ के सदस्य देश और यूरोपीय आयोग भी हॉन्ग कॉन्ग में चीन के दमनकारी उपायों के खिलाफ बोलने के लिए अनिच्छुक हैं।
  • यूरोपीय संघ में चीन की बढ़ती आलोचना के बाद भी यूरोप की कई सरकारें सीधे टकराव से हिचकिचाती रही हैं।

चीन पर क्या होगा इसका असर?

  • यूरोपीय संसद के इस प्रस्ताव को चीन के लिए बड़ा नकारात्मक प्रभाव वाला माना जा रहा है।
  • पिछले कुछ साल से चीन यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में जुटा हुआ है।
  • चीन की योजना यूरोप में अमेरिका की खाली की हुई जगह को भरना है।
  • डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका का यूरोपीय देशों के साथ कई मुद्दों पर विवाद हुआ था।
  • चीन को इसमें अवसर दिखाई दिया और वह बिना देर किए यूरोपीय देशों के बीच पैठ जमाने में जुट गया।
  • चीन ने यूरोप में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए चीन सीईईसी कॉर्पोरेशन की शुरुआत भी की है।
  • जिसकी मदद से वह यूरोप के कई देशों को भारी भरकम कर्ज भी दे रहा है।

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सांस्कृतिक परिदृश्य

कच्छी नव वर्ष

चर्चा में क्यों?

  • आषाढ़ी बीज शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है। यह कच्छी नव वर्ष भी कहलाता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह गुजरात के कच्छ क्षेत्र में मनाया जाता है। इस साल 12 जुलाई को आषाढ़ी बीज का त्यौहार मनाया जा रहा है।
  • कच्छ के लोगों के लिए, यह दिन गुजरात के कच्छ में बारिश की शुरुआत के साथ जुड़ा हुआ है।
  • कच्छ काफी हद तक एक रेगिस्तानी इलाका है इसलिए रहने वाले लोग बारिश को बहुत महत्व देते हैं।
  • आषाढ़ी-बीज भारत में मुख्य रूप से दो स्थानों पर मनाया जाता है, वाराणसी, यूपी में विश्वनाथ मंदिर और गुजरात के उमरेठ में मूलेश महादेव मंदिर में।
  • इसके अलावा दुनिया भर के कच्छी लोग इस दिन को अपने स्तर पर बेहतरीन तरीके से मनाते हैं।
  • कच्छी लोग आषाढ़ी बीज पर अपना कच्छी नव वर्ष मनाते हैं।
  • यह हिंदू कैलेंडर (जून-जुलाई) के आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन है।
  • संयोग से आषाढ़ी बीज पर प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी (ओडिशा) में होती है।

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विंबल्डन 2021

पुरुष सिंगल्स

  • विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने विम्बलडन 2021 का ख़िताब अपने नाम कर लिया है।
  • इसके साथ ही 34 वर्षीय जोकोविच ने रोजर फेडरर और राफ़ेल नडाल के रिकॉर्ड 20 ग्रैंड स्लैम जीतने की बराबरी कर ली है।
  • फ़ाइनल में उन्होंने शीर्ष वरीयता प्राप्त जोकोविच ने इटली के माटियो बेरेटिनी को हराया।
  • 1976 में एड्रियानो पनाटा के फ्रेंच ओपन का ख़िताब जीतने के बाद से पहली बार इटली का कोई टेनिस खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम के फ़ाइनल में पहुंचा था।
  • जहां जोकोविच का यह 30वां ग्रैंड स्लैम फ़ाइनल था वहीं बेरेटिनी पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के फ़ाइनल में खेल रहे थे।
  • विम्बलडन 2021 का ख़िताब जीतने के साथ ही जोकोविच ओपन एरा में रॉड लीवर के बाद केवल दूसरे ऐसे खिलाड़ी बने हैं जिन्होंने साल के पहले तीनों ग्रैंड स्लैम अपने नाम किया है।
  • अब जोकोविच कैलेंडर ग्रैंड स्लैम (गोल्डन स्लैम) यानी साल के चारों ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट जीतने से महज एक ख़िताब दूर हैं।
  • अगर साल के आखिर में होने वाले यूएस ओपन टूर्नामेंट को भी जोकोविच जीतने में कामयाब रहे तो रॉड लीवर के बाद गोल्डन स्लैम का कारनामा करने वाले ओपन एरा के दूसरे पुरुष टेनिस खिलाड़ी बन जाएंगे।

