आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 में संशोधन सहित केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 3 जून को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि सुधारों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण निर्णय लिए-
1-आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 में संशोधन
आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 में बदलाव को स्वीकृति दे दी गई। इसके लिए सरकार अध्यादेश लाएगी। अधिनियम में परिवर्तन के पश्चात किसान अपनी उपज को बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे। आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम में संशोधन के जरिए अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्‍याज और आलू जैसी वस्‍तुओं को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से हटा दिया जाएगा।
इस व्‍यवस्‍था से निजी निवेशक अत्‍यधिक नियामकीय हस्‍तक्षेप के भय से मुक्‍त हो जाएंगे। उत्‍पादन, भंडारण, ढुलाई, वितरण और आपूर्ति करने की आजादी से व्‍यापक स्‍तर पर उत्‍पादन करना संभव हो जाएगा और इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में निजी/प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा।
इससे कोल्‍ड स्‍टोरेज में निवेश बढ़ाने और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (सप्‍लाई चेन) के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।अधिनियम में संशोधन के तहत यह व्‍यवस्‍था की गई है कि अकाल, युद्ध, कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में इन कृषि उपजों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है।
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955?
आवश्यक वस्तु अधिनियम ( Amendment to Essential Commodities Act)1955 की मदद से ‘आवश्यक वस्तुओं’ का उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करती है ताकि ये वस्तुएं उपभोक्ताओं को उचित दाम पर उपलब्ध हो सकें। सरकार अगर किसी चीज को ‘आवश्यक वस्तु’ घोषित कर देती है तो सरकार के पास अधिकार आ जाता है कि वह उस उत्पाद का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) तय कर दे। उस मूल्य से अधिक दाम पर चीजों को बेचने पर सजा हो सकती है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का उद्देश्य
जीवन जीने के लिए कुछ अत्यधिक आवश्यक चीजें हैं। खाने-पीने की चीजें, दवा, ईंधन जैसे पेट्रोलियम के उत्पाद आदि। यदि कालाबाजारी या जमाखोरी की वजह से इन वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होती है तो आम जन जीवन प्रभावित हो सकता है।
ये वस्तुएं ऐसी हैं जिनके बिना इंसान का ज्यादा दिनों तक जिंदा रहना मुश्किल है या इंसान के लिए बहुत ही जरूरी है। इन्हीं वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आवश्यक वस्तु की सूची में डाल दिया जाता है।
इसका एक ही उद्देश्य होता है कि लोगों को जीवन के लिए जरूरी वस्तुएं उचित दाम पर और आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
कौन सी वस्तुएं इस श्रेणी में शामिल हैं?
सात बड़ी वस्तुओं को इस श्रेणी में डाल दिया गया है जिनमें से कुछ इस तरह से हैं। 1. पेट्रोलियम और इसके उत्पाद जिनमें पेट्रोल, डीजल, नेफ्था और सोल्वेंट्स वगैरा शामिल हैं। 2. खाने की चीजें जैसे खाने का तेल और बीज, वनस्पति, दाल, गन्ना और इसके उत्पाद जैसे गुड़, चीनी, चावल और गेहूं, 3. टेक्सटाइल्स, 4. जरूरी ड्रग्स, 5. फर्टिलाइजर्स। इनके अलावा कई बार सरकार कुछ चीजों को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में डाल चुकी है और बाद में स्थिति सामान्य होने पर निकाल दिया गया है। कभी लौह और स्टील समेत कई उत्पादों को आवश्यक वस्तु की सूची में डाला गया था।
क्या है सजा का प्रावधान?
इस कानून के सेक्शन 7(1) ए (1) के तहत अगर सही से रेकॉर्ड नहीं रखा, रिटर्न फाइल आदि करने में कानून का उल्लंघन किया तो इसे जुर्म माना जाएगा। इसके लिए तीन महीने से एक साल तक की सजा का प्रावधान है। सेक्शन 7(1) ए (2) में बड़े अपराधों जैसे जमाखोरी, मुनाफाखोरी, कालाबाजारी आदि के लिए सजा का प्रावधान है। इस स्थिति में सात साल तक जेल की सजा या जुर्माना, या दोनों हो सकता है।
2-कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 3 जून 2020 कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020 (‘The Farming Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance, 2020’) को मंजूरी दी गई। कई तरह के नियामक प्रतिबंधों के कारण देश के किसानों को अपने उत्पाद बेचने में काफी दिक्कत आती है।
  • अधिसूचित कृषि उत्पाद विपणन समिति (Agricultural produce market committee)वाले बाजार क्षेत्र के बाहर किसानों पर उत्पाद बेचने पर कई तरह के प्रतिबंध हैं। उन्हें अपने उत्पाद सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त खरीदारों को ही बेचने की बाध्यता है।
  • इसके अतिरिक्त एक राज्य से दूसरे राज्य को ऐसे उत्पादों के सुगम व्यापार के रास्ते में भी कई तरह की बाधाएं हैं।
  • अध्यादेश के लागू हो जाने से किसानों के लिए एक सुगम और मुक्त माहौल तैयार हो सकेगा जिसमें उन्हें अपनी सुविधा के हिसाब से कृषि उत्पाद खरीदने और बेचने की आजादी होगी।
  • अध्यादेश से राज्य के भीतर और बाहर दोनों ही जगह ऐसे बाजारों के बाहर भी कृषि उत्पादों का उन्मुक्त व्यापार सुगम हो जाएगा जो राज्यों के कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम के तहत अधिसूचित हैं।

