चर्चा में क्यों?

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 – 20, जुलाई 2020 से लागू हो गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के स्थान पर यह अधिनियम लाया गया है।
  • नए अधिनियम में उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा के लिए केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की स्थापना करना शामिल है।
  • सीसीपीए को उपभोक्ता अधिकारों और संस्थानों की शिकायतों/अभियोजन के उल्लंघन की जांच करने, असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं को वापस लेने का आदेश देने, अनुचित व्यापार चलनों और भ्रामक विज्ञापनों को रोकने का आदेश देने और निर्माताओं/समर्थनकर्ताओं/भ्रामक विज्ञापनों के प्रकाशकों पर जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।
  • इस अधिनियम के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को 48 घंटों के भीतर उपभोक्ता को शिकायत प्राप्ति की सूचना देनी होगी और शिकायत प्राप्ति की तारीख से एक महीने के भीतर उसका निपटारा करना होगा।
  • अधिनियम उत्पाद दायित्व की अवधारणा को प्रस्तुत करता है और मुआवजे के किसी भी दावे के लिए उत्पाद निर्माता, उत्पाद सेवा प्रदाता और उत्पाद विक्रेता को इसके दायरे में लाता है।
  • नए अधिनियम में मध्यस्थता का एक वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र प्रदान किया गया है। ये इस अधिनिर्णय प्रक्रिया को सरल करेगा। जहां भी शुरुआती निपटान की गुंजाइश मौजूद हो और सभी पक्ष सहमत हों, वहां मध्यस्थता के लिए उपभोक्ता आयोग द्वारा एक शिकायत उल्लिखित की जाएगी।
  • उपभोक्ता आयोगों के तत्वावधान में स्थापित किए जाने वाले मध्यस्थता प्रकोष्ठों में मध्यस्थता आयोजित की जाएगी। मध्यस्थता के माध्यम से होने वाले निपटान के खिलाफ कोई अपील नहीं होगी।
  • उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के नियमों के अनुसार 5 लाख रुपये तक का मामला दर्ज करने के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। इलेक्ट्रॉनिक रूप से शिकायतें दर्ज करने के लिए भी इसमें प्रावधान है, न पहचाने जाने वाले उपभोक्ताओं की देय राशि को उपभोक्ता कल्याण कोष (CWF) में जमा किया जाएगा।
  • नौकरियों, निपटान, लंबित मामलों और अन्य मसलों पर राज्य आयोग हर तिमाही केंद्र सरकार को जानकारी देंगे।
  • नया अधिनियम उत्पाद दायित्व की अवधारणा को भी लाया है, और मुआवजे के लिए किसी भी दावे के लिए उत्पाद निर्माता, उत्पाद सेवा प्रदाता और उत्पाद विक्रेता को अपने दायरे में लाता है।

मिलावटी / नकली सामानों के निर्माण या बिक्री के लिए सजा का प्रावधान

  • इस अधिनियम में एक सक्षम न्यायालय द्वारा मिलावटी / नकली सामानों के निर्माण या बिक्री के लिए सजा का प्रावधान है।
  • पहली बार दोषी पाए जाने की स्थिति में संबंधित अदालत दो साल तक की अवधि के लिए व्यक्ति को जारी किए गए किसी भी लाइसेंस को निलंबित कर सकती है, और दूसरी बार या उसके बाद दोषी पाए जाने पर उस लाइसेंस को रद्द कर सकती है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद (CCPC)

  • केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद (Central Consumer Protection Council, CCPC) के गठन के लिए नियम भी तय किए गए हैं।
  • ये परिषद उपभोक्ता मुद्दों पर एक सलाहकार निकाय है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री द्वारा की जाती है और उपाध्यक्ष के रूप में संबंधित राज्य मंत्री और विभिन्न क्षेत्रों से 34 अन्य सदस्य होते हैं।
  • तीन वर्ष के कार्यकाल वाली इस परिषद के पास उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और एनईआर, प्रत्येक क्षेत्र से दो राज्यों के उपभोक्ता मामलों के प्रभारी मंत्री होंगे। विशिष्ट कार्यों के लिए इन सदस्यों के बीच कार्य समूह का भी प्रावधान है।

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