Follow Us On

Daily Current Affairs 10 July 2021

रिपोर्ट/इंडेक्स

दि हंगर वायरस मल्टीप्लाइज”

चर्चा में क्यों?

  • गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाले संगठन ‘ऑक्सफैम’ (Oxfam) ने कहा है कि दुनियाभर में भुखमरी के कारण हर एक मिनट में 11 लोगों की मौत होती है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ऑक्सफैम ने ‘दि हंगर वायरस मल्टीप्लाइज’ (“The Hunger Virus Multiplies) नामक रिपोर्ट में कहा, भुखमरी से मरने वाले लोगों की संख्या कोविड-19 के चलते जान गंवाने वालों की संख्या से ज्यादा हो गई है। कोरोना के कारण दुनिया में हर एक मिनट में करीब सात लोगों की जान जाती है।
  • ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले एक वर्ष में पूरी दुनिया में अकाल जैसे हालात का सामने करने वाले लोगों की संख्या छह गुना बढ़ गई है। ऑक्सफैम अमेरिका के अध्यक्ष व सीईओ एब्बी मैक्समैन ने कहा, आंकड़े हैरान करने वाले हैं। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये आंकड़े उन लोगों से बने हैं जो अकल्पनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं।
  • इनमें से करीब दो तिहाई लोग भुखमरी के शिकार हैं और इसकी वजह उनके देश में चल रहा सैन्य संघर्ष है।
  • मैक्समैन ने कहा, कोविड-19 के आर्थिक दुष्प्रभाव, बेरहम संघर्षों और विकट होते जलवायु संकट ने 5,20,000 से अधिक लोगों को भुखमरी की कगार पर पहुंचा दिया है।

महामारी से जूझने के बजाय संघर्ष बढ़े

  • ऑक्सफैम अमेरिका के अध्यक्ष व सीईओ एब्बी मैक्समैन ने कहा, दुनिया में लोग वैश्विक महामारी से मुकाबला करने के बजाय परस्पर विरोधी धड़े एक दूसरे से लड़ रहे हैं। इसका असर अंतत: उन लाखों लोगों पर पड़ रहा है जो पहले ही मौसम संबंधी आपदाओं और आर्थिक झटकों से बेहाल हैं।
  • कोरोना काल में सेनाओं पर होने वाला खर्च पूरी दुनिया में 51 अरब डॉलर बढ़ गया है। यह राशि भुखमरी को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र को जितने धन की जरूरत है उसके मुकाबले कम से कम छह गुना ज्यादा है।

इन पांच देशों में स्थिति निंयंत्रण से बाहर

  • इस रिपोर्ट में जिन देशों को भुखमरी से सर्वाधिक प्रभावितों की सूची में रखा है उनमें अफगानिस्तान, इथियोपिया, दक्षिण सूडान, सीरिया और यमन शामिल हैं। इन सभी देशों में संघर्ष के हालात हैं।
  • मैक्समैन ने कहा, आम नागरिकों को भोजन पानी से वंचित रखकर और उन तक मानवीय राहत नहीं पहुंचने देकर भुखमरी को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। बाजारों पर बम बरसाए जा रहे हों, फसलों और मवेशियों को खत्म किया जा रहा हो तो लोग सुरक्षित नहीं रह सकते और न ही भोजन तलाश सकते हैं।

ऑक्सफैम इंटरनेशनल

  • ऑक्सफैम इंटरनेशनल का गठन वर्ष 1995 में हुआ था जो स्वतंत्र गैर-सरकारी संगठनों का एक समूह है।
  • “ऑक्सफैम” नाम ब्रिटेन में वर्ष 1942 में स्थापित ‘अकाल राहत के लिये ऑक्सफोर्ड सहायता समिति’ (Oxford Committee for Famine Relief) से लिया गया है।
  • इस समूह ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ग्रीस में भूख से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिये भोजन की आपूर्ति हेतु अभियान चलाया।
  • इसका उद्देश्य वैश्विक गरीबी और अन्याय को कम करने के लिये कार्य क्षमता को बढ़ाना है।
  • ऑक्सफैम का अंतर्राष्ट्रीय सचिवालय नैरोबी (केन्या) में स्थित है।