वूमेंस सिंग्ल्स

  • टॉप सीड ऑस्ट्रेलिया की एश्ले बार्टी ने साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट विम्बलडन में महिला सिंगल्स का खिताब जीत लिया है।
  • उन्होंने पहली बार यह ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट जीता है।
  • उन्होंने फाइनल मुकाबले में 8वीं सीड चेक रिपब्लिक की कैरोलिना प्लिसकोवा को 3 सेटों तक चले मुकाबले में 6-3, 7-6, 6-3 से हराया।
  • बार्टी का यह ओवरऑल दूसरा सिंगल्स का ग्रैंड स्लैम टाइटल है। नंबर-1 एश्ले बार्टी ने इससे पहले 2019 में फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था।
  • 25 साल की बार्टी पहले एक प्रोफेशनल क्रिकेटर भी रह चुकी हैं और महिला बिग बैश लीग में ब्रिस्बेन हीट और क्वींसलैंड फायर की ओर से खेल चुकी हैं।
  • 1980 के बाद पहली ऑस्ट्रेलियन महिला चैंपियन
  • 41 साल बाद किसी ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी ने विम्बलडन में महिला सिंगल्स का खिताब जीता है।
  • उनसे पहले 1980 में इवोनी गुलागोंग कावली ने यह खिताब जीता था। बार्टी ने दूसरी बार कोई ग्रैंड स्लैम खिताब जीता है।
  • इससे पहले वे 2019 में फ्रेंच ओपन में महिला सिंगल्स का खिताब जीत चुकी हैं।

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चर्चित व्यक्तित्व

मारिया सिसाक

चर्चा में क्यों?

  • दुनिया के सबसे पुराने टेनिस ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट विम्बलडन में नया इतिहास लिखा गया जब क्रोएशिया की 43 साल की मारिया सिसाक नोवाक ने जोकोविच और मैटियो बेरेटिनी के बीच होने वाले पुरुष सिंगल्स फाइनल मुकाबले में चेयर अंपायरिंग की।
  • 1877 से खेले जा रहे विम्बलडन के 144 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब पुरुष सिंगल्स फाइनल में कोई महिला चेयर अंपायर होंगी।

गोल्ड बैज चेयर अंपायर हैं मारिया

  • मारिया सिसाक गोल्ड बैज चेयर अंपायर हैं। वे 2012 से महिला टेनिस महासंघ (WTA) की एलीट टीम में शामिल हैं।
  • टेनिस में सबसे ऊंची कैटेगरी के अंपायर को गोल्ड बैज मिलता है। इससे पहले सिल्बर, ब्रॉन्ज और ग्रीन बैज होते हैं।
  • 2014 में महिला सिंगल्स फाइनल में कर चुकी हैं अंपायरिंग
  • सिसाक पहले महिलाओं के कई बड़े मुकाबले में अंपयारिंग कर चुकी हैं। वे 2014 में महिला सिंगल्स के फाइनल में अंपायरिंग कर चुकी हैं।
  • इसके तीन साल बाद 2017 में उन्होंने विम्बलडन में महिला डबल्स मैच में भी अंपायरिंग की।
  • इसके अलावा सिसाक 2016 रियो ओलिंपिक में महिला सिंगल्स के गोल्ड मेडल मैच में भी अंपायर रह चुकी हैं।

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सिरीशा बांदला

  • कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स के बाद भारतीय मूल की सिरीशा बांदला ने अंतरिक्ष में उड़ान भरी है।
  • आंध्र प्रदेश में जन्मी सिरिशा बांदला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली तीसरी भारतीय महिला बन गई है।
  • उन्होंने 11 जुलाई 2021 को अमेरिका के न्यू मैक्सिको प्रांत से ब्रिटिश अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन के साथ ‘वर्जिन गैलेक्टिक’ की अंतरिक्ष के लिए पहली पूर्ण चालक दल वाली सफल परीक्षण उड़ान भरी।
  • आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में जन्मी बांदला चार साल की उम्र में अमेरिका चली गईं और 2011 में पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स से साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
  • उन्होंने 2015 में जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री पूरी की।
  • सिरिशा ने वर्जिन गेलेक्टिक के अंतरिक्ष विमान वीएसएस यूनिटी पर वर्जिन के संस्थापक रिचर्ड ब्रेनसन और चार अन्य लोगों के साथ उड़ान भरी।
  • बांदला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के बाद अंतरिक्ष में जाने वाली केवल दूसरी भारत में जन्मी महिला है।
  • भारत की ओर से राकेश शर्मा सबसे पहले अंतरिक्ष में गए थे। इसके बाद कल्‍पना चावला गई थीं। वहीं भारतीय मूल की सुनीता विलियम्‍स ने भी अंतरिक्ष में कदम रखा था।

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