वैश्विक रेमिटेंस में आएगी 20 प्रतिशत की कमी: विश्व बैंक

विश्व बैंक (World Bank) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, COVID-19 की महामारी और शट डाउन के कारण वर्ष 2020 में वैश्विक स्तर पर प्रवसियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) में करीब 20 प्रतिशत गिरावट की संभावना है। विश्व बैंक की छमाही रिपोर्ट माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ( Migration and Development Brief) के अप्रैल अंक जिसका शीर्षक “COVID-19 Crisis Through a Migration Lens” है, के अनुसार, वर्ष 2020 में भारतीय प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंस में 23% की गिरावट हो सकती है और यह 64 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक रह सकता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में भारत को रेमिटेंस के रूप में प्राप्त होने वाले धन में 5.5% की वृद्धि के साथ कुल 79 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए थे।
रिपोर्ट के अनुसार विश्व के अन्य प्रमुख हिस्सों में भी रेमिटेंस में गिरावट देखी जा सकती है। इनमें यूरोप और मध्य एशिया (27.5%), उप-सहारा अफ्रीका (23.1%), दक्षिण एशिया (22.1%), मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (19.6%), लैटिन अमेरिका तथा कैरेबियन (19.3%), पूर्वी एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र (13%) में रेमिटेंस में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।
भारत है पहले स्थान पर
अपने देश पैसा भेजने में भारत पहले स्थान पर है। 2018 के आकड़ों के अनुसार प्रवासी भारतीयों ने 79 अरब डॉलर की रकम भेजी थी। चीन के प्रवासी दूसरे पायदान पर हैं 2018 में 67 अरब डॉलर भेजे। इसके बाद मैक्सिको (36 अरब डॉलर), फिलीपींस (34 अरब डॉलर) और मिस्त्र (29 अरब डॉलर) का स्थान है।
क्या होता है रेमिटेंस?
जब एक प्रवासी अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए धनराशि भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। रेमिटेंस का फायदा देश की इकोनॉमी को होता है। इसके जरिए हम विदेशी मुद्रा अर्जित करते हैं, जो इकोनॉमी के लिए अच्छी बात होती है।
इन देशों के लिए जरूरी है रेमिटेंस
विश्व बैंक के मुताबिक रेमिटेंस कम और मध्यम आय वाले देशों low and middle-income countries (LMICs)में गरीबी को कम करने के अलावा शिक्षा पर अधिक खर्च और पिछड़े परिवारों में बाल श्रम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार रेमिटेंस में गिरावट से इन क्षेत्रों में परिवारों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित होगी, क्योंकि ऐसी स्थिति में रेमिटेंस पर आश्रित परिवार खाने और आजीविका की जरूरतों को हल करने के लिए खर्च करेंगे।

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