चीन में परंपरागत चिकित्सा में अब नहीं होगा पैंगोलिन का उपयोग

चीन ने परंपरागत चिकित्सा उपचार की सूची से पैंगोलिन (pangolin)का नाम हटा दिया है। चीन में पैंगोलिन का शिकार सिर्फ़ मांस के लिए नहीं होता है बल्कि इसकी की मांग दवाइयों के लिए भी भारी मात्रा में होती है। अब जबकि चीन ने अपनी परंपरागत चीनी चिकित्सा की आधिकारिक सूची से पैंगोलिन को हटा दिया है तो यह उम्मीद की जा सकती है कि इस जीव के शिकार में भी कमी आए।
चींटियों को खाने वाला यह स्तनपायी जीव विश्व में सबसे अधिक तस्करी का शिकार है और इस कारण इस जीव की सभी आठ प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर भी हैं। पैंगोलिन का शरीर स्कैल्स से ढका रहता है। जो उसकी सुरक्षा के लिए होते हैं। इन स्कैल्स का उपयोग पारंपरिक चीनी चिकित्सा में होता है, इसके अलावा इसका मांस भी खाया जाता है।कोरोना वायरस (सार्स-सीओवी-2) फैलने के बाद पैंगोलिन काफ़ी चर्चा में रहा। इसे कोविड-19 के वायरस का वाहक माना गया। हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि पैंगोलिन से ही कोरोना वायरस इंसानों में आया। वैज्ञानिक अभी इस पर अध्ययन कर रहे हैं।
चीनी पैंगोलिन को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की गंभीर संकटग्रस्त (Critically Endangered) की श्रेणी में रखा गया है। वहीं भारत में पाई जाने वाली इंडियन पैंगोलिन को IUCN की लाल सूची में संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में रखा गया है।

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