कोरोना विस्फोट के मुहाने पर शरणार्थी शिविर

ग्रीस का लेसबॉस द्वीप यूरोप के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर मोरिया के लिए जाना जाता है। शरणार्थियों से भरे मोरिया में उनके बीच एक मीटर का फासला बनाए रखना, कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण वालों को पृथक करना और पानी की किल्लत के बीच जरूरी साफ-सफाई सुनिश्चित करना पहले ही नामुमकिन था। अब लेसबॉस में कोरोना के तीन मामले सामने आने के बाद अधिकारियों के लिए वहां मौजूद शरणार्थियों को बाकी आबादी से दूर रखना बड़ी चुनौती बन गया है। मोरिया कैंप की अधिकतम क्षमता छह हजार है, लेकिन वहां 19 हजार से अधिक शरणार्थी रह रहे हैं। इनमें से आधे से ज्यादा कैंप के बाहर बने अस्थाई टेंट में सोते हैं।
विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में भीड़ और तंग शिविरों में रहने वाले 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या कोरोना संक्रमण की चपेट में हैं। उनका कहना है कि 2017 में ये शरणार्थी यहां आये थे।अन्य देशों में जहां जनता को दो मीटर (छह फीट) दूर रहने को कहा जा रहा है, यहां लगभग 600,000 रोहिंग्या बड़ी बुरी हालत में हैं। प्रत्येक झोंपड़ी बमुश्किल 10 वर्ग मीटर (12 वर्ग गज) है और वे 12 लोग एक साथ रहते हैं।
संयुक्‍त शरणार्थी उच्‍चायुक्‍त कार्यालय (UNHCR)
संयुक्‍त शरणार्थी उच्‍चायुक्‍त कार्यालय (UNHCR)की स्‍थापना 14 दिसम्‍बर, 1950 को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने की थी। एजेंसी का कार्य क्षेत्र दुनिया भर में शरणार्थियों के संरक्षण और शरणार्थी समस्‍याओं के समाधान के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय कार्रवाई का नेतृत्‍व और उसमें समन्‍वय करना है। इसका मूल उद्देश्‍य शरणार्थियों के अधिकारों और कल्‍याण की रक्षा करना है। यूएनएचसीआर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करता है कि हर कोई किसी दूसरे देश में शरण मांगने और सुरक्षित शरण पाने के अधिकार का उपयोग कर सके। उसे स्‍वेच्‍छा से स्‍वदेश लौटने, स्‍थानीय समुदाय में घुलमिल जाने अथवा किसी तीसरे देश में बस जाने का विकल्‍प भी मिले। यूएनएचसीआर को राष्‍ट्रविहीन लोगों की मदद करने का काम भी सौंपा गया है। इसके महानिदेशक फिलिप्पो ग्रांडी हैं। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में है।

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