……………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………

 

सभी का भविष्य–मानव-वन्यजीव सहअस्तित्वरिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • भारत के 35 प्रतिशत बाघ क्षेत्र, संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हैं और विकास गतिविधियों के बढ़ने के चलते भारत मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती का सामना कर रहा है।
  • वर्ल्ड वाइड फंड (WWF) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा किये गये अध्ययन में यह भी कहा गया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष जंतुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अध्ययन में 27 देशों के 40 संगठनों के 155 विशेषज्ञों ने योगदान दिया।
  • ‘सभी का भविष्य–मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व (Future of all–human-wildlife coexistence’) शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वर्तमान में, भारत के 35 प्रतिशत बाघ क्षेत्र और अफ्रीकी तथा एशियाई हाथियों के 70 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित क्षेत्रों से बाहर हैं। ’’

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • समुद्री जीव, जैसे कि कछुआ, व्हेल, जो सालाना हजारों किलोमीटर का सफर करती हैं, का भी मानव से आमना-सामना बढ़ रहा है। इस स्थिति में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
  • स्थल पर और जल में रहने वाली कई अन्य मांसाहारी प्रजातियां जैसे कि ध्रुवीय भालू और भूमध्यसागरीय मोंक सील तथा हाथी जैसे विशालकाय शाकाहारी जंतु भी मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित हो रहे हैं।
  • भारत में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मिलने आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि 2014-2015 के बीच 500 से अधिक हाथी मारे गये, जिनमें से अधिकतर मामले मानव-जंतु संघर्ष से संबद्ध है। इसी अवधि में 2,361 लोग हाथियों के हमले में मारे गये।
  • रिपोर्ट के मुताबिक भारत मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती का सामना कर रहा है और इसकी वजह विकास संबंधी गतिवधियों से जंगलों पर बढ़ता दबाव है।
  • बाघों, हाथियों, एक सींग वाले गैंडे, एशियाई शेरों की सर्वाधिक संख्या के साथ-साथ विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भारत मानव-वन्यजीव संघर्ष की तात्कालिक समस्याओं का सामना कर रहा है, जिसका अवश्य ही समाधान करना चाहिए ताकि संरक्षण का एक सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण संरक्षण का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
  • भारत में हाथी अपने मूल अधिवास के सिर्फ तीन-चार प्रतिशत हिस्से में कैद होकर रह गये हैं, उनका शेष क्षेत्र वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन की भेंट चढ़ गया है। यह हाथियों को वनों और संरक्षित क्षेत्रों से बाहर जाने के लिए बाध्य कर कर रहा है।
  • डब्ल्यूडब्ल्यूएफ में ग्लोबल वाइल्डलाइफ प्रैक्टिस लीडर मार्गरेट किनेर्ड ने कहा कि वैश्विक वन्यजीव आबादी 1970 से औसतन 68 प्रतिशत घट गई है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)

  • परिचय: संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम पर्यावरण के बारे में विश्‍व में अग्रणी प्राधिकार है जो वैश्विक पर्यावरण एजेंडा तय करता है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है। इसकी स्थापना 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान हुई थी।
  • इसका मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है।
  • यूएनईपी संयुक्‍त राष्‍ट्र तंत्र के भीतर सतत् विकास के पर्यावरण संबंधी पहलू के सामंजस्‍यपूर्ण क्रियान्‍वयन को बढ़ावा देता है और दुनिया के पर्यावरण के लिए अधिकार के साथ हिमायत करता है।
  • प्रमुख प्रकाशन: अवर प्‍लेनेट; तुन्जा; एटलस; जीईओ : ग्‍लोबल एनवायरमेंट आउटलुक;

……………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

शक्तिशाली सौर तूफान

चर्चा में क्यों?

