सीबीआईसी ''तुरंत कस्टम्स''

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ( Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) ने एक सुरक्षित क्यूआर कोड शिपिंग बिल “Turant Customs” की शुरुआत की है जिसे सीमा शुल्क विभाग द्वारा निर्यात की अनुमति देने के बाद निर्यातकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाएगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • “तुरंत कस्टम्स”, जिसका मुख्य घटक फेसलेस असेसमेंट है, जिसे विभिन्न चरणों में 1 जनवरी 2021 तक पूरे देश में लागू किया जाएगा।
  • इससे निर्यात के प्रमाण के लिए निर्यातकों को सीमा शुल्क अधिकारियों से संपर्क करने की आवश्यकता समाप्त हो गयी है।
  • निर्यातकों को इस उद्देश्य के लिए सीमा शुल्क कार्यालय जाने की जरूरत नहीं रह जायेगी और वे व्यवसाय को बढ़ावा देने में अपने समय का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
  • इसके माध्यम से शिपिंग बिल को जमा करने से लेकर निर्यात-अनुमति के अंतिम आदेश तक, सीमा शुल्क निर्यात प्रक्रिया पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक आधारित भी हो गयी है।

“तुरंत कस्टम्स”  कार्यक्रम का उद्देश्य

  • “तुरंत कस्टम्स” कार्यक्रम के तहत फेसलेस, पेपरलेस और कॉन्टैक्टलेस कस्टम्स की ओर एक और कदम है। ये सुधार आयातकों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के लिए समय और लागत को कम करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी के उन्नत उपयोग पर आधारित हैं, जिससे वर्ल्ड बैंक के डूइंग बिजनेस रिपोर्ट (Ease of Doing Business (EoDB) index) के सीमा-पार व्यापार मानकों के सन्दर्भ में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है।
  • शिपिंग बिल को इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजने से इन दस्तावेजों को कागज में प्रस्तुत करने की वर्तमान आवश्यकता दूर हो जायेगी, जिससे ग्रीन कस्टम्स को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड

  • गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) के लागू होने के बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स (CBEC) का नाम बदलकर 2018 में Central Indirect Taxes and Customs (CBIC) कर दिया गया है।
  • सीबीआईसी वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है।
  • सीबीआईसी सीमा शुल्क (Customs) , केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Customs), गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) और तस्करी की रोकथाम के संबंध में नीति के निर्माण के कार्यों से संबंधित है।
  • इसके वर्तमान अध्यक्ष एम अजीत कुमार हैं।

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