भारत-चीन के राजनयिक संबंधों की 70 वीं वर्षगांठ

भारत और चीन ने 1 अप्रैल, 2020 को कूटनीतिक संबंध स्थापित होने की 70वीं वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुखों ने एक दूसरे को बधाई तो दी ही। साथ ही दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भी एक दूसरे को संदेश भेजा है। हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच चेन्नई के मामल्लापुरम में हुई मुलाकात में इस अवसर पर 70 तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की जो सहमित बनी थी अभी तक उसका खाका तैयार नहीं हो पाया है। कोरोनावायरस के प्रभाव के खत्म होने के बाद नए सिरे से इस बारे में फैसला होगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने चीन के पीएम ली किचयांग को भेजे संदेश में लिखा है कि भारत व चीन सिर्फ दो बेहद पुरानी सभ्यताएं नहीं है बल्कि एक दूसरे को मदद करने की हमारा काफी लंबा इतिहास भी रहा है। आज हम दोनों दो बेहद बड़े विकासशील देश हैं जो वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दोनो देशों के बीच शांतिपूर्ण रिश्ते सिर्फ इन दो देशों के लिए ही नहीं बल्कि इस क्षेत्र व समूचे विश्व में शांति व सद्भाव के लिए जरुरी है।मोदी ने चीन के पीएम से कहा- मैं दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने को तैयार हूं
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कोविड-19 कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए कहा है कि इस महामारी ने आज दुनिया पहले से ज्यादा जुड़ी हुई है और हमें इसका सामना करने के लिए सही मायने में एक वैश्विक रणनीति बनानी चाहिए। मोदी ने चीन के पीएम से कहा है कि वह दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने को तैयार है।
भारत-चीन संबंधों पर एक नज

  • दोनों देशों के मध्य संबंधों की शुरुआत भारत की स्वतंत्रता (1947) और चीन की कम्युनिस्ट क्रांति (1949) के बाद हुई।
  • भारत ने 1 अप्रैल, 1950 को चीन के साथ अपने राजनयिक संबंध स्थापित किये थे और इसी के साथ भारत पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला पहला गैर-समाजवादी देश बन गया।
  • वर्ष 1954 में नेहरू और झोउ एनलाई ने “हिंदी-चीनी-भाई-भाई” के नारे के साथ पंचशील संधि पर हस्ताक्षर किये, ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिये कार्ययोजना तैयार की जा सके।
  • वर्ष 1959 में चीन के तिब्बत पर कब्जे के बाद तिब्बती लोगों के आध्यात्मिक और लौकिक प्रमुख दलाई लामा तथा उनके साथ अन्य कई तिब्बती शरणार्थी हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बस गए। इसके पश्चात् चीन ने भारत पर तिब्बत और पूरे हिमालयी क्षेत्र में विस्तारवाद और साम्राज्यवाद के प्रसार का आरोप लगा दिया।
  • चीन ने भारत के मानचित्र में प्रदर्शित 104,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर दावा प्रस्तुत किया और दोनों देश के मध्य अंतर्राष्ट्रीय सीमा के संशोधन की मांग की।
  • वर्ष 1962 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने लद्दाख और तत्कालीन नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी में मैकमोहन रेखा के पार भारत पर आक्रमण कर दिया, जिसके बाद दोनों देश के मध्य युद्ध शुरू हो गया एवं संबंध और अधिक खराब स्थिति में पहुँच गए।
    न गया था।
  • वर्ष 1962 में भारत और चीन के मध्य सीमा संघर्ष की शुरुआत दोनों देशों के संबंधों के लिये एक गहरा झटका था। परंतु वर्ष 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की ऐतिहासिक यात्रा ने दोनों देशों के मध्य संबंधों को सुधारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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