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Daily Current Affairs 08 July 2021

राष्ट्रीय परिदृश्य

केन्द्रीय मंत्रीमंडल का विस्तार एवं विभागों में परिवर्तन

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रीपरिषद में 07 जुलाई 2021 को व्यापक फेरबदल हुआ।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रीपरिषद में 07 जुलाई को हुए विस्तार और फेरबदल में इसमें 36 नए सांसदों को शामिल किया गया है।
  • सात वर्तमान राज्यमंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। आठ नए सांसदों को कैबिनेट में शामिल किया गया।
  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित एक समारोह में मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए सभी 43 सदस्यों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन सभी मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है।

मंत्रियों के विभागों की पूरी सूची

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग। सभी महत्‍वपूर्ण नीतिगत मुद्दे तथा वे सभी विभाग, जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।

कैबिनेट मंत्री

1 राजनाथ सिंह : रक्षा मंत्रालय

2 अमित शाह : गृह मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय

3 नितिन गडकरी : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग (एमएसएमई मंत्रालय हटाया गया)

4 निर्मला सीतारमण : वित्‍त मंत्री और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री

5 नरेंद्र सिंह तोमर : कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री

6 एस जयशंकर : विदेश मंत्री

7 अर्जुन मुंडा : जनजातीय मामलों के मंत्री

8 स्मृति ईरानी : महिला एव बाल विकास मंत्रालय

  1. पीयूष गोयल : वाणिज्य और उद्योग मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री और कपड़ा मंत्री
  2. धर्मेंद्र प्रधान : शिक्षा मंत्री, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री
  3. प्रल्हाद जोशी : संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री, और खान
  4. नारायण तातू राणे : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री
  5. सर्बानंद सोनोवाल – बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री, आयुष मंत्री
  6. मुख्तार अब्बास नकवी : अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री
  7. वीरेंद्र कुमार : सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री
  8. गिरिराज सिंह – ग्रामीण विकास मंत्री, और पंचायती राज मंत्री
  9. ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया : नागरिक उड्डयन मंत्री
  10. रामचंद्र प्रसाद सिंह : इस्पात मंत्री
  11. अश्विनी वैष्णव : रेल मंत्री, संचार मंत्री, और इलेक्ट्रॉनिक्स-सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
  12. पशुपति कुमार पारस : खाद्य प्रसंस्करण, उद्योग मंत्री
  13. गजेन्द्र सिंह शेखावत : जल शक्ति मंत्री
  14. किरण रिजिजू : कानून और न्याय मंत्री
  15. राज कुमार सिंह : विद्युत मंत्री, और ऊर्जा मंत्री
  16. हरदीप सिंह पुरी : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, और आवास और शहरी मामलों के मंत्री
  17. मनसुख मंडाविया : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, और रसायन और उर्वरक मंत्री
  18. भूपेंद्र यादव : पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, और श्रम और रोजगार मंत्री
  19. महेंद्र नाथ पाण्डेय : भारी उद्योग मंत्री
  20. पुरुषोत्तम रूपाला : मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री
  21. जी. किशन रेड्डी : संस्कृति मंत्री, पर्यटन मंत्री, और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री
  22. अनुराग सिंह ठाकुर : सूचना और प्रसारण मंत्री, और युवा मामले और खेल मंत्री

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

  1. राव इंद्रजीत सिंह : सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), योजना मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  2. डॉ. जितेंद्र सिंह : विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधान मंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री; तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री

राज्य मंत्री

  1. श्रीपद येसो नाइक : बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री और पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  2. फग्गनसिंह कुलस्ते : इस्पात मंत्रालय में राज्य मंत्री, और ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री
  3. प्रहलाद सिंह पटेल : जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री, और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  4. अश्विनी कुमार चौबे : उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री, और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  5. अर्जुन राम मेघवाल : संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री, और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री
  6. जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह : सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री, और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  7. कृष्ण पाल : विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री, और भारी उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  8. दानवे रावसाहेब दादाराव : रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री, कोयला मंत्रालय में राज्य मंत्री, और खान मंत्रालय में राज्य मंत्री
  9. रामदास अठावले : सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  10. साध्वी निरंजन ज्योति : उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री, और ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री
  11. डॉ. संजीव कुमार बाल्यान : मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री
  12. नित्यानंद राय : गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री
  13. पंकज चौधरी : वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री
  14. अनुप्रिया सिंह पटेल : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  15. एस. पी. सिंह बघेल : कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री
  16. राजीव चंद्रशेखर : कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में राज्य मंत्री, और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री
  17. शोभा करंदलाजे : कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  18. भानु प्रताप सिंह वर्मा : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री
  19. दर्शना विक्रम जरदोश : कपड़ा मंत्रालय में राज्य मंत्री, और रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री
  20. वी. मुरलीधरन : विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री, और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री
  21. मीनाक्षी लेखी : विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री, और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री
  22. सोम प्रकाश : वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  23. रेणुका सिंह सरुता : जनजातीय मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  24. रामेश्वर तेली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री, और श्रम और रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री
  25. कैलाश चौधरी : कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  26. अन्नपूर्णा देवी : शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री
  27. ए. नारायणस्वामी : सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  28. कौशल किशोर : आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  29. अजय भट्ट : रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री, और पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  30. बी एल वर्मा : उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री, और सहकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  31. अजय कुमार : गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री
  32. देवुसिंह चौहान : संचार मंत्रालय में राज्य मंत्री
  33. भगवंत खुबा : नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में राज्य मंत्री, और रसायन और उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री

