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Daily Current Affairs 1 November

रिपोर्ट/इंडेक्स

द माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में विश्व बैंक ने ”माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ” (migration and development brief) रिपोर्ट जारी की है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस महामारी एवं वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण भारत प्रेषित की जाने वाली धनराशि  (Remittance) नौ फीसदी गिर कर 76 अरब अमेरिकी डॉलर हो जाएगी।
  • विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार रहते हैं, जो भारत में धनराशि को भेजते हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के कारण स्वदेश लौटे नागरिकों के चलते इसमें कमी होना स्वाभिक है। 
  • रिपोर्ट के अनुसार विदेशों से भेजे जाने वाले धन के मामले में भारत के बाद चीन, मैक्सिको, फिलीपींस और मिस्र 2020 में शीर्ष पांच देशों में शामिल हैं।
  • विश्व भर में कोरोना महामारी एवं आर्थिक संकट जारी रहने के बीच 2019 की तुलना में विदेशों में काम करने वाले लोगों द्वारा अपने घर भेजे जाने वाले धन (Remittance) में 2021 तक 14 फीसदी की कमी आएगी। 

क्यों महत्वपूर्ण है प्रवासियों द्वारा भेजा जाने वाला धन

  • दरअसल रेमिटेंस निम्न और मध्यम आय देशों में निर्धनता के उन्मूलन में मददगार होता है।
  • इससे शिक्षा पर व्यय में वृद्धि होती है और लाखों वंचित घरों में बाल श्रम की समस्या को दूर करने में भी मददगार होता है।
  • इसमें गिरावट से बहुत से परिवारों के व्यय करने की क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है।
  • विकासशील देशों में यह आय का एक प्रमुख जरिया है, लिहाजा इससे कई देशों के लोगों की व्यय करने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

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कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थिकी

गोनी चक्रवात

चर्चा में क्यों?

  • फिलीपींस में लुजोन द्वीप के बिकोल क्षेत्र में आये ऊष्णकटिबंधीय चक्रवात टाइफून ‘गोनी’(Goni) के कारण कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य लोग लापता हो गए।

महत्वपूर्ण बिंदु

  •  मौसम विभाग के मुताबिक ‘गोनी’ के कारण 225-310 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं।
  • ‘गोनी’ इस वर्ष फिलीपींस में दस्तक देने वाला 18वां चक्रवाती तूफान है।
  • उल्लेखनीय है कि फिलीपींस में प्रत्येक वर्ष जून से दिसंबर तक कई चक्रवाती टाइफून आते हैं।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical cyclone) को सैफिर-सिंपसन विंड स्केल (Saffir-Simpson Hurricane Wind Scale) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। जिसमें हवा की गति के आधार पर 1 से 5 तक की श्रेणी तय कर दी जाती है।

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टाइफून मोलावे

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में मध्य वियतनाम में आए टाइफून मोलावे (Typhoon Molave) के कारण  क्षेत्र में जन-धन की भारी क्षति हुई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अक्तूबर की शुरुआत से ही वियतनाम तूफान, भारी बारिश और बाढ़ के प्रकोप से जूझ रहा है, जिसके कारण देश में लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है।
  • टाइफून मोलावे वियतनाम में पिछले  दो दशकों में आया सबसे बड़ा तूफान है।  
  • 28 अक्तूबर, 2020 को इस तूफान के कारण वियतनाम के क्वांग नैम प्रांत (Quang Nam Province) के दो ज़िलों में भारी भू-स्खलन  की घटनाएँ देखी गईं।  
  • वियतनाम  पहुँचने से पहले टाइफून मोलावे फिलीपींस से गुज़रा था, जहाँ इसके कारण आई बाढ़ और भू-स्खलन में कम-से-कम 16 लोगों की मौत हो गई।

टाइफून  किसे कहते हैं?

  • ऊष्णकटिबंधीय चक्रवातों को दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन सागर क्षेत्र में टाइफून, उत्तरी अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में ‘हरिकेन’, दक्षिण-पश्चिम प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में ‘उष्णकटिबंधीय चक्रवात’ कहा जाता है।
  • ज़्यादातर टाइफून जून से नवंबर के बीच आते हैं जो जापान, फिलीपींस और चीन जैसे देशों को प्रभावित करते हैं।

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रक्षा प्रतिरक्षा एवं युद्धाभ्यास

मालाबार-2020

चर्चा में क्यों?

