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Daily Current Affairs: 10 August 2021

राष्ट्रीय परिदृश्य

127वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित

चर्चा में क्यों?

  • केंद्र सरकार द्वारा को लोकसभा में पेश किए गए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी समुदाय) से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो गया है।
  • उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 15(4), 15(5) और 16(4) के अंतर्गत राज्य को सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची की पहचान करने तथा घोषित करने के लिये स्पष्ट रूप से शक्ति प्राप्त है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह विधेयक 127वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में पेश किया जा रहा है।
  • इस संविधान संशोधन विधेयक में राज्य सरकारों को ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार देने का प्रावधान है।
  • इसके द्वारा ओबीसी श्रेणी की “राज्य सूची” को पूरी तरह से राष्ट्रपति के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा और राज्य विधानसभा द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।
  • यानी राज्य सरकारें अब अपने यहां ओबीसी की लिस्ट तैयार कर सकेंगी। अब उन्हें किसी जाति को ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना होगा।

क्यों पड़ी संशोधन की जरूरत?

  • उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के विगत 5 मई को दिए गए एक आदेश के अनुसार राज्यों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरी और एडमिशन में आरक्षण देने का अधिकार नहीं है।
  • इसके लिए कोर्ट ने संविधान के 102वें संशोधन का हवाला दिया था जिसके आधार पर कोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठों को ओबीसी में शामिल कर आरक्षण देने के फैसले पर भी रोक लगा दी थी।
  • दरअसल, 2018 में हुए इस 102वें संविधान संशोधन में नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज (NCBC) की शक्तियों और जिम्मेदारियों को बताया गया था। इसके साथ ही ये 342A संसद को पिछड़ी जातियों की लिस्ट बनाने का अधिकार देता है।
  • इस संशोधन के बाद विपक्षी पार्टियां ये आरोप लगाती थीं कि केंद्र संघीय ढांचे को बिगाड़ रहा है। 5 मई को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का केंद्र ने भी विरोध किया। इसी के बाद 2018 के संविधान संशोधन में बदलाव की कवायद शुरू हुई।

नए बिल में क्या है?

  • ये बिल संविधान के 102वें संशोधन के कुछ प्रावधानों को स्पष्ट करने के लिए लाया गया है। इस बिल के पास होने के बाद एक बार फिर राज्यों को पिछड़ी जातियों की सूची बनाने का अधिकार मिल जाएगा।
  • वैसे भी 1993 से ही केंद्र और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश दोनों ही OBC की अलग-अलग लिस्ट बनाते रहे हैं। 2018 के संविधान संशोधन के बाद ऐसा नहीं हो पा रहा था। इस बिल के पास होने के बाद दोबारा से पुरानी व्यवस्था लागू हो जाएगी।
  • इसके लिए संविधान के आर्टिकल 342A में संशोधन किया गया है। इसके साथ ही आर्टिकल 338B और 366 में भी संशोधन हुए हैं।

क्या होगा असर?

  • संसद से इस बिल के पास होने के बाद राज्यों के पास ओबीसी सूची में अपनी मर्जी से जातियों को अधिसूचित करने का अधिकार होगा।
  • कई राज्यों में ओबीसी आरक्षण को लेकर अलग-अलग जातियां आंदोलन कर रही हैं।
  • महाराष्ट्र में मराठा समुदाय, हरियाणा में जाट समुदाय, गुजरात में पटेल समुदाय और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय खुद को ओबीसी वर्ग में शामिल कर आरक्षण देने की मांग कर रहा है। ऐसे में अब राज्यों के पास अधिकार होगा कि वे विभिन्न जातियों को ओबीसी में शामिल कर पाएंगी।

संविधान संशोधन विधेयक क्या होता है?

  • संविधान में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक तीन प्रकार के हो सकते हैं।
  • प्रत्येक को सदन में पारित होने के लिये साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।
  • प्रत्येक को सदन में पारित होने के लिये विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, अर्थात् किसी सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उस सदन के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से (अनुच्छेद 368)।
  • उनके पारित होने के लिये विशेष बहुमत के साथ ही उन विधानमंडलों द्वारा पारित इस आशय के प्रस्तावों के माध्यम से आधे से कम राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है (अनुच्छेद 368 के खंड (2) का परंतुक)।
  • अनुच्छेद 368 के तहत एक संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और प्रत्येक सदन द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जाता है।
  • धन विधेयक या संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

ट्रोइका प्सस वार्ता

चर्चा में क्यों?

