असम गैस के कुंए में लगी आग के कारणों की जांच के लिए कमेटी गठित

असम के तिनसुकिया जिले के बाघजान तेल कुएं में लगी आग के कारणों को जानने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है।
इस कमेटी में हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के महानिदेशक एससीएल दास, ओनजीसी के पूर्व अध्यक्ष बीसी बोरा और ओनजीसी के पूर्व निदेशक टीके सेनगुप्ता शामिल है।
समिति निर्धारित प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए अंतराल पर एक रिपोर्ट करेगी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। समिति ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए छोटे और दीर्घकालिक उपायों की भी सिफारिश करेगी।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के असम के तिनसुकिया जिले स्थित बाघजान तेल क्षेत्र में 27 मई को अनियंत्रित गैस उत्सर्जन हुआ जिसके बाद एक में 9 जून को भीषण आग लग गई । इसके बाद कंपनी ने सिंगापुर स्थित कंपनी अलर्ट डिसास्टर कंट्रोल के विशेषज्ञों को फैलती आग को नियंत्रित करने के लिए बुलाया। आग लगने के कारणों का हालांकि, अब तक पता नहीं लग पाया है।
अग्निकांड से हुई व्यापक पर्यावरणीय क्षति की आशंका
उल्लेखनीय है कि दुर्घटना स्थन के पास ही मगुरी-मोटापुंग वेटलैंड (Maguri-Motapung Wetland) स्थित है, जो कि एक महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (Important Bird Area- IBA) के रूप में अधिसूचित किया गया है। डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान भी इसके पास में ही है जहां वनस्पतियों तथा वन्य जीवों की कुछ दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसके अलावा बाघजान गांव के पास से गुजरने वाली डिब्रू नदी के पानी पर भी गैस रिसाव के कारण काफी असर पड़ा है। गैस रिसाव के प्रभाव से नदियों में मछलियां मर गई हैं। साथ ही लुप्तप्राय नदी डॉल्फिन अनेक प्रकार की मछलियों की मारी गई हैं।

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