  • मालाबार नौसेना अभ्यास का पहला चरण तीन से छह नवंबर के बीच विशाखपत्तनम तट के पास बंगाल की खाड़ी में होगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • मालाबार नौसेना अभ्यास में इस बार भारत, अमेरिका, जापान के साथ आस्ट्रेलिया की नौसेनाएं भी भाग लेंगी।
  • चार देशों के इस नौसेना अभ्यास का पहला चरण तीन से छह नवंबर के बीच विशाखपत्तनम तट के पास बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया जा रहा है। वहीं दूसरा चरण 17 से 20 नवंबर के बीच अरब सागर में तय किया गया है। 
  • हाल ही में भारत ने यह घोषणा की थी कि ऑस्ट्रेलिया इस नौसेना अभ्यास का हिस्सा होगा, जिसके साथ ही अब यह प्रभावी तरीके से ‘क्वॉड’ या ‘चतुष्कोणीय गठबंधन’ (क्वाड्रीलैटरल कोलेशन) के सभी चार सदस्य देशों का अभ्यास हो गया है। 

टोक्यो में हुई थी ‘क्वॉड’ की बैठक 

  • ‘क्वॉड’ सदस्य राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों की टोक्यो में बैठक होने के दो हफ्ते बाद भारत ने आस्ट्रेलियाई नौसेना को अभ्यास में हिस्सा लेने का न्योता दिया था।
  • जापान में हुई इस बैठक में चारों देशों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत बाचतीत की गई थी।
  • पहले चरण के अभ्यास में जटिल एवं अत्याधुनिक नौसेना अभ्यास होंगे, जिनमें पनडुब्बी रोधी एवं हवाई युद्ध रोधी अभियान होंगे।
  • इसके अलावा, एक जंगी जहाज से उड़ान भर कर दूसरे युद्ध पोत पर भी लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर उतरेंगे। हथियारों से फायरिंग का भी अभ्यास किया जाएगा।

वर्ष 1992 में शुरू हुआ था मालाबार

  • 1992 में भारत-अमेरिका के बीच नौसेना के साझा युद्ध अभ्‍यास को लेकर एक समझौता हुआ था।
  • यह अभ्‍यास भारत के दक्षिणी राज्‍य केरल के मालाबार तट में हुआ था इसलिए इसको मालाबार एक्‍सरसाइज या मालाबार अभ्‍यास का नाम दिया गया था।
  • 1998 तक इसके तीन अभ्‍यास हुए थे। बाद में अमेरिका ने भारत के परमाणु कार्यक्रम से नाराज होकर इसको सस्‍पेंड कर दिया था। अमेरिका में 9/11 हमले के बाद अमेरिका के रुख में बदलाव आया और तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति जॉर्ज डब्‍ल्‍यू बुश ने भारत से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ देने की पेशकश की। इसके बाद एक बार फिर से दोनों देशों के बीच रिश्‍ते परवान चढ़े और इसकी दोबारा शुरुआत हुई।
  • वर्ष 2007 में बंगाल की खाड़ी में आयोजित मालाबार नौसेनिक अभ्यास पर चीन ने आपत्ति जाहिर की थी क्योंकि इसमें भारत, अमेरिका और जापान के अलावा सिंगापुर-ऑस्ट्रेलिया भी हिस्सा लेने वाले थे। ये दोनों ही अस्‍थाई सदस्‍य थे।
  • चीन के दबाव में ऑस्ट्रेलिया ने अंतिम समय में इस अभ्यास में आने से मना कर दिया था, लेकिन इस बार फिर से ऑस्ट्रेलिया भी इसमें शामिल होगा।
  • 2015 में जापान इसका स्थाई हिस्सा बना।
  • यह वार्षिक अभ्यास 2018 में फिलीपींस के समुद्री इलाके गुआम तट और 2019 में जापान के ससेबो शहर के समीप पश्चिमी प्रशांत महासागर में हुआ था।
  • इस बार का ये युद्धाभ्यास समुद्र में बिना संपर्क विषय पर केंद्र‍ित है। इस अभ्यास से मित्र देशों की नौसेना के बीच समन्वय मजबूत होगा।

ये पोत अभ्यास में हिस्सा लेंगे

  • इस साल के अभ्यास में भारतीय नौसेना अपने विध्वंसक पोत रणविजय,युद्ध पोत शिवालिक, समुद्र तटीय गश्ती नौका सुकन्या, जहाजों के बेड़े को सहायता पहुंचाने वाले पोत शक्ति और पनडुब्बी सिंधुराज को शामिल करेगी।
  •  इसके अलावा अत्याधुनिक जेट प्रशिक्षक हॉक, लंबी दूरी की समुद्री गश्त विमान पी 8 आई, डोर्नियर समुद्री गश्त विमान और कई सारे हेलीकॉप्टर भी अभ्यास में हिस्सा लेंगे।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

हाइड्रोजन जेनेरेशन टेक्नोलॉजी के लिए IOC औऱ IISC में करार

चर्चा में क्यों?