34 : कपिल मोरेश्वर पाटिल : पंचायती राज मंत्रालय में राज्य मंत्री

  1. प्रतिमा भौमिक : सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  2. डॉ. सुभाष सरकार : शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री
  3. डॉ. भागवत किशनराव कराड : वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री
  4. डॉ. राजकुमार रंजन सिंह : विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री, और शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री
  5. डॉ. भारती प्रवीण पवार : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  6. बिश्वेश्वर टुडू : जनजातीय मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री, और जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री
  7. शांतनु ठाकुर : बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  8. डॉ. मुंजापारा महेंद्रभाई : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री, और आयुष मंत्रालय में राज्य मंत्री
  9. जॉन बारला : अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  10. डॉ. एल. मुरुगन : मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री, और सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  11. निसिथ प्रमाणिक : गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री, और युवा मामले और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री

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सहकारिता मंत्रालय का गठन

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्र सरकार ने हाल ही में एक नए मंत्रालय ‘सहकारिता मंत्रालय’ (Ministry of Co-operation) का गठन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस नए मंत्रालय का पहला मंत्री अमित शाह को बनाया गया है।
  • सरकार ने कहा है कि ‘सहकार से समृद्धि’ के सपने को साकार करने के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।
  • नया सहकारिता मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान करेगा।
  • यह सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक पहुंचने वाले एक सच्चे जनभागीदारी आधारित आंदोलन को मजबूत बनाने में भी सहायता प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान अलग सहकारी मंत्रालय का गठन करने की घोषणा की थी।

क्यों आवश्यकता पड़ी नए मंत्रालय की?

  • हमारे देश में सहकारिता आधारित आर्थिक विकास मॉडल बहुत प्रासंगिक है, जहां प्रत्येक सदस्य अपनी जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करता है। को-कोऑपरेटिव्स के काम करने को लेकर लीगल फ्रेमवर्क की बेहद ज्यादा जरूरत थी।
  • सहकारी समितियों को पिछड़ने से बचाने और उन्हें विकास के पथ पर आगे ले जाना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया है।
  • यह मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए ‘कारोबार में सुगमता’ के लिए प्रक्रियाओं को कारगर बनाने और बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) के विकास को सक्षम बनाने की दिशा में कार्य करेगा।

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पश्चिम बंगाल में विधान परिषद का प्रस्ताव पारित

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में पश्चिम बंगाल राज्य की विधानसभा ने राज्य में विधान परिषद के गठन हेतु एक प्रस्ताव पारित किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • राज्य विधानसभा ने संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत राज्य में विधान परिषद (legislative council) के निर्माण के लिए 6 जुलाई, 2021 को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया। सरकार 196 मतों के साथ प्रस्ताव पारित करने में सफल रही।
  • बंगाल में विधान सभा में 294 सदस्य है। हालांकि, मतदान के दौरान केवल 265 ही मौजूद रहे।
  • वर्तमान में छह राज्यों; उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में विधान परिषद है।
  • पश्चिम बंगाल में भी विधान परिषद थी। यह 1937 में उच्च सदन वाला पहला राज्य था। लेकिन 1969 में, विधान परिषद को समाप्त कर दिया गया था क्योंकि तत्कालीन सरकार ने इसे “अभिजात्यवाद का प्रतीक” (symbol of elitism) माना था।
  • ने संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत राज्य में विधान परिषद (legislative council) के निर्माण के लिए 6 जुलाई, 2021 को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया। सरकार 196 मतों के साथ प्रस्ताव पारित करने में सफल रही।
  • बंगाल में विधान सभा में 294 सदस्य है। हालांकि, मतदान के दौरान केवल 265 ही मौजूद रहे।
  • वर्तमान में छह राज्यों; उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में विधान परिषद है।
  • पश्चिम बंगाल में भी विधान परिषद थी। यह 1937 में उच्च सदन वाला पहला राज्य था। लेकिन 1969 में, विधान परिषद को समाप्त कर दिया गया था क्योंकि तत्कालीन सरकार ने इसे “अभिजात्यवाद का प्रतीक” (symbol of elitism) माना था।