  • तालिबान पर अंकुश लगाने और अफगानिस्तान में शांति की स्थापना के लिए अमेरिका, रूस, चीन और पाकिस्तान सहित ट्रोइका प्लस (Troika Plus) के प्रतिनिधियों ने दोहा में एक बैठक आयोजित करने की योजना बनाई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ​ट्रोइका प्लस उन देशों का समूह हैं, जो तालिबान पर अंकुश लगाने के लिए साथ में काम कर रहे हैं, जिसमें की अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश शामिल है।
  • इस समय पहला लक्ष्य अफगान समझौता कर देश में युध्द पर विराम लगाना, अफगान के साथ फिर से बातचीत शुरू करना, देश में आम चुनाव करवाना और संवैधानिक सुधार कर के एक अंतरिम गठबंधन सरकार बनाना हैं।
  • ​अफगानिस्तान सरकार को तालिबान से एक साल पहले बातचीत की शुरुआत करनी चाहिए थी जब आंदोलन को सैन्य सफलता नहीं मिली थी।
  • कुछ दिन पहले ही अफगान सरकार और तालिबान दोनों ने देश में शांति बहाल करने और युद्ध को रोकने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता जारी रखने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए सहमत हुए थे।
  • दोहा में हुए दो दिवसीय बैठक के बाद दोनों पक्षों ने एक संयुक्त बयान जारी किया क्योंकि अफगानिस्तान में हिंसा भड़की थी। मगर दोनों पक्षों ने हिंसा या संघर्ष विराम को कम करने की बात नहीं की।
  • रूस अफगानिस्तान में शांति कायम करने और राष्ट्रीय सुलह की प्रक्रिया की शर्तें तय करने के लिए बातचीत का ‘मॉस्को फॉर्मेट’ भी आयोजित करा रहा है।

भारत शामिल नहीं होगा

  • इस बैठक की हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें रूस ने भारत को आमंत्रित नहीं किया है। जबकि इस बैठक के लिए रूस ने पाकिस्तान और चीन जैसे देशों को भी आमंत्रित किया है, जिनके शामिल होने की संभावना है।
  • अफगानिस्तान में तालिबान के हमले बढ़ने पर रूस ने हिंसा रोकने और अफगान शांति प्रक्रिया पर जोर देने के लिए युद्धग्रस्त देश में सभी प्रमुख पक्षकारों तक पहुंचने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

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रिपोर्ट/इंडेक्स

जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी की रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग तेज हो रही है और इसके लिए साफ़ तौर पर मानव जाति ही ज़िम्मेदार है।
  • हाल ही में जारी इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की रिपोर्ट में कहा गया है कि पृथ्वी की औसत सतह का तापमान, साल 2030 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। यह बढ़ोतरी पूर्वानुमान से एक दशक पहले ही हो जाएगी।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते तापमान से दुनिया भर में मौसम से जुड़ी भयंकर आपदाएं आएंगी।
  • दुनिया पहले ही, बर्फ की चादरों के पिघलने, समुद्र के बढ़ते स्तर और बढ़ते अम्लीकरण में अपरिवर्तनीय बदलाव झेल रही है।
  • रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा हालात को देखते हुए इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस शताब्दी के अंत तक समुद्र का जलस्तर लगभग दो मीटर तक बढ़ सकता है।

कैसे रुक सकती है विभीषिका?