किसानों को लाभ

  • इससे किसानों को अधिक विकल्प मिलेंगे। बाजार की लागत कम होगी और उन्हें अपने उपज की बेहतर कीमत मिल सकेगी।
  • इसके अलावा अतिरिक्त उपज वाले क्षेत्रों में भी किसानों को उनके उत्पाद के अच्छे दाम मिल सकेंगे और साथ ही दूसरी ओर कम उपज वाले क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को भी ज्यादा कीमतें नहीं चुकानी पड़ेंगी।
  • अध्यादेश में कृषि उत्पादों का सुगम कारोबार सुनिश्चित करने के लिए एक ई-प्लेटफॉर्म बनाए जाने का भी प्रस्ताव है।
  • इस अधिनियम के तहत किसानों से उनकी उपज की बिक्री के लिए कुछ भी उपकर (सेस) या शुल्क नहीं लिया जाएगा।
  • इसके अलावा, किसानों के लिए एक अलग विवाद समाधान व्‍यवस्‍था होगी।

एक देश, एक कृषि बाजार

  • अध्‍यादेश का मूल उद्देश्य एपीएमसी बाजारों की सीमाओं से बाहर किसानों को कारोबार के अतिरिक्‍त अवसर मुहैया कराना है जिससे कि उन्‍हें प्रतिस्‍पर्धात्‍मक माहौल में अपने उत्‍पादों की अच्‍छी कीमतें मिल सकें।
  • यह एमएसपी पर खरीद की मौजूदा प्रणाली के पूरक के तौर पर काम करेगा जो किसानों को स्थिर आय प्रदान कर रही है। यह ‘एक देश, एक कृषि बाजार’ बनाने का मार्ग प्रशस्‍त करेगा और कठोर परिश्रम करने वाले हमारे किसानों के लिए उपज की मुंह मांगी कीमत सुनिश्ति करेगा।

3- मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020
कैबिनेट ने ‘मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020’ को स्वीकृति दे दी है।The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance, 2020’भारतीय कृषि को खेतों के छोटे आकार के कारण विखंडित खेती के रूप में वर्गीकृत किया जाता और मौसम पर निर्भरता, उत्पादन की अनिश्चितता और बाजार अनिश्चितता इसकी कुछ कमजोरियां हैं। इसके चलते कृषि जोखिम भरी है और इनपुट तथा आउटपुट प्रबंधन के मामले में अप्रभावी है।
किसानों को लाभ

  • अध्यादेश किसानों को शोषण के भय के बिना समानता के आधार पर प्रसंस्करणकर्ताओं (processors), एग्रीगेटर्स(aggregators), थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा कारोबारियों, निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने में सक्षम बनाएगा।
  • इससे बाजार की अनिश्चितता का जोखिम प्रायोजक पर हस्तांतिरत हो जाएगा और साथ ही किसानों की आधुनिक तकनीक और बेहतर इनपुट्स तक पहुंच भी सुनिश्चित होगी। इससे विपणन की लागत में कमी आएगी और किसानों की आय में सुधार होगा।
  • यह अध्यादेश किसानों की उपज की वैश्विक बाजारों में आपूर्ति के लिए जरूरी आपूर्ति चेन तैयार करने को निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करने में एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा।
  • किसानों की ऊंचे मूल्य वाली कृषि के लिए तकनीक और परामर्श तक पहुंच सुनिश्चित होगी, साथ ही उन्हें ऐसी फसलों के लिए तैयार बाजार भी मिलेगा।
  • किसान प्रत्यक्ष रूप से विपणन (marketing) से जुड़ सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा। किसानों को पर्याप्त सुरक्षा दी गई है और समाधान की स्पष्ट समयसीमा के साथ प्रभावी विवाद समाधान तंत्र भी उपलब्ध कराया गया है।

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