बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) (Securities and Exchange Board of India (SEBI) द्वारा गठित अनिल दवे समित ने समिति ने बाजार नियामक के प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत बनाने और धन की हेराफेरी की वसूली प्रणाली में सुधार के लिये विभिन्न सुझाव दिये हैं।
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अनिल दवे की अध्यक्षता वाली समिति ने चूकर्ताओं के मुनाफे के आकलन और निवेशकों को हुए नुकसान के आकलन के उपाय का भी प्रस्ताव किया है। समिति ने ऋण शोधन, वसूली और प्रतिभूति संबंधी देश-विदेश के कानूनों की भी समीक्षा की।
समिति ने ऋण शोधन एवं दिवाला संहिता में उपयुक्त बदलाव का सुझाव दिया ताकि इस कानून का उपयोग चूककर्ता आसान आश्रय के रूप में नहीं करे और निवेशकों के हितों की रक्षा हो।
समिति ने हेराफेरी वाले धन की वसूली की मौजूदा व्यवस्था में भी सुधार की व्यापक सिफारिश की है। रिपोर्ट में समिति ने सेबी के बिचौलिया नियमन (Intermediary regulations) में भी संशोधन की सिफारिश की है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ((Securities and Exchange Board of India, SEBI) की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के अनुसार 12 अप्रैल, 1992 को हुई थी।इसका मुख्यालय मुंबई में है। इसके वर्तमान अध्यक्ष अजय त्यागी हैं।
इसके मुख्य कार्य हैं –
प्रतिभूतियों (Securities) में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण करना।
प्रतिभूति बाज़ार (Securities Market) के विकास का उन्नयन करना तथा उसे विनियमित करना और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का प्रावधान करना।

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