  • सूरज की सतह से पैदा हुआ शक्तिशाली सौर तूफान 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है।
  • यह सौर तूफान 11 और 12 जुलाई के बीच किसी भी समय पृथ्वी से टकरा सकता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अनुमान है कि ये हवाएं 1609344 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरिक्ष से महातूफान फिर आता है तो धरती के लगभगर हर शहर से बिजली गुल हो सकती है।

पृथ्वी पर क्या होगा असर?

  • सौर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है जिसका सीधा असर सैटलाइट्स पर हो सकता है। इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं।
  • हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।

1989 में भी आ चुका है सौर तूफान

  • वर्ष 1989 में आए सौर तूफान की वजह से कनाडा के क्‍यूबेक शहर में 12 घंटे के के लिए बिजली गुल हो गई थी और लाखों लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ा था।
  • इसी तरह से वर्ष 1859 में आए चर्चित सबसे शक्तिशाली जिओमैग्‍नेटिक तूफान ने यूरोप और अमेरिका में टेलिग्राफ नेटवर्क को तबाह कर दिया था।

सौर तूफान क्या होता है?

  • सूर्य की सतह पर कभी-कभी बेहद चमकदार प्रकाश दिखने की घटना को सन फ्लेयर (Sun Flare) कहा जाता है।
  • इस घटना में असीम ऊर्जा निकलती है।
  • इस ऊर्जा के साथ सूर्य से अतिसूक्ष्म नाभिकीय कण भी निकलते हैं। यह ऊर्जा और कण ब्रह्मांड में फैल जाते हैं। इससे बड़े स्तर पर नाभिकीय विकिरण की घटना होती है जिसे सौर तूफान कहा जाता है।
  • सौर तूफान का सौरमंडल पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। इस प्रकार की घटना के अध्ययन से वैज्ञानिकों को सूर्य और ब्रह्माण्ड को समझने में मदद मिलने की संभावना है ।
  • सूर्य से लगातार आते आवेशित (Charged) कणों से चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की रक्षा करता है। ये चुंबकीय शक्तियाँ वायुमंडल के आस-पास कवच का काम करती हैं, लेकिन सौर तूफान के दौरान कई बार आवेशित कण इस चुंबकीय कवच को भेद देते हैं।

……………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………

आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

सीमेंट उद्योग के लिए 25 सदस्यीय विकास परिषद का गठन

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार ने सीमेंट उद्योग के लिए 25 सदस्यीय विकास परिषद का गठन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • परिषद में डालमिया भारत ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पुनीत डालमिया तथा अल्ट्राटेक सीमेंट के प्रबंध निदेशक के सी झांवर शामिल है।
  • परिषद कचरे को समाप्त करने, अधिकतम उत्पादन हासिल करने, गुणवत्ता को बेहतर करने, लागत घटाने तथा उत्पादों के मानकीकरण के उपाय सुझाएगी।
  • आदेश के अनुसार परिषद स्थापित क्षमता के पूरे इस्तेमाल और उद्योग में कामकाज की स्थिति सुधारने के बारे में भी सिफारिशें देगी। विशेष रूप से परिषद कम दक्ष इकाइयों, लोगों को प्रशिक्षित करने तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान के बारे में सुझाव देगी।
  • इसके साथ ही परिषद लेखा और लागत के तरीकों और व्यवहार के मानकीकरण पर काम करेगी। साथ ही परिषद श्रम की उत्पादकता बढ़ाने के बारे में सुझाव देगी।
  • पुनीत डालमिया परिषद के चेयरमैन होंगे। परिषद के अन्य सदस्यों में श्री सीमेंट लि. के प्रबंध निदेशक एच एम बांगड़, इंडिया सीमेंट्स लि. के कार्यकारी अध्यक्ष राकेश सिंह, बिड़ला कॉरपोरेशन लि. के सीईओ प्रचेता मजूमदार, जेके सीमेंट लि. उप प्रबंध निदेशक माधव कृष्ण सिंघानिया और जेएसडब्ल्यू सीमेंट के सीईओ नीलेश नारवेकर शामिल हैं।

Related Posts