इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे ने आईजीजी एलिसा टेस्ट (IgG ELISA antibody test)‘कोविड कवच एलिसा’ को विकसित और प्रमाणित किया है। इसके माध्यम से कोविड-19 के एंडीबॉडी की खोज की जाएगी। कोरोना वायरस कोविड-19 अब तक 214 देशों में फ़ैल चुका है। ज़्यादातर देश हर संभव प्रयास के बाद भी इस वायरस के प्रसार को फ़ैलने से रोकने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय वैज्ञानिक लगातार इस प्रयास में लगे हुए हैं कि वो कोविड-19 के कारक सार्स-कोव-2 से जुड़ा स्वदेशी इलाज विकसित कर लें। एनआईवी देश की सर्वोच्च लैबोरेट्री है जिसमें वॉयरोलॉजी से जुड़े रिसर्च की सारी उच्चतम सुविधाएं उपलब्ध हैं।
एनआईवी के निपुण वैज्ञानिकों की टीम भारत में लैबोरेट्री कंफर्म पेशेंट से सार्स-कोव-2 वायरस को अलग करने में सफल रही। इसकी वजह से सार्स-कोव-2 के स्वदेशी उपचार का रास्ता तैयार हुआ। हालांकि, सार्स-कोव-2 के मामले में आरटी-पीसीआर टेस्ट को सर्वोत्तम टेस्ट माना जाता है, किसी आबादी में कितने लोगों का सामना वायरस से हुआ है इसे समझने के लिए एंटीबॉडी टेस्ट अहम है।आईसीएमआर ने ज़ायडस कैडिला के साथ इस किट के व्यापक उत्पादन के लिए हाथ मिलाया है। व्यापक उत्पादन के लिए इस तकनीक को ज़ायडस कैडिला को दे दिया गया है। ज़ायडस कैडिला इनोवेशन आधारित एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी है।

Related Posts

Leave a Reply