कोरोना किलर बॉक्स

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के विशेषज्ञों ने एक ऐसा बॉक्स तैयार किया है, जिसमें उनका दावा है कि सब्जी, फल, चीनी, दूध, दाल की पैकिंग, मोबाइल, रुपये और चाबी, आदि को सैनिटाइज किया जा सकता है। इससे निकलने वाली पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet Rays) कुछ ही समय में वस्तुओं को बैक्टीरिया और वायरस मुक्त कर सकती है। सेंसर आधारित बॉक्स में टाइम सेट करने के बाद अलार्म बज उठता है। इस डिवाइस को कोरोना किलर बॉक्स नाम दिया गया है। इस बॉक्स में कई पराबैंगनी लाइटें लगाई हैं, जिसकी रेंज 240 से 260 नैनोमीटर के बीच रखी गई है। एक बॉक्स की अनुमानित कीमत करीब पांच हजार रुपये है।
पराबैंगनी किरणें  किरणें क्या है?
दृष्य प्रकाश, इंफ्रारेड और रेडियो वेव्स की तरह ही पराबैंगनी किरणें  भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (Electromagnetic Radiation)है। स्पेक्ट्रम पर, UV लाइट 4 से 400 नैनोमीटर तक वेवलेंथ के साथ वायलेट लाइट और एक्स किरणो कें बीच होता है।
यद्यपि यह नग्न आंखों से नही देखी जाती लेकिन सूर्य के अधिक सम्पर्क में आने से हम इसके प्रभावों को नोट कर सकते है। क्योंकि यही रेडिएशन सनबर्न, स्किन कैंसर और अन्य बीमारियों का कारक बनती है। शब्द “पराबैंगनी” मतलब है “बैंगनी से परे” का । पराबैंगनी विकिरण की खोज जर्मन भौतिकशास्त्री जोहान विल्हेम रिटर 1801 में की थी।
अल्ट्रावायलेट रेडिएशन के स्त्रोत
सूर्य अल्ट्रावॉयलेट विकीरण का हमारा प्राथमिक प्राकृतिक स्रोत है। कृत्रिम स्तोत्र में टैनिंग बूथ, ब्लैक लाइट, क्यूरिंग लैंप, जरमिसाइडल लैंप, हैलोजन लाइट, हाई इंटेनसिटी डिस्चार्ज लैंप्स, फ्लोरोसेंट और इंकैंडिसेंट सोर्सेज और कुछ प्रकार के लेज़र शामिल हैं।
सबसे घातक बैंगनी किरणें
सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें हानिकारक होती हैं सूर्य की पराबैंगनी किरणों को सामान्यता उनके तरंग धैर्य के आधार पर तीन वर्गों में बांटा गया है – UV -A, UV -B, UV -C तथा इन किरणों में UV -C सबसे अधिक हानिकारक होती है लेकिन ये किरणें पृथ्वी के धरातल तक नहीं पहुंच पाती हैं क्योंकि इनका अवशोषण ओजोन परत द्वारा हो जाता है। UV -A एवं UV -B किरणों का त्वचा पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है़।

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