ऑस्ट्रेलिया ने निलंबित की हांगकांग के साथ प्रत्यर्पण संधि

चर्चा में क्यों?

  • हांगकांग में चीन के विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के विरोध में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन ने चीन नियंत्रित हांगकांग के साथ किए गए प्रत्यर्पण संधि को समाप्त करने की घोषणा की है।
  • हालांकि यह संधि अभी सिर्फ निलंबित की गई है।
  • इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया पूर्व ब्रिटिश क्षेत्र (हांगकांग) के 10,000 छात्रों और अस्थायी कुशल श्रमिकों के लिए वीजा की पेशकश की, ताकि वे आस्ट्रेलिया में नया जीवन शुरू सकें।
  • इससे पहले कनाडा ने हांगकांग के साथ प्रत्यर्पण संधि को निलंबित कर दिया है।

क्या है विवाद की वजह?

  • दरअसल हांगकांग में लोकतंत्र के तेज हो रहे स्वरों को दबाने के लिए चीन ने मई 2020 में हांगकांग में विवादास्पद कानून ( National Security Law for Hong Kong (NSL) लागू किया था।
  • चीन के इस प्रस्‍ताव का अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्‍ट्रेलिया समेत कई देशों ने अपनी गहरी चिंता व्‍यक्‍त की है।
  • इन देशों ने तर्क दिया था कि यह ‘एक देश, दो प्रणालियों’ के ढांचे को कमजोर करेगा।
  • यह कानून चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा का उल्‍लंघन है। इससे वन कंट्री, टू सिस्टम फ्रेमवर्क कमजोर होगा।

हांगकांग के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

  • हांगकांग लगभग एक शताब्दी तक ब्रिटेन का उपनिवेश रहा था जिसे 1997 में चीन को सौंप दिया गया।
  • इसे सौंपने के दौरान एक देश दो व्यवस्था (One Nation Two System) की व्यवस्था की गई।
  • इस व्यवस्था के अनुसार हांगकांग को विशेष दर्जा दिया गया अर्थात् हांगकांग की शासन व्यवस्था चीन के मुख्य क्षेत्र से अलग होनी थी।
  • चीन को रक्षा एवं विदेश संबंधी मामलों में अधिकार दिया गया जबकि अन्य मामले हांगकांग को दिये गए तथा यह तय किया गया कि वर्ष 2047 में अर्थात् चीन को हॉन्गकॉन्ग सौंपे जाने के 50 वर्ष पश्चात् इस व्यवस्था को पुनरीक्षित किया जाएगा।
  • हांगकांग पर चीन के नियंत्रण के बाद से अब तक कई बार चीन को विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है।
  • वर्ष 2009 में भी ऐसे ही एक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का विरोध हुआ जिसे बाद में वापस ले लिया गया।
  • 2019 में क् विवादास्पद प्रत्यर्पण कानून के बाद से लगातार  हांगकांग में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी है। इस विरोध को ‘अंब्रेला मूवमेंट’ कहा जाता है।
  • कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण यह आंदोलन थमा ही था कि अब एक और कानून लाकर चीन ने प्रदर्शनकारियों को उत्तेजित कर दिया है।

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