  • रिपोर्ट के अनुसार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में बड़ी कटौती करके बढ़ते तापमान को स्थिर किया जा सकता है।
  • रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि इसमें देरी की गुंजाइश नहीं है और अब कोई बहाना बनाने से भी काम नहीं चलेगा।
  • संयुक्त राष्ट्र के इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की 42 पन्नों की इस रिपोर्ट को नीति-निर्माताओं के लिए सारांश के रूप में जाना जाता है।
  • यह रिपोर्ट, आने वाले महीनों में सिलसिलेवार आने वाली कई रिपोर्ट्स की पहली कड़ी है जो ग्लासगो में होने वाले जलवायु सम्मेलन (COP26) के लिए महत्वपूर्ण होगी।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप अगर धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है तो इसके बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अब तक वैश्विक तापमान औद्योगीकरण पूर्व के स्तर से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है।

क्या है IPCC ?

  • इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था है जिसे जलवायु परिवर्तन के विज्ञान का आकलन करने के लिए 1988 में स्थापित किया गया था।
  • IPCC सरकारों को वैश्विक तापमान बढ़ने को लेकर वैज्ञानिक जानकारियां मुहैया कराती है ताकि वे उसके हिसाब से अपनी नीतियां विकसित कर सकें।
  • 1992 में जलवायु परिवर्तन पर इसकी पहली व्यापक मूल्यांकन रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। इस कड़ी में यह छठी रिपोर्ट है।

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भारत एवं विश्व

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 09 अगस्त को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की उच्‍च स्‍तरीय बैठक की अध्‍यक्षता की। यह बैठक समुद्री सुरक्षा बढ़ाने से संबंधित थी।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • UNSC की इस तरह की खुली परिचर्चा की बैठक की अध्यक्षता करने वाले नरेन्द्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।
  • इस बैठक में समुद्री अपराध और असुरक्षा से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इस बैठक में कहा कि आतंकवाद और पायरेसी के लिए समुद्री रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

समुद्र हमारी साझा धरोहर हैं

  • बैठक की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी बोले कि समुद्र हमारी साझा धरोहर हैं। समुद्री मार्ग अंतरराष्‍ट्रीय व्यापार की लाइफ लाइन हैं। ये समंदर हमारे ग्रह के भविष्य के लिए बेदह महत्वपूर्ण हैं। लेकिन, हमारी इस साझा समुद्री धरोहर को आज कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।’
  • ‘पायरेसी और आतंकवाद के लिए समुद्री रास्तों का दुरुपयोग हो रहा है। अनेक देशों के बीच समुद्री विवाद हैं। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं भी समुद्र से जुड़े विषय हैं।‘

क्‍या था विषय?

  • प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस खुली परिचर्चा की अध्यक्षता की। इसका विषय था- ‘समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा: अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता।’ यह परिचर्चा समुद्री अपराध और असुरक्षा का प्रभावी ढंग से मुकाबला और समुद्री क्षेत्र में समन्वय को मजबूत करने के तरीकों पर केंद्रित थी।
  • यूएनएससी ने समुद्री सुरक्षा और समुद्री अपराध के विभिन्न पहलुओं पर पूर्व में चर्चा कर कई प्रस्ताव पारित किए हैं।
  • हालांकि, यह पहली बार था जब उच्च स्तरीय खुली बहस में एक विशेष एजेंडा के रूप में समुद्री सुरक्षा पर समग्र रूप से चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने दिए पांच सिद्धांत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बैठक में पांच सिद्धांत रखे-

1-‘वैध समुद्रीय व्यापार से बैरियर हटाने चाहिए।

2- समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और अंतर्राष्‍ट्रीय कानून के आधार पर ही होना चाहिए।

3-हमें प्राकृतिक आपदाओं और समुद्री खतरे का सामना मिलकर करना चाहिए।

4-समुद्रीय पर्यावरण और संसाधनों को संजोकर रखना होगा।

5-हमें जिम्मेदार समुद्रीय कनेक्टिविटी को प्रोत्साहित करना चाहिए।’

इस साल अगस्‍त से मिली अध्‍यक्षता

  • भारत इस साल अगस्त महीने के लिए यूएनएससी की अध्यक्षता कर रहा है।
  • एक अगस्त से भारत ने यह जिम्मेदारी संभाल भी ली है।
  • यूएनएससी में केवल पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस हैं। वर्तमान में भारत दो साल के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है।
  • परिचर्चा में यूएनएससी के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के प्रमुख व संयुक्त राष्ट्र प्रणाली एवं प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों के उच्च स्तरीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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