  • सार्वजनिक तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (Indian Oil Corporation) ने इंडियन इंस्टि्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु (Indian Institute of Science Bangalore) के साथ एमओयू (Memorandum of Understanding) साईन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • करार के मुताबिक बायोमॉस गैसिफिकेशन आधारित हाइड्रोजन जेनेरेशन टेक्नोलॉजी (Hydrogen Generation Technology) को डेवलप और डेमोन्सट्रेट करेगी।इससे फ्यूल सेल ग्रेड हाइड्रोजन बनाने में मदद मिलेगी।
  • इंडियन ऑयल और इंडियन इंस्टि्यूट ऑफ साइंस नई तकनीक से हाइड्रोजन ईंधन की प्रदर्शनी इंडियन ऑयल के शोध एवं अनुसंधान केंद्र फरीदाबाद में करेगी।
  • उत्पादन किए हाइड्रोजन का इस्तेमाल बसों में किया जाएगा।
  • दावा किया जा रहा है कि हाइड्रोजन ईंधन के अधिकाधिक इस्तेमाल से देश को ग्रीन मोबिलिटी के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
  • हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल टेलपाईप से सिर्फ पानी का उत्सर्जन करता है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

इंस्टीट्यूशन  ऑफ एमिनेंस

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में सोनीपत (हरियाणा) स्थित ‘ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी’ को ‘उत्कृष्ट संस्थान’ या ‘इंस्टीट्यूशन  ऑफ एमिनेंस’ (Institution of Eminence- IoE) का दर्जा प्रदान किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • गौरतलब है कि वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission- UGC) द्वारा देश के 13 अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ ‘ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी’ को IoE की उपाधि प्रदान करने के लिये चुना गया था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिये कुछ विधायी और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को पूरा करना आवश्यक था।
  • 29 अक्तूबर को ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के बीच एक समझौता-ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए, जिसके बाद इस यूनिवर्सिटी को IoE के रूप में घोषित करने की आधिकारिक पुष्टि की गई।  

‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’

(Institution of Eminence- IoE):

  • ‘उत्कृष्ट संस्थान योजना’ या ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस स्कीम’ की घोषणा सबसे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2016 के बजट भाषण के दौरान की गई थी।
  • IoE के रूप में संस्थानों के चयन हेतु UGC द्वारा सितंबर 2017 में सार्वजनिक संस्थानों के लिये ‘यूजीसी (सरकारी शिक्षण संस्थानों को इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के रूप में घोषित करने हेतु) दिशा-निर्देश, 2017’ और निजी संस्थानों के लिये ‘यूजीसी (इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस मानद विश्वविद्यालय) दिशा-निर्देश, 2017’ को अधिसूचित किया गया।
  • इसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षा संस्थानों को सशक्त बनाने तथा उन्हें वैश्विक स्तर के शिक्षण और अनुसंधान संस्थान बनने में सहायता के लिये सरकार की प्रतिबद्धताओं को लागू करना है।
  • इसके पहले चरण के तहत वैश्विक स्तर के शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के रूप में उभरने के लिये देश के 10 सार्वजनिक और 10 निजी उच्च शिक्षा संस्थानों को चिह्नित करने का लक्ष्य रखा गया था।
  • इसके तहत वर्ष 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र से आईआईटी-दिल्ली, आईआईटी-बंबई और बंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) तथा निजी क्षेत्र से मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन एवं बीआईटीएस, पिलानी (BITS Pilani) को चुना गया तथा महाराष्ट्र के जियो इंस्टीट्यूशन को ग्रीनफील्ड श्रेणी में चुना गया था।

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ई गवर्नेंस

‘सुमंगल’ पोर्टल

चर्चा में क्यों?

  • अंतर-जातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ‘सुमंगल’ नाम से एक वेब पोर्टल लॉन्च किया है, जो कि अंतर-जातीय जोड़ों को आवेदन की तारीख से 60 दिनों के भीतर प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने में मदद करेगा।
  • इसके अलावा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अंतर्जातीय विवाह करने वाले जोड़ों को मिलनी वाली प्रोत्साहन राशि को 1 लाख रुपए से बढाकर 2.5 लाख रुपए करने की भी घोषणा की है।
  • मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह के विवाहों से सामाजिक समरसता में बढ़ोतरी होगी। ध्यातव्य है कि ओडिशा में अंतर्जातीय विवाह से संबंधित एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिये विवाह में एक पक्ष का उच्च जाति और दूसरे पक्ष का अनुसूचित जाति से होना अनिवार्य है। इसके अलावा विवाह को  हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत पंजीकृत होना भी अनिवार्य है।

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