अश्वेत अमेरिकी की हिरासत में हत्या के बाद अमेरिका में हिंसक प्रदर्शन

अमेरिका के मिनेपॉलिस शहर में अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन देश के 30 शहरों तक पहुंच गए हैं। अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd)) की मौत का वीडियो वायरल होने के बाद से ही अमेरिका के कई शहरों में 29 मई 2020 से हिंसक प्रदर्शनों का दौर जारी है।
प्रदर्शनकारी हाथों में ‘I can’t breathe’ यानी ‘मुझे सांस नहीं आ रही है लिखे हुए प्लेकार्ड लहरा रहे हैं। जार्ज फ्लॉयड को एक दुकान में नकली नोट का उपयोग करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिस अधिकारी को घुटने से आठ मिनट तक जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन दबाते हुए देखा गया।मामले में श्वेत अधिकारी डेरेक चाउविन को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उस पर थर्ड डिग्री हत्या और मानव वध का आरोप लगाया गया हैल लेकिन प्रदर्शनकारियों का आक्रोश शांत नहीं हो रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
हिंसक प्रदर्शनों पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ट्वीट करके कहा है कि इस आंदोलन को हाइजैक कर लिया गया है इसलिए अमेरिका Antifa को आतंकवादी संगठन घोषित करेगा। उन्होंने हिंसा के पीछे उन संगठनों को जिम्मेदार बताया है जिन्हें आमतौर पर Antifa कहा जाता है। दरअसल, अमेरिका में फासीवाद के विरोधी लोगों को Antifa (anti-fascists) कहते हैं। अमेरिका में Antifa आंदोलन उग्रवादी, वामपंथी और फासी-वादी विरोधी आंदोलन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
ये लोग नव-नाजी, नव-फासीवाद, श्वेत सुपीरियॉरिटी और रंगभेद के खिलाफ होते हैं और सरकार के विरोध में खड़े रहते हैं। इस आंदोलन से जुड़े लोग आमतौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, रैलियां करते हैं। हालांकि, विरोध के दौरान हिंसा के भी परहेज नहीं किया जाता है।
इस अमानवीय घटना पर इसलिए भी ज्यादा उबल रहा है क्योंकि करीब 6 साल पहले ऐसा ही कुछ अश्वेत अमेरिकी एरिक गार्नर के साथ हुआ था। उनकी जान भी ऐसे ही पुलिस के हाथों में दम घुटने से गई थी।

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