विधान परिषद का इतिहास

  • विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। हालांकि यह सभी राज्यों में अस्तित्व में नहीं है। भारत सरकार के अधिनियम, 1919 के तहत भारत एकपक्षीय से द्विसदनीय विधायिका की ओर अग्रसर हुआ।
  • 1918 में आई मांटेग्यु-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट, जिसने केंद्र में उच्च सदन (राज्यसभा) के गठन की परिकल्पना की, ने ही प्रांतों (मौजूदा राज्यों) में ऊपरी सदन (विधान-परिषद्) की नींव रखी।
  • इसके पश्चात भारत सरकार अधिनियम, 1935 में ब्रिटिश सरकार ने 1937 के मध्य में बंगाल, संयुक्त प्रांत, बिहार, बॉम्बे, मद्रास और असम में उच्च सदनों की स्थापना की। स्वतन्त्रता के पश्चात भारत के संविधान में विधान परिषद सम्बन्धी प्रावधान बनाए रखा गया।

विधानपरिषद का गठन एवं विघटन

  • भारतीय संविधान अनुच्छेद 169 के तहत संसद को किसी राज्य में विधान परिषद स्थापित करने या समाप्त करने का अधिकार दिया गया है।
  • इसके लिए उस राज्य कि विधान सभा द्वारा इस आशय का संकल्प अपनी की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों की संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित होना चाहिए। इसके पश्चात् राष्ट्रपति की स्वीकृति भी आवश्यक होती है।
  • अनुच्छेद 168 में यह प्रावधान किया गया है कि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों जैसे; आंध्र प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तथा पश्चिम बंगाल में विधान मण्डल द्विसदनीय होगा तथा शेष राज्यों में एक सदनीय होगा।
  • 2 जून, 2014 को आंध्र प्रदेश के विभाजन के पश्चात 29वें राज्य के रुप में तेलंगाना में द्विसदनीय विधायिका का प्रावधान किया गया। जम्मू कश्मीर के विभाजन के पश्चात वर्तमान में 6 राज्यों में विधान परिषद प्रचलन में है जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा कर्नाटक शामिल हैं।

निर्वाचन पद्धति 

  • विधान परिषद के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होते हैं। परिषद में सदस्यों की अधिकतम संख्या विधान सभा की एक तिहाई और न्यूनतम संख्या 40 निश्चित की गई है।

   विधानपरिषद के कुल सदस्यों में से,

  •  1/3 सदस्य राज्य के विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं;
  •  1/3 सदस्य एक विशेष निर्वाचक-मंडल द्वारा निर्वाचित होते हैं जिसमें नगरपालिकाओं, ज़िला बोर्डों और अन्य स्थानीय प्राधिकारों के सदस्य शामिल होते हैं;
  •  1/12 सदस्यों का निर्वाचन शिक्षकों के निर्वाचक-मंडल द्वारा
  •  1/12 सदस्यों का निर्वाचन पंजीकृत स्नातकों के निर्वाचक-मंडल द्वारा
  •  शेष सदस्यों को विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट सेवाओं के लिये राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।

कार्यकाल एवं पीठासीन अधिकारी

  • राज्य सभा के समान विधान परिषद भी एक स्थायी सदन है। इसके एक तिहाई सदस्य, प्रत्येक दूसरे वर्ष सेवा निवृत हो जाते हैं। इस प्रकार प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष तक विधान परिषद का सदस्य होता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 182 में यह प्रावधान किया गया है कि विधान परिषद के दो प्रमुख अधिकारी सभापति और उप-सभापति होंगे। इन दोनों पदाधिकारियों का चुनाव विधान परिषद अपने सदस्यों में से करती हैं।

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कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

गुजरात का भालिया गेहूं

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भौगोलिक संकेतक (GI) प्रमाणित गुजरात के भालिया गेहूं का निर्यात किया गया है।

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • भौगोलिक संकेतक (GI) प्रमाणित गुजरात के भालिया गेहूं की पहली शिपमेंट गुजरात से केन्या और श्रीलंका को भेजी गई है।
  • इस पहल से भारत से गेहूं निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

जीआई प्रमाणित भालिया गेहूं

  • जीआई प्रमाणित भालिया गेहूं में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है और यह स्वाद में मीठा होता है।
  • इसकी फसल प्रमुख रूप से गुजरात के भाल क्षेत्र में पैदा की जाती है।
  • भाल क्षेत्र में अहमदाबाद, आनंद, खेड़ा, भावनगर, सुरेंद्रनगर, भरूच आदि जिले शामिल हैं।
  • इस गेहूं की किस्म की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि इसे बारिश के मौसम में बिना सिंचाई के उगाया जाता है।
  • गुजरात में लगभग दो लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में इसकी खेती की जाती है।
  • गेहूं की भालिया किस्म को जुलाई, 2011 में जीआई प्रमाणन प्राप्त हुआ था। जीआई प्रमाणीकरण का पंजीकृत प्रोपराइटर आणंद कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात है।

क्या है भौगोलिक संकेतक?

  • भौगोलिक संकेतक या जियोग्राफिकल इंडीकेशन का इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के लिये किया जाता है, जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र होता है। इन उत्पादों की विशिष्ट विशेषता एवं प्रतिष्ठा भी इसी मूल क्षेत्र के कारण होती है।इस तरह का संबोधन उत्पाद की गुणवत्ता और विशिष्टता का आश्वासन देता है।

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